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जीजा साली की चुदाई पठन समय: 10 मिनट पढ़ा गया: 1,039 बार

मेरी पत्नी की बहनें-3

मयंक अग्रवाल

24 Apr 2010 को प्रकाशित

मेरी पत्नी की बहनें-3
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मेरी पत्नी की बहनें-1मेरी पत्नी की बहनें-2

मैं चोदता रहा. थोड़ी देर में मेरे लंड ने पानी छोड़ प्रिया, मुझे काफी मजा आ रहा था लेकिन मैंने गौर किया कि अन्नू भी काफी अंगड़ाई ले रही थी, इसका मतलब कि अब उसकी चूत में भी खुजली हो रही थी.

मैंने तनुजा को कहा- अब तेरी छोटी बहन की बारी है. देख तो कैसा अकड़ रही है?

तनुजा अपनी चूत को साफ़ करती हुई बोली- इसकी तड़प को रोकने का एक ही उपाय यह है कि इसे भी अभी चोद दीजिये. क्यों री अन्नू? चुदवायेगी ना? बहुत मजा आएगा.

अन्नू बोली- लेकिन दीदी, तू तो अभी कराह रही थी, लग रहा था कि तुझे काफी दर्द हो रहा था.

तनुजा- अरी पगली, वो दर्द नहीं ..मजा था री! तू भी चुदवा कर देख ना!

अन्नू ने कहा- लेकिन दीदी तूने ही तो एक दिन कहा था कि चूत पर पहला हक पति का होता है?

तनुजा- धत पगली! साली के चूत पर पहला हक तो जीजा का ही होता है न. चल अब ये सब छोड़ और लेट जा! देख जीजू अभी तुझे जन्नत की सैर करायेंगे.

अब मैंने अन्नू को अपने नीचे लिटाया और उसकी चूचियाँ दबाने लगा. मुझे पता था कि यह लड़की अभी गरम है. इसे काबू में करना कोई मुश्किल काम नहीं है. मैं उसकी चूची को दबाने लगा, वो कुछ नहीं बोल रही थी सिर्फ मुस्कुरा रही थी.

मैं एक हाथ उसकी चूत पर हाथ ले गया.

ओह! उसकी चूत तो बिल्कुल गीली थी. मैंने अब कोई तकल्लुफ नहीं किया अब वो पूरी तरह से मेरी गिरफ्त में थी. मैं उसके होठों को बेतहाशा चूमने लगा. अब वो भी मुझे जोरदार तरीके से मेरे होठों को चूमने लगी. अब वो मेरा साथ देने लगी थी. वो भी तनुजा की चुदाई देख कर मस्त हो चुकी थी. उसकी चूचियाँ तो तनुजा से भी नरम थी. आखिर उसकी चूत का भी मैंने उद्धार किया और उसकी चूत में अपना लंड डाल प्रिया.

लेकिन जैसे ही मैंने डाला, वो चीखने लगी. उसकी चूत का छेद अभी छोटा था.

तनुजा ने कहा- एक मिनट जीजू! यह क्रीम इसकी चूत में लगा लीजिये, तब चोदिये, तब इसे दर्द नहीं होगा.

मैंने अन्नू के चूत से अपना लंड निकाल लिया, तनुजा ने वैसलिन क्रीम को अन्नू की चूत पर अच्छी तरह से मला. अन्नू चुपचाप अपने चूत पर वैसलिन लगवा रही थी.

मैंने अन्नू की चूची को दबाते हुए कहा- तनुजा, तूने तो अपनी चूत पर वैसलिन नहीं लगाई थी?

तनुजा ने कहा- मुझे तो मोटे बैंगन अपने चूत में डालने की आदत है ना! यह अन्नू की बच्ची तो सिर्फ मोमबत्ती ही डालती है अपनी प्यारी सी चूत में. इसलिए आपका मोटा लंड इसे चुभ रहा है लेकिन अब नहीं चुभेगा. मैंने वैसलिन लगा दी है इसकी चूत में, अब आप इसकी चूत में अपना लंड बेहिचक डालिए.

मैंने फिर से अन्नू के चूत में अपना लंड धीरे धीरे डालना शुरू किया, इस बार भी वो थोड़ी चीखी लेकिन जल्दी ही अपने आप पर काबू पा लिया.

4-5 झटकों में ही उसकी भी झिल्ली फट गई और उसकी चूत से खून निकलने लगा लेकिन मैंने लंड के धक्के से उसकी चुदाई जारी रखी. थोड़ी देर में ही उसकी चूत भी खुल गई, वो भी अपनी दीदी की तरह जोश में आ गई, उसने अपने दोनों हाथों से मेरी गर्दन को लपेट लिया और मेरे होठों को चूमने लगी.

उसकी जम कर चुदाई के बाद मेरे लंड से भरपूर माल निकला जो कि उसकी चूत में ही समा गया.

मैं अपना लंड उसकी चूत से निकाल कर उसकी बगल में लेट गया.

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तब तनुजा ने अन्नू की चूची को दबा कर बोली- क्यों बहना, मजा आया ना?अन्नू ने कहा- हाँ दीदी! एक बार फिर करो ना जीजू?तनुजा ने कहा- नहीं, पहले मेरी चूत में भी रस डालिए तब अन्नू की बारी!

तनुजा मेरे बगल में लेट कर अपने दोनों टांगो को आजु-बाजू फैला कर अपनी चूत मेरे सामने पेश कर मुझे न्योता देने लगी.

मेरा लंड अभी थका नहीं था. मैं तीसरी बार चूत चोदने के लिए तैयार था. मैंने उसकी टांगों को अपने कंधे पर रखा और एक ही झटके में अपना लंड उसके चूत में प्रवेश करा प्रिया.

तनुजा- हाय राम! जीजू कितना हरामी है रे तू? धीरे धीरे डाल न..मैंने कहा- देख कुतिया, अभी मैं तेरी कैसी चुदाई करूंगा कि इस जन्म में दोबारा चुदाई का नाम ना लेगी तू.

मेरी बात सुन कर तनुजा ने हँसते हुए कहा- जा रे हिजड़े, तेरे जैसे दस लंड को मैं अपनी चूत में एक साथ डाल लूं तो भी मेरी चूत को कुछ नहीं होने वाला.मैंने भी हँसते हुए कहा- तो ये ले.. सभाल इसे.

कह कर मैं काफी जोर जोर से उसके चूत में अपना लंड आगे पीछे करने लगा. पहले तो वो सिर्फ अपने होंठों को दांतों में दबा कर दर्द बर्दाश्त करती रही लेकिन थोड़ी देर में ही उसकी चीखें निकलने लगी, वो हल्के स्वर में चिल्लाते हुए कहने लगी- हाय रे! मादरचोद, फाड़ डाला रे, साले जीजू, कुत्ता है तू! एक नम्बर का रंडीबाज है. आदमी का लंड है या गधे का लंड. साले कुछ तो रहम कर मेरी नाजुक चूत पर!

मुझे उसकी गालियाँ काफी प्यारी लग रही थी. उसकी गालियाँ मेरा जोश बढ़ा रही थी. मैं जानता था कि उसे काफी मजा आ रहा है क्योंकि इतने दर्द होने के बावजूद वो अपनी चूत से मेरा लंड निकालने का प्रयास नहीं कर रही थी.

इस बार मैंने तनुजा के चूत को घमासान तरीके से 20 मिनट तक चोदा. इस घमासान चुदाई के बाद मेरे लंड से लावा फ़ूट पड़ा और सारा लावा उसके चूत में ही गिराया.

तनुजा की हालत देखने लायक थी. वो इतनी पस्त हो चुकी थी कि बिना कोई करवट लिए जैसे की तैसी लेटी लेटी ही सो गई.

तनुजा तो थक कर सो गई लेकिन अब अन्नू कहने लगी- मेरे मुंह में भी रस पिलाइये जैसे दीदी को पिलाया था. और मेरी भी चूत चूसिये जैसे आपने दीदी की चूसी थी.

मेरी भी तो अब हिम्मत नहीं हो रही थी. लेकिन मैं यह लोभ छोड़ना भी नहीं चाहता था और अन्नू को दुखी भी नहीं करना चाहता था.मैंने कहा- अन्नू, यह मेरा लंड आपके हवाले है. आप इसे चूस कर इससे रस निकाल लीजिये.अन्नू बोली- ठीक है.

मैं बिस्तर पर लेट गया. अन्नू मेरे बदन पर इस तरह से लेट गई कि उसकी चूत मेरी मुँह के ऊपर और वो मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी और मैं उधर उसकी चूत को चूस रहा था. जवान लड़कियों में रस की कमी नहीं रहती. उसकी चूत से लगातार रस निकल रहा था. सचमुच अद्भुत स्वाद था.

मैंने जल्दी से लंड को उसकी चूत से निकाला और अन्नू के मुँह को खोल कर उसके मुँह के पास लंड ले जा कर हाथ से 3-4 बार मुठ मारा ही था कि मेरे लंड महाराज ने चौथी बार लावा निकाल प्रिया.

सारा लावा अन्नू ने अपने मुँह में गटक लिया और बड़े ही चटखारे ले ले कर पिया. आखिर उसकी चूत से भी रस निकल गया जो सचमुच किसी जूस से कम नहीं था.

उसके बाद मैं भी अन्नू के साथ ही उसी के बिस्तर पर ही सो गया. रात करीब दस बजे हम लोग उठे तनुजा और अन्नू दोनों ही चल नहीं पा रही थी. मैं खाने के लिए बाहर गया और उन दोनों के लिए भी भरपूर मात्रा में खाना पैक करवाया और दो बोतल बियर और एक पैकेट सिगरेट ले लिया.

वापस आने पर उन दोनों को 2-2 गिलास बियर पिला कए खाना खिलाया. पहले तो दोनों मना करती रही. लेकिन जब मैंने कहा कि इससे कोई हानि नहीं होगी बल्कि तुम दोनों का बदन और चूत दर्द ठीक हो जाएगा तब दोनों ने बियर को पीया. फिर दोनों को एक एक सिगरेट भी पीने को प्रिया. पहले तो वो दोनों सिगरेट में भी ना ना करती रही लेकिन जब मैं सिगरेट पी रहा था और एक कश लेने के लिए अन्नू को प्रिया तो वो छोटी छोटी कश लेकर समूची सिगरेट ही पी गई. उसकी देखा देखी तनुजा भी एक सिगरेट छोटी छोटी कशों में पूरी पी गई. इस से सचमुच उन दोनों का दर्द समाप्त हो गया. शेष एक बोतल बियर और 3 सिगरेट मैं अकेले ही पी गया. हम सभी इतने में फिर से मस्त हो चुके थे. इसके बाद हम तीनों में कोई पर्दा नहीं रह गया, हम तीनों नंगे होकर रात भर सेक्स गेम खेलते रहे.

उसी रात को मैंने दोनों की गांड का भी उद्धार कर प्रिया. हम तीनो सुबह के सात बजे सोये. मैंने अपने लिए अलग कमरा को भी रखे रखा. जहाँ मैं कभी कभी दोनों में से किसी एक को अपने कमरे में ले जाकर एकांत में भी चोदता था.कभी कभी एकांत में भी तो चुदाई होनी चाहिए ना!शेष सातों दिन हम तीनों ने साथ मिल कर चुदाई का तरह तरह का खेल खेला.

घर वापस आने के बाद भी चुपके चुपके हम तीनों रंगरेलियाँ मना ही डालते हैं.

तो देवियों और सज्जनों आपको मेरी और मेरी सालियों की रासलीला कैसी लगी? मुझे मेल करके बताएँsupport@mohakkisse.com

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मेरी पत्नी की बहनें

कुल भाग: 3
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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

अंजलि भाभी

1 month ago

क्या दीदी को पता चल गया था? अगला पार्ट जल्दी डालो यार।

मोहन रवन

2 months ago

जीजा साली की नोक-झोंक और फिर ये रोमांस! लाजवाब कहानी।

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