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माँ की चुदाई • पठन समय: 21 मिनट • पढ़ा गया: 762 बार

बहू की मेहरबानी, सास हुई बेटे के लंड की दीवानी-6

राज कार्तिक शर्मा

25 Mar 2014 को प्रकाशित

बहू की मेहरबानी, सास हुई बेटे के लंड की दीवानी-6
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सुमन को बेड पर लेटा कर अशोक अपने कपड़े उतारने लगा और सुमन बेड पर पड़े पड़े उसको देखती रही। चंद पलों में ही अशोक अपनी माँ के सामने उसी अवस्था में खड़ा था जिस अवस्था में वो 24 साल पहले पैदा हुआ था।सुमन मन ही मन बहुत खुश और उत्तेजित थी जैसे किसी बच्चे को कोई मनचाही चीज मिलने वाली हो। माँ बेटे के रिश्ते को तो जैसे कब का भूल चुकी थी। याद थी तो बस अपनी चुत की लंड के लिए प्यास। उसका मन बैचैन हो रहा था कि अशोक उसको चोदने में इतनी देर क्यों लगा रहा है, बस अशोक आये और अपने मोटे लंड से उसकी चुत की धज्जियाँ उड़ा दे… फाड़ डाले उसकी चुत।

अशोक भी जल्दी से अपनी माँ की चुत का मजा लेकर उसकी प्यास बुझाना चाहता था। तभी तो वो जल्दी से बेड पर चढ़ गया और एक झटके से अपनी माँ की पैंटी फाड़ कर उसके बदन से अलग कर दी।एक पल के लिए अशोक अपनी माँ की चुत देखता रहा। एकदम चिकनी और क्लीन शेव चुत देख अपनी माँ की खूबसूरती पर मोहित हो गया था। उसने अपनी माँ की पनियाई चुत को अपनी उंगली से छू के देखा और फिर धीरे धीरे एक उंगली अपनी माँ की चुत में उतार दी।

सुमन पहले तो थोड़ा कसमसाई पर अगले ही पल वो उसके बदन में मस्ती की लहर दौड़ गई, उसने कस कर सिर के नीचे लगे तकिये को कस कर पकड़ लिया। उसे लगने लगा था जैसे उसकी चुत से अभी सब कुछ बाहर निकल आएगा।

अशोक ने अपनी उंगली से कुछ देर अपनी माँ की चुत को सहलाया और फिर अपने होंठ चुत पर टिका दिए। वैसे तो रमिता सुमन को बहुत बार अपनी जीभ से ये मजा दे चुकी थी पर अशोक की थोड़ी खुरदरी जीभ का मजा ही कुछ और था। लेस्बियन सेक्स और किसी मर्द के साथ सेक्स करने में सबसे बड़ा फर्क तो यही है। मर्द के कड़क हाथ खुरदरी जीभ और सबसे बड़ी बात मजबूती औरत को मदहोश करने में इन सब चीजों का बहुत योगदान रहता है।

यही हाल अब सुमन का हो रहा था। रमिता ने बेशक उसके बदन को मसला हो उसकी चुत चाटी हो या उंगली की हो पर अशोक के साथ ये मजा रमिता की मुकाबले कई गुना ज्यादा आ रहा था।

जब अशोक सुमन की चुत चाट रहा था तो सुमन ने भी अशोक का लंड पकड़ लिया और मसलने लगी। अशोक थोड़ा सा सुमन की तरफ सरक गया। अब अशोक का लंड सुमन के चेहरे के बिल्कुल पास था। बरसों बाद आज सुमन लंड को इतने नजदीक से देख रही थी। अशोक के लंड का लाल लाल सुपारा सुमन को बहुत अच्छा लग रहा था। उसने जीभ निकाल कर अशोक के सुपारे को चख कर देखा। सुमन को इसका स्वाद बहुत अच्छा लगा तो वो जीभ निकाल कर अच्छे से चाटने लगी और फिर कुछ ही देर में अशोक का लंड सुमन के मुँह के अन्दर था और सुमन मस्त होकर अशोक का लंड चाट और चूस रही थी।

अशोक तो जैसे जन्नत में था, उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उसकी सेक्सी माँ कभी उसका लंड इस तरह से चूसेगी। अब दोनों माँ बेटा 69 की अवस्था में आ गए थे और मस्त होकर एक दूसरे के लंड चुत को चाट और चूस रहे थे।

जब से ये सब शुरू हुआ था तब से अब तक दोनों के बीच कोई बात नहीं हुई थी। इस चुप्पी को सुमन ने ही तोड़ा- कमीने… कब तक तड़पाएगा अपनी माँ को… अब चोद भी दे… बहुत प्यासी है तेरी माँ की चुत!

इतना सुनना था कि अशोक ने अगले ही पल पोजीशन संभाली और अपना लंड टिका प्रिया सुमन की आग उगलती चुत के मुहाने पर। जैसे ही सुपारा चुत के संपर्क में आया तो सुमन ने अपनी गांड उछाल कर उसका स्वागत किया।चुत पहले से ही पानी पानी हो रही थी, अशोक ने भी सुमन का इशारा समझा और धक्का प्रिया अपना मोटा लौड़ा अपनी माँ की चुत में।

मम्मी की चुत सालों बाद चुद रही थी तो मोटे लंड के साथ फैलती चली गई और साथ ही दर्द के मारे सुमन की आँखें भी फ़ैल गई। एक बारगी तो उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे आज ही उसकी सुहागरात हो और उसका पति उसकी चुत की सील खोल रहा है।वो दर्द से कराही- अह्ह्ह… उईई… ओह्ह्ह माँ… धीरे डाल कमीने… फाड़ेगा क्या अपनी माँ की चुत!

अशोक का अभी सिर्फ सुपारा ही अन्दर गया था और सुमन का ये हाल था, अभी तो पूरा लंड बाहर था। अशोक ने मन ही मन कुछ सोचा और लंड बाहर निकाल कर उस पर थोड़ा थूक लगाया और दुबारा से लंड को ठिकाने पर टिका कर बिना देर किये एक जोरदार धक्का लगा कर लगभग आधा लंड चुत में उतार प्रिया।

सुमन दर्द में चिल्ला उठी… पर अशोक ने बेरहमी से साथ ही दूसरा धक्का लगा कर पूरा लंड सुमन की चुत में पेल प्रिया।“हाय्य्य य्य्य… मरर… गईई ईईई उईई याईईई आईईईई…” सुमन दर्द से तड़प उठी।“बहनचोद कुते… रण्डी की चुत नहीं है… तेरी माँ की चुत है कमीने…”

“सॉरी मम्मी… वो उत्तेजना में कुछ ज्यादा हो गया… बस अब आराम से करूँगा.” कह कर अशोक ने अपने होंठ अपनी माँ के होंठों से मिला दिए। अब अशोक सुमन के होंठ चूस रहा था और दोनों हाथो से अपनी माँ की बड़ी बड़ी चुचियाँ मसल रहा था।

अशोक के रुक जाने से सुमन को भी थोड़ा आराम मिला था, उसे भी अपनी चूत अब भरी भरी महसूस हो रही थी, उसका मन करने लगा था कि अब अशोक धक्के मारना शुरू करे।“अब ऐसे ही पड़ा रहेगा या कुछ करेगा भी?”सुमन का बस इतना कहना था कि अशोक को भी जैसे इसी बात का इंतजार था, उसने धीरे धीरे लंड सुमन की चुत में अन्दर बाहर करना शुरू कर प्रिया। शुरू के दस बीस धक्कों में तो सुमन को थोड़ा दर्द हुआ पर फिर तो जैसे जन्नत के दरवाजे खुलते चले गए, हर धक्के के साथ सुमन का बदन मस्ती से झूम उठा और साथ ही अशोक के धक्कों की भी स्पीड अब बढ़ती चली गई और बेड पर जैसे भूचाल आ गया।

“चोद दे रे… चोद अपनी माँ की चुत… बहुत प्यासी है तेरी माँ… मिटा दे उसकी प्यास… क्या मस्त लंड है तेरा… मजा आ गया… आह्ह्ह… चोद मेरे बच्चे… चोद… जोर जोर से चोद!” सुमन मस्ती में बड़बड़ाती जा रही थी।उधर अशोक भी जैसे जन्नत में था, रमिता की चुत में भी शायद इतना मजा नहीं था जितना उसको अपनी माँ की चुत चोदने में आ रहा था। इसका एक मुख्य कारण तो अपनी सगी माँ की चुत को चोदने का एहसास भी था।

“ओह्ह… माँ… तू क्यों तड़पती रही इतने दिन… मुझे बताया क्यों नहीं… क्या चुत है तुम्हारी… तुम्हें तो मैं दिन रात चोदना चाहूँगा… एक पल के लिए भी तड़पने नहीं दूंगा अपनी प्यारी माँ को…”“उम्म्मम्म… चोद… मेरे बेटा… आज से ये चुत मेरे मर्द बेटे के लिए तोहफा… जब चाहे चोद लेना… क्योंकि इसमें तेरी बीवी को भी ऐतराज नहीं होगा… अब तो जब भी दिल करेगा, खूब चुदवाया करुँगी… प्यासी नहीं रहना है अब मुझे…”

इसी मस्ती की धुन में दोनों माँ बेटा लगभग पंद्रह बीस मिनट तक चुदाई का आनन्द लेते रहे। इस बीच सुमन दो बार झड़ चुकी थी और अब अशोक भी झड़ने को तैयार था। अब वो तूफानी गति से अपनी माँ की चुत में लंड पेल रहा था। सुमन भी गांड उछाल उछाल कर अशोक को लंड को अपनी चुत में अन्दर तक महसूस कर रही थी।

और फिर अशोक के लंड ने गर्म गर्म वीर्य की पिचकारी छोड़ दी अपनी माँ की चुत में। सुमन की चुत भी गर्मी से बह उठी और तीसरी बार झड़ने लगी। चुत की पकड़ लंड पर बढ़ गई थी और वो लंड से वीर्य का कतरा कतरा निचोड़ने को बेचैन कर लग रही थी।

झड़ने के बाद दोनों ही काफी देर तक ऐसे ही लेटे रहे।

जब अशोक के फ़ोन की घंटी बजी तो जैसे दोनों जन्नत से जमीन पर आये। फ़ोन अशोक के बॉस का था, अशोक को जरूरी मीटिंग के लिए पहुँचना था पर सुमन को चोदने के चक्कर में उसे कुछ याद ही नहीं रहा।उसने तबीयत ख़राब होने का बहाना बनाया और फिर मात्र दस मिनट में ही नहा धोकर वो ऑफिस के लिए निकल गया।

सुमन अभी भी नंगधड़ंग बेड पर पड़ी थी, उसे अब नींद आने लगी थी और वो कब सो गई उसे खुद भी पता नहीं लगा।

अशोक ऑफिस तो पहुँचा पर उसका दिल अभी भी सुमन पर ही अटका हुआ था। जैसे तैसे दोपहर तक ऑफिस में बिताया और फिर तबीयत का बहाना बना कर वापिस घर के लिए निकल पड़ा।

उधर जब सुमन की आँख खुली तो उसने अपने आप को अभी भी बेड पर नंगी पड़े पाया और एकदम से सब कुछ फिल्म की तरह उसकी आँखों के सामने घूम गया। तब उसको एहसास हुआ कि उसने कामाग्नि में यह क्या कर प्रिया है। उसे अपने आप पर गुस्सा आ रहा था कि वो कैसे अपने सगे बेटे के साथ ये सब कर सकती है। कहीं ना कहीं ग्लानि के भाव सुमन के मन में उठ रहे थे।

वो बेड से उठ कर बाथरूम की तरफ चली तो उसकी चुत में एक टीस सी उठी और उसे वो मजा याद आने लगा जो अशोक से चुदवाते हुए उसे आ रहा था। वो दुविधा में थी कि उसने गलत किया या सही।वो कुछ समझ नहीं पा रही थी।

बाथरूम में फ्रेश हो, नहा धोकर वो बाहर निकली और रसोई में घुस गई। भूख भी लगने लगी थी, नाश्ता बना कर खाया पीया और फिर कमरे में अपने बेड पर लेटे लेटे वो सुबह की अशोक के साथ बीते पलों को याद कर कभी परेशान हो जाती तो कभी चुदाई के एहसास से दिल की धड़कनें बढ़ जाती उसकी!

तभी दरवाजे पर आहट हुई, इस समय कौन आया होगा, यह सोचते हुए सुमन दरवाजे की तरफ बढ़ी। दरवाजा खोलते ही उसकी धड़कनें बढ़ गई।दरवाजे पर अशोक खड़ा था।

“इतनी जल्दी कैसे आ गया तू…”“कुछ नहीं बस थोड़ा सिर में दर्द था तो वापिस आ गया!” कहकर अशोक अपने कमरे में चला गया।

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कुछ देर बाद सुमन अशोक के कमरे में चाय पूछने के लिए गई तो अशोक उसी समय बाथरूम से फ्रेश होकर निकला था और उसने उस समय बनियान और अंडरवियर ही पहना हुआ था।

ना चाहते हुए भी सुमन की नजर उसके अंडरवियर में लंड और अंडकोष से बने उभार पर गई, उसके दिल की धड़कन एक बार से फिर बढ़ने लगी। वो अशोक को बिना चाय पूछे ही बाहर आ गई और रसोई में जाकर चाय बनाने लगी।

वो चाय बनाने में मशरूफ थी कि अशोक रसोई में आया और उसने सुमन को पीछे से पकड़ कर अपने से चिपका लिया।सुमन ने छूटने की कोशिश की पर अशोक ने उसको कस के पकड़े रखा और अपने होंठ सुमन की गर्दन पर रख दिए। वो सुमन की गर्दन और कान की लटकन को चूमने लगा। अशोक का इतना करना था कि सुमन भी बहकने लगी और अशोक से लिपट गई।

गैस बंद कर अशोक सुमन को एक बार फिर अपने बेडरूम में ले गया और कुछ ही देर बाद दोनों माँ बेटा फिर से नंगे बदन एक दूसरे से उलझे हुए अपनी कामाग्नि को शान्त करने में व्यस्त हो गए।कमरे में से अब सिर्फ आहे और सिसकारियाँ ही सुनाई दे रही थी या फिर सुनाई दे रही थी बेड की चूं चूं!

दोपहर को शुरू हुआ यह तूफ़ान शाम के नौ बजे तक चला, दोनों ने तीन बार चुदाई का भरपूर मजा लिया, उसके बाद अशोक बाजार से खाने पीने का सामान ले आया और खा पीकर दोनों फिर से बेडरूम में घुस गए और फिर सारी रात बेडरूम में भूचाल आया रहा।

कमाल की बात यह थी कि दोनों माँ बेटे ने आपस में चुदाई के सिवा कोई बात नहीं की थी। अगर कुछ किया था वो बस चुदाई वो भी आसन बदल बदल कर। कभी अशोक ऊपर सुमन नीचे तो कभी सुमन ऊपर तो अशोक नीचे। कभी घोड़ी बन कर तो कभी टेबल पर उल्टा लेटा कर।

दोनों ने ही अपने अपने फ़ोन बंद किये हुए थे। रमिता ने दोनों का फ़ोन बहुत बार मिलाया पर फ़ोन तो बंद थे। अगली सुबह अशोक छुट्टी लेना चाहता था पर सुमन ने मना कर प्रिया क्योंकि पिछली दोपहर से आठ बार चुदवा चुकी थी और उसकी चुत सूज कर डबल रोटी हुई पड़ी थी, उसमें अब और चुदवाने की ताकत नहीं बची थी।

अशोक ने नाश्ता किया और वो अपने ऑफिस के लिए निकल गया। उसके जाते ही सुमन ने अपना फ़ोन खोला ही था कि रमिता का फ़ोन आ गया। उसने सुमन से बार बार पूछा कि कुछ हुआ या नहीं पर सुमन ने मना कर प्रिया।

रमिता ने सुमन को कहा कि उनके पास आज आज की रात और है, या तो वो अशोक से चुद कर मजा ले ले नहीं तो वो आते ही उनको अशोक के सामने नंगी करके चुदने को डाल देगी। अब उसे क्या पता था कि उसकी सास और पति तो पहली पारी में ही शतक जमा कर पारी घोषित कर चुके हैं।

अशोक उस दिन भी जल्दी आ गया और शाम होते होते उसने और सुमन ने दो बार चुदाई कर ली थी। फिर रात का खाना दोनों बाहर करने गए। अशोक ने अपनी माँ के लिए 3-4 जोड़ी फैंसी अंडरगारमेंट्स ख़रीदे। सुमन के कहने पर 2 जोड़ी रमिता के लिए भी लिए और फिर रात को करीब 11 बजे घर पहुँचे।

घर में अन्दर घुसते ही जैसे ही सुमन ने दरवाजा बंद किया अशोक ने उसे अपनी गोद में उठा लिया और सीधा अपने बेडरूम में लेकर घुस गया और अगले कुछ ही पलों में दोनों के बदन पर एक भी कपड़ा नहीं था। अशोक ने सुमन को नए ब्रा-पैंटी डाल कर दिखाने को कहा तो सुमन ने भी ख़ुशी ख़ुशी सब एक एक बार पहन कर अशोक को दिखाए। सुमन दो दिन की चुदाई से ही खिल उठी थी। जो सुमन पिछले तेरह साल से चुदाई के लिए तरस रही थी वो आज उसे छप्पर फाड़ कर मिल रही थी।

कपड़े उतर चुके थे और अशोक सुमन की चुत पर अपनी जीभ टिका चुका था और सुमन ने भी अपने बेटे का लंड अपने मुँह में भर लिया था। फिर सारी रात घपाघप घपाघप होती रही। सुमन चुदती रही और अशोक चोदता रहा।

सुमन ने अशोक को बता प्रिया था कि अगले दिन रमिता आने वाली है और वो रमिता के सामने यह जाहिर नहीं होने देना चाहती है कि वो अशोक से चुद चुकी है तो बस आज रात जम के चोद दो फिर दो तीन दिन रमिता के सामने शराफत का नाटक करने के बाद ही चुदाई होगी दोनों के बीच। ताकि रमिता को लगे कि उसने ही सुमन को अशोक से चुदवाया है।सुबह तक पाँच बार चुदाई हुई और फिर दोनों सो गए।

दस बजे अशोक अपनी ड्यूटी पर चला गया और करीब बारह बजे रमिता आ गई। वो सुमन से बहुत नाराज हुई कि उसने अशोक को और सुमन को मौका प्रिया पर फिर भी दोनों ने कुछ नहीं किया। सुमन की मन ही मन हँसी छुट रही थी पर उसने रमिता को एक बार भी ये बात जाहिर नहीं होने दी।

शाम को अशोक आ गया और खाना खाने के बाद जब रमिता और अशोक अपने बेडरूम में मिले तो अशोक रमिता से ऐसे लिपटा जैसे तड़प रहा हो रमिता को चोदने के लिए। जैसे पिछले तीन दिन से चुत देखी ही ना हो।रमिता अशोक पर भी नाराज हुई कि उसने कहने के बाद भी अपनी मम्मी को नहीं चोदा. पर अशोक ने बोल प्रिया कि उसे शर्म आती है अपनी माँ के साथ ये सब करने में।यह सुन रमिता बोली- तुम दोनों ही लुल्ल हो… मुझे ही कुछ करना पड़ेगा।

अगले दिन से रमिता ने सुमन और अशोक दोनों पर ही दबाव बनाना शुरू कर प्रिया कि वो चुदाई करें।रमिता सुमन को बोली- मम्मी जी, जब चुत में आग लगी है और अशोक चोदने को भी तैयार है तो आप चुदवा क्यों नहीं लेती?सुमन बोली- रमिता… मुझे एक दो दिन का टाइम दे… मैं सोचती हूँ इस बारे में!“कोई एक दो दिन का टाइम नहीं… जो होगा आज रात को होगा… बस आप अपनी चुत चमका कर रखना ताकि आपका बेटा आपकी चुत देखते ही चोदने को टूट पड़े!”“तू मुझे चुदवा कर ही मानेगी कमीनी…”

शाम को अशोक आया, सबने खाना खाया और फिर जब सब सोने की तैयारी करने लगे तो रमिता ने सुमन को अपने साथ उनके बेडरूम में चलने को कहा। सुमन ऊपर से मना करती रही पर सच तो ये था कि उसने पिछली रात भी बड़ी मुश्किल से काटी थी अशोक से चुदे बिना… थोड़ी ना-नुकर के बाद सुमन रमिता के साथ उसके कमरे में चली गई।

अशोक सिर्फ अंडरवियर में बैठा रमिता का इंतज़ार कर रहा था। सुमन को देख उसने भी चौंकने का ड्रामा किया। रमिता कुछ नहीं बोली बस उसने सुमन की साड़ी खींच दी। सुमन ब्लाउज और पेटीकोट में अशोक के सामने खड़ी थी। अशोक या सुमन कुछ बोलते इससे पहले ही रमिता ने पेटीकोट का कमरबन्द खींच प्रिया। पेटीकोट सुमन के बदन से अलग हो उसके कदम चूमने लगा। सुमन ने नीचे पैंटी नहीं पहनी थी।

“अब सब कुछ मैं ही करूँ या आप भी खड़े होकर कुछ करोगे?” रमिता ने अशोक की तरफ देखते हुए कहा।“क्या कर रही हो रमिता… माँ है वो मेरी… कैसे चोद सकता हूँ मैं उन्हें?” अशोक का ड्रामा अभी भी चालू था।“अब खड़े होकर कुछ करते हो या पड़ोसी को बुलाऊं तुम्हारी माँ चुदवाने के लिए!” रमिता पर तो जैसे भूत सवार था सुमन को अशोक से चुदवाने का।

तभी सुमन ने अशोक को आँख मारी और आने का इशारा किया तो अशोक शर्माने का नाटक करते हुए सुमन के पास गया और एक हाथ सुमन की चूची पर रख प्रिया।

रमिता यह देख पास पड़ी कुर्सी पर बैठ गई और एक डायरेक्टर की तरह दोनों को बताने लगी कि क्या करना है। उसे क्या पता था कि ये दोनों तो पहले ही इस काम की पीएचडी कर चुके है।“जल्दी से अपनी माँ का ब्लाउज भी उतार दो… और मम्मी जी आप भी जल्दी से अशोक का अंडरवियर उतार कर लंड पकड़ कर देखो अपने हाथ में!”

अशोक और सुमन दोनों रमिता की ये बातें सुन कर मन ही मन मुस्कुरा रहे थे। अब उन दोनों ने भी नाटक बंद कर मजे लेने का सोचा और फिर तो दोनों लिपट गए एक दूसरे से। कुछ ही देर में दोनों के नंगे बदन बेड पर एक दूसरे से उलझे हुए थे।

रमिता भी अपने कपड़े उतार चुकी थी और बेड के कोने पर बैठ माँ बेटे की चुदाई का लाइव शो देख रही थी। सुमन ने अशोक का लंड चूसा और अशोक ने भी दिल से सुमन की चुत चाटी और फिर एक ही झटके में अशोक ने अपना लंड सुमन की चुत में उतार प्रिया।

अगले बीस मिनट तक दोनों चुदाई का मजा लेते रहे और रमिता ये सोच सोच कर खुश होती रही कि आखिर उसने अपनी सासू माँ की प्यास बुझाने का प्रबन्ध कर प्रिया था। बेशक इस काम के लिए उसे अपना पति अपनी सास के साथ साँझा करना पड़ रहा था।

उस दिन से चुदाई का जो सिलसिला शुरू हुआ वो शायद आज भी जारी है।

कहानी पसंद आई या नहीं, जरूर बतायें। बेशक यह सेक्स कहानी मेरी नहीं है और ना ही मैं माँ बेटे की चुदाई का समर्थन करता हूँ। यह कहानी रमिता की है।

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