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चुदाई की कहानी पठन समय: 13 मिनट पढ़ा गया: 575 बार

बर्थडे सेलिब्रेशन-1

सनी वर्मा

20 Apr 2020 को प्रकाशित

बर्थडे सेलिब्रेशन-1
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दोस्तो, आप मेरी कहानी पसंद करते हैं. आपके मेल से ये पता लगता रहता है.मेरी पिछली सेक्सी स्टोरीबिजनेस की सीढ़ी बना सेक्सभी सबने पसंद की.

आज की कहानी ‘बर्थडे सेलिब्रेशन’ कई किस्सों को मिलकर बनी है. पूरी पढ़ियेगा, आनन्द आ जायेगा.

एक पॉवर प्लांट के निर्माण में इंजीनियर्स/सुपरवाईजर्स की टीम लगी हुई थी. सभी एक ही उम्र वर्ग के थे. मतलब 30-32 वर्ष के आस पास.

चूंकि कॉलोनी के निर्माण में अभी वक़्त था तो दो इंजीनियर्स अनिल और विशाल के रुकने की व्यवस्था कम्पनी ने एक स्थानीय होटल में कर दी थी.

छोटा शहर था. ज्यादा होटल नहीं थे. होटल की तीसरी मंजिल पर पांच कमरे थे. कंपनी ने सभी एक साल के लिए ले लिए थे. दो कमरे तो इन्हीं इंजीनियर्स ने ले लिए. एक में ऑफिस बना रखा था. एक खाली रखा था, कभी कोई और अधिकारी आ जाए इस लिए.

दोनों इंजीनियर्स एक-दो साल के शादीशुदा थे पर अपनी बीवियों को कोई नहीं लाया था कि एक बार सेटेल हो जाएँ तब लायेंगे.

अनिल और विशाल दोनों रात को प्लांट से इकट्ठे लौटते. दोनों को पीने का शौक था तो पेग लगाते और जितने अश्लील मजाक कर सकते थे कर के सो जाते.

सेक्स का बहुत शौक़ीन था विशाल … उसकी मजबूरी थी कि बीवी को छोड़कर यहाँ रहना पड़ रहा था. वो हर दस दिन में घर जाता और आकार बताता कि दो दिन सुबह शाम सिर्फ चुदाई की है.वो और उसकी बीवी रिंकी रोज रात को विडियो चेट करते हुए विडियो सेक्स करते.

विशाल अनिल को बताता था कि वो और उसकी बीवी दोनों रात को नंगे होकर विडियो चेट करते हैं. विशाल रोज रिंकी को दिखाकर मुठ मारता और रिंकी भी रोज विशाल को दिखाकर अपनी चूत में डिलडो करती.

अनिल को भी विशाल ने अब ये शौक लगा प्रिया था. अब दोनों ड्रिंक लेते समय पोर्न मूवी भी देखते.

इन दोनों को खाने-नाश्ते दिक्कत थी. उन्होंने साईट पर चौकीदार रामसिंह से किसी मेड के लिए कहा तो वो बोला- साब अपनी घरवाली को बोल देता हूँ, वो सुबह-शाम आकर बना प्रिया करेगी. उसे रसोई का काम बहुत अच्छे से आता है क्योंकि पहले वो किसी बड़े अधिकारी की कोठी पर काम करती थी और वहीं रहती थी. अतः उसे बड़े अधिकारियों की खाने पीने की आदतों की जानकारी थी.

अगले दिन सुबह ही राम सिंह अपनी घरवाली शीला को लेकर आ गया. शीला कहने को चौकीदार की घरवाली थी. पर मांसल बदन की गोरी और सलीकेदार बल्कि विशाल की निगाहों में सेक्स बम थी. उसके भरे हुए मम्मे और ऊँचा ब्लाउज … विशाल का तो खड़ा हो गया था.

राम सिंह के कोई बच्चा नहीं था. तो शीला की जवानी बरकरार थी. विशाल ने शीला को हाँ कह दी.

और ये तय हुआ कि चूंकि राम सिंह का क्वार्टर साईट पर ही है और वो तो बिल्डिंग में रात की ड्यूटी पर रहता है और शीला घर पर अकेली. तो शीला शाम को अनिल और विशाल के साथ ही गाड़ी में होटल आ जाया करेगी. नाश्ता खाना बनाकर वो ऑफिस में ही सो जाया करेगी और सुबह जल्दी उठकर ऑफिस साफ़ कर के इन दोनों का नाश्ता बना प्रिया करेगी और दोपहर का खाना पैक करके इनके साथ ही साईट पर आ जायेगी और फिर अपने क्वार्टर में जाकर अपने घर का काम निबटा लेगी.

राम सिंह एक बार हिचकिचाया पर विशाल ने तीन हजार रूपये देने की बात कि तो उसे भी लालच आ गया. कभी कभी अनिल उसे बची हुई व्हिस्की भी दे देता था तो इस लालच में राम सिंह ने हाँ कह दी.

उस दिन शाम को तय बात के अनुसार शीला इनके साथ होटल आ गयी. शीला बहुत साफ़ सुथरी और सलीकेदार लग रही थी.विशाल तो अनिल से बोला- इस लंगूर रामसिंह को ये हीरा कहाँ से मिल गया?

रास्ते में और होटल पहुंचकर बातूनी शीला इन दोनों से बहुत ही मिलनसार हो गयी थी. उसकी बातचीत में भी सलीका था. होटल पहुँचते ही उसने पहले तो कमरे कि गंदगी को देख कर मुँह बिचकाया और होटल वाले को दस गाली दीं.

होटल के जिस कमरे में ऑफिस बना था उसके बाथरूम को ही फिलहाल किचन बना रखा था.

शीला ने विशाल से कहा- बाबू, हम कल आपके साथ साईट पर नहीं जायेंगे. आप हमें दो हजार रुपया देना, हम राशन लाकर किचन सेट करेंगे और आप लोगों का रूम भी साफ़ करेंगे.उसने ये बात इतने अधिकार से कही कि विशाल से कोई जवाब देते नहीं बना. उसने चुपचाप उसके हाथ में दो हजार रूपये रख दिए और बोला- फटाफट चाय बना दो.

शीला बोली- आज तो सिर्फ चाय मिलेगी पर कल से चाय के साथ गर्म गर्म नाश्ता भी मिलेगा.

अनिल के कमरे में बैठ कर चाय पीकर दोनों की तबियत खुश हो गयी.

तब तक शीला ने विशाल का कमरा थोड़ा बहुत ठीक कर प्रिया. शीला ने आकर पूछा- खाने में क्या बनाऊं?क्योंकि राशन तो कुछ नहीं था तो अनिल बोला कि हमें रात को ड्रिंक करने की आदत हैं, पर इससे तुम्हें कोई परेशानी नहीं होगी, तुम खाना बनाकर सोने चली जाना.

इस पर शील मुस्कुरा कर बोली- देखो बड़े साब, मुझे तो सब आदत है. इससे पहले जहां मैं काम करती थी वहां तो साब और मेम साब दोनों पीते थे, तो उन दोनों को रात में खाना खिलाकर सारा काम समेटकर ही मैं जाती थी. अब आप बोलो कि अगर आप मुझे आधे घंटे का टाइम दो तो, तो मैं फटाफट नीचे से कुछ सामान लाकर आपको ड्रिंक के साथ कुछ नाश्ता देती हूँ और फिर रात को गरमा गर्म खाना.

अनिल, विशाल को लगा कि उनकी तो लाटरी निकल गयी है.

शीला नीचे जाकर पंद्रह मिनट में ही आ गयी. पता नहीं थैले में क्या भर लायी थी. दूसरे हाथ में दूध, दही, पनीर, घी के पैकेट्स थे.अनिल विशाल नहाने अपने अपने कमरे में चले गए.

विशाल जैसे ही अपने कमरे में पहुंचा तो उसे लगा कि वाकयी अब कमरा घर जैसा साफ़ था.

पर उस पर घड़ों पानी पड़ गया जब वो छोटा सा टॉवल जिस पर वो रात को अपनी बीवी से बात करते करते मुठ मारकर वीर्य निकालता था और जिसे उसने कल लापरवाही से साइड टेबल पर छोड़ प्रिया था, उसे शीला करीने से तह करके उसके तकिये के ऊपर रख गयी थी.

खैर, अनिल नहाकर उसके कमरे में ही आ गया, तब तक विशाल भी नहा लिया था.

विशाल ने शीला को आवाज लगाकर कहा- फ्रिज से आइस क्यूब ला दो.तो शीला आकर बोली- बस दस मिनट में मैं मेज लगा दूँगी, मुझे सब मालूम है.

विशाल आँखें फाड़ कर उसे देखने लगा. अनिल ने टीवी चालू किया. शीला ने आकर टेबल लगाई. व्हिस्की की बोतल उसे रखी दिख गयी थी. व्हिस्की, सोडा, गिलास, आइस क्यूब सब उसने सलीके से लगा दिए और किचन से स्नैक्स ले आई. उसने भुने काजू और पनीर काट कर लगा दिए थे.

अनिल विशाल तो खुश हो गए. आज दारु का नशा कुछ और ही होना था.

शीला बोली- आप कहो तो एक पेग मैं बना देती हूँ.इससे पहले वो कुछ बोलते, शीला ने व्हिस्की उनके गिलास में डाली और सोडा उनके हिसाब से दाल कर इसे क्यूब से टॉप उप कर प्रिया और मुस्कुराते हुए दोनों को गिलास थमा दिए.विशाल समझ ही नहीं पा रहा था कि ये सपना है या सच.

तभी शीला बोली- मैं पनीर और प्याज के परांठे सेक रही हूँ, दही अचार के साथ खा लीजियेगा. कल से जो कहेंगे बना दूँगी.

चलते चलते उसने विशाल का वो छोटा तौलिया मुस्कुराते हुए उठाकर धुलने वाले कपड़ों में रख प्रिया.विशाल कुछ नहीं बोला बस मुस्कुरा प्रिया.

आज नशा कुछ ज्यादा ही चढ़ गया था. शीला सब जानती थी तो उसने परांठे छोटे छोटे सेके. सब बातों की तारीफ़ करते करते अनिल और विशाल सोने चले गए.शीला ने भी खाना खाया और किचन संभालकर वहीं रखे गद्दे को बिछाकर लेट गयी.

शीला ने अपने कपड़े ढीले कर लिए थे. वो करवट बदल बदल सोने की कोशिश कर रही थी. अब उसने अपना पेटीकोट ऊपर किया और अपनी चूत को रगड़ने लगी.

असल में शीला राम सिंह की दूसरी घरवाली थी. राम सिंह नामर्द था. ये बात सबको मालूम थी, पर सरकारी नौकरी के लालच में शीला के घरवालों ने शीला की शादी उससे कर दी. अब शीला रोज रात को कभी उंगली, कभी मूली, गाजर करके अपनी गर्मी शांत करती.

इससे पहले वो जिन साब के काम करती थी, वहां तो उसका साब शराब में या अपने दौरों में मस्त रहता और मेमसाब सेक्स के शौक़ीन थीं, या यूं कहें कि भूखी थीं. शीला मेमसाब की मालिश करती थी तो वो पूरे कपड़े उतार कर नंगी होकर उससे मालिश करवातीं, अपनी चूत रगड़वातीं.

वहीं से शीला ने वाइब्रेटर का इस्तेमाल सीखा. मेमसाब की चूत की आग मिटा कर वो भी अपने कमरे में अपनी चूत रगड़ती.

उसने एक बार छिप कर साब और मेमसाब का सेक्स देखा. साब का लंड तो मोटा था पर शराब के नशे में साब चुदाई का मजा नहीं दे पाता था. मेमसाब उसके ऊपर चढ़ कर खूब उछाल कूद करती पर वो दो चार धक्कों में ही खाली हो जाता और मेमसाब उसे खूब भद्दी भद्दी गाली बकती.

एक बार साब का कोई मित्र उनके पास आया दो चार दिन के लिए.रात को तीनों ने शराब पी, मेमसाब और साब के दोस्त ने थोड़ी ली. साब तो अपनी आदत के अनुसार पी पीकर वहीं सोफे पर टुन्न हो गया.

मेमसाब ने शीला को भी अपने क्वार्टर में जाने को कह प्रिया और जाते जाते किवाड़ बंद करने को कह कर वो भी मेहमान से हंसी मजाक करते हुए अपने कमरे में चली गयी.

पीछे पीछे वो मेहमान भी उनके कमरे में चला गया. शीला खेली खाई थी. समझ गयी कि आज क्या होगा. वो भी किवाड़ बंद करने की आवाज कर के छिप गयी.

थोड़ी देर में जब मेमसाब के कमरे से ‘अरे छोड़ो न, सुनील आ जायेगा’ की आवाज आने लगी तो उसने कमरे में खिड़की के पीछे से झाँका. मेमसाब ने पेटीकोट और ब्रा में थीं और मेहमान अपने कपड़े उतार रहा था.

मेमसाब ने धीरे से कमरा बंद कर लिया और लाईट धीमी कर ली. शीला को सब दिखाई दे रहा था. मेहमान जिसका नाम अरविन्द था, उसने मेमसाब यानि सुनीता को पाने से चिपटा लिया था और दोनों के होंठ मिले हुए थे.अरविन्द पूरा नंगा हो चुका था और उसने सुनीता की ब्रा खोल कर उसके मम्मी आज़ाद कर दिए थे.

एक हाथ से उसने सुनीता का पेटीकोट खोल प्रिया और अब दोनों पूरे नंगे थे.

सुनीता भी भूखीं शेरनी की तरह अरविन्द को खा जाना चाह रही थी. इसी गुत्थम गुत्था में दोनों बेड पर आ गए. अरविन्द ने सबसे पहले सुनीता की चूत में अपनी जुबान दी.शीला की अब समझ में आया कि क्यों कल ही मेमसाब ने अपनी चूत उससे साफ़ करवाई थी. इसका मतलब मेमसाब और अरविन्द का पुराना याराना है.

सुनीता की कामाग्नि भड़क चुकी थी. उसने अरविन्द को अपने ऊपर खींचा और उसका लंड अपनी चूत में कर लिया.अब उनकी धक्कामार चुदाई शुरू हो चुकी थी.ये सब देख कर शीला की चूत ने पानी छोड़ प्रिया. काफी देर से उसकी उंगली भी चूत में मसाज कर रही थी. शीला बेचैन हो उठी. उसे भी लंड चाहिए था. उसके दिमाग में साब आया.

वो झट से ड्राइंग रूम में आई. साब मस्त पड़ा था. उसका गाउन भी खुला पड़ा था और उसके अंदर से उसका बरमूडा दिख रहा था. शीला ने लाईट बंद की और साब का बरमूडा नीचे कर प्रिया. साब का लंड अब उसके हाथ में फिर उसके मुँह में था.

मजे कि बात यह कि साब का लंड तना हुआ था. शीला ने फटाफट उसका लंड अपनी चूत पर सेट किया और लगी ऊपर नीचे करने. अंदर कमरे में मेमसाब और मेहमान चुदाई में लगे थे यहाँ शीला साब का चोदन कर रही थी. साब ने जल्दी ही सीला की चूत में फव्वारा छोड़ प्रिया.

शीला की आग बुझी नहीं थी. उसके दिमाग में क्या आया … वो सीधी मेमसाब के कमरे में घुस गयी. अरविन्द सुनीता की टांगों को ऊपर कर के जबरदस्त चुदाई कर रहा था. शीला घुस तो गयी पर उसे देख कर सुनीता और अरविन्द की साँसें रुक गयी और शीला भी घबरा गयी और वापिस भाग कर अपने क्वार्टर में आ गयी.

उसे सुनीता ने बहुत आवाज दी पर उसने दरवाजा नहीं खोला.

कहानी जारी रहेगीsupport@mohakkisse.com

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बर्थडे सेलिब्रेशन

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लेखक : माइक डिसूज़ा

14 मिनट 417

पाठकों की राय

1 टिप्पणी

कर्तिक शर्मा

2 months ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

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