प्रेषक : राज कार्तिक
अंजली भाभी का अपने प्यारे प्यारे दोस्तों को सप्रेम चुम्बन… कितना प्यार करते हैं आप सब मुझे…
आप सबकी मेल पढ़ पढ़ कर मैं तो गदगद हो जाती हूँ। बहुत से दोस्त अपने मोटे मोटे लण्ड की फोटो मुझे भेजते हैं जिन्हें देखते ही चूत में गुदगुदी होने लगती हैं। आप सबकी मेल पढ़ कर चुदवाने के लिए बैचैन हो जाती हूँ।
आज जो अपनी चुदाई का किस्सा आप सब को बता रही हूँ वो अभी कुछ दिन पहले ही हुआ है।
मेरी कहानीगर्मी का ईलाजआई थी तब। कहानी आने के बाद बहुत से मेल आये। मेल पढ़ पढ़ कर चुदास से भर गई थी मैं ! और पतिदेव हमेशा की तरह टूर पर गए हुए थे। मैं चुदवाने को मरी जा रही थी पर कोई भी मनपसंद लण्ड नजर नहीं आ रहा था जिसे अपनी चूत में ले सकूँ।
आखिर मन बनाया कि कुछ दिन के लिए अपने मायके जोधपुर जा आती हूँ। पतिदेव को फोन करके बता प्रिया कि मैं जोधपुर जा रही हूँ और फिर बस पकड़ कर जोधपुर के लिए रवाना हो गई। बस की भीड़भाड़ में लोगों के स्पर्श का आनन्द लेती हुई जोधपुर पहुँच गई।
घर पहुँच कर सबसे मिलने के बाद मैं नहाने चली गई। करीब आधा घंटा ठन्डे ठन्डे पानी का मज़ा लेने के बाद जब मैं बाथरूम से बाहर आई तो देखा कि भाभी का भाई अजय आया हुआ था।
हम दोनों एक दूसरे को देख कर बहुत खुश हुए। मैं जानती थी कि अजय तो भाई की शादी के समय से ही मेरा दीवाना है और मुझे भी अजय बहुत पसंद था। आखिर अजय था भी तो बहुत स्मार्ट।
लगभग छ: फुट का हट्टा कट्टा नौजवान था अजय। बाकी लड़कियों का तो पता नहीं पर मैं तो अजय पर फ़िदा थी। यह अलग बात है कि ना तो मैंने और ना ही अजय ने कभी अपनी चाहत का इज़हार किया था। अजय की भी शादी हो चुकी थी और वो सुखी जीवन व्यतीत कर रहा था।
खैर अजय को देखते ही मेरे मन में हलचल होने लगी थी और चूत भी खुशी के आँसू टपकाने लगी थी और मेरी पेंटी को गीला करने लगी थी। आखिर पूरी चुदक्कड़ जो बन चुकी थी मैं।
शाम को मैं भाई भाभी के साथ उनके कमरे में बैठी बातें कर रही थी, तभी अजय भी नहा धोकर हमारे पास आकर बैठ गया। मैंने उसकी तरफ देखा तो उसने हँस कर मेरी नजर का जवाब प्रिया। हम सब बैठे बातें कर रहे थे पर मेरी नजर बार बार अजय की तरफ घूम रही थी। मैंने महसूस किया कि अजय भी मुझे ही घूर रहा था।
तभी भाई का फोन आया और वो उठ कर चला गया। अजय भी उठ कर दूसरी तरफ बैठने लगा तो मेरी नजर अपनी मनपसंद चीज की तरफ चली गई और वो चीज नजर आते ही मेरे मुँह से आह निकल गई।
अजय का लण्ड पजामे में लटक रहा था। अजय ने शायद पजामे के नीचे अंडरवियर नहीं पहना था। माल मतलब का लग रहा था। वो तो भाभी पास में बैठी थी इसीलिए मैं कण्ट्रोल कर रही थी। वैसे तो दिल कर रहा था कि अभी जाकर अजय का लण्ड पकड़ कर मसल दूँ।
एक तो चुदाई करवाए कई दिन हो गए थे, दूसरा अजय का लण्ड देखकर चूत में खुजली होने लगी थी। ऐसे ही तड़पते तड़पते शाम हो गई और फिर रात, पर बात आगे नहीं बढ़ पाई थी। मुझे मौका ही नहीं मिल रहा था अजय से खुल कर बात करने का। पूरी रात तड़प तड़प कर काटनी पड़ी।
सुबह होते ही अजय वापिस जाने लगा। उसने बातों बातों में बता प्रिया कि वो जयपुर होते हुए जाएगा। अजय के मुँह से जयपुर होते हुए जाने की बात सुनकर मेरे दिमाग में चुदवाने की योजना बनने लगी। मैंने अजय को कुछ देर रुकने को कहा। मैं अपनी माँ के पास गई और उसको झूठ बोल प्रिया कि पतिदेव का फोन आया है और मुझे आज ही वापिस जाना पड़ेगा।
माँ ने कहा- अगर जाना ही है तो अजय के साथ ही चली जाओ वो तुम्हें जयपुर छोड़ कर आगे चला जाएगा।
मैं तो पहले से ही यही मन बनाए बैठी थी तो भला मैं कैसे मना कर देती। मैंने झट से अपना बैग तैयार किया और अजय के साथ वापिस जयपुर आने के लिए चल पड़ी।
यह लण्ड का चस्का होता ही ऐसा है दोस्तो।
अजय की गाड़ी में बैठ कर जैसे ही सफर शुरू हुआ, मेरी चूत के कीड़े सक्रिय हो गए। मैंने अजय से बातचीत शुरू कर दी।
“अजय… कल तुम मुझे घूरे क्यों जा रहे थे… अगर भाभी देख लेती तो…”
“अरे मैं कहा घूर रहा था… घूर तो तुम रही थी…”
“अच्छा जी… बहुत चालू हो तुम…” मैं कहकर हँस दी।
अजय ने गाड़ी का गियर बदलने के बहाने से हाथ बढ़ाया और मेरा हाथ पकड़ कर बोला… “शालू… तुम बहुत खूबसूरत हो… पता है जब पहली बार तुम्हें देखा था, तभी मैंने अपना दिल तुम्हारे नाम कर प्रिया था.. पर तुम मेरी किस्मत में ही नहीं थी…”
अजय के हाथ के स्पर्श से मेरे अंदर बिजली दौड़ गई।
“मैं भी तुम्हें बहुत पसंद करती हूँ अजय…” मैंने अजय के हाथ को दबाते हुए कहा तो अजय का चेहरा खिल उठा।
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अब तो जयपुर बहुत दूर महसूस होने लगा था। मन कर रहा था कि जल्दी से जयपुर पहुँच कर अजय के मोटे लण्ड से चुद जाऊँ। अजय का हाथ भी अब आगे बढ़ गया था और अब मेरे कंधे से होते हुए मेरी चूचियों को अपनी गिरफ्त में लेने की कोशिश कर रहा था। कुछ देर कंधा सहलाने के बाद अजय ने मेरी चूची को पकड़ लिया और ब्लाउज के ऊपर से ही सहलाने लगा।
चूची पर अजय का हाथ लगते ही मेरी तो चूत गीली हो गई थी। मैंने भी शर्म छोड़ी और हाथ बढ़ा कर पेंट के ऊपर से ही अजय का लण्ड सहलाने लगी। लण्ड में तनाव आने लगा था। मैंने जिप खोली और अजय का लण्ड बाहर निकाल लिया।
लण्ड बहुत मस्त था अजय का। बहुत लंबा और मोटा भी बहुत था।
लण्ड देख कर मेरी चूत चुदने को बेचैन हो गई। गाड़ी कब जयपुर पहुँचेगी यह सोच सोच कर परेशान हो गई थी। खैर कण्ट्रोल तो करना ही था। चूची मसलवाते और लण्ड को सहलाते सहलाते आखिर जयपुर आ ही गया।
घर पहुँचते ही मैंने झट से बैग एक तरफ फेंका और दरवाजा बंद करने लगी। तभी अजय ने पीछे से मुझे पकड़ कर अपने से चिपका लिया और मेरी गर्दन और कंधों पर चूमने लगा। आग तो पहले से ही लगी हुई थी सो झट से पलटी और अजय के होंठों पर अपने होंठ रख दिए। अजय भी पागलों की तरह मुझे चुम्बन करने लगा।
चूमाचाटी करते करते उसके हाथ मेरे कपड़ों को कम करने लगे। पहले ब्लाउज फिर साड़ी और पेटीकोट एक साथ धरती पर पड़े थे। ब्रा और पेंटी में मैं अजय की बाहों में झूल रही थी और वो मेरे बदन को बेहताशा चूम रहा था।
जब तक मैंने उसकी पैंट खोली, उसने मेरी ब्रा भी मेरे बदन से अलग कर दी।
मैंने भी उसकी पेंट और अंडरवियर नीचे खींच प्रिया। उसका लगभग नौ इंच लंबा लण्ड सर उठाकर खड़ा हो गया। मैं उसका लण्ड हाथ में लेकर सहलाने लगी। अजय भी मेरी मस्ती के मारे तनी हुई चूचियों को अपने मुँह में लेकर चूसने और चुम्भलाने लगा।
जब वो चूची के चुचक को अपने दांतों से काटता, दर्द चूत की गहराई तक महसूस होता और मैं मस्त हो जाती। जो चुदवाती है उनको इस मजे का एहसास जरूर होगा।
अजय ने मुझे अपनी मजबूत बाहों में उठाया और सोफे पर लेटा प्रिया। मेरे नंगे बदन को चूमते हुए उसने मेरी पेंटी भी उतार दी। मेरी नंगी चूत के दर्शन होते ही अजय भी मदहोश सा हो गया और एक क्षण देखने के बाद उसने अपने होंठ मेरी रसीली चूत पर लगा दिए। अपनी लंबी सी जीभ के साथ अजय मेरी चूत चाटने लगा। गोल गोल घुमा कर जीभ से मेरी चूत के हर हिस्से को चाट रहा था और मैं मस्ती से पागल हुई जा रही थी।
“खा जा मेरे राजा…. चाट ले सारा रस मेरी चूत का… आज ये चूत तेरी हुई…” मैं मस्ती के मारे बड़बड़ा रही थी। अजय मेरी चूत का रस अपनी जीभ से निकालने की भरपूर कोशिश कर रहा था जिससे मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।
कुछ देर चूत चाटने के बाद अजय ने अपना लण्ड मेरे होंठों से लगाया तो मैंने भी अजय के लण्ड को चूस चूस कर निहाल कर प्रिया। अब तो हम दोनों चुदाई के लिए तड़प उठे थे इसीलिए अब और इंतज़ार करना मुश्किल था। अजय ने सोफे पर ही मेरी गाण्ड के नीचे एक तकिया लगाया जिससे मेरी चूत उभर कर ऊपर की और हो गई। मेरी सफाचट चिकनी चूत अब लण्ड लेने के लिए मुँह खोल कर तैयार थी। अजय ने अपने मोटे लण्ड का सुपाड़ा चूत के मुहाने पर लगाया और एक जोरदार धक्के के साथ चुदाई का आगाज़ किया। पहले धक्के में आधे से ज्यादा लण्ड चूत की दीवारों को रगड़ता हुआ चूत की गहराई में उतर गया। अगले ही क्षण दूसरा धक्का लगा कर अजय ने पूरा लण्ड चूत में जड़ तक गाड़ प्रिया।
अजय एक पल के लिए रुका और फिर जब चुदाई शुरू की, तो दुरंतो एक्सप्रेस की स्पीड भी उसके सामने कम पड़ गई। सटासट धक्के लगा लगा कर अजय मेरी चूत चोद रहा था। हर धक्के के साथ अजय के अंडकोष मेरी गाण्ड से टकरा टकरा कर फट फट की एक मीनूर आवाज पैदा कर रहे थे और चूत से फच्च फच्च की आवाज उसकी ताल से ताल मिला रही थी।
“चोद मेरे राजा…चोद अपनी रानी को… फाड़ दे अपनी रानी की चूत… मिटा दे सारी खाज इस कमीनी चूत की…चोद साले जोर जोर से चोद…आह्ह्ह उम्म्म्म आह्ह्ह ओह्ह्ह…चोद चोद और चोद… चोद…” मैं मस्त हुई चिल्ला रही थी और अजय अपने पूरे दमखम से मेरी चुदाई कर रहा था।
लगभग पन्द्रह मिनट की चुदाई के दौरान मैं दो बार झड़ चुकी थी। अजय अब भी मस्त चुदाई कर रहा था। उसके धक्कों की स्पीड अब और ज्यादा खतरनाक होती जा रही थी। लण्ड चूत के अंदर फूलने लगा था। मेरा अनुभव मुझे बता रहा था कि अब अजय के गर्म गर्म वीर्य से मेरी चूत की प्यास बुझने वाली है।
मुझे ज्यादा इंतज़ार नहीं करना पड़ा और आठ दस धक्कों के बाद ही अजय के लण्ड से गर्म गर्म वीर्य मेरी चूत में भरने लगा।
मैं तो जैसे जन्नत में पहुँच गई थी। मैंने अजय को अपनी टांगों में जकड़ लिया और उसके सर को भी अपनी चूचियों में दबा लिया और आनंद के सागर में गोते लगाने लगी। लण्ड से वीर्य अब भी रुक रुक कर निकल रहा था और मुझे आनन्दित कर रहा था।
मैं अजय को और अजय मुझे पाकर बहुत खुश थे। पाँच दस मिनट ऐसे ही पड़े रहने के बाद हम दोनों अलग हुए।
मैं अपने कपड़े पहनने लगी तो अजय ने मुझे रोक प्रिया और सोफे पर बैठे हुए मेरे नंगे बदन को अपने ऊपर खींच लिया। मैं भी उसकी गोद में बैठ गई। अजय मेरे पसीने से भीगे बदन को चाटने और चूमने लगा तो आग दुबारा भड़क उठी। नीचे गाण्ड पर भी अजय का लण्ड सर उठा कर अपनी दस्तक देने लगा था।
अजय ने मुझे थोड़ा सा ऊपर उठाया और अपना लण्ड मेरी चूत के मुहाने पर रख कर फिर से मुझे बैठा लिया जिससे उसका लण्ड एक बार फिर मेरी चूत की गहराई में उतर गया। पहले धीरे धीरे और फिर चुदाई अपने पूरे चरम पर पहुँच गई। अगले बीस पच्चीस मिनट कभी अजय मेरे ऊपर तो कभी मैं अजय के ऊपर आकर चुदाई का मज़ा लेते रहे।
अजय को जरूरी काम से जाना था इसीलिए उसने रात को रुकने से मना कर प्रिया। पर मैं तो रात को भी अजय के साथ रंगीन करना चाहती थी। मैंने बहुत मिन्नत की तो उसने फोन करके रात को रुकने की अनुमति ले ली। मेरी तो मनचाही मुराद पूरी हो गई थी। फिर तो अगली सुबह तक ना तो अजय सोया और ना ही उसने मुझे सोने प्रिया। यहाँ तक की हम दोनों ने चुदाई के चक्कर में रात को खाना भी नहीं खाया। बस सिर्फ और सिर्फ चुदाई में खोये रहे।
आज भी जब अजय मिलने आता है तो वो सब काम भूल कर सिर्फ और सिर्फ मेरी चुदाई में ही खोया रहता है।
आपको मेरी चुदाई की यह दास्ताँ कैसी लगी जरूर बताना।
इन कहानियों को आप सब तक पहुँचाने में मेरे दोस्त राज का बहुत सहयोग है।