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आज दिल खोल कर चुदूँगी-19

नेहा रानी

15 Oct 2023 को प्रकाशित

आज दिल खोल कर चुदूँगी-19
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मैं देश दुनिया से बेखबर बुर चुदाती रही ताबड़तोड़ चुदाई से मेरी बुर पानी छोड़ रही थी। तभी उसका लण्ड मेरी चूत में वीर्य की बौछार करने लगा। मैं असीम आनन्द में आँखें बंद करके बुर को लौड़े पर दबाकर उसके गरम वीर्य को बुर में लेने लगी।तभी उसने अपना लण्ड बाहर खींच लिया। सट.. की आवाज करता लण्ड बाहर था.. और मैं खड़ी होती… इससे पहले वह गायब हो गया।

मैं भी नीचे बाथरूम में जाकर चूत साफ करके मेकअप आदि ठीक करके बाहर आकर महमूद के पास बैठ गई। देखा कि डिनर भी आ चुका था। अब लण्ड खाने के बाद भूख भी जोरों से लगती है न..

अब आगे..

डिनर करने के बाद हम लोग सीधे कमरे पर पहुँचे और महमूद ने मुझे उसी ड्रेस में रहने को बोला.. जिस ड्रेस में मैं थी।मैं सोफे पर बैठ गई.. मेरे पास ही महमूद भी बैठकर मेरी जांघ सहलाते हुए बात करने लगे।

‘पूजा.. आज जो लड़का आ रहा है.. संजय राना.. वो बहुत ही मस्त कद-काठी का है.. तुम देखोगी तो तेरी बुर पानी छोड़ने लगेगी.. और मैं जो ड्रिंक लेने को बोल रहा था.. वो इसलिए कि संजय राना का लण्ड एक सामान्य लण्ड नहीं है.. जैसा कि तुमको आज तक मिला होगा और तुम चूत में ले चुकी होगी। तुम्हारी जानकारी के लिए बता रहा हूँ.. अगर तुम सब बात जानकर मना करोगी संजय राना से चुदने के लिए.. तो मैं संजय राना को नहीं बुलाऊँगा..आज तक तुम बहुत मोटे लण्ड से चूत मरवाई होगी.. पर संजय राना का लण्ड बहुत ही लम्बा और मोटा लण्ड कहना गुनाह है। संजय के लण्ड की तुलना घोड़े के लण्ड से कर सकती हो। एक बात और जो है कि संजय का लण्ड सुसुप्त अवस्था में भी बहुत मोटा रहता है.. जब तुम संजय के लण्ड से बहुत खुल कर खेलोगी.. तब जाकर कहीं वह चुदाई के लिए तैयार होता है। मैं इसलिए भी बता रहा हूँ क्योंकि उसके लण्ड को देखकर लड़कियाँ चुदने से मना कर देती हैं। इसलिए बेचारे के मन से सेक्स की फीलींग ही समाप्त सी हो गई है.. बहुत जगाने पर संजय का लण्ड बुर चोदने को तैयार होता है। मैं चाहता हूँ कि तुम मना मत करना.. मैं उसके लण्ड को तेरी बुर में देखना चाहता हूँ।’

मेरे मन में भी संजय राना के विषय में सुनकर उसके लण्ड को देखने की इच्छा जाग उठी थी, मैं भी ऐसे अदभुत लण्ड को देखना और ट्राई करना चाहती थी।उधर महमूद ने एक अंग्रेजी शराब की बोतल खोल कर दो पैग बना दिए।

मैं बोली- महमूद.. मैं होश में संजय का लण्ड अपनी चूत में लेना चाहती हूँ.. नशे में मजा नहीं आएगा।

पर महमूद ने कहा- नहीं रानी.. मेरी बात मानो.. तुम होश में अगर संजय राना का लण्ड देख लोगी.. तो तुम्हारी चूत मैदान छोड़ कर भाग जाएगी.. इसलिए तुम्हारा पीना जरूरी है।और उसने मेरी तरफ पैग बढ़ा प्रिया।

मैं भी पैग उठाकर एक ही बार में पी गई.. मैंने करीब तीन-चार पैग गले से उतार लिए.. पहला पैग लेने में थोड़ी दिक्कत हुई.. फिर तो पीने में मजा आने लगा, महमूद पैग देते गए.. मैं पीती गई और मैं नशे में अपनी बुर सहलाते हुए बड़बड़ाने लगी।

तभी बेल बजी.. महमूद ने जाकर दरवाजा खोला और किसी को अन्दर लेकर आए और उसे मेरी बगल में बैठा प्रिया।उस लड़के का जिस्म मजबूत कद-काठी का था।मैं तो पहले ही नशे की हालत में होश खो बैठी थी। उस पर उस लड़के का जिस्म.. मेरी चूत की आग को नशा और भड़काने लगा।

तभी महमूद ने मुझे उस लड़के से चिपका प्रिया और मैं नशे की हालत में उसके होंठों को अपने होंठों में लेकर चूसने लगी। मैं अपने एक हाथ को उसके पैन्ट पर ले जाकर ऊपर से ही उसके लण्ड को सहलाने लगी। काफी देर तक यूँ ही मैं उससे चिपकी रही। मैं अलग तब हुई.. जब महमूद ने मुझे खींचकर अलग किया।

फिर महमूद ने एक-एक करके मेरे सारे कपड़े खींचकर निकाल दिए और उस लड़के को भी इशारा किया। वह भी अपने पूरे कपड़े निकाल कर मादरजात नंगा हो गया। वो मेरी तरफ बढ़ा.. मेरा ध्यान जब उसकी जाँघों के बीच में गया.. तो मैं उछल पड़ी.. यह साला मर्द है कि राक्षस है..

दैत्याकार लण्ड लिए वो मेरी तरफ बढ़ रहा था। वह मतवाली चाल से मेरे करीब आकर मुझे अपनी गोद में उठा कर बिस्तर पर पटक कर मेरे ऊपर चढ़ बैठा। मैं उसकी बलिष्ठ भुजाओं में फंस कर रह गई थी। संजय मेरी चूचियाँ भींचने लगा और मेरे होंठों को किस करते हुए मेरी चूचियों को मुँह में भरकर खींच-खींच कर पीने लगा।

काफी देर तक वो मेरे ऊपर चढ़ा रहा। अभी भी उसका लण्ड किसी हाथी के लण्ड के समान झूल रहा था.. पर अभी भी खड़ा नहीं हुआ था।

उधर महमूद बैठ कर देखते हुए उठे.. और नजदीक आकर संजय को पकड़ कर मुझसे अलग किया।

संजय नीचे खड़ा हो गया और महमूद उसके लौड़े को दोनों हाथों से पकड़ कर आगे-पीछे करने लगे, इशारा करके मुझे उसके लण्ड के पास बैठने को कहा और मैं संजय के लण्ड के बिलकुल करीब जाकर बैठ गई।संजय का लण्ड मेरे नथुनों से टकराने लगा, मैंने न चाहते हुए भी संजय के लण्ड को मुँह में लेना चाहा.. पर मेरे मुँह में संजय का लण्ड गया ही नहीं… मैं ऊपर से ही लण्ड चाट कर संतोष करने लगी।

कुछ देर की चटाई से संजय का लण्ड थोड़ा जोर मारने लगा। संजय के लण्ड के जोर मारने का एक कारण और भी था। मैं बिस्तर पर से ही संजय का लण्ड चाट रही थी और संजय लण्ड चटाते हुए मेरी बुर को सहला रहा था।इधर महमूद आगे-पीछे होते हुए बड़े गौर से संजय को बुर मसकते और मुझे लौड़ा चाटते देख रहे थे।

काफी देर ऐसे ही खेल चलता रहा और संजय का लण्ड फुंफकार उठा था। पूरी तरह खड़ी हालत में लण्ड देख कर मेरी चुदने की इच्छा खत्म होने लगी और मैं सोचने लगी कि इस लण्ड से नहीं चुद पाऊँगी।

तभी मुझे संजय ने उठाकर बिस्तर पर पटक प्रिया.. मेरी चूत पर लण्ड रख कर लण्ड को अन्दर करने के लिए ताबड़तोड़ जोर देने लगा।

शायद वह समझ चुका था कि लण्ड देख कर मेरी गाण्ड फट गई है.. इसी लिए उसने मुझे जकड़ लिया था और वो मुझे छूटने का कोई मौका नहीं देना चाहता था।महमूद यह सब देख खुश हो रहे थे.. मैं विनती करते हुए बोली- महमूद मुझे बचा लो.. मुझे इस राक्षस से नहीं चुदना..

पर महमूद मेरी तरफ कोई ध्यान ही नहीं दे रहे थे, वो तो संजय के लण्ड पर थूक और लगाने लगे।पहले से मेरी पनियाई बुर के मुँह को खोलकर सुपारा भिड़ा प्रिया और संजय को जोर लगाने को कहने लगे। संजय पूरी जोर से मेरी बुर पर लण्ड चांपने लगा।

‘फक..’ की एक तेज आवाज के साथ संजय का सुपारा बुर को चीरते हुए प्रवेश कर गया।मैं चीख पड़ी- आआ.. अरे बाप रे.. न..न..नहीं.. न..नहीं.. चचु..चुद..ना.. आहऊई..माई..

तभी महमूद ने मेरे मुँह पर हाथ रख कर संजय को पूरा लण्ड जितना जा सके.. डालने को बोले। संजय पूरे जोर से शॉट पर शॉट मार कर लण्ड अन्दर करता रहा। मैं बेहोश हो गई और जब होश में आई.. तो संजय मेरी बुर पर शॉट मार रहा था।महमूद मेरी चूचियों को चचोर रहे थे।

मेरी चूत में जलन हो रही थी.. मैं फिर छटपटाने लगी.. पर संजय और महमूद को कोई रहम नहीं आ रहा था। न जाने कब तक संजय मेरी बुर चोदता रहा.. और मैं नीचे पड़ी बुर में लण्ड लेती रही थी।मेरी बुर फट चुकी थी.. मुझे मजा नहीं आ रहा था.. बस भगवान से विनती कर रही थी कि कब यह राक्षस मेरी बुर में वीर्य डाल कर मेरी बुर से उतरे और मुझे राहत हो…पर साला घोड़े की तरह हुमुच हुमुच कर मेरी बुर के चिथड़े उड़ाते हुए लण्ड को बुर में पेले जा रहा था और मैं दर्द भरी सिसकियाँ ले रही थी ‘आह.. ऊई.. ऊफ… आआआ.. ऊऊऊउफ.. आहह..”

संजय अनगिनत बार मेरी बुर से लण्ड को खींचता और बुर में डाल देता..

तभी एकाएक उसने चुदाई की रफ़्तार बढ़ा दी.. ठाप पर ठाप लगाते हुए अपने वीर्य से बुर को भरकर मुझे कस कर जकड़ कर झड़ने लगा।

उधर महमूद मेरी बुर और संजय के लण्ड को चाट रहे थे और संजय बुर में लण्ड चांप कर अन्तिम बूंद तक वीर्य बुर में गिरा रहा था। संजय मेरी बुर को फाड़ चुका था। मेरी बुर की दीवार से संजय का वीर्य बह रहा था.. जिसे महमूद मजे से चाट रहे थे।

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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

आकाश जैन

3 months ago

सच में बहुत ही हॉट और उत्तेजक कहानी है भाई। मजा आ गया पढ़कर।

मानस गुरू

3 months ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

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