पिछला भाग पढ़े:-छोटी बहन सपना की बम्पर चुदाई अलग-अलग लंड से-3
आशा है आपने पिछली कहानी को पढ़ लिया होगा। आगे की कहानी-
राहुल ने जब सपना के सूट के अंदर हाथ डाल कर उसके सुडौल बूब्स को अपनी हथेलियों में भींचा, तो सपना की आँखें पूरी तरह बंद हो गईं। चलती ट्रेन के हिचकोले और कूपे की मद्धम नीली रोशनी ने माहौल को बेहद उत्तेजक बना दिया था। राहुल ने बिना वक्त गंवाए सपना के कुर्ते को ऊपर की तरफ खींचा और उसे उसके सिर के ऊपर से उतार कर सीट के कोने में फेंक दिया।
कुर्ता हटते ही सपना का गोरा और गदराया बदन राहुल के सामने था। बिना ब्रा के उसके 32″ के पपीते जैसे कड़े बूब्स हवा में आज़ाद होकर हिल रहे थे। राहुल ने अपनी टी-शर्ट और जींस भी तुरंत उतार फेंकी। उसका गठीला बदन और उत्तेजना से भरा लंड देख कर सपना के अंदर की भूख और बढ़ गई।
राहुल सीधे सपना के ऊपर आ गया और उसके निप्पल्स को अपने मुंह में भर कर चूसने लगा। सपना ने अपनी पीठ को थोड़ा ऊपर उठाया और सुख से कराह उठी, “आहह… राहुल… बहुत अच्छा चूस रहे हो… जल्दी करो…”
राहुल ने नीचे सरकते हुए सपना की सलवार और पैंटी का नाड़ा एक साथ पकड़ा और उन्हें उसकी लंबी, गोरी टांगों से बाहर निकाल दिया। अब सपना फर्स्ट एसी की उस सीट पर पूरी तरह निर्वस्त्र होकर लेटी थी। चलती ट्रेन की हल्की थरथराहट उसकी चूत में एक अलग ही सिहरन पैदा कर रही थी, जिससे उसका काम-रस रिसकर सीट पर लगे मखमली चादर को भिगोने लगा था।
राहुल ने सपना के दोनों पैरों को उठाया और कूपे की दीवारों के सहारे फैला दिया। इससे सपना की कद्दू जैसी गांड थोड़ी ऊपर उठ गई और उसकी गुलाबी चूत की फांकें पूरी तरह खुल गईं। राहुल ने अपने कड़े लंड को उसकी चूत के मुहाने पर सेट किया और ट्रेन के एक बड़े झटके के साथ अपनी पूरी ताकत से एक गहरा धक्का मारा।
‘पकाक-फच’ की एक रसीली और जोरदार आवाज कूपे के सन्नाटे को चीरती हुई गूंज उठी।
“उई मां! आहह राहुल…” सपना के मुंह से एक तीखी चीख निकली, जिसे उसने राहुल के मजबूत कंधों को अपने दांतों से काट कर छुपाने की कोशिश की।
ट्रेन अब 110 की स्पीड से पटरी पर दौड़ रही थी, और अंदर राहुल की चुदाई की रफ्तार भी उसी स्पीड को मात दे रही थी। ट्रेन के हर झटके के साथ राहुल का लंड सपना की चूत की गहराई में और अंदर तक धंस जाता। कूपे के अंदर सिर्फ ‘फच-फच-फच’, ‘चट-चट-चट’ और ‘फट-फट’ की आवाजें गूंज रही थीं। राहुल की जांघें जब सपना की भारी गांड से टकराती, तो थप्पड़ जैसी तेज आवाज़ आती।
सपना इस नए लड़के के जोरदार धक्के झेलते हुए पूरी तरह मदहोश हो चुकी थी। उसने अपनी आँखें बंद कर रखी थी और राहुल की पीठ पर अपने नाखून गड़ाए हुए लगातार सिसक रही थी, “हाँ राहुल… और तेज… पूरा अंदर तक पेलो…”
राहुल ने अब सपना को सीट पर ही घुटनों के बल लाकर घोड़ी बना दिया। कूपे के शीशे में सपना की भारी गांड और उसके नीचे झूलते हुए बूब्स का नजारा बेहद कामुक लग रहा था। राहुल ने पीछे से उसकी कमर को कस कर पकड़ा और दोबारा अपना लंड उसकी चूत में पेलना शुरू किया। हर धक्के के साथ सपना का पूरा बदन आगे-पीछे हिल रहा था।
करीब 20 मिनट की इस नॉन-स्टॉप और जोरदार चुदाई के बाद सपना का पूरा शरीर कांपने लगा। उसकी चूत के संकुचन ने राहुल के लंड को कस कर जकड़ लिया और वह पूरी तरह से स्खलित हो गई। सपना के झड़ते ही राहुल का भी सब्र जवाब दे गया। उसने दो-तीन आखिरी और बेहद गहरे धक्के मारे और अपना सारा गर्म वीर्य सपना की चूत के अंदर खाली कर दिया।
दोनों पसीने से लथपथ होकर उसी संकरी बर्थ पर एक-दूसरे से लिपट कर हांफते रहे। ट्रेन की ‘खट-खट’ की आवाज अब भी जारी थी, लेकिन कूपे के अंदर की हवस की आग शांत हो चुकी थी।
यह था सपना के सफर का वह अनसुना किस्सा, जिसने उसकी विदाई को और भी रोमांचक बना दिया। सुबह जब ट्रेन मेरे शहर के स्टेशन पर रुकी, सुबह की ताजी धूप जब प्लेटफॉर्म पर बिखरी, तो कूपे का दरवाजा खुला। सपना जब ट्रेन से नीचे उतरी, तो उसकी चाल में वही जाना-पहचाना धीमा-पन और हल्का सा लंगड़ा-पन था, जो रात भर की भारी चुदाई के बाद अक्सर उसके बदन में आ जाता था। उसके ठीक पीछे-पीछे राहुल भी अपना बैग लटकाए बाहर निकला।
उसके चेहरे पर एक अजीब सी संतुष्टि और थकावट भरी कटीली मुस्कान थी। उसने सपना की तरफ देखा और थोड़े दबे स्वर में रस लेते हुए बोला, “बाय सपना… आज की रात वाकई बेहद खूबसूरत और यादगार रही। उम्मीद है हम फिर मिलेंगे।”
वह अभी अपनी बात पूरी कर ही रहा था कि उसकी नज़र ठीक सामने खड़े मुझ पर पड़ी। मेरी कड़कती हुई नज़रों और चौड़े बदन को देख कर राहुल के चेहरे की हवाईयां उड़ गईं और वह अचानक बुरी तरह घबरा गया। वह समझ नहीं पा रहा था कि आगे क्या बोलना है।
सपना ने माहौल को संभालते हुए तुरंत हम दोनों का परिचय कराया, “भैया, ये राहुल हैं… फर्स्ट एसी में मेरे को-पैसेंजर थे। इन्होंने सफर में मेरी काफी मदद की।” और फिर राहुल की तरफ देख कर बोली, “राहुल, ये मेरे बड़े भैया हैं।”
भाई की पारखी नज़र और सच्चाई का अहसास-
मैंने आगे बढ़ कर राहुल से हाथ मिलाया। राहुल का हाथ थोड़ा कांप रहा था। मैं कोई सीधा-साधा लड़का नहीं था; मैं सपना का वही बड़ा भाई था जिसने जयपुर के होटलों से लेकर गाँव के गन्ने के खेतों तक उसके जिस्म के हर हिस्से को अपने लंड से नापा था।
जब मैंने सपना के चेहरे की तरफ देखा, तो उसकी आँखें थोड़ी झुकी हुई थीं और उसके होठों की लाली थोड़ी बिखरी हुई थी। सूट के पतले कपड़े के नीचे उसके 32″ के पपीते जैसे बूब्स बिना ब्रा के हल्के से हिल रहे थे और उसकी चाल का वह रसीला दर्द मुझसे छुपा नहीं रह सका था।
मैं तुरंत समझ गया कि रात के सन्नाटे में फर्स्ट एसी के उस बंद कूपे के अंदर इस नए लौंडे ने सपना को जम कर बजाया था और उसकी चूत का पानी निकाला था।मैंने राहुल की आँखों में सीधे देखते हुए एक तीखी मुस्कान के साथ कहा, “अच्छा… तो रात भर आपने मेरी बहन का ‘खयाल’ रखा? बहुत-बहुत शुक्रिया राहुल। उम्मीद है सफर वाकई आरामदायक रहा होगा।”
राहुल मेरी आँखों के पीछे छिपे गहरे राज को भांप गया। उसने घबराते हुए थूक निगला और कहा, “जी… जी हाँ, बिल्कुल। अच्छा, अब मैं चलता हूँ, मेरी गाड़ी का वक्त हो रहा है।” इतना कह कर वह लगभग भागते हुए कदमों से प्लेटफॉर्म की भीड़ में गायब हो गया।
राहुल के जाते ही मैंने सपना का भारी सूटकेस उठाया और हम दोनों स्टेशन से बाहर खड़ी अपनी गाड़ी की तरफ बढ़ने लगे। रास्ते में मैंने सपना की पतली कमर पर पीछे से हल्का सा हाथ रखा और उसके कान के पास झुक कर बेहद धीमे स्वर में फुसफुसाया, “तो… शहर के लौंडों से मन नहीं भरा जो ट्रेन में भी नया आशिक ढूंढ लिया? कूपे में रात भर खूब ‘फच-फच’ हुई है ना? तेरी चाल सब बयां कर रही है सपना।”
Aakhiri Dagar, Purane Humsafar – Episode 22
सपना का चेहरा तुरंत शर्म और लालसा से लाल हो गया। उसने अपनी आँखें झुका ली और मेरी बांह को कस कर पकड़ते हुए धीरे से बोली, “भैया… आप भी ना… स्टेशन पर तो रुकिए। घर चलिए, फिर आपको रात की पूरी कहानी अपने मुंह से सुनाऊंगी।”
गाँव की तरफ बढ़ती हुई गाड़ी के अंदर हम दोनों के बीच की वो पुरानी कामुक गरमाहट फिर से जाग उठी थी। मेरठ और ट्रेन के सफर के बाद, सपना अब फिर से मेरे लंड की छांव में आ चुकी थी।
स्टेशन का यह ड्रामा तो बस शुरुआत थी। घर पहुँच कर जब सब सो गए, तब सपना ने मुझे कूपे की एक-एक हरकत बताई और फिर मैंने राहुल के छोड़े हुए काम को जिस बेरहमी से पूरा किया।
स्टेशन से घर पहुँचने के बाद, दिन-भर सब लोगों की मौजूदगी के कारण हमें आपस में अकेले बात करने का मौका नहीं मिला। लेकिन शाम होते-होते, जब घर के बड़े-बुजुर्ग खाना खाकर आँगन की तरफ सोने चले गए, तब जाकर हमारे कमरे का दरवाजा बंद हुआ। गाँव में रात का सन्नाटा पसर चुका था और बाहर झींगुरों की आवाजें गूंज रही थीं।
सपना ने रात को ढीला-ढाला सूती नाइटी पहन रखा था, जिसके अंदर उसने हमेशा की तरह ब्रा नहीं पहनी थी। मोमबत्ती की मद्धम रोशनी में उसके 32″ के पपीते जैसे बूब्स नाइटी के पतले कपड़े को फाड़ कर बाहर आने को बेताब लग रहे थे। वह मेरे बेड पर आकर बैठ गई।
मैंने उसके पास जाकर उसकी ठुड्डी को ऊपर उठाया और मुस्कुराते हुए पूछा, “तो सपना रानी, अब बताओ… उस राहुल ने ट्रेन के फर्स्ट एसी कूपे में तुम्हारी चूत की कैसी मरम्मत की? स्टेशन पर तो तुम लंगड़ा कर चल रही थी।”
सपना ने शर्माते हुए अपनी आँखें झुका लीं, लेकिन उसके चेहरे पर कामुकता का रंग गहरा होने लगा। उसने मेरा हाथ पकड़कर अपने भारी और गदराए बूब्स पर रख दिया और बेहद रसीली आवाज में बताने लगी-
“भैया… क्या बताऊँ, मेरठ की फेयरवेल की वजह से मैं बहुत थक गई थी। कूपे में जब राहुल आया, तो वह बहुत शरीफ बन रहा था। लेकिन जैसे ही रात के ग्यारह बजे और कूपे की बड़ी लाइट बंद हुई, उसकी नीयत डगमगाने लगी। मैंने भी उमस के बहाने अपना दुपट्टा हटा दिया था।”
उसने अपनी नाइटी के ऊपर से ही मेरे हाथ को दबाते हुए आगे कहा, “फिर वह मेरे पास आया और मसाज करने के बहाने मेरी जांघों को सहलाने लगा। उसका हाथ लगते ही मेरी भी चूत पानी छोड़ने लगी थी। उसने बिना कोई वक्त गंवाए मेरा कुर्ता ऊपर किया और मेरे बूब्स को मुंह में भर लिया। भैया… वह बहुत भूखे शेर की तरह चूस रहा था, मेरे निप्पल आज भी थोड़े दुख रहे हैं।”
मैंने उसके नाइटी के गले में हाथ डाल कर उसके एक टाइट बूब को बाहर निकाला और उसे अंगूठे से सहलाते हुए पूछा, “फिर… फिर उसने पैंट कब खोली अपनी?”
सपना ने एक गहरी सांस ली और आँखें मूंदकर बोली, “उसने मेरी सलवार और पैंटी एक साथ नीचे खींच दी। फिर अपनी जींस खोल कर अपना लंड निकाला… उसका लंड काफी सख्त था भैया। उसने मेरी दोनों टांगों को उठा कर कूपे की खिड़की पर टिका दिया और ट्रेन के एक बड़े झटके के साथ पूरा लंड एक ही बार में अंदर पेल दिया।”
“आहहह…” सपना उस पल को याद करके खुद ही सिहर उठी। “ट्रेन 110 की स्पीड पर थी और राहुल के धक्के भी उसी रफ्तार से लग रहे थे। पूरा कूपे ‘फच-फच-फच’ और ‘चट-चट-चट’ की आवाज से गूंज रहा था। सीट छोटी थी, इसलिए उसने मुझे घोड़ी बना कर पीछे से भी बहुत बुरी तरह बजाया।
जब तक मेरा पानी नहीं निकल गया, उसने मुझे नहीं छोड़ा और फिर अपना सारा माल मेरी चूत के अंदर ही खाली कर दिया। इसी वजह से सुबह मुझसे ठीक से चला भी नहीं जा रहा था।”
सपना के मुंह से एक अजनबी लड़के द्वारा उसकी चूत मारे जाने का यह रसीला विवरण सुन कर मेरे 8 इंच के लंड ने पैंट के अंदर एक जोरदार झटका मारा और वह लोहे की तरह सख्त हो गया। मेरी आँखों में वासना का खून उतर आया।
“तो दूसरे लौंडे से चूत मरवा कर बड़ी खुश हो रही है?” मैंने गुस्से और प्यार के मिले-जुली आवाज में कहा और एक झटके में उसकी नाइटी को ऊपर खींच कर उसके सिर से बाहर निकाल दिया।
अब सपना पूरी तरह निर्वस्त्र होकर मोमबत्ती की रोशनी में मेरे सामने बिस्तर पर पड़ी थी। राहुल के वीर्य और रस की वजह से उसकी गुलाबी चूत के आस-पास का हिस्सा अभी भी थोड़ा चिपचिपा और लाल दिख रहा था।
“भैया… वह तो बस सफर का एक मजा था, लेकिन इस चूत का असली मालिक तो हमेशा आपका यह बड़ा लंड ही रहेगा। अब और बातें मत करो, राहुल ने जो कसर छोड़ी है, उसे आप पूरा करो,” सपना ने अपनी दोनों जांघों को पूरी तरह फैलाते हुए कहा।
मैंने बिना कोई देरी किए अपनी पैंट उतारी और मेरा लंबा-मोटा लंड तन कर खड़ा हो गया। मैंने सपना के दोनों पैरों को उठा कर अपने कंधों पर रखा, जिससे उसकी भारी, कद्दू जैसी गांड ऊपर उठ गई। मैंने लंड की टोपी को उसकी गीली चूत पर सेट किया और अपनी पूरी ताकत से एक ही झटका मारा।
‘पकाक-सड़सड़-फच’ की एक ऐसी जोरदार और रसीली आवाज हुई कि सपना के मुंह से चीख निकल गई।
“उई मां! भैया… आह… यह है असली लंड…” वह चिल्ला उठी।
मैंने बिना रुके अपनी फुल स्पीड पकड़ ली। कमरे के सन्नाटे में अब सिर्फ ‘फच-फच-फच’, ‘चट-चट-चट’ और ‘फट-फट’ की तेज आवाजें गूंजने लगी। राहुल के बाद अब मेरे भारी धक्कों ने सपना की चूत को पूरी तरह से झकझोर कर रख दिया था।
राहुल के छोड़े हुए काम को मैंने उस रात जिस बेरहमी से पूरा किया, उसने सपना को यह अहसास करा दिया कि दुनिया में चाहे कोई भी आ जाए, उसके भाई के लंड का मुकाबला कोई नहीं कर सकता। हमारी इस यात्रा के अगले पड़ाव और गाँव के नए किस्से जल्द ही आपके सामने आएंगे। तब तक के लिए नमस्कार!