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भाभी की चुदाई पठन समय: 11 मिनट पढ़ा गया: 1,034 बार

एत बात औल…पुंचु?-1

जितेन्द्र कुमार

06 Jan 2024 को प्रकाशित

एत बात औल…पुंचु?-1
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आपने मेरी कहानीमैं भ्रम में रह गयातीन भागों में पढ़ी होगी।

आज जो बात मैं आपको बताने जा रहा हूँ वो उससे पहले की बात है।

मेरी ब्रोकिंग एजेन्सी स्टॉक एक्सचेंज़ का काम करती है, शनिवार और रविवार को छुट्टी होती है और मुझे ये दो दिन काटना भारी होता है।

बात उन दिनों की है जब मेरी शादी नहीं हुई थी और तीन माह पहले ही मेरी बहन की शादी हुई थी। और ऐसे ही आज सब गड़बड़ हो रहा था क्योंकि सुबह से ही हल्की हल्की बरसात हो रही थी जिससे घूमने जाने का प्रश्न ही नहीं था। मेरे घर में मेरे अलावा मेरी माँ के सिवा कोई नहीं है। मेरी बहन जिसकी शादी इसी साल हुई है, हाँ, एक मेहमान जो मेरी बहन की शादी के समय से मेरे घर पर रह रहा है, वो है मेरी चचेरी भाभी जिनके पति बिजनेस में हैं और लगभग बाहर ही रहते हैं और जब उन्हें आना होता है तो हमारे घर आते हैं जब से भाभी यहाँ रह रही है। चाचा के और भी तीन लड़के हैं इसलिए भैया भाभी को यहाँ हमारे साथ रहने में कोई परेशानी नहीं, भाभी हम लोगों का पूरा ध्यान रख रखती हैं।

तो उस दिन मेरी छुट्टी थी और मेरे लायक कुछ काम भी नहीं था। शनिवार और रविवार को मैं देर तक सोता हूँ, फ्रेश होकर मैंने खाना पीना किया और लेपटाप पर इन्टरनेट का कुछ काम किया और सोचा कि कोई फिल्म देखी जाए।

मैं हॉलीवुड की फ़िल्म ‘मानसून’ देखने लगा जो मैं किसी से कापी कर पेन ड्राइव में लाया था। मैं फ़िल्म देखने में मस्त था और जब गर्म सीन आता तो आवाज बन्द कर लेता। भाभी अपने काम में लगी थी, माँ अपने कमरे से नहीं निकलती हैं क्योंकि वे घुटनों के दर्द से परेशान रहती हैं।

मैं फ़िल्म देख रहा था कि मेरी नजर सामने के कमरे में कपड़े अलमारी मे रख रही भाभी पर पड़ी। फिल्म में गर्म सीन था, आवाज बन्द थी, और मेरा कलेजा धकधकाने लगा, कारण यह था कि इस बार नजारा कुछ अलग था, भाभी की साड़ी का पल्लू नीचे गिरा था और वो अपने काम में मस्त थी, उनके ब्लाऊज़ से उनकी चूचियाँ दिख रही थी, मैंने घबरा कर अपनी नजरें हटा ली और अपने को धिक्कारने लगा कि भैया की पत्नी है, मेरे मन में ऐसा नहीं आना चाहिये। मैंने फ़िर फ़िल्म में ध्यान लगाया पर नजरों ने फिर गुस्ताखी कर ही दी और इस बार भाभी के उरोजों से नजर हटाने पर भी नहीं हटी, दिमाग सोच रहा था कि कौन देख रहा है और मैं केवल देख ही तो रहा हूँ, हाथ थोड़े ही लगा रहा हूँ। मैं लगातार भाभी की छातियाँ देख रहा था और इतना मजा आने लगा कि भाभी जाने कब से मुझे और मेरी इस हालत को देख रही थी पता ही ना चला।

जब वे अपना पल्लू ठीक कर आगे बढ़ी तब मैं तन्द्रा से जागा पर यह क्या ! वे मेरी तरफ़ ही चली आ रही थी।

मैंने सोचा- हे भगवान, यह मुझसे कैसी गलती हो गई।

और भाभी के नाराज होने का डर भी सताने लगा !!

अब करता भी क्या, भाभी मेरे कमरे में आई और मेरे सिर के बालों को सहलाती हुई बोली- डरिये नहीं, मैं किसी से कुछ नहीं कहूँगी देवर जी ! यह उम्र ही ऐसी होती है, सब जानने का दिल करता है।

मैं तो जैसे काठ हो गया था, मेरे लेपटाप के स्क्रीन की तरफ़ देख कर बोली- ओ ! तो अब समझी कि मेरा भोला देवर इस फ़िल्म की वजह से भटक गया था ! आपको ऐसी फ़िल्म नहीं देखनी चाहिये ! खैर कोई बात नहीं !

मैं तो एकदम पानी-पानी हो गया और वे कमरे से चली गई। मेरे आँखों में आँसू आ गए, मैं सोचने लगा कि किसी ने सच ही कहा है कि बड़ी भाभी गुरु होती हैं, आज मैंने देख लिया था और मेरा मन भाभी को देवी मान चुका था और मैं सोचने लगा कि जरुर दीपक भैया ने पिछले जन्म में बहुत अच्छे कर्म किये होंगे जो उन्हें ऐसी धर्मपत्नी मिली है।

खैर मेरा मूड बदल गया, बारिश भी बन्द हो गई थी तो मैंने सोचा चार बजे हैं जरा बाजार से ही घूम आता हूँ।

मैं लेपटाप बन्द कर बाजार निकल पड़ा। सच तो यह था कि मैं अपने मन से दिन की घटना से निकाल नहीं पा रहा था। काफी देर पार्क में बैठा रहा, युगल आने लगे और इधर उधर जगह लेकर बैठने लगे अपने अपने बातों में मस्त !

टाइम देखा तो साढ़े पाँच हो चुके थे पर मन अभी तक नहीं बदला था।

वहाँ से निकल कर मैं सोचने लगा चाहे भाभी ने मुझे माफ़ कर प्रिया हो पर मुझे उनसे माफ़ी मांगनी चाहिये और मैं सोचने लगा कि कैसे कौन सा तरीका अपनाऊँ माफ़ी मांगने का ! फिर सोचा कि कोई अच्छा सा गिफ़्ट लेता हूँ भाभी के लिए।

मैंने एक रेडिमेड कपड़ों की दुकान से लेटेस्ट एक सूट खरीदा, एक मशहूर मिठाई की दुकान से छेना और खोए की मिठाई ली, थोड़ी चाट पैक करवा ली फिर वापस चुपचाप अपने कमरे में आकर बैठ गया अब तक सात बज चुके थे, माँ खाना खाकर लेटी हुई थी और भाभी उन्हें तेल लगा रही थी। मेरे आने के बारे में जान कर माँ ने भाभी से कहा- अब रहने दो, जित आ गया है, उसे खाना दे दो और तुम भी खाकर सो जाओ।

भाभी उठ कर खाना लेकर मेरे कमरे में आई, खाना रख पानी लाने के लिये गई। तब तक मैंने सभी गिफ़्ट आईटम सामने रख दिए। जब वो वापस आई तो पानी रख मेरे सामने ही बैठ गई।

मैं नजर नीचे किये धीरे से पैकेट उनकी तरफ़ बढ़ाते हुए- भाभी, मैं आपके लिये कुछ लाया हूँ। क्या आपने मुझे माफ़ किया?

भाभी मुस्कुराते हुए बोली- देवर जी, आपने ऐसा किया ही क्या जो माफ़ी मांग रहे हैं?

मैं लज्जित होते हुए बोला- वो भाभी, आगे से ऐसी गलती नहीं होगी, प्लीज यह मेरा लाया हुआ गिफ़्ट आप ले लीजिये तो मैं समझूँगा कि आपने मुझे माफ़ कर प्रिया है।

वो उठ कर मेरे पास आई और मेरे सिर पर बड़े प्यार से हाथ फेरती हुये बोली- माफ़ी के लिये कोई बात ही नहीं है पर आपको लगता है तो चलो हम आपको माफ़ करते हैं।

मैं खुश होता बोला- तो इसे ले लीजिये प्लीज !

वे लेती हुई बोली- इतना कुछ? क्या क्या हैं इसमें?

मैं बोला- कुछ खास नहीं, इसे आप अपने कमरे में खोलिएगा !

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भाभी ने मेरे चेहरे को हथेली से पकड़ कर मेरे गाल पर चुम्बन ले लिया या यूँ कहें कि चुम्बन के बहाने दांत काट लिया जिससे मेरे गाल से सिहरन लन्ड तक पहुँच गई।

वो हंसती हुई अपने कमरे में चली गई। मुझे अचानक अजीब सा बदलाव लगा पर मैंने अपने को समझाया कि जिसकी जैसी सोच होती है उसे हर जगह वैसा ही दिखता है।

मैंने खाना खत्म किया ही था कि वे मेरे सामने, जो मैं लाया था, वही ड्रेस पहन कर हाथों में मेरी लाई हुए मिठाई लेकर आई।

मेरी तो हालत खराब हो रही थी, इन कपड़ों में तो गजब कयामत लग रही थी भाभी और इतनी ही देर में फ़िल्मी हिरोइनों के जैसे बालों को सेट कर लिया था।

भाभी मुस्कुराते हुए आई और उन्हें देख अन्दर से फिर मुझे अपने चचेरे भैया की किस्मत से जलन होने लगी, मेरा लन्ड खड़ा होकर भाभी की चूत में जाने को तड़प उठा।

मैं एक बार फिर वो ही गलती करने की गुस्ताखी करने की सोच रहा था क्योंकि जब वो मिठाई रखने के लिये झुकी तो उनके कमीज का गला कुछ इस तरह का था कि भाभी की एकदम नंगी सन्तरे जैसी गोल गोल चूचियाँ मेरे सामने थी, देखने में बिल्कुल सख्त लग रही थी जैसे किसी पोर्न फ़िल्म में दिखती हैं, जी तो चाहा कि अभी के अभी हाथ डाल कर मसल डालूँ पर सुबह की बात एकाएक ध्यान में आते ही मैं नजरें हटाकर मिठाई खाने लगा।

वो सामने से हट मेरे पास सटकर बैठते हुए बोली- मेरे हिसाब से अब ताई जी से आपकी शादी के बारे में बात करने में देर नहीं करनी चाहिये !

मैं चुप्पी तोड़ते हुए बोला- नहीं भाभी, अभी अभी तो दीदी की शादी हुई है, और आप तो हैं ना !

“क्यों भाई? मेरे होने से क्या? मैं आपकी लुगाई थोड़े ही हूँ?”

एक बार फिर मुझे डर सा लगा।

वो तुरन्त वोली- अरे डर गए?

“मेरे कहने का मतलब माँजी की सेवा से था !”

भाभी ने मुझ पर गौर से नजर गड़ाते हुए कहा- एक बात पूछूँ? सच बताना होगा !

मैंने कहा- हाँ जरूर ! सच कहूँगा, पूछिये आप !

वे जरा और पास आकर बोली- जो बात मैं जानना चाहती हूँ, वो सच है या नहीं, मैं जांच कर भी देखूँगी, सच बोलियेगा !

मैंने जरा गम्भीर होकर कहा- आपकी कसम भाभी, मैं आपसे झूठ नहीं बोलूँगा ! आप निश्चिन्त होकर बोलिये !

वे जरा और पास आकर कान में बोली- कोई गर्लफ़्रेन्ड है आपकी?

मैंने लजाते हुए बात काटी- वो सब छोड़िए ना भाभी !

वे दुबारा से बोली- आपने कहा है निश्चिन्त होकर पूछने को, इसलिए अब आपको बताना ही है।

मैंने उनसे स्पष्ट कह प्रिया- भाभी, मेरी कोई गर्लफ़्रेन्ड नहीं है, सच में !

भाभी सम्भल कर बोली- सच में !

“हाँ भाभी, मैंने आपकी कसम खाई है। झूठ नहीं बोलूंगा !

वे अपने होंठों को जरा सा गोल करके बच्चो से बात करते हैं, वैसा बनाते हुये बोली- एत बात औल…पुंचु?

इस तरीके से होंठ करके उनका यह स्टाइल देख मेरा तो दिल किया कि अभी के अभी लण्ड निकाल कर उनके होंठों में पकड़ा दूँ पर खुद को रोकते हुए बोला- हाँ कहिये ना?

कहानी जारी रहेगी।

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एत बात औल…पुंचु?

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