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चाची की चुदाई पठन समय: 8 मिनट पढ़ा गया: 610 बार

बुआ की सील तोड़ चुदाई -1

जीत सिंह

11 Dec 2014 को प्रकाशित

बुआ की सील तोड़ चुदाई -1
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मैं एक बड़े परिवार में रहता हूँ। मेरे घर में 4 लोग हैं, मेरे पापा (46), मेरी मम्मी (42), मैं (20), मेरी छोटी बहन (17) और एक छोटा भाई (10) हैं।मेरा परिवार बहुत बड़ा है, मेरे दादाजी के दो छोटे भाई और हैं, मेरे तीनों दादाजी का परिवार पास-पास ही रहता है।मेरे बीच वाले दादाजी से मेरे दोनों दादाजी की नहीं बनती है। मेरे सबसे छोटे वाले दादाजी के तीन बेटे मतलब मेरे चाचा और चार बेटियाँ.. यानि मेरी बुआ हैं.. जिनमें से एक चाचा और एक बुआ क्रमशः एक साल और 4 साल छोटे हैं।

यह कहानी मेरी ओर मेरी बुआ के बारे में है।हमारे गांव में मेरे पिताजी के दादाजी की बनाई हुई एक बहुत बड़ी हवेली है.. जिसमें मेरे पापा अपने बचपन से ही रहते हैं, मेरा पूरा परिवार शुरू से ही वहीं पर रहता है।मेरे दादाजी मेरे दोनों चाचा जी के साथ हमारे खेत पर ही रहते हैं। वहीं पर दोनों दादा जी और उनका परिवार भी रहता है।

मेरी बुआ.. जिसका नाम पार्वती है.. उसने अभी-अभी स्कूल की पढ़ाई पूरी की है, वह 18 साल की है, उसका शरीर बहुत ही कामुक है। मैं उसके जिस्म के साईज के बारे में सही-सही तो नहीं बता सकता मगर उसका जिस्म ऐसा है कि अगर कोई भी उसे देख ले.. तो उसे चोदने के लिए तड़प उठे।उसका रंग गोरा नहीं है.. मगर फ़िर भी उसके ऊपर दिल मचल जाता है।मैं और मेरी बुआ पार्वती एक-दूसरे के साथ दोस्ताना किस्म का व्यवहार करते हैं।

यह 2013 की बात है.. जब मेरी बुआ की लड़कियों की शादी थी.. हम सभी लोग वहाँ गए हुए थे। वहाँ पर सभी लोग शादी में व्यस्त थे और मेरे पास बैठकर कोई बात करने वाला नहीं था.. तो मैंने पार्वती को साथ लिया और पास ही पहाड़ों पर जाकर एक बड़े से पेड़ के नीचे पत्थरों पर बैठ कर बातें करने लगा।पहाड़ के ठीक नीचे से ही मुख्य सड़क गुजरती है और पास ही एक हैण्डपम्प है.. जिस पर सारे दिन गांव की औरतें और लड़कियाँ पानी भरती हैं।

हम दोनों ऐसी जगह पर बैठे थे.. जहाँ से हम पूरे गांव को देख सकते थे.. पर हमें वहाँ पर कोई नहीं देख सकता था। मैं हमेशा से ही उसे चोदना चाहता था और इस समय मेरे पास मौका भी था। मैं उसे कहीं पर भी हाथ लगा देता था.. लेकिन मेरे इस तरह हाथ लगाने का उसने कभी विरोध नहीं किया।

लेकिन मैंने भी कभी उसे ऐसी जगह से नहीं छुआ.. जहाँ पर उसे आपत्ति हो.. यानि मैंने कभी उसके उभारों या उसकी जांघों पर हाथ नहीं लगाया था। ज्यादातर यह होता था कि मैं उसके गले में हाथ डालकर उसको अपनी ओर दबाते हुए चलता था।हम वहाँ भी ऐसे ही बैठे थे। मैंने उसके गले में अपना हाथ डाल रखा था। मैं वहाँ पर बैठे-बैठे इधर-उधर की बातें कर रहा था कि अचानक सामने की सड़क पर एक सेक्सी लड़की पानी लेने के लिए जा रही थी।

मेरे मुँह से अचानक निकला- वाह.. क्या माल जा रहा है.. एक बार नीचे आ जाए तो मजा आ जाए।मैं उस लड़की को देखकर पार्वती को भूल गया।उसने ने तपाक से कहा- उसके आने से तुझे मजा कैसे आएगा और वो लड़की तुझे माल कहाँ से दिखी? अगर वो माल है.. तो क्या मैं माल नहीं हूँ? और मैं तो तेरे पास ही बैठी हूँ.. ला बता तुझे मजा कैसे आएगा?

मैं- ठीक है.. एक नमूना तो देख ही लेते हैं।पार्वती- ठीक है।असल में मैं उसे किस करना चाहता था, जिसको वो समझ नहीं रही थी। मेरा हाथ उसके गले में तो था ही.. मैंने अपना हाथ वहाँ से निकाल कर उसके बालों में पीछे से इस तरह घुसाया कि उसका पूरा सिर मेरे गिरफ्त में ही रहे।

वो पहले से मेरी ओर देख रही थी.. तो मुझे सिर्फ उसको अपनी तरफ खींचना ही था। कुछ मैं आगे हुआ और कुछ उसके सिर पर दबाव डालकर उसे अपनी ओर खींचा। मैं इस मौके को किसी भी हालत में गंवाना नहीं चाहता था.. इसलिए मैंने तुरन्त ही उसके होंठों को अपने होंठों की गिरफ्त में ले लिया।मैंने जैसे दोनों के होंठ मिलाए.. वो इसका विरोध जताकर मुझसे अपने होंठों को छुड़ाने की मशक्कत करने लगी।

पर मैं भी राजस्थानी गबरू जवान था.. वो जैसे मुझसे अपने होंठों को छुड़ाने की कोशिश करती.. वैसे ही मैं उनका रस पीने के लिए उसको खींचने का अन्दाज तेज कर देता। लगभग 5-6 मिनट वो कोशिश करती रही.. पर मैंने उसे ढीला नहीं छोड़ा।

इसके बाद उसने कोशिश करनी छोड़ दी.. पर वो अब भी मेरा साथ नहीं दे रही थी। करीब 2-3 मिनट बाद उसके हाथ मेरे कन्धों से होते हुए मेरी पीठ पर जाकर आपस में जुड़ गए और उसकी आँखें बन्द हो गईं।अब उसने कुछ-कुछ साथ देना शुरु किया.. पर अब भी वो ठीक से मेरा साथ नहीं दे पा रही थी.. शायद यह इस कारण था.. क्योंकि ये उसका पहली बार था।

मुझे लम्बी चूमा-चाटी करना ज्यादा पसन्द है.. इसलिए मैं काफी देर तक लगा रहा।अब मैंने अपने बाएँ हाथ को उसके गाल पर रखा और उसे सहलाते हुए उसकी गर्दन से होते हुए.. उसके कन्धे पर लाया।उसने बन्द गले और लम्बी आस्तीन का सूट पहना था.. इसलिए मुझे कन्धे से होते हुए अपने हाथ को उसके हाथ पर सहलाना बेकार सा लगा.. तो फिर मैं अपने हाथ को उसके सूट के ऊपर से ही उसके बायें चूचे पर लाया।

कुछ समय मैंने अपने हाथ को उसके चूचे पर रखा.. लेकिन उसने इसका अहसास नहीं किया.. शायद वो होश में नहीं थी।पर मैंने इसे उसकी स्वीकृति समझी और जैसे ही मैं उसके स्तनों को दबाने और सहलाने की कोशिश करता.. उसने तुरन्त इसका विरोध जताना चालू कर दिया। उसने पहले अपने हाथ से मेरा हाथ झटका और फिर से अपने होंठों को छुड़ाने में मेहनत करने लगी।

मैं जानता था कि मैं अब भी उसे अपने बस में कर सकता था.. पर मुझे उसी समय एक कहावत याद आ गई।‘अति सर्वत्र वर्जयेत..’

इसलिए मैंने अब उसे छोड़ने मैं अपनी भलाई समझी और मुझे सिर्फ उसे किस ही थोड़े करना था, मैं तो उसे चोदना भी चाहता था.. इसलिए मैंने उसे छोड़ दिया.. पर उसने बहुत देर तक आँखें नहीं खोलीं।

फिर जब उसने अपनी आँखें खोलीं तो उसके चहरे पर कुछ मुस्कान और कुछ शर्म थी, मैं लगातार उसे देखे जा रहा था।अब उसने धीरे से अपनी नजरें ऊपर उठाईं और मेरी आँखों में देखा और जिस पल हमारी नजरें मिलीं.. उसने तुरन्त ही अपनी नजरें वापस झुका लीं.. और खड़ी होकर जाने लगी तो मैंने तुरन्त उसका हाथ पकड़ लिया।उसने एक बार अपना हाथ घुमाया और मैंने झट से उसका हाथ छोड़ दिया और वो बिना मुड़े भाग गई।

मुझे इस बात का कोई डर नहीं था कि वो किसी को इस बात का ज़िक्र करेगी.. क्योंकि अब जब भी वो मेरे सामने आती थी.. तो उसके चहरे पर एक अजीब सी मुस्कान रहती थी।

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बुआ की सील तोड़ चुदाई

कुल भाग: 3
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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

सौरभ एम

3 weeks ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

आशीष गर्ग

4 weeks ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

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