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Meri Chudai पठन समय: 11 मिनट पढ़ा गया: 1,164 बार

बेटे के दोस्त ने माँ को चोदा-1(Bete ke dost ne maa ko choda-1)

sunitamanish3

12 Jun 2023 को प्रकाशित

बेटे के दोस्त ने माँ को चोदा-1(Bete ke dost ne maa ko choda-1)
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मेरा नाम वंदना है। उम्र 42 साल। मैं एक साधारण-सी दिखने वाली लेकिन अच्छी-खासी आकर्षक औरत हूं। गोरी रंगत, लंबे काले बाल, 36D की भरी-भरी छातियाँ, पतली कमर और गोल-मोटी गांड। मेरी शादी को 22 साल हो चुके हैं। मेरे पति अक्सर बिजनेस के सिलसिले में बाहर रहते हैं। घर में मैं, मेरा बेटा आर्यन (21 साल) और कभी-कभी उसके दोस्त आते-जाते रहते हैं।

आर्यन का सबसे अच्छा दोस्त है रोहन। उम्र 22 साल। लंबा, फिट बॉडी, जिम जाता है, गोरा चेहरा और बहुत भरी मुस्कान। रोहन पिछले 3 साल से हमारे घर आता-जाता है। शुरू में तो सब नॉर्मल था – “आंटी चाय”, “आंटी खाना”, “आंटी कैसे हैं”। लेकिन पिछले कुछ महीनों से कुछ बदल रहा था।

रोहन अब ज्यादा देर तक रुकने लगा था। जब आर्यन अपने रूम में पढ़ता या फोन पर बात करता, रोहन किचन में या लिविंग रूम में मेरे पास बैठ जाता। बातें छोटी-छोटी से शुरू हुईं, फिर धीरे-धीरे पर्सनल होने लगी।

**पहला बदलाव**

एक दिन दोपहर को आर्यन कॉलेज गया हुआ था। मैं किचन में खाना बना रही थी। रोहन अचानक आ गया।

“आंटी, आर्यन है?”

“नहीं बेटा, कॉलेज गया है। तू बैठ, मैं चाय बना देती हूं।”

रोहन किचन के दरवाजे पर टेक लगा कर खड़ा हो गया। उसकी नज़र बार-बार मेरी साड़ी के ब्लाउज पर जा रही थी। उस दिन मैं हल्की गुलाबी सूती साड़ी पहने थी। ब्लाउज थोड़ा टाइट था, जिससे मेरी छातियों का उभार साफ दिख रहा था।

रोहन ने मुस्कुराते हुए कहा, “आंटी, आप रोज इतनी सुंदर लगती हो। आर्यन को तो पता भी नहीं होगा कि उसकी माँ कितनी हॉट है।”

मैं शर्मा गई। पहली बार किसी जवान लड़के ने मुझे इस तरह कम्प्लिमेंट किया था।

“रोहन, ऐसी बातें मत कर। मैं तेरी आंटी हूं।”

रोहन हँसा, “आंटी, आंटी भी तो औरत होती है ना?”

उसने आगे बढ़ कर मेरे पास आकर पानी का गिलास लिया। उसके हाथ मेरे हाथ को छू गए। मैंने झटके से हाथ खींच लिया, लेकिन अंदर से एक अजीब सी सिहरन हुई।

**दूसरा दिन**

अगले दिन रोहन फिर आया। आर्यन अभी भी कॉलेज से नहीं लौटा था। रोहन ने कहा,‌ “आंटी, आज बहुत गर्मी है। पानी पिला दो।”

जब मैं फ्रिज से पानी निकाल रही थी, रोहन मेरे पीछे खड़ा हो गया। उसका शरीर मेरी पीठ से हल्का सा छू रहा था। मैंने महसूस किया कि उसका सांस मेरी गर्दन पर पड़ रहा था।

“आंटी… आपकी खुशबू बहुत अच्छी है।”

मैं घूमी तो रोहन बहुत करीब था। उसकी आँखों में एक अलग सी चमक थी। मैं पीछे हटना चाहती थी, लेकिन किचन की दीवार आ गई।

रोहन ने धीरे से मेरे हाथ को पकड़ लिया और बोला, “आंटी, आप डर क्यों रही हो? मैं तो बस आपको देखना चाहता हूं। आप सच में बहुत खूबसूरत हो।”

मेरा दिल जोर से धड़क रहा था। मैंने हाथ छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन रोहन ने नहीं छोड़ा। उसने मेरे हाथ को अपने होंठों के पास लाकर हल्का सा किस्स कर दिया।

“रोहन… यह गलत है… मैं तेरी आंटी हूं… आर्यन का दोस्त हूं तू…”

रोहन मुस्कुराया, “आंटी, गलत तभी लगता है जब मन ना माने। आपका मन भी तो कुछ कह रहा है ना?”

उस दिन मैंने उसे झिड़क दिया और कमरे में चली गई। लेकिन रात को बिस्तर पर लेटे-लेटे रोहन का चेहरा, उसकी मुस्कान और उसके स्पर्श बार-बार याद आ रहे थे। मैंने पहली बार अपने पति के अलावा किसी और मर्द के बारे में सोचा।

**तीसरा दिन – थोड़ा और आगे**

तीसरे दिन रोहन शाम को आया। आर्यन अपने रूम में था। रोहन ने मुझे अकेले में पकड़ा जब मैं बालकनी में कपड़े सुखा रही थी।

“आंटी, कल रात आपने मेरे बारे में सोचा था ना?”

मैं चौंक गई। “क्या बकवास कर रहा है तू?”

रोहन ने धीरे से मेरी कमर पर हाथ रख दिया। “आंटी, आपकी साड़ी में आप बहुत सेक्सी लगती हो। मैं रोज सपने देखता हूं कि आप मेरे साथ…”

मैंने उसका हाथ हटाने की कोशिश की, लेकिन रोहन ने मुझे दीवार से सटा दिया। उसका चेहरा मेरे चेहरे के बहुत करीब था।

“आंटी… बस एक बार मुझे चूमने दो। अगर आप नहीं चाहोगी तो मैं कभी नहीं आऊँगा।”

मेरा दिमाग कह रहा था “नहीं”, लेकिन शरीर ने जवाब दिया। मैंने आँखें बंद कर लीं। रोहन ने बहुत धीरे से मेरे होंठों पर किस किया। सिर्फ 4-5 सेकंड का किस्स था, लेकिन मेरे पूरे शरीर में बिजली दौड़ गई। जब रोहन पीछे हटा तो मैं शर्म से लाल हो गई थी।

“रोहन… यह कभी मत करना… प्लीज…”

रोहन मुस्कुराया और बोला, “आंटी, आपने रोका नहीं। इसका मतलब है आप भी चाहती हो। अब धीरे-धीरे हम आगे बढ़ेंगे।”

उसके बाद रोहन रोज आने लगा। छोटे-छोटे स्पर्श, कम्प्लिमेंट, छेड़खानी… सब धीरे-धीरे बढ़ रहा था। मैं हर बार “बस” कहती, लेकिन अंदर से इंतजार करने लगी थी कि कब वो फिर आएगा।

मैं जानती थी कि यह गलत है। मैं एक शादी-शुदा औरत हूं, आर्यन की माँ हूं। लेकिन रोहन की जवानी, उसकी हिम्मत और उसकी छूने की चाहत मुझे कमजोर कर रही थी।

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उस पहले किस्स के बाद तीन दिन बीत गए थे। मैं खुद को बहुत समझाती, लेकिन रोहन के आने का इंतजार रहने लगा था।तीसरे दिन दोपहर करीब 2:30 बजे रोहन आया। आर्यन अभी कॉलेज में था और 5 बजे तक लौटने वाला नहीं था।

जैसे ही मैंने दरवाजा खोला, रोहन ने मुझे अंदर खींच लिया और दरवाजा बंद कर दिया। बिना कुछ बोले उसने मुझे दीवार से सटा दिया और गहरा किस्स करने लगा। इस बार किस बहुत जोरदार और भूखा था। उसकी जीभ मेरे मुंह में घुस गई और मैं भी अनजाने में उसकी जीभ चूसने लगी।

रोहन ने मेरी साड़ी का पल्लू सरका दिया और ब्लाउज के हुक तेजी से खोलने लगा। ब्लाउज खुलते ही मेरी भारी 36D छातियाँ ब्रा में उभर आईं। रोहन ने ब्रा का हुक खोला और दोनों छातियाँ बाहर निकाल ली। उसने एक छाती को जोर से दबाया और निप्पल को मुंह में ले लिया।

“आह्ह्ह… रोहन… धीरे… आह्ह्ह…” मैं कराह उठी।

रोहन निप्पल चूसते हुए बोला, “आंटी, आपकी छातियाँ तो स्वर्ग हैं… मैं इन्हें दिन-रात चूसना चाहता हूं।”

उसके हाथ नीचे सरके। उसने मेरी साड़ी और पेटीकोट कमर तक ऊपर कर दिया और पैंटी उतार दी। मेरी चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी। रोहन ने दो उंगलियाँ अंदर डाली और तेजी से अंदर-बाहर करने लगा।

“वाह आंटी… आपकी चूत तो पूरी तर से भीग चुकी है। आप भी तो बहुत प्यासी हैं।”

मैं कुछ बोल नहीं पाई। रोहन ने मुझे सोफे पर लिटा दिया, अपनी पैंट उतारी और अपना मोटा, खड़ा लंड बाहर निकाला।वह मेरे ऊपर चढ़ गया। लंड का सिरा मेरी चूत पर रख कर धीरे से दबाव डाला।

“आंटी… अब मैं आपको चोद रहा हूं… आपकी चूत मेरी हो गई।”

एक जोरदार धक्के के साथ उसका मोटा लंड मेरी चूत में घुस गया।

“आआह्ह… रोहन… बहुत मोटा है… आह्ह्ह… मेरी चूत फट गई… धीरे बेटा…”

रोहन ने पूरा लंड अंदर डाल कर धीरे-धीरे चोदना शुरू किया। मेरी सिसकियाँ तेज होने लगी – “आह्ह्ह… हाँ… और गहरा… आह्ह्ह…”

हम दोनों पूरी तरह लीन हो चुके थे। रोहन की स्पीड बढ़ रही थी।

**तभी फोन बज उठा।**

रोहन का फोन था। स्क्रीन पर नाम चमक रहा था — **आर्यन**।

रोहन ने मुस्कुराते हुए फोन उठाया और स्पीकर ऑन कर दिया। मैं घबरा गई और उसे रोकने की कोशिश करने लगी। लेकिन रोहन ने मेरी दोनों कलाइयाँ पकड़ ली और और जोर से धक्का मार दिया।

रोहन (फोन पर, हाँफते हुए): “हेलो भाई… बोल…”

आर्यन: “ब्रो, तू कहाँ है? मैं कॉलेज से निकल रहा हूं। 15-20 मिनट में घर पहुँच जाऊँगा।”

रोहन ने मेरी चूत में और तेजी से लंड घुसाना शुरू कर दिया। “थप-थप-थप” की आवाज तेज़ हो गई। मैं सिसकियां रोकने की कोशिश कर रही थी, लेकिन मुंह से आवाज निकल ही रही थी।

रोहन (हँसते हुए): “भाई, मैं एक नई माल को पेल रहा हूं यार… बहुत टाइट और गर्म माल है… आह्ह्ह…”

उसने “गर्म” शब्द पर और जोर से धक्का मारा। मेरी सिसकी निकल गई — “आह्ह्ह… उफ्फ्फ…”

आर्यन जोर से हँसा और बोला: “हाहाहा… मजा कर भाई! तुझे तो कोई भी चूत दे देती है। नई माल को अच्छे से पेल… पूरा मजा लेले। मैं आ रहा हूं, तब तक तू अपनी नई वाली को खूब चोद।”

रोहन ने मेरी आँखों में देखा और जान-बूझ कर स्पीड और बढ़ा दी। अब वह बहुत जोर-जोर से चोद रहा था। उसके हर धक्के के साथ मेरी सिसकियाँ तेज हो रही थी।

रोहन (फोन पर, हाँफते हुए): “हाँ भाई… ये माल बहुत कमाल की है… बहुत जोर से चीख रही है… आह्ह्ह… सुन रहा है ना? कितनी प्यासी है… मैं इसे अच्छे से ठोक रहा हूं… आह्ह्ह… बहुत टाइट चूत है यार…”

मैं अब बिल्कुल काबू में नहीं थी। मेरी सिसकियाँ फोन पर साफ सुनाई दे रही थी — “आह्ह्ह… रोहन… आह्ह्ह… और जोर से… आह्ह्ह…”

आर्यन फिर हँसा: “वाह भाई, आवाज तो सुन कर ही मजा आ रहा है। तुझे तो सच में हर कोई अपनी चूत दे देता है। ठीक है, तू मजा कर। मैं आता हूं।”

फोन कटते ही रोहन ने मुझे कस कर पकड़ लिया और पागलों की तरह चोदने लगा।“सुन लिया आंटी? आपका बेटा कह रहा है कि मुझे हर कोई चूत दे देता है… लेकिन वो नहीं जानता कि आज मैं उसकी माँ की चूत को फाड़ रहा हूं… आह्ह्ह… बोलो आंटी… मेरे लंड का मजा कैसा लग रहा है?”

मैं अब पूरी तरह टूट चुकी थी। सिसकियाँ तेज हो गईं — “आह्ह्ह… रोहन… बहुत मोटा है… मेरी चूत फाड़ दी… आह्ह्ह… और जोर से चोद… हाँ… मैं झड़ रही हूं… आ गया… आ गया!”

मैं जोर से झड़ गई। मेरी चूत रोहन के लंड को कस कर दबाने लगी। रोहन भी और तेज हो गया। उसने आखिरी जोरदार धक्के मारे और मेरी चूत के गहरे अंदर गरम-गरम वीर्य छोड़ दिया।

“ले आंटी… पूरा माल अंदर… अब तेरी चूत मेरी हो गई।”

हम दोनों पसीने से तर थे। रोहन मेरे ऊपर लेट गया और मेरे कान में फुसफुसाया, “आंटी… अगली बार मैं और जोर से चोदूँगा… ताकि आर्यन सारी सिसकियां अच्छे से सुन सके।”

मैं शर्म, पछतावे और अनोखे सुख के मिश्रण में चुप पड़ी रही।

अगला भाग पढ़े:-बेटे के दोस्त ने माँ को चोदा-2

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