अब तक आपने पढ़ा..
भाभी ने बड़ी अदा से अपने कम कपड़ों को और कम किया और फिर मेरे कपड़े उतारने लगीं। मेरे तने हुए लण्ड से रिस्ते हुए रस की बूँद को देखकर बोलीं- देखो जानू तेरा लौड़ा कैसा लार टपका रहा है..‘क्या करूँ भाभी.. खाना परसा हुआ रखा है.. लेकिन खाने को न मिले तो लार तो टपकेगी ही..!’यह कह कर मैंने भाभी को फिर से पकड़ कर उनके होंठों को चूसना शुरू कर दिया और उनके नंगे चूचों को दबाने लगा.. उस समय मैं इतना अधिक उत्तेजित था कि उनको पकड़ कर अपनी तरफ खींचने लगा। मैं उनको अपने अन्दर समा लेना चाहता था।
अब आगे..
भाभी ने बड़ी मुश्किल से अपने को अलग किया, आँवले का तेल.. एक चादर.. हेयर रिमूव करने की क्रीम निकाली और मुझे देती हुई बोलीं- शरद ये लो.. अब तुम्हारा काम शुरू होता है।
इतना कहकर उन्होंने चादर बिछाई और उस पर सीधी लेट गईं। मैंने उनके हाथ को ऊपर करके उनकी कांख पर हेयर रिमूवर लगाया.. फिर बुर के ऊपर.. थोड़ा उनकी गाण्ड के अगल-बगल और पैरों पर.. जहाँ भी बाल थे.. रिमूवर लगाया और भाभी के सीने पर अपने पैरों के दम पर बैठकर अपने लौड़े को उनके होंठों पर लगा दिया।
अब भाभी भी बड़े प्यार से मेरे गिरते हुए वीर्य को अपनी जीभ से चाट रही थी, वे करीब पंद्रह मिनट तक मेरे लौड़े को चूसती रहीं और मेरे रस की एक-एक बूँद पीकर मुझे निचोड़ कर रख दिया।
अब मुस्कुराते हुए भाभी बोलीं- जानू.. अब तो मेरे ऊपर से उठो और यह जो रिमूवर लगाया है.. इसको तो साफ करो..
मैंने रूई और हल्का सा गरम पानी लिया.. सबसे पहले उसकी बगल के बाल साफ किए और थोड़ी ही देर में बुर के हिस्से को छोड़कर सभी जगह लगा रिमूवर को हटा दिया। फिर बुर पर से सफाई शुरू की.. तो क्या बुर खिल कर आ गई.. बिल्कुल चिकनी और उठी हुई..तुरन्त मैंने उनकी बुर को गरम पानी से धोया और बुर को हौले से चूम लिया।
भाभी के मुँह से ‘ऊईईईई माँ..’ की सिस्की निकल पड़ी।ऐसा लग रहा था.. वो भी काफी तड़प रही थीं..
मैंने तुरन्त भाभी से पूछा- भाभी पहले एक बार खेत में हल चला लिया जाए.. उसके बाद मसाज किया जाए।‘हाँ मेरे राजा.. मैं भी बहुत तड़प रही हूँ.. इस खेत में अपना हल चला ही दो और मेरी तड़प को मिटा दो.. आओ मेरे राजा मेरी बुर को चोदो..’
मैंने तुरन्त पोजीशन ली और एक झटके से अपना लौड़ा बुर में डाल दिया और जोर-जोर से धक्के मारने लगा।फिर भाभी मेरे ऊपर आ गईं और धक्के पर धक्के मारने लगीं। पूरे कमरे में तूफान अपने शवाब पर था.. क्योंकि भाभी की बुर पूरी तरह गीली थी और ‘फच-फच’ की आवाज आ रही थी।
थोड़ी देर बाद भाभी का बदन अकड़ने लगा और भाभी बोलीं- मेरे राजा मेरा माल बाहर आने वाला है..यह कहते-कहते भाभी का बदन ढीला हो गया और वो मेरे ऊपर ही लेट गईं और मेरे चूचुकों को चूसने लगीं।मैंने तुरन्त ही भाभी को नीचे लेटाया और धक्के मारने लगा.. कुछ ही धक्कों में मैंने भी अपना माल भाभी के बुर में डाल दिया।
थोड़ी देर हम लोग इसी तरह पड़े रहे। भाभी ने अपनी पैंटी से अपनी बुर को साफ किया और मेरे लौड़े को साफ किया और तेल लाकर देते हुए बोलीं- लो अब तुम्हारी बारी..बारी का मतलब मसाज से था। भाभी की मसाज..
मुझे एक अजीब सा आनन्द आ रहा था। मैंने तुरन्त ही तेल लिया और उनकी पूरी पीठ में डाल कर हौले-हौले से मालिश करते हुए नीचे उनके चूतड़ों के उभारों पर और जाँघों पर मालिश करने लगा। फिर थोड़ा सा तेल उनकी गाण्ड के छेद में डाल कर उँगली अन्दर-बाहर करने लगा।
भाभी के मुँह से ‘उ-आउच..’की सेक्सी आवाज आने लगी.. उसके बाद मैंने भाभी को पलटा कर फिर उनके चूचों पर तेल डाल कर और घुटनों को हल्के से मरोड़ कर.. उनके पूरे शरीर की मसाज की और अन्त में बुर को भी पूरे तेल से नहला कर मालिश करने का अपना ही मजा था।
इसी के साथ भाभी की वो सेक्सी आवाज सुनने का अपना ही आनन्द था। उनका वो अपने दाँतों से अपने होंठों को काटना और अपने बदन को अकड़ाना.. दोस्तो, मैं बयान नहीं कर सकता।
फिर हम लोग नहाने के लिए गए।भाभी ने मुझे और मैंने भाभी को रगड़-रगड़ कर नहलाया और बाथरूम में ही भाभी ने अपने मुँह का जादू मेरे लण्ड पर चलाना चालू किया और मुझे मस्त करती गईं।
पतिव्रता बीवी की चुदाई पुराने आशिक से- 9
थोड़ी ही देर में ही मैं चरमोत्त्कर्ष पर पहुँच गया और भाभी के मुँह में पूरा माल उलट दिया।भाभी ने मेरा एक-एक रस की बून्द को चूस लिया।मुझमें कुछ सुस्ती सी आने लगी और भूख लग रही थी।भाभी ने मेरी मनोदशा को जैसे जान लिया था। वे मेरे साथ रसोई में आ गईं.. हम दोनों ही अब भी पूर्ण नग्न अवस्था में थे।
भाभी ने दो गिलास दूध बनाए और आमलेट बनाया, हम दोनों ने नाश्ता किया.. दूध पिया.. इससे मुझमें तरोताजगी आ गई।मैंने भाभी को छेड़ते हुए कहा- भाभी मुझे थोड़ा दूध और चाहिए।भाभी मुस्कुराईं और मेरे ऊपर चढ़ गईं और अपनी चूची को मेरे मुँह में डालते हुए बोलीं- पी ले.. मेरे राजा.. ले पी ले.. ताजा दूध भी सेहत के लिए अच्छा होता है।
अब तक मेरा लंड फिर से सलामी देने लगा.. मैंने भाभी को खड़ा किया और उनसे लौड़े पर बैठने के लिए बोला।
भाभी तुरन्त ही मेरे लौड़े को चूत के छेद में सैट करके उस पर सवार हो गईं। फिर मैं उनकी चूची को जोर से मसलते हुए उनकी चूची से दूध पीने का असफल प्रयास करने लगा। कभी मैं उनकी घुंडी को काटता.. तो कभी उनकी चूची को पूरा अपने अन्दर लेने का प्रयास करता।इधर भाभी की बुर में खुजली होने लगी थी और वो धीरे-धीरे ऊपर नीचे हो रही थीं।मैंने भाभी से कहा- जोर से करो न..तो बोलीं- पहले मेरा दूध तो पीना बन्द करो.. जब तो जोर से चोद पाऊँ तेरे लौड़े को..
मैंने तुरन्त ही चूची को पीना छोड़कर उनकी कमर को पकड़ लिया और भाभी की चुदाई की स्पीड धीरे-धीरे बढ़ने लगी।इधर उन्होंने अपनी स्पीड बढ़ाई.. उधर हम दोनों के मुँह से ‘आहह..उ.. आह..उह..’ और नीचे से ‘फच-फच’ की आवाजें आने लगी थीं।
भाभी अब तेज-तेज मुझे चोद रही थीं और उनकी चूचियाँ भी उसी तरह उछल रही थीं।‘मेरे राजा.. पता नहीं क्या बात है तेरे में.. कि मैं अपने चोदू पति से हटकर तेरे से चुदवाने के लिए अपने मायके में आ गई हूँ.. आह्ह.. मेरे राजा तेरे घोड़े की सवारी मेरी चूत को बड़ी रास आ रही है।’
‘भाभी.. मैं जाने वाला हूँ..’‘कोई बात नहीं मेरे राजा.. मेरा भी आने वाला है।’
बस एक मिनट बाद ही मैं और भाभी दोनों साथ झड़ गए।भाभी उतरीं और घुटने के बल बैठ कर मेरे लौड़े को चाट-चाट कर पूरी मलाई चट कर गईं।
फिर वी अपनी बुर में उँगली डाल कर अपनी मलाई निकाल कर बड़ी अदा से मेरे होंठों पर लगाते हुए बोलीं- लो जानू अभी दूध पीये हो.. अब मलाई चाट जाओ..उँगली को चाटते हुए मैं भाभी को गोदी उठाने ही जा रहा था कि अचानक दरवाजे की घन्टी बजी।मैंने भाभी से पूछा- इस समय कौन होगा?
भाभी ने भी अनजान बनते हुए कहा- देखो.. कौन है.. यदि कोई सब्जी बेचने वाला हो.. तो मना कर देना।
मैंने लुंगी पहनी और दरवाजा खोलने चला गया.. जैसे ही मैंने दरवाजा खोला.. मेरे पैरों के नीचे से जमीन खिसक चुकी थी और मैं बुत बन कर खड़ा हो गया।उधर भाभी का भी यही हाल था.. हम लोगों को तो मानो समझ नहीं आ रहा था कि यह क्या हो गया.. आने वाला गुस्से से लाल-पीला था।
मैंने तुरन्त ही दरवाजे को बन्द किया और अन्दर आकर खड़ा हो गया।
तभी एक चीखती हुई आवाज आई- तो तुम लोग यहाँ ये सब करने आए हो.. क्यों दीदी.. तुम्हारा जीजाजी से मन नहीं भरता.. जो इसको लेकर यहाँ चुदने आई हो? आज ही जीजाजी को मैं ये सब बताऊँगी।
तभी भाभी की आवाज आई- प्रज्ञा, मैं तुम्हारे हाथ जोड़ती हूँ। प्लीज, अपने जीजाजी से मत कुछ कहना।भाभी थर-थर काँप रही थीं।‘तू जो कहेगी.. मैं वो करूँगी.. तुम अपना गुस्सा शांत करो।’‘ठीक है..’अपनी आवाज को धीरे करते हुए प्रज्ञा बोली- पहले इसे यहाँ से भेजो।
मित्रो.. बबली भाभी और उनकी बहन की चुदाई की रसभरी मेरी यह कहानी आप सभी को मजा दे रही होगी। मेरी आपसे विनम्र प्रार्थना है कि मेरा उत्साह बढ़ाने के लिए मुझे ईमेल जरूर कीजिएगा।
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