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बाप बेटी की चुदाई पठन समय: 12 मिनट पढ़ा गया: 378 बार

शादी वाले दिन के मेरे कारनामे- 3

गरिमा सेक्सी

16 Feb 2021 को प्रकाशित

शादी वाले दिन के मेरे कारनामे- 3
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बेटी बाप सेक्स कहानी में मैं दुल्हन बनी बैठी थी अपनी बरात के इन्तजार में कि मेरे पापा मेरे रूम में आये मुझे चोदने की जिद करने लगे. मेरी सहेली मेरे साथ थी.

कहानी के पिछले भागदुल्हन बन कर भाई का लंड चूसामें आपने पढ़ा कि ब्यूटी पारलर से तैयार होकर आने के बाद मेरा भाई मुझे चोदना चाहता था. पर मैंने उसका लंड चूस कर उसका वीर्य पी लिया. उसने मेरी चूत चाट ली.

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अब आगे बेटी बाप सेक्स कहानी:

उसके बाद सोनू कमरे से चला गया और स्वाति ने दोबारा दरवाजा अंदर से लॉक कर लिया।

दरवाजा बंद कर मैं अपने कपड़े ठीक करने लगी.वहीं स्वाति भी कपड़े बदलने की तैयारी करने लगी।

तभी मेरे मोबाइल की घंटी बजने लगी.देखा तो मेरे पापा की कॉल आ रही थी।

मैंने कॉल रिसीव किया तो पापा बोले- कहाँ हो बेटा?तो मैंने कहा- होटल में ऊपर अपने रूम में!

पापा- तुम्हारी मम्मी कहाँ हैं? तुम्हारे साथ कौन है रूम में?मैंने कहा- मम्मी तो नीचे ही हैं मेहमानों के साथ … मेरे साथ रूम में स्वाति है।पापा बोले- ओके, मैं आ रहा हूँ पांच मिनट में … कुछ काम है।

फोन रखने के बाद मैंने स्वाति से कहा- पापा आ रहे हैं किसी काम से!स्वाति आँख मारते हुए बोली- वही काम तो नहीं है जो सोनू अभी करके गया है।

इसपर मैंने उसके गाल पर चिकोटी काटते हुए मुस्कुरा कर कहा- तो दिक्कत क्या है? तू है तो चिंता की कोई बात ही नहीं … मुझे पता है तू सब संभाल लेगी। जैसे अभी संभाला था।

फिर मैंने स्वाति को पापा की ख्वाहिश बता दी कि वे भी मुझे दुल्हन के कपड़ों में चोदना चाहते हैं।

स्वाति बोली- सच में अंकल इसीलिए आ रहे हैं क्या?मैंने कहा- मुझे क्या पता … बस बोला है कि पाँच मिनट में आ रहा हूँ और पूछ रहे थे कि साथ में कौन है!

इस पर स्वाति कमेंट कर मुस्कुराती हुई बोली- वैसे ये तो सच है कि अंकल तुझे इस रूप में देखेंगे तो कितना भी मना कर ले वे बिना चोदे मानेंगे नहीं!

मैं मुस्कुराती हुई बोली- अरे ये भी तो हो सकता है किसी और काम से आ रहे हों।स्वाति बोली- देख अगर तू तैयार हो तो … अंकल से बस इतना बोल देना कि जो करना है वे जल्दी से कर लें।

मैंने कहा- लेकिन किसी को पता चला कि पापा इतनी देर तक मेरे कमरे में क्या कर रहे हैं वह भी दरवाजा अंदर से बंद करके तो?स्वाति बोली- वह तू मेरे पर छोड़ दे … वैसे भी सब नीचे नाश्ते-पानी और डांस में बिजी हैं; कोई ऊपर नहीं आने वाला। बस एक सोनू का डर था तो उसका काम हो गया है वह अब नहीं आने वाला।

अभी हम ये बातें कर ही रहे थे कि दरवाजे पर नॉक हुई।हम समझ गई कि पापा हैं।

स्वाति ने तेजी से जाकर दरवाजा खोला।देखा पापा खड़े थे।

पापा के अंदर आते ही स्वाति ने दरवाजा बंद कर अंदर से लॉक कर प्रिया।

मैं बेड के ऊपर बैठी थी।पापा सीधा मेरे पास आये और मुझे देखते ही बोले- अरे वाह बेटा, तुम तो बहुत सुन्दर लग रही हो।

मैं पापा की बात सुनकर मुस्कुरा दी।तब तक स्वाति भी पास आ गयी।

पापा बेड के पास रखे चेयर पर बैठ गये।स्वाति भी बेड पर आकर बैठ गयी।

अभी पापा हम लोग कुछ बात करते तभी पापा की बेड पर पड़े पैंटी पर चली गयी।

पैंटी देखकर बोले- ये किसकी पैंटी है?

दरअसल मैंने सोनू के जाने के बाद पर्स से पैंटी पहनने के लिए निकाली थी लेकिन बातचीत में पैंटी पहनना भूल गयी थी और पैंटी की तरफ ध्यान भी नहीं गया कि वह बेड पर ही पड़ी है।

पापा के पैंटी देखते ही तुरंत सवाल कर देने पर मेरे मुँह से झटके से निकल गया- मेरी है।फिर सफाई देती हुई मैं बोली- दरअसल थोड़ी टाइट हो रही थी तो बस अभी निकाल प्रिया था और दूसरी पहनने जा रही थी।

स्वाति समझ गयी थी कि पैंटी वाले सवाल से मैं थोड़ा घबरा गयी हूँ।तो वह मामले को संभालती हुई हंसकर बोली- अरे नहीं अंकल, झूठ बोल रही है। पैंटी इसे टाइट नहीं हो रही थी. ये तो जब आपने फोन करके बताया कि आप आ रहे हैं तो इसने पहले ही पैंटी निकाल दी थी।

फिर मेरी और देखकर आँख मारती हुई बोली- ताकि अगर आप अपनी कोई तमन्ना पूरी करना चाहें तो ज्यादा टाइम न लगे।

मैं स्वाति को हंसकर थप्पड़ मारती हुई बोली- बहुत बद्तमीज हो गयी है ये लड़की। कुछ भी बकवास करने लगती है।

ये सब सुनकर पापा का चेहरा खिल गया था और उन्हें मजा आ भी रहा था।वे मुझसे मुस्कुराते हुए बोले- सच में तुमने पैंटी नहीं पहनी है क्या अभी?

स्वाति हँसती हुई बोली- अरे अंकल, सच में इसने पैंटी नहीं पहनी है। विश्वास नहीं हो रहा तो लहंगा ऊपर करके आप खुद ही देख लीजिए।कहकर स्वाति हंसने लगी।

मैंने उसे फिर थप्पड़ मारते हुइ कहा- चुप कर …फिर मैं पापा से बोली- बोला तो पापा टाइट हो रही थी इसलिए अभी निकाली है।

पापा हंसते हुए बोले- अरे मार क्यों रही हो उसे? ठीक बोल रही है वो … जब तक खुद न देख लूं तो कैसे विश्वास कर लूँ?

इस पर स्वाति बोली- हाँ और नहीं तो क्या … गरिमा दिखा दो, नहीं तो खड़ी हो जाओ अंकल खुद ही देख लेंगे।फिर वह पापा से बोली- क्यों अंकल? सही है कि नहीं?पापा मेरी तरफ देखते हुए मुस्कुराकर बोले- हाँ बिल्कुल!

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तभी पापा के मोबाइल की घंटी बजने लगी।पापा ने पहली बार तो नहीं उठाया.फिर जब दो बार कॉल आयी तो पापा ने फोन उठाया।

उधर से किसी ने कुछ कहा तो पापा बोले- हाँ-हाँ अभी आता हूँ 10-15 मिनट में! थोड़ा ज़रूरी काम से आया था अभी!फिर फोन काटने के बाद पापा ने मोबाइल को फ्लाइट मोड पर डाल प्रिया।

फोन रखकर पापा दोबारा हम दोनों की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए बोले- तो मैं खुद देखूं कि तुमने पैंटी पहनी है या नहीं … या तुम दिखाओगी?मैंने थोड़ा नखरा दिखाते हुए कहा- क्या पापा आप भी …

अभी और कुछ बोलती इससे पहले स्वाति हँसती हुई बोली- अरे अंकल, आप ही देख लीजिए … ये दुल्हन क्या बन गयी है इसके तो नखरे बढ़ गये हैं।मैंने स्वाति को फिर थप्पड़ मारती हुई कहा- तू चुप रहती है कि नहीं?

फिर पापा को तो जैसे मौका चाहिए था, वे बोले- स्वाति ठीक कह रही है. लगता है मुझे खुद ही देखना पड़ेगा। वैसे भी मुझे नीचे जल्दी जाना है. बहुत काम भी है और सारे गेस्ट मुझे ढूँढ रहे होंगे।तब मैंने कहा- ठीक है फिर आप खुद ही देख लीजिए।

मैं समझ गयी कि सोनू तो रिक्वेस्ट करने पर मान भी गया था लेकिन पापा मेरी चुदाई करने का मन बनाकर आये हैं इसलिए ये बिना बेटी बाप सेक्स किये मानेंगे नहीं।वहीं पापा को भी अब हमारी बातों में मजा आ रहा था।

सच कहूँ तो सोनू से चूत चटवाने और फिर उसका लण्ड चूसने के बाद से मेरी चूत में फिर से थोड़ी कुलबुली मचने लगी थी।

स्वाति बेड पर मेरे बगल बैठी थी और पापा मेरे सामने कुर्सी पर बैठ हुए थे।

मेरे खुद ही देख लेने की बात पर पापा ‘ठीक है’ बोले और अपनी कुर्सी को आगे खिसका कर एकदम मेरे पास आ गये।

मैं बेड के किनारे पैर नीचे करके बैठी थी।पापा नीचे झुक कर मेरे लहंगे को उठाने लगे।मेरे पैरे बेड से नीचे लटके होने की वजह से लहंगा घुटनों के थोड़ा ऊपर तक आकर रुक गया।

पापा मेरी तरफ देखने लगे।

स्वाति बोली- तू खड़ी हो जा तो फिर अंकल आराम से देख लेंगे।पापा तुरंत बोले- हाँ ये ठीक रहेगा।

मैं हंसती हुई बोली- हाँ, आपको तो बस जल्दी पड़ी है देखने की। ऐसे लग रहा है जैसे पहली बार देख रहे हैं।पापा बोले- दुल्हन के जोड़े में यानि लहंगा और चोली में तो पहली बार ही देख रहा हूँ ना तुम्हें! कुछ याद है? मैंने अपने मन की एक इच्छा तुझसे बतायी थी। आज वह पूरी कर दो।

जैसा स्टोरी में मैंने पहले ही आपको बताया था कि शादी तय हो जाने के बाद ही पापा ने कई बार मुझसे ये कह चुके कि वह शादी वाले दिन दुल्हन के कपड़ों यानि कि लहंगा-चोली में मेरे साथ सेक्स करना चाहते हैं।

स्वाति हंसती हुई बोली- अरे अंकल, इसीलिए तो आपके आने से पहले ही इसने पैंटी उतार दी थी ताकि आप अपनी इच्छा आराम से पूरी कर लें।जिस पर हम तीनों हंस दिये।

फिर पापा मुझसे बोले- खड़ी हो जाओ बेटा!

मैं बेड से नीचे उतर कर पापा के सामने खड़ी हो गयी।

पापा कुर्सी पर बैठे-बैठे ही नीचे झुके और मेरे लहंगे को पकड़कर ऊपर उठाने लगे और फिर कमर तक पूरा ऊपर उठा प्रिया।मेरी नंगी चूत पापा के सामने थी।

कुछ देर तक तो लंहगे के नीचे से मेरी चूत को एकटक देखने के बाद पापा मुस्कुराते हुए बोले- वाह, बाल साफ कर एकदम सुहागरात की तैयारी कर ली है तुमने!

और फिर लंहगे को एक हाथ से पकड़ा और दूसरे हाथ को मेरी चूत के ऊपर रख कर चूत सहलाने लगे।करीब 20 सेकेण्ड तक इसी तरह चूत को सहलाने के बाद पापा मुझसे बोले- बेड पर लेटो, थोड़ा अच्छे से देख लूँ।

मैंने कहा- पापा, लेटूंगी तो पूरे कपड़े अस्त-व्यस्त हो जाएंगे। फिर से पार्लर जाना पड़ेगा. इसलिए जो करना है खड़े होकर ही कर लीजिए।

इस पर पापा बोले- कोई बात नहीं बैठने में तो कोई दिक्कत नहीं।मैंने कहा- नहीं, बैठने में कोई दिक्कत नहीं।यह कहकर मैं बेड पर बैठने लगी।

जिस पर पापा कुर्सी से खड़े होते हुए बोले- बेड पर नहीं, इस पर बैठो।फिर मुझे कुर्सी पर बैठने का इशारा किया।

मैं समझ नहीं पायी कि पापा खुद खड़े होकर मुझसे कुर्सी पर बैठने को क्यों कह रहे हैं।फिर मैं कुर्सी पर बैठ गयी।

पापा मेरे सामने आकर सीधा नीचे घुटनों के बल बैठ गये और मुझसे बोले- अब अपने पैरों को कुर्सी के हैंडल पर रख लो।

मैं समझ गयी कि पापा चूत चाटना चाहते हैं।फिर मैंने अपने लहंगे को हाथ से पकड़ा और पैर को कुर्सी के हैंडल पर रखने की कोशिश करने लगी।

लेकिन मैं रख नहीं पा रही थी।मैंने कहा- आप ही कर लीजिए, मुझसे नहीं हो रहा।

तब पापा ने जमीन पर बैठे-बैठे ही मेरे लहंगे को नीचे से पकड़ कर मेरी जांघों तक कर प्रिया.इसके बाद उन्होंने बारी-बारी से मेरे दोनों पैरों को उठाकर कुर्सी के दोनों हैंडल पर अगल-बगल फैला कर रख प्रिया।

मेरे दोनों पैर अगल-बगल कुर्सी के हैंडल पर होने की वजह से लंहगा पूरा खिसक कर मेरे पेट पर आ गया था जिससे मेरी फैली हुई जांघों के बीच नंगी चूत ठीक पापा के आँखों के सामने थी।पापा घुटनों के बल नीचे मेरे सामने बैठे थे।

अपने हाथों से पापा मेरी दोनों चिकनी जांघों को चूत के पास सहलाने लगे और फिर अपने मुंह को मेरी दोनों जांघों के बीच लाकर मेरी चूत पर किस किया।मेरे शरीर में जैसे करंट दौड़ गया।

अगले भाग की प्रतीक्षा करें और बेटी बाप सेक्स कहानी पर आप अपने विचार मुझ तक भेजें.

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शादी वाले दिन के मेरे कारनामे

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