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जीजा साली की चुदाई पठन समय: 28 मिनट पढ़ा गया: 1,037 बार

चिरयौवना साली-22

कमला भट्टी

13 May 2012 को प्रकाशित

चिरयौवना साली-22
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लेखिका : कमला भट्टीमैं पहुँची तो वे सड़क पर लेफ्ट-राईट कर रहे थे। आखिर मैं सिटी बस से उतरी, वो मुझे होटल की ओर ले गये और कहा- मैं नाश्ता साथ ही लाया हूँ, हम कमरे में ही करेंगे, अभी सर्दी में वैसे भी लस्सी अच्छी नहीं लगेगी।मैंने कहा- चलो ठीक है।उस लिफ्ट में तीन मंजिल तक जाने तक जब लिफ्ट में हम दो ही थे तो उन्होंने बाँहों में भरकर चूम लिया।मैंने कहा- अरे कमरे में चूमा-चाटी कर लेना यहाँ नहीं ! मैं कोई कहीं भागी थोड़े ही जा रही हूँ !तो जीजाजी मान गए !कमरे में पहुँचते ही जीजाजी ने मुझे अपनी बाँहों में लेकर अपने सीने से चिपटा लिया और बिना हिले डुले दो मिनट तक मुझसे चिपके रहे। मैं भी उनके सीने से चिपकी रही, हमें ऐसा लग रहा था जैसे हमारी जन्मों-जन्मों की प्यास बुझ रही हो। वास्तव मुझे उनके सीने से चिपट कर बहुत शांति महसूस हुई।हम अलग हुए तब तक उन्होंने मेरा चेहरा अपने चुम्बनों से भर प्रिया था। मैं भी उनका प्यार देख कर ख़ुशी महसूस कर रही थी। हमने अलग होकर 3-4 ठंडी ठंडी सांसें खींची तो मन में तृप्ति का अहसास हुआ !फिर जीजाजी बोले- पहले हम नाश्ता कर लेते हैं, फिर तुम नहा लेना और अपनी साफ सफाई कर लेना, आखिर आज हमारी सुहागरात है।मैं मुस्कुरा दी।उन्होंने अपने बैग से काजू कतली, मावे की मिठाई और नमकीन निकाली तो मैंने कहा- मैं भी मिठाई और नमकीन ले कर आई हूँ।उन्होंने कहा- लाओ ! पर उस बैग की चेन पर ताला लगा हुआ था और मेरे पर्स में उसकी चाबी ही नहीं मिली। मैं फटाफट में उसके ताला लगाकर चाबी कमरे की दरी पर ही छोड़ आई थी, उसे पर्स में डालना भूल चुकी थी। साइड वाली जेबों में तो शेम्पू तेल आदि था पर मेरे कपड़े और खाने पीने का सामान,पैसे ए टी ऍम उसमें ही था।जीजाजी ने वो ताला तोड़ने की कोशिश की पर वहाँ कोई प्लास या सरिया तो था नहीं और हाथ से टूटना नहीं था। मैंने कहा- जाने दो, कल वापिस वही जाऊँगी, सिर्फ मेरे कपड़ों की कमी रहेगी।तो जीजाजी के चेहरे पर एक चमक आ गई और बोले- ऐसा करो, अपने सारे कपड़े उतार कर अलमारी में रख दो इन्हें मैला नहीं करो और कल वापिस यही पहन कर चले जाना ! मैंने कहा ठीक है जीजाजी बोले नाश्ता बाद में करना, पहले अपने कपड़े उतार कर रख दो, गंदे हो जायेंगे।उनके चेहरे पर शरारती मुस्कान दौड़ रही थी।मैंने अपनी साड़ी उतारी तो वे बोले- फटाफट यह ब्लाउज और पेटीकोट भी उतार दो, इन्हें कल तक फ्रेश रखना है।मैंने वे भी उतार दिए और जीजाजी ने उन्हें अलमारी में रख प्रिया। अब मैं सिर्फ ब्रेजरी और पैंटी में थी तो वे बोले- इन्हें भी उतारो भाई ! ये भी गंदे हो जायेंगे।मैंने कहा- इन्हें उतारने की जरूरत नहीं है, ये तो वैसे भी नीचे रहते है, गंदे हो भी जाएँ तो दीखते नहीं हैं।पर जीजाजी कहाँ मानने वाले थे, उन्होंने जबरदस्ती वे भी उतार दिए। अब मैं सिर्फ होटल का तौलिया लपेटे बैठी थी एकदम मादरजात नंगी और जीजाजी मुस्कुराते हुए बोले- अच्छा रहा जो तू चाबी भूल आई !फिर हमने नाश्ता किया, मैंने उन्हें खिलाया और उन्होंने मुझे ! कई बार तो उन्होंने कतली मेरे मुँह में देकर आधी अपने मुँह से तोड़ी और इस बहाने अपने होंट मेरे होंटों से सटाए !फिर नाश्ता कर जीजाजी ने कहा- मुझे एक दोस्त से मिलने जाना है, तब तक तुम अपनी सफाई करके नहा लो, फिर मैं वापिस आकर सुहागरात मनाऊँगा।मैंने कहा- ठीक है !वे बोले- मैं जाऊँ तो तुम कमरा अन्दर से लॉक कर लेना, कोई आये तो दरवाज़ा मत खोलना, मैं आऊँ, तब ही खोलना और कोई परेशानी आये तो मुझे फोन कर लेना।मैंने कहा- ठीक है !जीजाजी ने जाते जाते कहा- गुलाब के फ़ूल लाऊँ क्या सेज पर बिछाने के लिए?तो मैंने कहा- मुझे तो कोई खुशबू आती नहीं तो क्यों फूलों के पैसे खर्च करो?उन्होंने कहा- ठीक है।फिर वो बोले- आओ, दरवाज़ा बंद कर लो।मैं बोली- आप बाहर जाकर दरवाज़ा उढ़काओ, तब मैं आकर बंद कर लूंगी ! अभी जब आप बाहर निकलोगे तो कोई मुझे दरवाज़े के पास इस हालत में देख लेगा।तो उन्होंने कहा- ठीक है !वे बाहर चले गए, मैंने भी फटाफट अन्दर से सिटकनी लगा दी, रेजर-ब्लेड, शेम्पू लेकर बाथरूम में चली गई और गर्म पानी वाला नल खोल प्रिया और फिर तो मेरे दो घंटे बाथरूम में ही गुज़रे।अपने आपको मैंने साफ सफाई करके तैयार कर लिया पर रही नंगी ही रही, साड़ी नहीं पहनी, सिर्फ तौलिया लपेटे रही !मैं नहा कर जो जीजाजी का मोबाईल जिसमे वे सेक्सी वीडियो थे, देखना शुरू हो गई। उनके पास दो मोबाईल हैं, एक में तो सिफ गाने और सेक्सी फिल्में ही हैं जो वे होटल में आते ही मेरे सेक्स ज्ञान वर्धन करने के लिए मुझे दे देते हैं।करीब 5 बजे मेरे कमरे की बेल बजी, मैंने तौलिया लपेटा, मोबाईल में वीडियो को बंद किया, फिर दरवाज़े के पास आकर पूछा- कौन है?तो जीजाजी की आवाज़ आई- मैं हूँ !मैंने कहा- और कोई तो साथ नहीं है?उन्होंने कहा- कोई नहीं है, मैं अकेला ही हूँ !तब मैंने दरवाज़े की ओट में होकर जो कमरे की सिटकनी खोली और फटाक से बाथरूम में घुस कर दरवाज़ा बंद कर लिया !जीजाजी ने दरवाज़ा खोला और अन्दर आकर सिटकनी लगा दी, मैंने बाथरूम से सिर्फ अपना सर निकाल कर देखा फिर आश्वस्त होकर बाहर निकली !जीजाजी ने हंस कर कहा- इतनी क्या डर रही है मेरी जान?मैंने कहा- डरना पड़ता है ! मैंने कपड़े भी नहीं पहन रखे हैं, कोई कारीडोर से गुजरता भी देख सकता है !उन्होंने कहा- मैंने पहले सब स्थिति देख कर ही कालबेल बजाई थी, पर खैर तेरी सावधानी भी जायज है !अब वे अपने कपड़े उतार कर लुंगी लगा रहे थे, मैं सिर्फ तौलिया लपेटे थी जो मेरे पूरे शरीर को ढकने में असमर्थ था पर अब मुझे जीजाजी से इतनी शर्म महसूस नहीं हो रही थी ! पर मैं उन्हें लुंगी लगाते नहीं देख रही थी शर्म के कारण !मैं टीवी देख रही थी, उसमें भी किसी फिल्म का सुहागरात का दृश्य चल रहा था जिसे देख कर मेरे गाल गुलाबी हो गए थे !फिर जीजाजी मेरे पास आये और बोले- चलो, अब अपना मुँह ढको, फिर मैं तुम्हें मुँह दिखाई देता हूँ !मैंने कहा- साड़ी तो वार्डरोब में पड़ी है, मैं अपना चेहरा किससे ढकूँ?तो जीजाजी बोले- इसी तौलिए से ! बाकी सब उघाड़ दो और सिर्फ अपना मुँह ढक लो !मैंने कहा- धत्त्त ….ऐसा कैसे हो सकता है? मैं ऐसा नहीं करुँगी !तो उन्होंने सोफे पर पड़ा होटल का दूसरा तौलिया उठाया और मुझे देकर बोले- इससे ढक लो !मैंने उस तौलिए से अपना मुँह ढक लिया और बोली- बस अब तो खुश?वे बोले- अभी तुम घूँघट मत उतारना, इसे मैं उतारूंगा।मैंने कहा- ठीक है।मुझे भी उनके इस खेल में कुछ आनन्द आने लग गया था !अब उन्होंने अपने बैग से सोने का लोंग निकाल कर पलंग के पास आये और बोले- दूल्हा आ गया है और दुल्हन अभी तक बैठी है? उठकर मेरे पांव छुओ !मैंने ठंडी साँस भरकर कहा- हे राम ! अब ये उठक बैठक भी करनी पड़ेगी क्या?जीजाजी बोले- बड़ी बेशरम बीबी है ! पहले से ही बोल रही है, चुपचाप रहना चाहिए सुहाग रात को तो ! फिर तो वैसे भी सारी उम्र बीबी ही बोलती है।मैंने मन में ही कहा- क्या क्या नाटक करवाएंगे आज !मैं उठकर नईनवेली पत्नी की तरह उनके पास खड़ी हुई जिसकी टांगें नंगी दिख रही थी ! फिर मैंने उनके पैरों को छूते छूते उनके पंजों पर चिकोटी काटी, उन्होंने मेरी पीठ पर धौल जमाकर मुझे आशीर्वाद प्रिया, मुझे सीधा खड़ा कर अपनी बाँहों में लिया और अपने सीने से चिपटा कर कहा- मेरी जान, तेरी जगह पैरों में नहीं, तेरी जगह तो मेरे दिल में है !उनके जोर से लिपटाने से मेरे हाथ खुदबखुद उनकी पीठ पर चले गए, मेरे सर का तौलिया फिसल कर नीचे गिर गया और मेरा लपेटा हुआ तौलिया खुल गया और वो सिर्फ हम दोनों के बीच में अटका हुआ था जिसकी अब कोई जरुरत भी नहीं थी !हम दोनों के अलग होते ही वो हमारे पैरों पर गिर गया, मैंने झुक कर उठाना चाहा पर जीजाजी ने उठाने नहीं प्रिया और मुझे अपनी बाँहों में उठाकर हौले से पलंग पर लिटा प्रिया । मैंने फटाफट वहाँ पड़ा कम्बल अपने शरीर पर डाल लिया !फिर जीजाजी आकर मेरे कम्बल में घुस गए, मुझे अपने से लिपटा लिया। मैंने भी उन्हें कस कर पकड़ लिया, अपनी एक टांग उनकी कमर पर चढ़ा दी जिससे उनके घुटने मेरे मुनिया को छूने लगे जिसे आज मैंने बाथरूम में रेजर से बिल्कुल चिकनी कर प्रिया था ! वो छोटी सी चूत किसी कमसिन लड़की की सी लग रही थी, वैसे भी मेरे बाल बहुत कम आते हैं और जांघों और पिंडलियों पर तो बिल्कुल नहीं आते हैं, मेरी सहेलियाँ कहती हैं कि तू ब्यूटीपार्लर से साफ करा के आई है क्या?जबकि मेरे वहाँ कभी बाल आते ही नहीं है !उनके घुटने ने मेरी चूत की गर्मी और चिकनाई को महसूस किया तो फटाक से जीजाजी का हाथ वहाँ पहुँच गया और उनके हाथ की अँगुलियों का जादुई स्पर्श पाते है मेरे मुँह से मादक आह निकल गई !अब उनकी उंगलिया और अंगूठा मेरी चूत पर गोल गोल घूम रहा था ! मेरी आँखें बंद थी पर मेरे हाथ भी जीजाजी के पीठ पर घूम रहे थे और कभी कभी मैं उनका गाल भी काट लेती थी जब वे मुझे चूमते थे और सिसकारी भर के मुझे कहते थे- स….स…स…स साली..ली..ली… काटती है? निशान पड़ जायेंगे !पर मैं उनकी बात अनसुनी करके फिर जोर से काट लेती तो वो इसका बदला मेरी पूरी चूत को अपनी हथेली में भींच कर चुकाते और मैं भी चिल्ला पड़ती- अरे इसे उखाड़ोगे क्या?वो बोले- इसे उखाड़ कर मुझे दे दो ताकि मैं इसे जेब में रख लूँ, जब चाहूँ और जहाँ चाहूँ निकालूँ और मार लूँ !मैंने कहा- उखाड़ लो ! पर फिर यह आपके सामान पर सिर्फ टंग जाएगी और अन्दर वाली गहराई कहाँ से लाओगे? और इसकी जरुरत आपको ही नहीं मेरे पति को भी पड़ती है !वो हंस पड़े और बोले- यार, साढू को तो मैं भूल ही गया था ! वास्तव में मैं तो अतिक्रमणकारी हूँ।मैंने कहा- नहीं, आप उनके नहीं रहने पर भी उनकी मशीन को तेल पानी देकर तैयार रखने वाले मिस्त्री हो !उन्होंने कहा- हाँ यह बात तुम्हारी सही है, चलो अब मशीन लाओ, उसमें तेल पानी चेक करते हैं।मैंने कहा- मशीन अपनी जगह ही है, आप थोड़ा नीचे सरको मशीन के पास पहुँच जाओगे !दरअसल मुझे अपनी चूत चटवाने की जबरदस्त इच्छा हो रही थी !जीजाजी फटाफट नीचे सरक गए और और मेरी चूत के पास पहुँच कर उसे अंगूठे और अँगुलियों से चौड़ा किया और अपनी लम्बी जीभ को नोकीला करके अन्दर घुसा दी !मेरे मुँह से आनन्द की आआअ….ह्ह्ह्ह निकल गई, मैं अपने हाथ नीचे कर जीजाजी के सर पकड़ कर मेरी चूत में धकेलने लगी !मैं उन्हें सर से पकड़ कर टांगो में खींच रही थी और फिर उन्हें साँस आना भी मुश्किल हो गया तो उन्होंने मेरी चूत की फांकों पर हल्का सा काटा तो मैंने उन्हें हटा प्रिया।फिर वे जोर जोर से सांस भरते हुए बोले- साली मेरा सारा सर अन्दर डालवाएगी क्या?मैंने मुस्कुरा कर कहा- मुझे जोश में पता ही नहीं चला कि आपको साँस भी नहीं आ रही है।उन्होंने फिर से अपना मुँह मेरी चूत में घुसा प्रिया। इस बार मैं अपनी जांघें नहीं भींच रही थी, मेरी आँखें शर्म से बंद थी पर मुँह से मस्ती की आहें-कराहें निकल रही थी जो मुझे मज़े आने की चुगली मेरे जीजाजी से कर रही थी और वे और जोर जोर से अपनी जीभ मेरे दाने पर रगड़ रहे थे, उनकी एक अंगुली मेरी चूत में आवागमन कर रही थी और जीजाजी के मुँह से लार गिर गिर कर मेरी गुदा के छेद से बह कर जा रही थी।बाद में मुझे पता चला यह उनकी योजना थी क्यूंकि मैं तो चूत चाटने की मस्ती में खोई थी और उनकी अंगुली उनके थूक से चिकनी हुई मेरी गाण्ड को खोद रही थी।धीरे धीरे उन्होंने अपनी अंगुली का एक पोरवा मेरी गाण्ड में घुसा प्रिया था और चूत चाटते चाटते उसको धीरे धीरे अन्दर-बाहर कर रहे थे। हालाँकि उनकी अंगुली मेरी गाण्ड के छल्ले में नहीं घुसी थी पर वे उसको रवां करके घुसाने की तैयारी में ही थे। मेरी गाण्ड का छिद्र इतना छोटा था कि उसमें उनकी पतली अंगुली भी बहुत सारी थूक की चिकनाई होने के बाद भी मुश्किल से घुस रही थी।तभी मेरा पानी छूटा, मेरी मस्ती कम हुई और मुझे अनचाहे मेहमान का पता चला !कहानी जारी रहेगी।

लेखिका : कमला भट्टी

मैं पहुँची तो वे सड़क पर लेफ्ट-राईट कर रहे थे। आखिर मैं सिटी बस से उतरी, वो मुझे होटल की ओर ले गये और कहा- मैं नाश्ता साथ ही लाया हूँ, हम कमरे में ही करेंगे, अभी सर्दी में वैसे भी लस्सी अच्छी नहीं लगेगी।

मैंने कहा- चलो ठीक है।

उस लिफ्ट में तीन मंजिल तक जाने तक जब लिफ्ट में हम दो ही थे तो उन्होंने बाँहों में भरकर चूम लिया।

मैंने कहा- अरे कमरे में चूमा-चाटी कर लेना यहाँ नहीं ! मैं कोई कहीं भागी थोड़े ही जा रही हूँ !

तो जीजाजी मान गए !

कमरे में पहुँचते ही जीजाजी ने मुझे अपनी बाँहों में लेकर अपने सीने से चिपटा लिया और बिना हिले डुले दो मिनट तक मुझसे चिपके रहे। मैं भी उनके सीने से चिपकी रही, हमें ऐसा लग रहा था जैसे हमारी जन्मों-जन्मों की प्यास बुझ रही हो। वास्तव मुझे उनके सीने से चिपट कर बहुत शांति महसूस हुई।

हम अलग हुए तब तक उन्होंने मेरा चेहरा अपने चुम्बनों से भर प्रिया था। मैं भी उनका प्यार देख कर ख़ुशी महसूस कर रही थी। हमने अलग होकर 3-4 ठंडी ठंडी सांसें खींची तो मन में तृप्ति का अहसास हुआ !

फिर जीजाजी बोले- पहले हम नाश्ता कर लेते हैं, फिर तुम नहा लेना और अपनी साफ सफाई कर लेना, आखिर आज हमारी सुहागरात है।

मैं मुस्कुरा दी।

उन्होंने अपने बैग से काजू कतली, मावे की मिठाई और नमकीन निकाली तो मैंने कहा- मैं भी मिठाई और नमकीन ले कर आई हूँ।

उन्होंने कहा- लाओ ! पर उस बैग की चेन पर ताला लगा हुआ था और मेरे पर्स में उसकी चाबी ही नहीं मिली। मैं फटाफट में उसके ताला लगाकर चाबी कमरे की दरी पर ही छोड़ आई थी, उसे पर्स में डालना भूल चुकी थी। साइड वाली जेबों में तो शेम्पू तेल आदि था पर मेरे कपड़े और खाने पीने का सामान,पैसे ए टी ऍम उसमें ही था।

जीजाजी ने वो ताला तोड़ने की कोशिश की पर वहाँ कोई प्लास या सरिया तो था नहीं और हाथ से टूटना नहीं था। मैंने कहा- जाने दो, कल वापिस वही जाऊँगी, सिर्फ मेरे कपड़ों की कमी रहेगी।

तो जीजाजी के चेहरे पर एक चमक आ गई और बोले- ऐसा करो, अपने सारे कपड़े उतार कर अलमारी में रख दो इन्हें मैला नहीं करो और कल वापिस यही पहन कर चले जाना ! मैंने कहा ठीक है जीजाजी बोले नाश्ता बाद में करना, पहले अपने कपड़े उतार कर रख दो, गंदे हो जायेंगे।

उनके चेहरे पर शरारती मुस्कान दौड़ रही थी।

मैंने अपनी साड़ी उतारी तो वे बोले- फटाफट यह ब्लाउज और पेटीकोट भी उतार दो, इन्हें कल तक फ्रेश रखना है।

मैंने वे भी उतार दिए और जीजाजी ने उन्हें अलमारी में रख प्रिया। अब मैं सिर्फ ब्रेजरी और पैंटी में थी तो वे बोले- इन्हें भी उतारो भाई ! ये भी गंदे हो जायेंगे।

मैंने कहा- इन्हें उतारने की जरूरत नहीं है, ये तो वैसे भी नीचे रहते है, गंदे हो भी जाएँ तो दीखते नहीं हैं।

पर जीजाजी कहाँ मानने वाले थे, उन्होंने जबरदस्ती वे भी उतार दिए। अब मैं सिर्फ होटल का तौलिया लपेटे बैठी थी एकदम मादरजात नंगी और जीजाजी मुस्कुराते हुए बोले- अच्छा रहा जो तू चाबी भूल आई !

फिर हमने नाश्ता किया, मैंने उन्हें खिलाया और उन्होंने मुझे ! कई बार तो उन्होंने कतली मेरे मुँह में देकर आधी अपने मुँह से तोड़ी और इस बहाने अपने होंट मेरे होंटों से सटाए !

फिर नाश्ता कर जीजाजी ने कहा- मुझे एक दोस्त से मिलने जाना है, तब तक तुम अपनी सफाई करके नहा लो, फिर मैं वापिस आकर सुहागरात मनाऊँगा।

मैंने कहा- ठीक है !

वे बोले- मैं जाऊँ तो तुम कमरा अन्दर से लॉक कर लेना, कोई आये तो दरवाज़ा मत खोलना, मैं आऊँ, तब ही खोलना और कोई परेशानी आये तो मुझे फोन कर लेना।

मैंने कहा- ठीक है !

जीजाजी ने जाते जाते कहा- गुलाब के फ़ूल लाऊँ क्या सेज पर बिछाने के लिए?

तो मैंने कहा- मुझे तो कोई खुशबू आती नहीं तो क्यों फूलों के पैसे खर्च करो?

उन्होंने कहा- ठीक है।

फिर वो बोले- आओ, दरवाज़ा बंद कर लो।

मैं बोली- आप बाहर जाकर दरवाज़ा उढ़काओ, तब मैं आकर बंद कर लूंगी ! अभी जब आप बाहर निकलोगे तो कोई मुझे दरवाज़े के पास इस हालत में देख लेगा।

तो उन्होंने कहा- ठीक है !

वे बाहर चले गए, मैंने भी फटाफट अन्दर से सिटकनी लगा दी, रेजर-ब्लेड, शेम्पू लेकर बाथरूम में चली गई और गर्म पानी वाला नल खोल प्रिया और फिर तो मेरे दो घंटे बाथरूम में ही गुज़रे।

अपने आपको मैंने साफ सफाई करके तैयार कर लिया पर रही नंगी ही रही, साड़ी नहीं पहनी, सिर्फ तौलिया लपेटे रही !

मैं नहा कर जो जीजाजी का मोबाईल जिसमे वे सेक्सी वीडियो थे, देखना शुरू हो गई। उनके पास दो मोबाईल हैं, एक में तो सिफ गाने और सेक्सी फिल्में ही हैं जो वे होटल में आते ही मेरे सेक्स ज्ञान वर्धन करने के लिए मुझे दे देते हैं।

करीब 5 बजे मेरे कमरे की बेल बजी, मैंने तौलिया लपेटा, मोबाईल में वीडियो को बंद किया, फिर दरवाज़े के पास आकर पूछा- कौन है?

तो जीजाजी की आवाज़ आई- मैं हूँ !

मैंने कहा- और कोई तो साथ नहीं है?

उन्होंने कहा- कोई नहीं है, मैं अकेला ही हूँ !

तब मैंने दरवाज़े की ओट में होकर जो कमरे की सिटकनी खोली और फटाक से बाथरूम में घुस कर दरवाज़ा बंद कर लिया !

जीजाजी ने दरवाज़ा खोला और अन्दर आकर सिटकनी लगा दी, मैंने बाथरूम से सिर्फ अपना सर निकाल कर देखा फिर आश्वस्त होकर बाहर निकली !

जीजाजी ने हंस कर कहा- इतनी क्या डर रही है मेरी जान?

मैंने कहा- डरना पड़ता है ! मैंने कपड़े भी नहीं पहन रखे हैं, कोई कारीडोर से गुजरता भी देख सकता है !

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उन्होंने कहा- मैंने पहले सब स्थिति देख कर ही कालबेल बजाई थी, पर खैर तेरी सावधानी भी जायज है !

अब वे अपने कपड़े उतार कर लुंगी लगा रहे थे, मैं सिर्फ तौलिया लपेटे थी जो मेरे पूरे शरीर को ढकने में असमर्थ था पर अब मुझे जीजाजी से इतनी शर्म महसूस नहीं हो रही थी ! पर मैं उन्हें लुंगी लगाते नहीं देख रही थी शर्म के कारण !

मैं टीवी देख रही थी, उसमें भी किसी फिल्म का सुहागरात का दृश्य चल रहा था जिसे देख कर मेरे गाल गुलाबी हो गए थे !

फिर जीजाजी मेरे पास आये और बोले- चलो, अब अपना मुँह ढको, फिर मैं तुम्हें मुँह दिखाई देता हूँ !

मैंने कहा- साड़ी तो वार्डरोब में पड़ी है, मैं अपना चेहरा किससे ढकूँ?

तो जीजाजी बोले- इसी तौलिए से ! बाकी सब उघाड़ दो और सिर्फ अपना मुँह ढक लो !

मैंने कहा- धत्त्त ….ऐसा कैसे हो सकता है? मैं ऐसा नहीं करुँगी !

तो उन्होंने सोफे पर पड़ा होटल का दूसरा तौलिया उठाया और मुझे देकर बोले- इससे ढक लो !

मैंने उस तौलिए से अपना मुँह ढक लिया और बोली- बस अब तो खुश?

वे बोले- अभी तुम घूँघट मत उतारना, इसे मैं उतारूंगा।

मैंने कहा- ठीक है।

मुझे भी उनके इस खेल में कुछ आनन्द आने लग गया था !

अब उन्होंने अपने बैग से सोने का लोंग निकाल कर पलंग के पास आये और बोले- दूल्हा आ गया है और दुल्हन अभी तक बैठी है? उठकर मेरे पांव छुओ !

मैंने ठंडी साँस भरकर कहा- हे राम ! अब ये उठक बैठक भी करनी पड़ेगी क्या?

जीजाजी बोले- बड़ी बेशरम बीबी है ! पहले से ही बोल रही है, चुपचाप रहना चाहिए सुहाग रात को तो ! फिर तो वैसे भी सारी उम्र बीबी ही बोलती है।

मैंने मन में ही कहा- क्या क्या नाटक करवाएंगे आज !

मैं उठकर नईनवेली पत्नी की तरह उनके पास खड़ी हुई जिसकी टांगें नंगी दिख रही थी ! फिर मैंने उनके पैरों को छूते छूते उनके पंजों पर चिकोटी काटी, उन्होंने मेरी पीठ पर धौल जमाकर मुझे आशीर्वाद प्रिया, मुझे सीधा खड़ा कर अपनी बाँहों में लिया और अपने सीने से चिपटा कर कहा- मेरी जान, तेरी जगह पैरों में नहीं, तेरी जगह तो मेरे दिल में है !

उनके जोर से लिपटाने से मेरे हाथ खुदबखुद उनकी पीठ पर चले गए, मेरे सर का तौलिया फिसल कर नीचे गिर गया और मेरा लपेटा हुआ तौलिया खुल गया और वो सिर्फ हम दोनों के बीच में अटका हुआ था जिसकी अब कोई जरुरत भी नहीं थी !

हम दोनों के अलग होते ही वो हमारे पैरों पर गिर गया, मैंने झुक कर उठाना चाहा पर जीजाजी ने उठाने नहीं प्रिया और मुझे अपनी बाँहों में उठाकर हौले से पलंग पर लिटा प्रिया । मैंने फटाफट वहाँ पड़ा कम्बल अपने शरीर पर डाल लिया !

फिर जीजाजी आकर मेरे कम्बल में घुस गए, मुझे अपने से लिपटा लिया। मैंने भी उन्हें कस कर पकड़ लिया, अपनी एक टांग उनकी कमर पर चढ़ा दी जिससे उनके घुटने मेरे मुनिया को छूने लगे जिसे आज मैंने बाथरूम में रेजर से बिल्कुल चिकनी कर प्रिया था ! वो छोटी सी चूत किसी कमसिन लड़की की सी लग रही थी, वैसे भी मेरे बाल बहुत कम आते हैं और जांघों और पिंडलियों पर तो बिल्कुल नहीं आते हैं, मेरी सहेलियाँ कहती हैं कि तू ब्यूटीपार्लर से साफ करा के आई है क्या?

जबकि मेरे वहाँ कभी बाल आते ही नहीं है !उनके घुटने ने मेरी चूत की गर्मी और चिकनाई को महसूस किया तो फटाक से जीजाजी का हाथ वहाँ पहुँच गया और उनके हाथ की अँगुलियों का जादुई स्पर्श पाते है मेरे मुँह से मादक आह निकल गई !

अब उनकी उंगलिया और अंगूठा मेरी चूत पर गोल गोल घूम रहा था ! मेरी आँखें बंद थी पर मेरे हाथ भी जीजाजी के पीठ पर घूम रहे थे और कभी कभी मैं उनका गाल भी काट लेती थी जब वे मुझे चूमते थे और सिसकारी भर के मुझे कहते थे- स….स…स…स साली..ली..ली… काटती है? निशान पड़ जायेंगे !

पर मैं उनकी बात अनसुनी करके फिर जोर से काट लेती तो वो इसका बदला मेरी पूरी चूत को अपनी हथेली में भींच कर चुकाते और मैं भी चिल्ला पड़ती- अरे इसे उखाड़ोगे क्या?

वो बोले- इसे उखाड़ कर मुझे दे दो ताकि मैं इसे जेब में रख लूँ, जब चाहूँ और जहाँ चाहूँ निकालूँ और मार लूँ !

मैंने कहा- उखाड़ लो ! पर फिर यह आपके सामान पर सिर्फ टंग जाएगी और अन्दर वाली गहराई कहाँ से लाओगे? और इसकी जरुरत आपको ही नहीं मेरे पति को भी पड़ती है !

वो हंस पड़े और बोले- यार, साढू को तो मैं भूल ही गया था ! वास्तव में मैं तो अतिक्रमणकारी हूँ।

मैंने कहा- नहीं, आप उनके नहीं रहने पर भी उनकी मशीन को तेल पानी देकर तैयार रखने वाले मिस्त्री हो !

उन्होंने कहा- हाँ यह बात तुम्हारी सही है, चलो अब मशीन लाओ, उसमें तेल पानी चेक करते हैं।

मैंने कहा- मशीन अपनी जगह ही है, आप थोड़ा नीचे सरको मशीन के पास पहुँच जाओगे !

दरअसल मुझे अपनी चूत चटवाने की जबरदस्त इच्छा हो रही थी !

जीजाजी फटाफट नीचे सरक गए और और मेरी चूत के पास पहुँच कर उसे अंगूठे और अँगुलियों से चौड़ा किया और अपनी लम्बी जीभ को नोकीला करके अन्दर घुसा दी !

मेरे मुँह से आनन्द की आआअ….ह्ह्ह्ह निकल गई, मैं अपने हाथ नीचे कर जीजाजी के सर पकड़ कर मेरी चूत में धकेलने लगी !

मैं उन्हें सर से पकड़ कर टांगो में खींच रही थी और फिर उन्हें साँस आना भी मुश्किल हो गया तो उन्होंने मेरी चूत की फांकों पर हल्का सा काटा तो मैंने उन्हें हटा प्रिया।

फिर वे जोर जोर से सांस भरते हुए बोले- साली मेरा सारा सर अन्दर डालवाएगी क्या?

मैंने मुस्कुरा कर कहा- मुझे जोश में पता ही नहीं चला कि आपको साँस भी नहीं आ रही है।

उन्होंने फिर से अपना मुँह मेरी चूत में घुसा प्रिया। इस बार मैं अपनी जांघें नहीं भींच रही थी, मेरी आँखें शर्म से बंद थी पर मुँह से मस्ती की आहें-कराहें निकल रही थी जो मुझे मज़े आने की चुगली मेरे जीजाजी से कर रही थी और वे और जोर जोर से अपनी जीभ मेरे दाने पर रगड़ रहे थे, उनकी एक अंगुली मेरी चूत में आवागमन कर रही थी और जीजाजी के मुँह से लार गिर गिर कर मेरी गुदा के छेद से बह कर जा रही थी।

बाद में मुझे पता चला यह उनकी योजना थी क्यूंकि मैं तो चूत चाटने की मस्ती में खोई थी और उनकी अंगुली उनके थूक से चिकनी हुई मेरी गाण्ड को खोद रही थी।

धीरे धीरे उन्होंने अपनी अंगुली का एक पोरवा मेरी गाण्ड में घुसा प्रिया था और चूत चाटते चाटते उसको धीरे धीरे अन्दर-बाहर कर रहे थे। हालाँकि उनकी अंगुली मेरी गाण्ड के छल्ले में नहीं घुसी थी पर वे उसको रवां करके घुसाने की तैयारी में ही थे। मेरी गाण्ड का छिद्र इतना छोटा था कि उसमें उनकी पतली अंगुली भी बहुत सारी थूक की चिकनाई होने के बाद भी मुश्किल से घुस रही थी।

तभी मेरा पानी छूटा, मेरी मस्ती कम हुई और मुझे अनचाहे मेहमान का पता चला !

कहानी जारी रहेगी।

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वैसे तो मेरे कई लोगों से सेक्स अनुभव हुए हैं.. जिसमें मेरी चाची, मेरी मामी, नौकरानी.. सहकर्मी.. नेट-फ्रेंड.. पड़ोसन.. नई छात्राएँ.. सभी शामिल हैं.. पर आज जो कहानी मैं आपको सुनाने जा रहा हूँ.. वो मेरे और मेरी हमउम्र सलहज (साले की बीवी) के बीच की है।

10 मिनट 832
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जीजा साली Xxx कहानी में पढ़ें कि मेरी साली बहुत सुंदर है. वो फ्रेंड्ली नेचर की है और थोड़ी बोल्ड भी है. मैं उसे चोदना चाहता था पर डरता था. तो बात कैसे बनी?

12 मिनट 497
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लेखिका : कमला भट्टीजीजाजी बाथरूम में लण्ड धोने चले गए थे। वापिस आकर मुझे उठाया बाथरूम में जाने के लिए और मैं भी बाथरूम में घुस गई अपनी मुनिया को धोने और पेशाब करने के लिए जो दर्द के कारण मुश्किल से उतर रहा था !फिर हम साथ में लेट कर बाते करने लगे !...

38 मिनट 526

पाठकों की राय

3 टिप्पणियां

आशीष उज्ज्वल

1 month ago

बहुत ही उत्तेजक और रोमांचक कहानी लिखी है भाई। मजा आ गया।

रचित 8

1 month ago

क्या दीदी को पता चल गया था? अगला पार्ट जल्दी डालो यार।

अभय इंडिया

2 months ago

जीजा साली की नोक-झोंक और फिर ये रोमांस! लाजवाब कहानी।

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