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Hindi Chudai Kahani पठन समय: 13 मिनट पढ़ा गया: 482 बार

छोटी बहन सपना की बम्पर चुदाई अलग-अलग लंड से-1(Chhoti behan Sapna ki bumper chudai alag-alag lund se-1)

rajukavya

28 Mar 2014 को प्रकाशित

छोटी बहन सपना की बम्पर चुदाई अलग-अलग लंड से-1(Chhoti behan Sapna ki bumper chudai alag-alag lund se-1)
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आशा है आपने पिछली कहानियां पढ़ ली होंगी, चलिए तो आज हम एक और अनकही कहानी की तरफ चलते हैं जो सपना की जिंदगी के कुछ हसीन पलों में से एक थे। बिना देर किए हुए हम कहानी की तरफ चलते हैं।

मेरठ कॉलेज की उस उठा-पटक भरी जिंदगी से बहुत पहले, सपना और मेरे बीच का रिश्ता एक अलग ही मुकाम पर पहुंच चुका था। जैसा कि मैंने आपको अपनी पहली कहानी में बताया था कि हमारी पहली चुदाई जयपुर की एक ट्रिप के दौरान हुई थी, जहाँ हम दोनों ने एक-दूसरे के जिस्म का स्वाद पहली बार चखा था। तब से सपना मेरे और मेरे लंड की इस कदर दीवानी हो चुकी थी कि जब भी हम अकेले होते, उसकी आँखें बस उसी पुराने रोमांस को ढूंढती थी।

जयपुर से लौटने के कुछ महीनों बाद, गर्मियों की छुट्टियों में हम दोनों अपने पैतृक गाँव आए हुए थे। गाँव का माहौल, चारों तरफ फैली हरियाली, और शहरों की भाग-दौड़ से दूर का वो सन्नाटा, कामवासना की आग को भड़काने के लिए एक-दम मुफीद था।

गाँव में दोपहर के वक्त अमूमन बड़े-बुजुर्ग घरों के अंदर सो रहे होते थे या चौपाल पर ताश खेलने निकल जाते थे। खेतों की तरफ इस समय कोई नहीं भटकता था। जून का महीना था, तेज धूप थी, लेकिन हमारे खेतों की तरफ लगे आम के घने पेड़ों और ऊंचे-ऊंचे गन्ने के खेतों के बीच एक ठंडी छांव और गजब का एकांत रहता था।

उस दिन दोपहर के करीब दो बज रहे थे। घर पर सब सो चुके थे। सपना ने उस दिन हल्के पीले रंग का सूती सूट और सफेद सलवार पहन रखी थी। धूप की वजह से उसके गोरे चेहरे पर हल्का गुलाबीपन आ गया था, और पसीने की कुछ बूंदें उसकी गर्दन और नाभि के पास चमक रही थी। बिना ब्रा के उसके 32″ के पपीते जैसे कड़े बूब्स सूट के पतले कपड़े के अंदर साफ मचलते हुए दिख रहे थे।

मैंने उसे आंख से इशारा किया, “सपना, चल जरा खेतों की तरफ चक्कर लगा कर आते हैं, ट्यूबवेल पर ठंडा पानी भी पी लेंगे।”

सपना मेरी आँखों की चमक समझ गई। उसकी पतली कमर और कद्दू जैसी गांड हल्के से मटकी। वह मुस्कुराते हुए बोली, “हाँ भैया, चलिए। घर में बहुत उमस है, खेतों की तरफ थोड़ी हवा होगी।”

हम दोनों चुपके से घर के पिछले दरवाजे से निकले और पगडंडियों से होते हुए अपने गन्ने के खेत की तरफ बढ़ गए। गन्ने की फसल इस समय काफी ऊंची हो चुकी थी, इतनी कि अगर कोई अंदर चला जाए, तो बाहर से उसे देख पाना नामुमकिन था।खेत के बीचो-बीच पहुंच कर मैंने सपना का हाथ पकड़ लिया। उसका हाथ हल्का सा कांप रहा था, लेकिन उसकी आँखों में वही पुरानी दीवानगी थी।

“भैया… यहाँ कोई देख तो नहीं लेगा ना? गाँव में अगर किसी ने देख लिया तो बवाल हो जाएगा,” उसने चारों तरफ देखते हुए हिचकिचा कर कहा।

मैंने उसकी पतली कमर में हाथ डाला और उसे अपनी तरफ खींचते हुए उसके सीने को अपने सीने से चिपका दिया। उसके टाइट बूब्स मेरे सीने पर दबे, तो मेरे लंड ने तुरंत पैंट के अंदर ही अपनी मौजूदगी का अहसास करा दिया।

मैंने उसके कान के पास फुसफुसा कर कहा, “इस दोपहर में यहाँ परिंदा भी पर नहीं मार सकता, सपना। बहुत दिन हो गए, आज इस हरियाली के बीच तुझे जी भर कर चोदने का मन है।”

सपना ने शर्माते हुए अपनी आँखें मूंद ली और अपनी दोनों बाहें मेरी गर्दन में डाल दी। उसका यह इशारा साफ था कि वह भी इस पल के लिए उतनी ही बेताब थी। गन्ने के खेत की उस छांव में सपना के कपड़े एक-एक करके उतरे, और गाँव की उस मिट्टी पर हमारी दूसरी चुदाई का ‘फच-फच’ और ‘चट-चट’ का दौर शुरू हुआ।

गन्ने के घने खेतों के बीच, जहाँ धूप की किरणें पत्तों को छान कर जमीन पर आ रही थी, वहाँ का सन्नाटा अब हमारी सांसों की गरमाहट से टूटने लगा था। सपना का वह पीला सूती सूट पसीने की वजह से उसके बदन से चिपक गया था, जिससे उसके सुडौल फिगर का हर उभार और भी तीखा नज़र आ रहा था।

मैंने बिना कोई वक्त गंवाए उसके कुर्ते के नीचे हाथ डाला और उसे ऊपर की तरफ सरकाने लगा। सपना ने धीरे से अपने दोनों हाथ ऊपर उठाए और मैंने उसका कुर्ता उतार कर गन्ने की सूखी पत्तियों के ढेर पर फेंक दिया। कुर्ता हटते ही उसका गोरा मखमली बदन मेरी आँखों के सामने था। चूंकि उसने अंदर ब्रा नहीं पहनी थी, इसलिए कुर्ते के हटते ही 32″ के पपीते के आकार के एक-दम टाइट बूब्स पूरी तरह आजाद हो गए। उनके ऊपर के भूरे निप्पल गर्मी और उत्तेजना की वजह से एक-दम अकड़ चुके थे।

“भैया… देखो ना कितनी गर्मी है,” सपना ने शर्माते हुए अपनी कद्दू जैसी गांड को थोड़ा मटकाया।

मैंने उसे अपनी बाहों में कस लिया और सीधे उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। सपना के मुंह से एक धीमी सी सिसकी निकली और वह भी पागलों की तरह मेरे होंठों का रस पीने लगी। एक हाथ से मैंने उसकी भारी गांड को सलवार के ऊपर से ही जोर-जोर से भींचना शुरू किया, तो दूसरी तरफ से उसने पैंट के ऊपर से ही मेरे 8 इंच के कड़े हो चुके लंड को अपने हाथों में दबोच लिया।

मैंने धीरे से उसकी सलवार का नाड़ा खोला और सलवार को उसकी पैंटी के साथ नीचे सरका दिया। अब सपना पूरी तरह निर्वस्त्र होकर गन्ने के खेत की उस छांव में खड़ी थी। उसका गोरा-चिट्टा छरहरा बदन और उसकी मांसल जांघों के बीच बालों से ढकी उसकी गुलाबी बुर से कामवासना का पानी रिसने लगा था।

मैंने जमीन पर गन्ने के सूखे पत्तों और एक साफ बोरी को बिछाया और सपना को उस पर पीठ के बल लेटा दिया। लेटने से उसकी पतली कमर और उसकी कद्दू जैसी गांड का ढलान और भी कातिलाना लग रहा था।

मैं तुरंत उसके ऊपर आ गया और सबसे पहले उसके कड़े बूब्स को अपने मुंह में भर लिया। जब मैंने उसके निप्पल को दांतों से हल्का सा काटा, तो वह पूरी तरह मचल उठी:

“उई मां… भैया… धीरे… चूसो ना इसे पूरा… बहुत मजा आ रहा है…”

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करीब 10 मिनट तक उसके दोनों बूब्स को बारी-बारी से चूसने और उसकी नाभि में जीभ घुमाने के बाद, मैं नीचे की तरफ सरका। मैंने उसकी दोनों टांगों को फैलाया और अपनी जीभ सीधे उसकी बुर के दाने पर रगड़ दी। चूत का स्वाद चखते ही सपना ने अपने दोनों पैर मेरे कंधों पर रख दिए और अपनी गांड को ऊपर उठाने लगी। पूरे खेत में उसकी सिसकारियां गूंजने लगी।

अब मेरे लंड की प्यास पूरी तरह चरम पर थी। मैंने अपनी पैंट उतारी और मेरा 8 इंच लंबा और मोटा लंड झटके के साथ बाहर आ गया। सपना ने जैसे ही उसे देखा, उसकी आँखों में चमक आ गई। उसने खुद आगे बढ़ कर मेरे लंड को पकड़ा और अपनी चूत के मुहाने पर सेट कर दिया।

मैंने अपनी हथेलियों को जमीन पर टिकाया, अपनी पोजीशन बनाई और एक ही जोरदार धक्के से अपना पूरा लंड उसकी चूत के अंदर पेल दिया। जयपुर में सील टूटने की वजह से चूत पूरी तरह खुली हुई थी, इसलिए लंड ‘सड़सड़-फच’ करता हुआ पूरा अंदर समा गया।

“आहहह… भैया… उई मां… पूरा डाल दिया…” सपना ने मेरी पीठ पर अपने नाखून गड़ा दिए।

मैंने बिना रुके अपनी रफ्तार बढ़ानी शुरू की। गन्ने के उस एकांत खेत में अब सिर्फ ‘फच-फच-फच’, ‘चट-चट-चट’ और ‘फट-फट’ की तेज आवाजें गूंजने लगी। जब भी मेरी जांघें उसकी भारी गांड से टकराती, एक जोरदार थाप की आवाज आती। धूप की तपन और चुदाई की गर्मी से हम दोनों के बदन पसीने से लथ-पथ हो चुके थे, जिससे बदन आपस में चिपकने पर और भी रसीली आवाजें निकाल रहा था।

मैंने सपना को पलट दिया और उसे घुटनों के बल लाकर घोड़ी बना दिया। पीछे से उसकी कद्दू जैसी गांड का नजारा अद्भुत था। मैंने पीछे से अपना लंड उसकी चूत में सेट किया और दोबारा धक्के मारना शुरू किया। हर धक्के के साथ उसके बूब्स नीचे की तरफ जोर-जोर से झूल रहे थे।

करीब 20 मिनट की ताबड़-तोड़ चुदाई के बाद सपना पूरी तरह से कांपने लगी और उसकी चूत ने भारी मात्रा में पानी छोड़ दिया। उसके झड़ते ही मेरी भी बर्दाश्त का बांध टूट गया। मैंने दो-तीन आखिरी और गहरे धक्के मारे और अपना सारा गर्म वीर्य सपना की चूत की गहराई में खाली कर दिया।

हम दोनों पूरी तरह थक कर उसी बोरी पर एक-दूसरे से लिपट कर लेट गए। थोड़ी देर आराम करने के बाद हम ट्यूबवेल के ठंडे पानी से खुद को साफ करने लगे, पर जब पानी को बूंदे सपना के भूरे बालों से होता हुआ, सुराही जैसी गर्दन से टपकते हुए पपीते जैसी चूचियों पर गिरने लगा तो सपना किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी, और ये नजारा देख मैं एक बार फिर अपना आपा खो बैठा। फिर उसकी कमसिन जवान गठीले बदन को भोगने के लिए मैं उसको अपनी बाहों में भर लिया और उसके चूचियों को चूसने लगा। कभी दांत से काटने लगा तो सपना की सिसकारियां निकलने लगी और उस वक्त फिर सपना बोल पड़ी-

सपना: अरे भैया, बस करो ना, कितना काटोगे?

राजू: चुप कर लौड़ी, आज तेरी चूची खा जाऊंगा।

कहते हुए मैं सपना को धक्के देकर ट्यूबवेल वाले टंकी में धकेल दिया और खुद भी टंकी में कूद गया, जिसमे कमर के ऊपर तक पानी लबालब भरा था। टंकी में कूदते ही मैंने सपना को पीछे से अपने गिरफ्त में कर लिया और तुरन्त घोड़ी बना दिया। और पीछे से ही सपना की चूचियों को मसलने लगा।

सपना की सिसकारियां निकलने लगी, तभी मैंने सपना की चूत पर अपना लंड सेट करके एक ही झटके में आठ इंच लम्बा लंड सपना की चूत में पेल दिया। सपना का मुंह दर्द की वजह से खुला रह गया, उसका मुंह बन्द होता उसके पहले मैंने दूसरा झटका मार दिया। फिर दूसरा वो सह ही रही थी कि तीसरा, चौथा, पांचवा झटका एक साथ धक्कम-पेल मारना शुरू किया तो उसकी चूत से चट चट चट चट की आवाज तो निकलती ही पर उसके साथ साथ पानी से हर झटके में चप चप चप चप चप चप छप छप छप छप छप छप छप छप छप छप की आवाज आने लगा।

चप चप छप छप की आवाज इतनी मनमोहक थी कि मैं उसी आवाज में खोने लगा और तेज तेज से झटके मारने लगा। सपना की चूचियां ऊपर-नीचे उछल रही थी। तो मैंने उसे अपने हाथों में भींच लिया और फिर जोर-जोर के झटके मारने लगा। कुछ दस मिनट तक ताबड़-तोड़ चुदाई के बाद सपना की हालत पस्त सी हो गई और वो पानी में ही बैठने लगी।

फिर मैंने उसे टंकी की दीवार पर टिका कर पेट के बल खड़े होने को बोला। फिर मैंने सपना की गांड में थूक लगाया तो सपना मना करने लगी, पर मन ही मन वो बोल रही थी मेरी गांड फाड़ दो मेरी गांड फाड़ दो। तो मैंने अपने लंड को सपना की गांड में धीरे-धीरे पेलना शुरू किया और कुछ ही देर में कसी गांड की गहराई नापते-नापते मेरा जोश चरम पर था और मैं तीन-चार शाॅट में सपना के गांड की गहराई नापने में सफल रहा।

जब सपना की हलक तक मेरा लंड घुसने लगा तो जांघ से जांघ टकराने की वजह से फट्ट फट्ट फट्ट फट्ट फट्ट फट्ट फट्ट की आवाज पूरे टंकी में गूंजने लगी। करीब दस से पन्द्रह मिनट की चुदाई में मेरी हालत खराब हो गई थी सपना भी दो बार झड़ चुकी थी। फिर मैंने ट्यूबवेल चलाया और दोनो लोग नहाए, और चुसम-चुसाई किए फिर दोनों जल्दी-जल्दी कपड़े पहने और चुपके से वापस घर की तरफ निकल गए।

यह थी हमारे गाँव के खेतों की वो दूसरी चुदाई, जिसने सपना को मेरे लंड का पूरी तरह गुलाम बना दिया था। इसके बाद ही वह मेरठ कॉलेज गई थी, जहाँ की कहानी आप पहले ही पढ़ चुके हैं।

अगली कहानियों में हमारे जीवन के और भी कई अनसुने और रोमांचक हिस्से आपके सामने आएंगे।

अगला भाग पढ़े:-छोटी बहन सपना की बम्पर चुदाई अलग-अलग लंड से-2

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