मैं तान्या हूं, 22 साल की। सिर्फ दो महीने पहले ही मैंने भोपाल से दिल्ली शिफ्ट करके एक बड़ी मल्टीनेशनल आईटी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में जॉइन किया था।
भोपाल की शांत, सरल और घरेलू जिंदगी को छोड़ कर दिल्ली आना मेरे लिए एक बड़ा कल्चरल शॉक था। यहां हर चीज तेज थी — ट्रैफिक, लोग, महत्वाकांक्षाएँ, रातें, और अब मेरी अपनी जिंदगी भी। ऑफिस में दिन भर कोडिंग, कोड रिव्यू, अनगिनत स्टैंडअप मीटिंग्स, क्रॉस-फंक्शनल सेशन्स, स्लैक पर लगातार मैसेजेस की बौछार, और शाम को घर लौटते वक्त मेट्रो में भीड़ — सब कुछ मिल कर मुझे थका देता था, लेकिन साथ ही एक अनोखा उत्साह भी देता था।
मैं बेहद खूबसूरत हूं, और यह बात मैं नहीं, बल्कि लोग मुझे बार-बार बताते हैं। मेरी हाइट 5 फीट 5 इंच है। रंग गोरा-गुलाबी, जो दिल्ली की धूप में भी अपनी नरम चमक नहीं खोता। मेरी आँखें बड़ी-बड़ी, गहरी और बेहद एक्सप्रेसिव हैं — उनमें अभी नई आजादी की चमक साफ झलकती है, जैसे कोई कैदी अभी-अभी जेल से छूटा हो। मेरे घने, काले और लंबे बाल अक्सर खुले रहते हैं। वे मेरी पीठ पर लहराते हुए मेरी कमर तक पहुँचते हैं। जब मैं चलती हूं तो बालों की ये लहर मेरे कूल्हों की गति के साथ ताल मिलाती हुई लगती है।
मेरा फिगर आकर्षक है — 34-26-36 के आस-पास। टाइट फॉर्मल शर्ट और पैंट में भी मेरी छाती की उभरी हुई गोलाई, पतली कमर और निचले हिस्से की सेडक्टिव कर्व्स लोगों की नज़रों को अपनी ओर खींच लेती हैं। मेरे होंठ नरम, गुलाबी और थोड़े मोटे हैं। जब मैं मुस्कुराती हूं तो मेरे गालों पर दो छोटी-छोटी डिम्पल्स उभर आती हैं, जो मुझे और भी मासूम और छूने लायक बना देती हैं। मेरी खूबसूरती में एक साधारण-सी, छोटे शहर वाली मासूमियत अभी भी बाकी है, जो बड़े शहर की चकाचौंध में और भी खतरनाक लगती है।
नई नौकरी, नया शहर, नया फ्लैट, और सबसे बड़ा — पूरा-पूरा अकेलापन। ये सब मिल कर मेरे अंदर एक अजीब सा मिश्रित भाव पैदा कर रहे थे। एक तरफ उत्साह था कि अब मैं अपनी जिंदगी खुद संवार सकती हूं, अपनी मर्जी से जी सकती हूं। दूसरी तरफ एक हल्का-सा डर भी था — इस तेज रफ्तार वाले शहर में अकेले लड़की होना आसान नहीं है।
रात को फ्लैट में अकेले लेटे-लेटे अक्सर पुरानी यादें आ जातीं — मां की बनाई चाय, भोपाल की छत पर ठंडी हवा, दोस्तों के साथ सस्ती चाय की टपरी, यहां तक कि वह शारीरिक संबंध जो मैंने अपने बॉयफ्रेंड्स के साथ बनाई थे। लेकिन फिर नई आजादी का रोमांच मेरे पूरे शरीर में सिहरन भर देता। मेरे मन में एक अनजानी बेचैनी थी। जैसे कोई तूफान आने वाला हो। जैसे मेरी जिंदगी अब पहले जैसी कभी नहीं रहने वाली। जैसे मैं किसी मोड़ पर खड़ी हूं, जहां से एक रास्ता शांति की ओर जाता है और दूसरा… अनजानी, खतरनाक, लेकिन बेहद लुभावनी उत्तेजनाओं की ओर।
शनिवार की शाम। ऑफिस की थकान अभी भी शरीर में बसी हुई थी। मैं सोच रही थी कि आज फ्लैट में आराम करूंगी, कोई सीरियल देखूंगी या फिर कुछ अच्छा खाना ऑर्डर करके नेटफ्लिक्स चला लूंगी। लेकिन मेरी सहेली और ऑफिस कलीग काव्य ने मुझे बिल्कुल छोड़ने का नाम नहीं लिया।
वह मेरे केबिन में आकर जोर-जोर से बोली, “अरे तान्या! पूरा हफ्ता हमने कोडिंग, बग फिक्सिंग, मीटिंग्स और मैनेजर की डिमांड्स में गंवा दिया। आज शनिवार है यार! थोड़ा तो एंजॉय कर ले। तू दिल्ली में नई आई है, ऐसे फ्लैट में बंद करके क्या करेगी? चल नाइट क्लब चलते हैं। मैं तुझे गारंटी देती हूं, तुझे मजा आएगा।”
मैंने हिचकिचाते हुए कहा, “काव्य… मैंने कभी दिल्ली जैसे नाइट क्लब नहीं देखे है। भोपाल में तो ऐसे प्लेस सामान्य होते थे। इसके अलावा मुझे शोर, भीड़, अंधेरा और… वो सब माहौल थोड़ा डराता है।”
काव्य हँसी और मेरे कंधे पर हाथ रख कर बोली, “अरे पगली! यही तो दिल्ली है। यहां लोग हफ्ते भर की थकान शनिवार-रविवार को निकालते हैं। बस एक बार चल के देख। अगर तुझे बुरा लगे तो मैं तुझे खुद घर छोड़ आऊँगी। प्लीज यार… तू बहुत क्यूट है, लेकिन इतनी बोरिंग मत बन। तेरे अंदर बहुत सारी दबी हुई वाइल्ड साइड है, आज उसे थोड़ा बाहर आने दे।”
उसके बार-बार मनाने, “मैं तेरे साथ हूं ना”, “कुछ नहीं होगा”, “सिर्फ डांस और म्यूजिक का मजा है”, और “तू देखना, एक बार अंदर घुस गई तो खुद बाहर नहीं निकलना चाहेगी” — इन सब बातों के आगे आखिरकार मैं मान गई।
घर लौट कर हम दोनों ने खूब तैयारी की।मैंने एक ब्लैक ऑफ-शोल्डर टॉप चुना। वह टॉप मेरे दोनों कंधों को पूरी तरह उजागर कर रहा था, कॉलरबोन की नरम लाइन साफ दिख रही थी, और छाती का ऊपरी हिस्सा थोड़ा-थोड़ा झलक रहा था। नीचे मैंने हाई-वेस्ट डार्क ब्लू जींस पहनी, जो मेरी पतली कमर को और भी पतला दिखा रही थी और मेरे कूल्हों तथा जाँघों की सेडक्टिव गोलाई को अच्छे से हाइलाइट कर रही थी।
मैंने हल्का मेकअप किया — काजल, हल्का ब्लश, और गुलाबी लिप ग्लॉस। बाल खुले छोड़ दिए। काव्य ने मुझे देख कर सीटी बजाई, “वाह तान्या! आज तो तू किसी को भी पागल कर देगी।”
काव्य के साथ हम दोनों एक पॉपुलर नाइट क्लब “Enigma” पहुँचे। जैसे ही हम अंदर घुसीं, माहौल ने मुझे पूरी तरह झकझोर दिया।
म्यूजिक बेहद तेज और बेस-हैवी था। हर बीट मेरे सीने में धड़क रही थी। अंदर अंधेरा था, लेकिन रंग-बिरंगी लेजर लाइट्स, स्ट्रोब लाइट्स और डिस्को लाइट्स पूरे क्लब को बार-बार अलग-अलग रंगों में रंग रही थी। डांस फ्लोर पर लोग पूरी तरह खोए हुए थे — कुछ जोड़ों में लिपटे, कुछ अकेले झूमते, कुछ लड़कियाँ सेक्सी तरीके से अपने शरीर हिला रही थी। हवा में शराब, परफ्यूम, पसीना और कामुकता की मिली-जुली महक थी।
काव्य काफी एक्साइटेड थी। उसने मेरी कलाई पकड़ कर मुझे डांस फ्लोर पर खींच लिया। शुरू-शुरू में मैं थोड़ी अजीब महसूस कर रही थी, लेकिन धीरे-धीरे बीट्स के साथ मेरे शरीर ने भी रियैक्ट करना शुरू कर दिया। मेरी कमर हिलने लगी, हाथ ऊपर उठने लगे। शरीर में एक अनजानी गर्माहट फैल रही थी। पसीना आने लगा था, लेकिन वो अच्छा लग रहा था।
Meri Fantasy Ki Kahani Meri Jubani – Part 2
तभी काव्य का बॉयफ्रेंड (राहुल) आ गया। काव्य ने मेरे कान के बहुत पास मुंह लगाकर, मेरे बालों को हल्के से हटाते हुए धीरे से कहा, “यार तान्या… राहुल आ गया है। मैं उसके साथ थोड़ी देर में निकल रही हूं। तू मजे से एंजॉय कर। कोई टेंशन मत लेना। बस सेफ रहना। अकेली मत घूमना बहुत, और अगर कोई परेशान करे तो तुरंत मुझे कॉल करना, ठीक है? घर पहुँच कर मैसेज जरूर करना।”
मैंने हल्के से मुस्कुरा कर सिर हिला दिया, लेकिन अंदर से मेरा दिल जोरों से धड़क रहा था। काव्य और राहुल चले गए। अब मैं पूरी तरह अकेली थी — इस शोर, इस भीड़, इस कामुक माहौल में।
थोड़ी देर तक मैं वहीं खड़ी रही, फिर बार काउंटर की तरफ चली गई। मैंने एक हल्का कॉकटेल (सेक्स ऑन द बीच) ऑर्डर किया और बार स्टूल पर बैठ गई। तभी मेरी नज़र बार के दूसरी तरफ बैठे एक लड़के पर पड़ी।
बार काउंटर पर बैठे हुए मैं अपना ड्रिंक धीरे-धीरे घूँट भर रही थी, तभी मेरी नज़र बार के दूसरी तरफ बैठे एक युवक पर पड़ी। वह लगभग 25 साल का था। उसका नाम सोहेब था।
दिखने में वह बेहद आकर्षक था। लंबाई करीब 6 फीट, चौड़े मजबूत कंधे, एथलेटिक और वेल-टोन्ड बॉडी। उसकी आस्तीनें ऊपर चढ़ी हुई थी, जिससे उसकी मोटी बाइसेप्स और फोरआर्म्स की नसें साफ दिख रही थी। चेहरा साफ-सुथरा, तेज़ नज़रें, हल्की साफ दाढ़ी और एक ऐसी मुस्कान जो किसी भी लड़की को अंदर तक हिला देने वाली थी। उसकी आँखों में एक खास तरह की भेदती हुई, भूखी चमक थी।
सोहेब ने मुझे कुछ देर तक ध्यान से देखा। फिर वह अपनी ड्रिंक लेकर उठा और सहज कदमों से मेरे पास आकर बार स्टूल पर बैठ गया। उसकी गहरी, मर्दाना आवाज में थोड़ी मुस्कान के साथ बोला, “अकेली बैठी हो? इतनी खूबसूरत लड़की को इस माहौल में अकेला छोड़ना सच में गलत है। क्या बात है? कोई छोड़ कर चला गया क्या? या फिर तुम खुद किसी को ढूंढ रही हो?”
मैं शरमाते हुए हल्के से मुस्कुराई। मेरे गाल थोड़े लाल हो गए। थोड़ा झिझकते हुए मैंने जवाब दिया, “हां… मेरी फ्रेंड अभी-अभी अपने बॉयफ्रेंड के साथ चली गई। मैं नई हूं यहां… थोड़ा अजीब लग रहा था।”
सोहेब ने हँसते हुए, अपनी आँखों में शरारत भर कर कहा, “तो अब मैं हूं ना। अकेलेपन का इलाज मैं बहुत अच्छा करता हूं। क्या पी रही हो? मैं भी यही ऑर्डर करूँ? या तुम्हें कुछ और ट्राई करना चाहोगी? आज तुम्हारी मर्जी, मैं पूरा साथ दूँगा।”
उसकी बातों में आत्मविश्वास और सहजता थी। हमारी बात-चीत धीरे-धीरे शुरू हुई। सोहेब बहुत चतुर और बातूनी था। वह अपनी बातों में हास्य घोलता जा रहा था। वह मुझे धीरे-धीरे सहज बना रहा था। उसकी नजरें बार-बार मेरे चेहरे, मेरे खुले कंधों, कॉलरबोन और मेरे ब्लैक टॉप से थोड़ा झलकते छाती के हिस्से पर घूम रही थीं। जैसे वह मुझे पहले से ही नाप-तौल रहा हो।
उसने बताया कि वह एक इवेंट मैनेजमेंट कंपनी चलाता है और अक्सर क्लब्स और पार्टीज़ में आता रहता है। उसकी आवाज़ में एक गहरी, आकर्षक मर्दाना गहराई थी जो मेरे कान में उतर कर पूरे शरीर में सिहरन पैदा कर रही थी।
कुछ देर सामान्य बातें करने के बाद सोहेब ने मुझे डांस फ्लोर पर बुलाया। “चलो तान्या, इतना बैठे-बैठे क्या करेंगे? डांस फ्लोर पर चलते हैं। मुझे लगता है तुम्हारे अंदर बहुत सारी दबी हुई ऊर्जा है, आज उसे बाहर निकालते हैं।”
मैंने हिचकिचाते हुए हां कह दी। दोनों डांस फ्लोर पर पहुँचे। म्यूजिक तेज था। सोहेब ने मुझे अपने करीब खींच लिया। हम दोनों एक-दूसरे के काफी पास आ गए। मुझे उसकी मजबूत छाती की गर्मी, उसकी मांसपेशियों की कठोरता और उसके शरीर से निकलती तीखी, मर्दानी खुशबू साफ-साफ महसूस हो रही थी। हर बीट पर हमारी बॉडीज बार-बार छू रही थी — कभी उसकी छाती मेरी छाती से सट जाती, कभी उसकी जाँघ मेरी जाँघों के बीच फिसल जाती।
हर छूने पर मेरे शरीर में एक मीठी, अनजानी सिहरन दौड़ जाती। मेरी साँसें थोड़ी तेज हो रही थी। शराब का हल्का नशा और तेज म्यूजिक मिल कर मेरे दिमाग को धीरे-धीरे प्रभावित कर रहे थे।
इसके आगे क्या हुआ, अगले पार्ट में पढ़िएगा।