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भाभी की चुदाई • पठन समय: 9 मिनट • पढ़ा गया: 849 बार

ऐसा प्यार फिर कहाँ-2

Antarvasna

02 Jul 2021 को प्रकाशित

ऐसा प्यार फिर कहाँ-2
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लेखिका : रीता शर्मा

हम दोनों ने अब शर्म छोड़ सी दी थी। वो मुझसे रोज अपनी पीठ दबवाती, शायद मजे लेने के लिये ! मैं भी उसे सहला सहला कर मस्त कर देता था। फिर वो भी मेरी पीठ दबा देती थी, मेरी टांगें, जांघें मस्त हो कर दबाती थी, फिर मेरे लण्ड के कड़कपन को जी कड़ा करके जी भर कर निहारती थी।

यह सिलसिला बहुत दिनों तक चलता रहा। हम दोनों इस कार्य में वासना में लोटपोट हो जाते थे। हाँ, एक दो बार मैंने भाभी के मम्मे भी दबा दिये थे, उसे बहुत ही मजा आया था। वो भी जोश में आकर मेरा लण्ड दो तीन बार दबा चुकी थी। एक बार यह दूरी भी मिट गई।

एक दिन मालिश के दौरान भाभी ने कहा- नीरू, एक बात कहूँ?

मैंने प्रश्नवाचक निगाहों से उसे देखा। उसकी नजरें झुक गई।

आज अपना पजामा उतार दो … मुझे देखना है ! कहते कहते भाभी हिचकिचा सी गई।

तो मैं अपनी आंखे बंद कर लेता हूँ, मेरा पजामा नीचे खींच लो !

नहीं, आंखे बंद नहीं करो… पर मुझे मत देखना !

भाभी ने धीरे से मेरा पजामा खींच कर नीचे खिसका प्रिया। मैं उसके सुन्दर से चेहरे को एकटक देखता रहा। उसके चेहरे पर आते जाते भाव देखने लगा। उसकी आंखें नशीली हो उठी थी। लाल डोरे उभर आये थे।

मत देखो ना, शरम आती है !

कब तक शरमाओगी भाभी … जी खोल कर करो जो करना है।

वो बिस्तर के नीचे मेरे पास आ गई और मेरी आंखों पर अपना हाथ रख प्रिया। मेरे लण्ड की लाल टोपी को उसने उघाड़ लिया और उस पर झुक गई। मेरा लण्ड उसने मुख में भर लिया। मेरे मुख से एक सिसकी निकल पड़ी। भाभी ने मुझे मुड़ कर देखा- भैया, कैसा लगा … और करूँ क्या ?

भाभी पूरा अन्दर तक घुसेड़ ले, बहुत मजा आ रहा है ! मैने भाभी के चूतड़ों को पकड़ कर अपनी ओर खींचा। उसका जिस्म मेरे और करीब आ गया। वो मेरे ऊपर चढ़ गई … उसने अपना पेटीकोट ऊपर खींच लिया और अपनी नंगी चूत मेरे मुख पर जमा दी। उसकी गीली चूत से मेरा मुख भी गीला हो गया था। एक तेज वीर्य युक्त सुगंध मुझे आई। यह जवानी से लदी स्त्री के यौनस्त्राव की सुगन्ध थी।

मेरी जीभ लपलपा उठी। उसकी प्यारी सी खुली हुई चूत को मैं चाटने लगा, भाभी सिसकने लगी। भाभी अपने हाथ से अपने पेटीकोट को मेरे चेहरे पर डाल कर अपना नंगापन छुपाने लगी। तभी उसका कड़ा दाना मेरी जीभ से टकरा गया और उसके मुख से जोर से आह निकल गई। वो अपने पांव समेट कर ऊंची हो गई। उसकी प्यारी सी रसीली चूत मुझे अब साफ़ दिख रही थी। उसका बड़ा सा दाना साफ़ चूत के ऊपर नजर आ रहा था। उसकी गाण्ड के बीच उसका मुस्कराता हुया छोटा सा भूरा सा छेद अन्दर बाहर सिकुड़ता हुआ नजर आ रहा था।

मैंने अपनी अंगुली थूक से गीली करके उसके छेद में दबा दी और उसमें गुदगुदी करता हुआ उसके आस पास अंगुली घुमाने लगा। उसने अपनी गाण्ड का छेद ढीला कर प्रिया और मैंने हौले से अपनी एक अंगुली छेद में घुसा दी। साथ ही में मैंने उसकी चूत फिर से अपने मुख से चिपका ली।

उसने भी यही किया, लण्ड चूसते चूसते मेरी गाण्ड में अंगुली घुसा कर घुमाने लगी। हम दोनों उत्तेजना के सागर मे गोते लगा रहे थे। काफ़ी देर तक यह खेल खेलने के पश्चात भाभी उठ गई। उसकी आंखें वासना से गुलाबी हो गई थी। मेरी नाक में, मुख मण्डल पर उसकी चूत की चिकनाई फ़ैली हुई थी। वो घूम कर मेरी ओर हो गई और मेरे लण्ड पर बैठ गई।

भाभी, कैसा मजा आ रहा है…?

भाभी ने मेरे होठों पर अपनी अंगुली रख दी। फिर एक हाथ से मेरा लण्ड पकड़ा और उसे हिलाया। तन्नाया हुआ लण्ड एक मस्त डाली की तरह झूल गया। फिर उसने लण्ड का लाल टोपा अपनी चूत की दरार पर रख प्रिया। और अपनी चूचियों को मेरी नजरों के आगे झुला प्रिया। वो मुझ पर झुकी जा रही थी। मैंने अनायास ही उसके दोनों स्तन हाथों में थाम लिये और उसके कड़े चुचूक मसल डाले। मेरा लण्ड उसकी चूत मे फ़िसलता हुआ अन्दर समाने लगा। एक तेज मीठी सी गुदगुदी लण्ड में उठने लगी। मेरे शरीर का रोम रोम पिघलने लगा।

मेरी मांऽऽऽऽ ! आह री … मर गई मैं तो… !!!

भाभीऽऽऽऽ … उफ़्फ़्फ़ ! जोर से घुसेड़ो … ! मेरे मुख से बरबस निकल पड़ा।

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Jab Main Bani Love Guru – Episode 3

पूरा लण्ड घुसेड़ने के बाद वो मुझ पर अपना भार डाल कर लेट गई और धीरे-धीरे चूत घिसने लगी। मैं असीम आनन्द में खो चला !!! भाभी भी मदमस्त हो कर आंखें बन्द किये अपनी चूत ऊपर नीचे घिसने लगी थी। मेरी कमर भी अपने आप ही ताल मिलाने लग गई थी। वो कभी ऊपर उठ कर अपने स्तन को देखती और मुझे उसे और जोर से दबाने को कहती और फिर मस्ती में चीख सी उठती थी।

अब उसकी रफ़्तार बढ़ने लगी थी। उसके केश मेरे चेहरे पर गिरे जा रहे थे। उसके पतले अधर पत्तियों जैसे कांप रहे थे। उसका यह वासनामय रूप किसी काम की देवी की तरह लग रहा था। तभी उसके मुख से एक चीख सी निकली और वो झड़ने लगी- हाय मेरे नीरू, मैं तो गई… मेरा तो निकला…

उसकी चूत में लहरें चलने लगी। तभी मुझे भी लगा कि मेरा माल निकलने को है, मैंने उसे नीचे की ओर खींच कर दबा लिया। वो कराह उठी और मेरा रस उसकी चूत में भरने लगा। हम दोनों कुछ देर तक झड़ने के बाद भी यूँ ही पड़े रहे, फिर भाभी मेरे ऊपर से हट गई। उसका पेटीकोट कमर से नीचे परदे की भांति नीचे गिर कर उसे ढक लिया। उसने जल्दी से बटन लगा लिये।

चलो पजामा ऊपर खींच लो…

भाभी बहुत मजा आया … एक बार और करें …?

ओय होये … अब लगा ना चस्का, आज तेरे भैया की नाईट ड्यूटी भी है, रात को देखेंगे ! भाभी ने दूसरे दौर की सहमति दे दी, पर रात को।

मैं तैयार हो कर कॉलेज चला गया। सारे दिन गुमसुम सा रहा, चुदाई की मीठी-मीठी यादें पीछा नहीं छोड़ रही थी। बड़ी मुश्किल से शाम आई तो रात आने का नाम ही नहीं ले रही थी।

घर के सभी लोग सो चुके थे। भाभी ने अपना कमरा अन्दर से बन्द करके अपनी चौक की खिड़की खोली और बाहर कूद आई ताकि लगे कि कमरा तो अन्दर से बंद है।

और मेरे कमरे में आते ही दरवाजा ठीक से बंद कर प्रिया। लाईट बन्द करके वो मेरे बिस्तर में मेरे साथ लेट गई। भाभी धीरे से फ़ुसफ़ुसाई- नीरू, आज तबला बजा दे…

मेरा लण्ड तो पहले ही बेताब हो रहा था, लग रहा था कि नई नई शादी हुई हो जैसे !!!

तबला क्या … ? बोलो ना… !

वो हिचकचाते हुये बोली- श्… श्… वो, मेरा मतलब है गाण्ड बजानी है !

वो कैसे …

म बोलते बहुत हो … गाण्ड नहीं मारी है क्या ? वो झुंझला कर बोली।

मैंने चुप्पी साध ली और पेटीकोट ऊपर कर प्रिया। मैंने भी अपना पजामा उतार लिया और अपना लण्ड उसकी प्यारी सी दरार में घुसा प्रिया। उसने अपनी गाण्ड में चिकनाई लगा रखी थी। सो देखते ही देखते लण्ड उसके टाईट छेद में घुस पड़ा।

आनन्द भरी सिसकियाँ एक बार फिर से गूंज उठी। उसकी गाण्ड चुदने लगी। मेरे लिये यह सब एक आनन्ददायक घटना थी… अब हम रोज ही अपनी वासना शांत कर लेते थे। भाभी का स्नेह मुझ पर दिनों दिन बढ़ता ही जा रहा था। सच पूछो तो मैं भी रीता भाभी के बिना नहीं रह पाता था।

मेरे देवर ने मुझे अपनी कहानी लिखने को कहा तो मैंने उसी को अपनी कलम दे दी।

बीते दिन एक सपने की तरह लगते हैं ! हैं ना … ? कोई ऐसा प्यारा सा इन्सान मिल जाये जो किसी की सभी बाते गुप्त रखते हुये जिन्दगी को रंगीन बना दे और काश ऐसे दिन कभी खत्म ना हो …

मैं आसमान में सितारों के साथ विचरण करती रहूँ, देवर जैसा कोई है क्या …

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Uske agle kuchh weeks achchhe se gaye. Suman ab mere sikhaye anusaar aage badhkar us ladke ke saath kabhi coffee, to kabhi lunch ya movie date par jaati.

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