होम पर वापस जाएं
भाभी की चुदाई • पठन समय: 9 मिनट • पढ़ा गया: 906 बार

हिंदी सेक्सी स्टोरी: तीन भाभियों की किस्मत मेरे हाथ-3

समीर शुक्ला

29 Jan 2025 को प्रकाशित

हिंदी सेक्सी स्टोरी: तीन भाभियों की किस्मत मेरे हाथ-3
कहानी सुनें

ऑडियो प्लेयर (Play Audio)

स्वर: लोड हो रहा है...

0:00
0:00

बसंती के जाने के बाद तीन दिन तक कुछ नहीं हुआ। मैं हर रोज़ उसकी चूत याद करके मुठ मारता रहा। चौथे दिन मैं अपने कमरे में पढ़ रहा था। लेकिन एक हाथ में लण्ड पकड़े हुए! और तभी साधना भाभी वहाँ आ पहुंची। झटपट मैंने लण्ड छोड़ कपड़े ठीक किए और सीधा बैठ गया।

वो सब कुछ समझती थी इसलिए मुस्कुराती हुई बोली- कैसी चल रही है पढ़ाई देवरजी? मैं कुछ मदद कर सकती हूँ?भाभी, सब ठीक है! मैंने कहा।

आँखों में शरारत भर कर भाभी बोली- पढ़ते समय हाथ में क्या पकड़ रखा था जो मेरे आते ही तुमने छोड़ प्रिया?नहीं, कुछ नहीं, ये तो! ये! मैं आगे बोल ना सका।तो मेरा लण्ड था, यही ना? उसने पूछा।

वैसे भी साधना मुझे अच्छी लगती थी और अब उसके मुँह से लण्ड सुन कर मैं उत्तेजित होने लगा पर शर्म से उनसे नज़र नहीं मिला सका, कुछ बोला नहीं।

उसने धीरे से कहा- कोई बात नहीं! मैं समझती हूँ! लेकिन यह बता कि बसंती को चोदना कैसा रहा? पसंद आई उसकी काली चूत? याद आती होगी ना?

सुन कर मेरे होश उड़ गए कि साधना को कैसे पता चला होगा? बसंती ने बता प्रिया होगा?

मैंने इन्कार करते हुए कहा- क्या बात करती हो? मैंने ऐसा वैसा कुछ नहीं किया है।अच्छा? वो मुस्कराती हुई बोली- क्या वो यहाँ भजन करने आती थी?वो यहाँ आई ही नहीं! मैंने डरते डरते कहा।

साधना मुस्कुराती रही।तो यह बताओ कि उसने सूखे वीर्य से अकड़ी हुई निक्कर दिखा कर पूछा- यह निक्कर किसकी है, तेरे पलंग से मिली है?

मैं ज़रा जोश में आ गया और बोला- ऐसा हो ही नहीं सकता, उसने कभी निक्कर पहनी ही नहीं!मैं रंगे हाथ पकड़ा गया।

मैंने कहा- भाभी, क्या बात है? मैंने कुछ ग़लत किया है?उसने कहा- वो तो तेरे भैया फ़ैसला करेंगे।

भैया का नाम आते ही मैं डर गया। मैंने साधना को गिड़गिड़ा कर विनती की कि भैया को यह बात ना बताएँ।असली खेल अब शुरू हुआ।मुझे क्या पता कि इसके पीछे साधना भाभी का हाथ था!तब उसने शर्त रखी और सारा भेद खोल प्रिया।

साधना ने बताया कि भैया के वीर्य में शुक्राणु नहीं थे, भैया इससे अनजान थे। भैया तीनों भाभियों को अच्छी तरह चोदते थे और हर वक़्त ढेर सारा वीर्य भी छोड़ जाते थे। लेकिन शुक्राणु बिना बच्चा हो नहीं सकता। साधना चाहती थी कि भैया चौथी शादी ना करें। वो किसी भी तरह बच्चा पैदा करने को तुली थी। इसके वास्ते दूर जाने की ज़रूर कहाँ थी, मैं जो मौज़ूद था!

साधना ने तय किया कि वो मुझसे चुदवाएगी और माँ बनेगी।अब सवाल उठा मेरी मंज़ूरी का।मैं कहीं ना बोल दूं तो? भैया को बता दूं तो? मुझे इसी लिए बसंती के जाल में फंसाया गया था।

सारा बखान सुन कर मैंने हंस कर कहा- भाभी, तुझे इतना कष्ट लेने की क्या ज़रूरत थी? तूने कहीं भी, कभी भी कहा होता तो मैं तुझे चोदने से इनकार ना करता, तू चीज़ ऐसी मस्त है।

उसका चहेरा लाल हो गया, वो बोली- रहने भी दो! झूठे कहीं के। आए बड़े चोदने वाले। चोदने के वास्ते लण्ड चाहिए और बसंती तो कहती थी कि अभी तो तुम्हारी नुन्नी है, उसको चूत का रास्ता मालूम नहीं था। सच्ची बात ना?’

मैंने कहा- दिखा दूं अभी कि नुन्नी है या लण्ड?

यह भी पढ़ें (Recommended)

Padosan Bhabhi Ek Dam Nangi

ना बाबा, ना। अभी नहीं। मुझे सब सावधानी से करना होगा। अब तू चुप रहना! मैं ही मौक़ा मिलने पर आ जाऊँगी और हम तय करेंगे कि तेरी नुन्नी है या लण्ड!

दो दिन बाद भैया दूसरे गाँव गए तीन दिन के लिए। उनके जाने के बाद दोपहर को वो मेरे कमरे में चली आई। मैं कुछ पूछूँ इससे पहले वो बोली- कल रात तुम्हारे भैया ने मुझे तीन बार चोदा है। सो आज मैं तुम से गर्भवती हो जाऊँ तो किसी को शक नहीं पड़ेगा और दिन में आने की वजह भी यही है कि कोई शक ना करे।

वो मुझसे चिपक गई और मुँह से मुँह लगा कर चूमने लगी। मैंने उसकी पतली कमर पर हाथ रख दिए, मुँह खोल कर हमने जीभ लड़ाई। मेरी जीभ होठों बीच लेकर वो चूसने लगी। मेरे हाथ सरकते हुए उसके नितंब पर पहुँचे। भारी नितंब को सहलाते सहलाते में उसकी साड़ी और घाघरी ऊपर उठाने लगा। एक हाथ से वो मेरा लण्ड सहलाती रही। कुछ देर में मेरे हाथ उसके नंगे नितंब पर फिसलने लगे तो पाजामा का नाड़ा खोल उसने नंगा लण्ड मुट्ठी में ले लिया।

मैं उसको पलंग पर ले गया और गोद में बिठा लिया। लण्ड मुट्ठी में पकड़े हुए उसने चूमना चालू रखा। मैंने ब्लाऊज़ के हुक खोले और ब्रा ऊपर से स्तन दबाए। लण्ड छोड़ उसने अपने आप ब्रा का हुक खोल कर ब्रा उतार फेंकी। उसके नंगे स्तन मेरी हथेलियों में समा गए। शंकु के आकार के साधना के स्तन चौदह साल की लड़की के स्तन जैसे छोटे और कड़े थे। एरेयोला भी छोटा सा था जिसके बीच नोकदार चुचूक था।

मैंने चुचूक को चुटकी में लिया तो साधना बोल उठी- ज़रा होले से! मेरे चुचूक और भग बहुत नाजुक हैं, उंगली का स्पर्श सहन नहीं कर सकती।

उसके बाद मैंने चुचूक मुँह में लिया और चूसने लगा।

मैं आपको बता दूँ कि साधना भाभी कैसी थी। पाँच फ़ीट पाँच इंच की लंबाई के साथ वज़न था साठ किलो, बदन पतला और गोरा था, चहेरा लम्बा-गोल थोड़ा सा नरगिस जैसा, आँखें बड़ी बड़ी और काली, बाल काले, रेशमी और लंबे, सीने पर छोटे-छोटे दो स्तन जिसे वो हमेशा ब्रा से ढके रखती थी, पेट बिल्कुल सपाट था, हाथ पाँव सुडौल थे, नितंब गोल और भारी थे, कमर पतली थी। वो जब हंसती थी तब गालों में गड्ढे पड़ते थे।

मैंने स्तन पकड़े तो उसने लण्ड थाम लिया और बोली- देवर जी, तुम तो अपने भैया जैसे बड़े हो गए हो। वाकई यह तेरी नुन्नी नहीं बल्कि लण्ड है और वो भी कितना तगड़ा! हाय राम, अब ना तड़पाओ, जल्दी करो।

मैंने उसे लेटा प्रिया। ख़ुद उसने घाघरा ऊपर उठाया, जांघें चौड़ी की और पाँव उठा लिए। मैं उसकी भोंस देख कर दंग रह गया। स्तन के माफ़िक साधना की भोंस भी चौदह साल की लड़की की भोंस जितनी छोटी थी। फ़र्क इतना था कि साधना की भोंस पर काली झांटें थी और भग लंबी और मोटी थी। भैया का लण्ड वो कैसे ले पाती थी, यह मेरी समझ में आ ना सका।

मैं उसकी जांघों के बीच आ गया। उसने अपने हाथों से भोंस के होंठ चौड़े करके पकड़ लिए तो मैंने लण्ड पकड़ कर भोंस पर रग़ड़ा। उसके नितंब हिलने लगे। अब की बार मुझे पता था कि क्या करना है। मैंने लण्ड का अग्र भाग चूत के मुँह में घुसाया और लण्ड हाथ से छोड़ प्रिया। चूत ने लण्ड पकड़े रखा। हाथों के बल आगे झुक कर मैंने मेरे कूल्हों से ऐसा धक्का लगाया कि सारा लण्ड चूत में उतर गया। जांघों से जांघें टकराई, लण्ड ठुमक-ठुमक करने लगा और चूत में फटक-फटक होने लगा।

मैं काफ़ी उत्तेजित था इसलिए रुक नहीं सका। पूरा लण्ड खींच कर ज़ोरदार धक्के से मैंने साधना को चोदना शुरू किया। अपने चूतड़ उठा-उठा कर वो सहयोग देने लगी, चूत में से और लण्ड में से चिकना पानी बहने लगा। उसके मुँह से निकलती आह-आह की आवाज़ और चूत की पच्च पच्च सी आवाज़ से कमरा भर गया।

पूरे बीस मिनट तक मैंने साधना भाभी की चूत मारी। इस दरमियान वो दो बार झड़ी। आख़िर उसने चूत ऐसी सिकौडी कि अंदर-बाहर आते-जाते लण्ड की टोपी उतर-चढ़ करने लगी, मानो कि चूत मुठ मार रही हो।

यह हरकत मैं बरदाश्त नहीं कर सका, मैं ज़ोर से झड़ गया। झड़ते वक़्त मैंने लण्ड को चूत की गहराई में ज़ोर से दबा रखा था और टोपी इतना ज़ोर से खिंच गई थी कि दो दिन तक लौड़े में दर्द रहा। वीर्य को भाभी की योनि में छोड़ कर मैंने लण्ड निकाला, हालांकि वो अभी भी तना हुआ था। साधना टाँगें उठाए लेटी रही, कोई दस मिनट तक उसने चूत से वीर्य निकलने ना प्रिया।

भाभी की चुदाई की शेष हिंदी सेक्सी स्टोरी अगले भाग में!support@mohakkisse.com

कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया दें (React to Story)

श्रृंखला

कहानी श्रृंखला (STORY SERIES)

हिंदी सेक्सी स्टोरी: तीन भाभियों की किस्मत मेरे हाथ

कुल भाग: 4
यह एक बहु-भाग कहानी है। अपनी पसंदीदा कड़ी पर जाने के लिए ऊपर क्लिक करें।

इसी श्रेणी से अन्य कहानियाँ

Bhabhi Ke Sang Jungle me Mangal – Part 3
भाभी की चुदाई

Bhabhi Ke Sang Jungle me Mangal – Part 3

Hello guys, I am Ranvir from Kolkata. Mere pichle kahani ka part continue karunga mai yaha.

8 मिनट 482
Padosan Bhabhi Ek Dam Nangi
भाभी की चुदाई

Padosan Bhabhi Ek Dam Nangi

Dosto main Vikram aaj fir se aapke liye apni ek aur sachi kahani le kar aaya hoon. Mujhe umeed hai aap meri ye kahani padh kar mujhe pehle ki tarah apna pyar denge. Ye kahani ek dam schi hai toh chaliye ab main bina time waste kiye apni kahani shu...

14 मिनट 432
Train Me Mili Bhabhi Se Bana Rista
भाभी की चुदाई

Train Me Mili Bhabhi Se Bana Rista

Hello, I am rohit, ye meri pehli hindi sex story ki kaise naa chahte huye bhi anjaan bhabhi se huyi gahri dosti, story per aata hun, main hanumangarh rajastha ka rehne wala hun jaipur main job karta hun as a dj.

9 मिनट 680

पाठकों की राय

0 टिप्पणियां
इस कहानी पर अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!
🔒 सुरक्षा कारणों से कॉपी करने की अनुमति नहीं है।