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कोई मिल गया • पठन समय: 8 मिनट • पढ़ा गया: 653 बार

चलती बस में सेक्स भरी मस्ती

रेनू रवि

26 Dec 2017 को प्रकाशित

चलती बस में सेक्स भरी मस्ती
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बात उन दिनों की है जब मैं हॉस्टल में रहती थी। मेरी रूम पार्टनर रीमा मुझसे तीन साल सीनियर थी, उसके कई बॉय फ्रैंड थे।कई बार जब वो आते थे तो रीमा किसी बहाने से मुझे बाहर भेज देती थी।

एक बार जब मुझे शक हुआ तो मैं बाहर तो गई लेकिन दोनों पैरों में अलग-अलग तरह की चप्पल पहन कर।पंद्रह मिनट के ही बाद मैंने अपने रूम का दरवाजा खटखटाया।अंदर से रीमा की भारी आवाज आई- ..कौन है।मैंने कहा में हूँ रेनू।

रीमा ने कहा- क्या हुआ? इतनी जल्दी क्यों लौट आई?मैंने कहा- जल्दी जल्दी में दोनों पैरों में अलग-अलग चप्पल पहन ली थी। बदलने आई हूँ, बस दस सैकेंड की बात है, चप्पल बदल कर चली जाऊंगी।

मेरी बात सुनकर रीमा ने दरवाजा खोल प्रिया।वो पसीने से लथपथ थी।मैंने चौंकते हुए पूछा- तबीयत ठीक है?उसने झुंझलाते हुए कहा- चप्पल पहनो और दफा हो जाओ।मैंने देखा कि रीमा का बॉय फ्रैंड अमित चादर ओढ़ कर लेटा हुआ था।

चप्पल बदल कर मैं रूम से चली गई।करीब एक घंटे बाद लौटी तो रीमा रूम में अकेली थी।मामला मेरी समझ में आ गया था, फिर भी अनजान बनते हुए मैंने पूछा- क्या हो रहा था?

रीमा ने कहा- यार, तुझे तो जरूरत नहीं है लेकिन मुझे तो लंड की जरूरत होती है। बस इसीलिये तुझे बाहर भेजती हूँ। तुझे जरूरत हो तो बता देना।

मैंने कहा- नहीं रीमा.. घर पर खबर लग गई तो मुश्किल होगी। कॉलेज में मेरे कई परिचित हैं।रीमा ने कहा- चिंता मत कर, जहाँ चाह वहाँ राह… अगर तुझे मजा लेना हो तो इंतजाम कर दूँगी।अब मस्ती से किसे इंकार था, मैंने भी हाँ कर दी।

अगले महीने मुझे अपने घर लखनऊ जाना था।रीमा का भी एक रिश्तेदार वहाँ रहता था, वो भी साथ चलने को तैयार हो गई।रीमा ने कहा- इस बार बस से लखनऊ चलेंगे। वोल्वो बस से रात का सफर करेंगे, उसमें सोने का इंतजाम भी होता है।

मैंने हाँ कर दी और घर वालों को भी खबर कर दी।

तय समय पर मैं और रीमा बस स्टैंड पहुँच गये।हमें ऊपर की बर्थ मिली थी। एक साथ दो लोगों के सोने का इंतजाम था। सामने प्राइवेसी के लिये पर्दे भी लगे थे, बस का इंतजाम देख कर मैं बहुत खुश हुई।

बस चलने वाली ही थी कि तभी अमित अपने एक दोस्त पवन के साथ बस में घुसा।उन दोनों की बर्थ हमारे सामने वाली थी।

मैंने चौंक कर रीमा से पूछा- इन लोगों को हमारे सफर का कैसे पता चला?रीमा ने बताया कि उसने दोनों को प्रोग्राम बताया है और आज रातबस में मस्तीकरनी है।

मेरी दिल की धड़कने तेज हो गई थी… बस में मस्ती…!! …यह लड़की तो मुझे मरवा देगी।मैंने रीमा से कहा- अगर किसी ने देख लिया तो?रीमा बोली- बस की सवारियों को देख ले.. सभी अंजान हैं। हर बर्थ पर परदे हैं और फिर भी अगर देख भी लेंगे तो क्या हुआ। सुबह तो हम अपने घर की तरफ निकल जाएंगे।

मैंने कहा- अमित को तो मैं जानती हूँ। तुझसे मिलने आता है लेकिन ये पवन?रीमा बोली- चिंता मत कर, पवन के साथ मैं मस्ती कर लूंगी, तू भरोसेमंद अमित के साथ रहना।मैंने हाँ तो कर दी लेकिन दिल बहुते तेजी से धड़क रहा था।

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बस के चलने पर मैं और रीमा एक बर्थ पर लेटे थे जबकि अमित और पवन हमारे सामने वाली बर्थ पर थे। थोड़ी ही देर में बस की लाइट बंद हो गई और बस में अंधेरा हो गया।

चलती बस में काफी शोर हो रहा था।रीमा ने पूछा- अंधेरे में कुछ दिख रहा है?मैंने कहा- हाँ दिख तो नहीं रहा है।मेरे इतना कहते ही रीमा ने अपने होंठ मेरे होठों से सटा दिये और उन्हें पीने लगी।

इसके बाद उसने मेरी चूचियाँ भी दबाई।मैं भी पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी।

करीब एक घंटे बाद बस किसी ठिकाने पर रूकी और कंडक्टर ने आवाज लगाई- किसी को टायलेट जाना हो तो नीचे उतर ले।रीमा ने कहा कि वो टॉयलेट जाना चाहती है और नीचे उतर गई।उसके साथ बमुश्किल तीन लोग नीचे उतरे, बाकी लोग बस में गहरी नींद में थे।

थोड़ी देर में रीमा वापस लौटी लेकिन वो सामने की सीट पर चली गई जहाँ पवन लेटा था।उसके साथ ही बस से नीचे उतरा अमित मेरी सीट पर आ गया था।सीटों की अदला-बदली हो चुकी थी और किसी को कानों कान खबर भी नहीं हुई।

अमित को अपने पास पाकर मैं घबरा गई।अमित ने बर्थ के सामने लगा पर्दा खींच कर बंद कर प्रिया था, उसने मुझे बाहों में दबोचना चाहा लेकिन मैं घबरा गई।अमित बोला- ऐसे कैसे काम चलेगा मैडम? आपकी सहेली रीमा तो कुश्ती लड़ रही होगी।मैंने कहा- नहीं अमित, बस में ऐसे थोड़ी होता है।

अमित बोला- ठीक है, दिखा देते हैं।उसने वहीं से रीमा को फोन मिलाया।फोन साइलेंट मोड पर था इसलिये आवाज तो नहीं आई लेकिन रीमा ने फोन उठा लिया।अमित ने उसे पूरी बात बताई।

रीमा ने कहा- ठीक है, वीडियो कॉल लगाओ.. मैं कॉल रिसीव करूंगी इसके बाद उसकी बर्थ का पूरा नजारा अमित और मैं भी देख लेंगे।अमित ने वीडियो कॉल लगाई और रीमा ने उसे रिसीव कर लिया। इसके बाद फोन को ऐसे ऱखा कि सब कुछ नजर आये।अमित के फोन में पिक्चर काफी धुंधली थी लेकिन समझ में आ रहा था कि क्या हो रहा है।पवन ने रीमा को दबोच रखा था और उसकी चूचियाँ पी रहा था।

थोड़ी देर में रीमा ने इशारा किया तो पवन उठ कर बैठ गया। अब रीमा घुटने के बल बैठ गई और अपनी चूचियाँ पवन के मुंह के आगे कर दी।पवन पागलों की तरह रीमा की चूचियाँ पी रहा था।अचानक उसका एक हाथ रीमा की चूत में गया तो रीमा जोर जोर से उछलने लगी, बस की तेज आवाज में चुदाई की आवाज दब कर रह गई थी।

अचानक रीमा नीचे बैठी और पवन का लंड रीमा की चूत में घुस गया, उसकी गांड तेजी से थिरक रही थी, दोनों बैठे-बैठे चुदाई कर रहे थे।मैंने हाथ बढ़ाकर अमित का फोन बंद कर प्रिया।

अमित ने तेजी से शर्ट उतारी और बोला- अब कंट्रोल नहीं हो रहा।मैंने भी अपनी टी शर्ट उतार दी थी, अमित मेरी चूची चूसने लगा, मेरी चूत से काफी पानी निकल रहा था।मैंने अमित से कहा- चूत बहुत गीली हो गई है, किसी कपड़े से पौंछ लेती हूँ।अमित कहने लगा- बस यही समस्या है?

वो नीचे की तरफ झुका और मेरी चूत पीने लगा।मेरे बदन में आग लग गई थी, मैंने अमित का लंड पकड़ कर अपनी तरफ खींचा।अमित मेरा इशारा समझ गया था, वो सिक्स नाइन की पोजीशन में आ गया और थोड़ी ही देर में हम दोनों के हथिय़ारों से पिचकारी छूट गई थी।

थोड़ी देर आराम करने के बाद हम सो गये।आँख खुली तो सुबह के पांच बजे थे।बाहर के नजारा देखते हुए हमने चुदाई का एक राउंड और किया जिसके बाद अमित चुपचाप मेरी सीट से हट गया और रीमा मेरी सीट पर आ गई।हम दोनों के चेहरे पर जीत की मुस्कान थी।support@mohakkisse.com

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मैं कहानियाँ लिखता भी रहा हूँ और पढ़ता भी रहा हूँ पर पूजा वर्मा की कहानी मुझे बहुत अच्छी लगती है।

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पाठकों की राय

3 टिप्पणियां
ग

गुरु 1090

3 months ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

र

रिकी सिंह

3 months ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

आ

आकाश राठी

3 months ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

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