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भाभी की चुदाई पठन समय: 12 मिनट पढ़ा गया: 281 बार

भाबी जी घर पे हैं-1

राज मकवाना

06 Mar 2025 को प्रकाशित

भाबी जी घर पे हैं-1
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दोस्तो, यह एक काल्पनिक कहानी है, और टी वी नाटक ‘भाबी जी घर पे हैं’ के चरित्रों पर आधारित है, इस कहानी का उद्देश्य सिर्फ यौन संतुष्टि देना है, न कि किसी भी व्यक्ति और उनकी इज्ज़त को ठेस पहुंचाना है.

रोज़ की तरह अंगूरी अपने रसोईघर में गुनगुनाते हुए खाना बना रही थी. लाल रंग की साड़ी और नीले रंग का ब्लाउज, माथे पे डाला हुआ वो उनका पल्लू और उनका वो बोड़मपना उसको और भी कामुक बना रहा था. विभूति तो क्या, सभी उन पर दिल हार जायें, ऐसी उनकी कामुक अदायें जलवे बिखेरे हुए थी.विभूति भाबी जी जैसी पड़ोसन को पाकर मानो धन्य हो गया था.

खाना बनाना जारी था कि तभी थोड़ी ही देर में रोज की तरह आदतवश भरभूती जी आ पहुंचे भाबी जी से मिलने के लिए.‘क्या हाल-चाल है भाबी जी?’ विभूति ने मुस्कुराते हुए पूछा.

‘सब ठीक बा. आप बताइए, आप केसन बा?’ लटके लेते हुए मुस्कराहट के साथ अंगूरी भाबी ने पूछा.‘बस आप एक बार हमारी ओ र देख लें!’ विभूति बड़बड़ाता हुआ बोला.‘का बोले?’ हमेशा की तरह कुछ भी न समझते हुए अंगूरी ने पूछा.‘बस यही भाबी जी की आपकी दुआयें बनी रहें!’ विभूति सुधारते हुए बोला.

‘और बताइए का चल रहा है आज कल?’ चुटकी लेते हुए अंगूरी ने भरभूती से पूछा.‘चल तो बहुत कुछ रहा है मन में वैसे, बस आपके साथ एक रात गुजारने को मिल जाये भाबी जी, माँ कसम मज़ा आ जाये!’ विभूति अपने दिली अरमान बड़बड़ाते हुए बोला.

‘का बोले भरभूतीजी… हमरी तो समझ में ही नाही आया कुछ!’ अंगूरी ने अपनी कड़छी हिलाते हुए मुस्कराहट के साथ पूछा.‘कुछ नहीं भाबी जी, आप अपनी रसोई कीजिये, हम चलते हैं.’

‘ठुक है भाई भाई भरभूती जी!’ अंगूरी ने कहा.‘वो भाई भाई नहीं, बाय बाय होता है भाबी जी.’ विभूति सुधारते हुए बोला.‘सही पकड़े हैं.’ अंगूरी जी ने अपना तकिया कलाम बोला.

‘यही तो अफ़सोस है भाबी जी, आप सिर्फ तिवारी जी का पकड़ती है, हमारा नहीं.’ मन ही मन अपनी किस्मत को कोसते हुए विभूति वहाँ से चल पड़ा.

अगला दृश्य:

रोज़ की तरह तिवारीजी फॉर्मल कपड़ों में सज कर अपने खोखे पे जाने के लिए निकले, इससे पहले सुनीता जी के घर उनके दर्शन करने चल पड़े. घर का दरवाज़े पर पहुँचते हुए अपने हाथो को जोड़ कर ‘भाबी जी घर पे हैं?’ ऐसा बोल के सुनीता से घर में प्रवेश के लिए उनकी अनुमति मांगी.सुनीता उस वक़्त अपनी सहेली के साथ फोन पर बिजी थी. तिवारीजी की आवाज़ सुन के उसने अपनी सहेली को ‘बाद में बात करती हूँ.’ ऐसा बोल फोन को काट प्रिया और तिवारीजी को प्यार से अन्दर बुलाया.

तिवारी ने जल्दी से ही सुनीता के सामने अपनी सीट धारण कर ली और मुस्कुराते हुए सुनीता से पूछा- क्या बात है भाबी जी, आपके चेहरे पे तो मुस्कान बिखरी पड़ी है, क्या बात है भाबी जी, जरा हमें भी तो सुनाइए.‘कुछ नहीं तिवारी जी, मेरी कॉलेज की सहेली का फोन था, बता रही थी कि वो आज कानपुर आ रही है.’ सुनीता हंसती हुई बोली.

‘ओह… तो कॉलेज की सहेलियों से मिलन हो रहा है, है न भाबी जी?’ तिवारी ने भी हंसते हुए पूछा.‘सहेलियाँ नहीं तिवारी जी, बेस्ट फ्रेंड बोलिए, कॉलेज के दिनों में हमारी बहुत बनती थी, और उस वक़्त हम साथ में लेस्बियन…’ लेस्बियन शब्द अपने मुंह से निकलते ही सुनीता ने अपने मुंह पे हाथ रख प्रिया और शर्मिंदगी महसूस करने लगी.लेस्बियन शब्द सुन के तिवारी को भी मानो एक झटका सा लगा और अपने नाख़ून मुंह में दबाते हुए बोला-लेस्बियन भाबी जी…?

सुनीता अपने हाथ मुंह से हटाते हुए बोली- सॉरी तिवारी जी बेस्ट फ्रेंड की आने की ख़ुशी में हड़बड़ाहट में न जाने में क्या बोल गयी.’ शर्मिंदगी के कारण उसका चेहरा लाल हो गया था और वोह और भी कामुक दिख रही थी.‘लेकिन… भाबी जी लेस्बियन…?’ तिवारी अब भी थोड़ा अस्पष्ट दिख रहा था.‘अब आपसे क्या छुपाना तिवारीजी, अब जब आधा सच बोल ही चुकी हूँ तो पूरा बता देती हूँ, लेकिन आपको मुझसे एक वादा करना पड़ेगा.’ सुनीता ने सामान्य होते हुए कहा.

‘कैसा वादा भाबी जी?’ तिवारी ने आँखे चौड़ी करते हुए पूछा, मानो कोई लाख पते की बात उसको पता चलने वाली हो.

तिवारी के ऐसा पूछते ही सुनीता ने तिवारी के हाथों को पकड़ लिया, तिवारी के लिए यह एक बहुत ही सुखद एहसास था, इससे पहले सुनीता ने कभी तिवारी को छुआ नहीं था, तिवारी तो मानो सुनीता के हाथों का स्पर्श पाकर गदगद हो गया, और अपने ही सपनों में खो गया सुनीता के साथ…

सुनीता ने तिवारी का हाथ जोर से हिलाया और उन्हें दिवास्वप्न से बाहर निकाला- कहाँ खो गये तिवारी जी?’ सुनीता ने पूछा.‘जी कहीं नहीं भाबी जी, आप कुछ बता रही थी?’ तिवारी अपने आप को ठीक करते हुए बोला.

‘जी बात दरअसल यूँ है कि…’ सुनीता बीच में ही शर्मा पड़ी.‘क्या भाबी जी?’ तिवारी ने पूछा.‘वैसे एक बात बताएं भाबी जी, आप शरमाते हुए बहुत अच्छी लग रही हैं.’ तिवारी बोला.

सुनीता तिवारी की खुशामद सुन कर हंस पड़ी और बात को आगे बढ़ाते हुए कहा- तिवारी जी दरअसल बात उन दिनों की है जब मैं कॉलेज के पहले साल में थी, मेरी एक सहेली थी, मतलब कि है दिया उसकी और मेरी खूब बनती थी, और उन दिनों हम एक ही हॉस्टल के रूम को शेयर करते थे, दिया को सेक्स मैगज़ीन पढ़ने का बहुत ही शौक था, उसके बेग में सेक्स मैगज़ीन मिल ही जाती थी, और ऊपर से वह रात को बिना कपड़ों के सोती थी.

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‘बिना कपड़ों के?’ तिवारी बीच में बोल पड़ा.‘बिना कपड़ों के मतलब न्यूड, तिवारी जी,’ सुनीता अच्छी तरह समझाते हुए बोली.‘फिर?’ तिवारी से रहा न गया और पूछ बैठा.‘वो कहते हैं न संगत का असर तो किसी पर भी होता है, धीरे धीरे मुझ पर भी दिया की सांगत का असर होने लगा और मैं भी अब रात को न्यूड सोने लगी थी.’सुनीता ने जारी रखा.

‘न्यूड?’ कौतूहल वश तिवारी ने पूछा.‘जी हाँ, तिवारीजी, न्यूड!’ मैं उस अहसास को शब्दों में बयाँ नहीं कर सकती कि नग्न अवस्था में सोने का अहसास कितना सुखद होता है.’

तिवारी बस अपनी आँखों को चौड़ी कर सुनीता को देखता रहा, सुनीता के इस रूप को इससे पहले तिवारी ने न तो कभी देखा था और नहीं कभी उनके मुख से कभी ऐसी बातें सुनी थी.

‘धीरे धीरे हमारे बीच नजदीकियां बढ़ती चली गयी, और फिर हम दोनों एक साथ लेस्बियन सेक्स करने लगी, हम साथ नहाती भी थी, और यही नहीं, जब भी छुट्टी होती थी और जब भी हम दोनों रूम पे होती थी तब हम नग्न ही रहती थी, नग्न होना मानो एक आशीर्वाद जैसा लगता था, शरीर पे कोई कपड़ों का बोझ नहीं, बिल्कुल फ्री वाला एहसास….’ सुनीता के चेहरे की मुस्कराहट बढ़ती ही जा रही थी.

‘यह सब आप हमें क्यों बता रही है भाबी जी?’ तिवारी ने पूछा.‘दरअसल, मुझे आपकी हेल्प चाहिए तिवारी जी.’ सुनीता ने अपने हाथों की पकड़ को मज़बूत करते हुए कहा.‘मदद? कैसी मदद?’ तिवारी के मन में मनों लड्डू फूट रहे थे, वो सोच रहा था कि शायद उस पल का ज़ल्दी से ही अंत होगा जिसका उसको बेसब्री से इंतज़ार था, सालों की तपस्या मानो खत्म होने को थी, उसने सोचा कि शायद सुनीता उसको अपना नंगा बदन दिखाना और उसके साथ सोना चाहती हो.

‘मैं चाहती हूँ कि आज की रात विभूति आप के यहाँ गुज़ारे!’ सुनीता के बोलने पर तिवारी सपनों से बाहर आया, उसे कुछ समझ नहीं आया लेकिन उसे लगा कि कोई बहाना बनाकर सुनीता विभूति को दूर करना चाहती है और आज रात के लिए उनको इनवाइट कर रही है.

‘बेशक भाबी जी, विभूति जी आज रात मेरे घर पे ठहर सकते हैं.’ तिवारी के चेहरे पे मुस्कान मानो असीम सी लग रही थी.‘आप जानते नहीं तिवारी जी, यह कहकर आपने मेरे मन का कितना बोझ हल्का कर प्रिया, आज जब शाम को दिया आएगी, तो फिर हम दो सहेलियाँ फिर से एक साथ वो लेस्बियन वाला रोमांस कर सकेंगी… थैंक यू, सो मच तिवारी जी, आई लव यू!’ यह बोलते हुए सुनीता ने तिवारी के गाल पर एक पप्पी दे दी, तिवारी को इसकी अर्चना भी न थी लेकिन इसके साथ साथ जो सुनीता उसको लेस्बियन लव की बात कर रही थी उसकी भी अर्चना न थी.

सुनीता से पूरा सच जानने के बाद तिवारी ने विभूति को अपने घर आश्रय देने को टालने के लिए कहा की- लेकिन भाबी जी एक दिक्कत है.सुनीता ने तिवारी की तरफ एक सीरियस लुक देते हुए और अपने होंठ गोल करते हुए पूछा- क्या दिक्कत है तिवारी जी?‘दरअसल बात यूं है कि जब विभूति जी रात को हमारे यहाँ ठहरेंगे और आप जब अपनी लेस्बियन फ्रेंड दिया के साथ यहा कामुक सुख का आनन्द ले रही होंगी, उस वक़्त हम भी तो अंगूरी के साथ प्यार कर रहे होंगे न? तो फिर भभूतिजी कोई दखल करेंगे तो?’ तिवारी ने अपनी मुश्किल जताई.

‘तिवारी जी, कम ओन, एक दिन के लिए क्या आप अंगूरीजी को नहीं पेलेंगे तो कोई फर्क पड़ेगा? वैसे भी अंगूरीजी तो आप के पास ही रहेंगी, आप जब चाहे उनको पेल सकते हैं, उससे प्यार कर सकते हैं, लेकिन दिया? दिया तो कल शाम को ही चली जाएगी, क्या आप एक दिन मेरे लिए इतनी सी कुर्बानी नहीं दे सकते? आपको मेरी कसम आप मना नहीं करेंगे.’ सुनीता के स्वर में विनती भाव स्पष्ट हो रहा था.

‘ठीक है भाबी जी, अब आपने कसम दे दी तो हम इतना जरूर करेंगे आपके लिए, लेकिन आपको भी हमसे एक वादा करना होगा.’ तिवारी के मुख पे मुस्कान थी.‘कैसा वादा तिवारी जी?’ सुनीता ने आश्चर्यवश पूछा.‘आप जब अपनी फ्रेंड दिया के साथ लेस्बियन रोमांस कर रही होंगी उसकी कुछ झलक आप हमें भी दिखाएंगी.’

तिवारी की यह बात सुन सुनीता थोड़ा हचमचा सी गयी लेकिन फिर अपने आपको सामान्य करते हुए बोली- आज रात को तो नहीं तिवारी जी, हाँ लेकिन यह वादा करती हूँ आपसे कि कल जब आप आएंगे मेरे घर तो में आपको वो सब बताऊँगी जो हम दोनों इस रात को साथ साथ करेंगी. और हाँ उसके जाने के बाद आपको मेरी सेक्सी बॉडी के दर्शन भी करवाऊँगी, और मौका मिला तो आपको जन्नत की सैर भी करवाऊँगी, बोलो है सौदा मंज़ूर?’ सुनीता ने तिवारी की तरफ हाथ आगे बढ़ाया.

तिवारी ने जरा भी पल न गंवाते हुए सुनीता से हाथ मिला लिया- याद रखना अपना सौदा भाबी जी, भूल मत जाना इस नाचीज़ को!’ यह बोलते हुए तिवारी जाने के लिए खड़ा हुआ.और जैसे ही दरवाज़े की और मुड़ा ही था कि सुनीता ने तिवारी का हाथ फिर से पकड़ लिया, तिवारी फिर उनकी तरफ मुड़ा, सुनीता ने तिवारी के फेस को अपने दोनों हाथों से पकड़ा और एक टाइट किस तिवारी के होंठो पे दी- आई लव यू तिवारी जी!और उन्हें हग कर लिया. सुनीता की सख्त चूचियां तिवारी जी के सीने में गड़ सी गई.

तिवारी ने भी उन्हें जोर से बांहों में भींचते हुए ‘आई लव यू टू’ बोला और फिर अपनी जगी हुई किस्मत पे नाज़ करते हुए निकल पड़े खोखे की ओर…

भाबी जी की कहानी जारी रहेगी.

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भाबी जी घर पे हैं-2

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भाबी जी घर पे हैं

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प्रेषक : अमित खण्डेलवाल

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