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Group Sex Story पठन समय: 13 मिनट पढ़ा गया: 530 बार

चाण्डाल चौकड़ी के कारनामे-13

राहुल मधु

23 Jul 2021 को प्रकाशित

चाण्डाल चौकड़ी के कारनामे-13
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नीलेश- भाई तू तो मानता है न कि मैं सही बोल रहा हूँ।मैं विकास- मेरे अकेले के मानने से कुछ नहीं होगा।

मीनू- शिखा एक काम करो, नीलेश भैया को बोलो कि विकास सबके सामने गीता को छुएँगे जिसके लिए गीता भी राज़ी है। अगर नीलेश भैया ख़ुशी ख़ुशी ये सब देख पाये तो हम विश्वास कर लेंगे कि ये जो कह रहे हैं वो सही है। क्यूँ ठीक है न गीता?

गीता ने भी हाँ में सर हिला प्रिया।

शिखा- तो नीलेश। तू तैयार है कि विकास गीता भाभी को हम सबके सामने छुएँगे और तुझे कोई परेशानी नहीं है?नीलेश गीता की तरफ देखकर- गीता, तुम्हें सच में बुरा नहीं लगेगा अगर तुम्हें विकास टच करे तो?

मैं मन ही मन सोच रहा था कि एक्टिंग तो देखो… साला इन लोगों को तो ऑस्कर मिल जाना चाहिए।

गीता- हाँ, मुझे ख़ुशी होगी और शायद क्रिस गेल से ज्यादा ख़ुशी होगी अगर विकास भैया मुझे छुएँ तो!मैं थोड़ा माहौल हल्का करने के लिए हँसते हुए बोला- अबे!!! कोई मुझसे भी पूछ लो। मेरा भी तो मन होना चाहिए या नहीं? मैंने सोचा इतनी नौटंकी ये कर रहे हैं तो थोड़ी तो मेरी भी बनती है।

गीता बड़ी अदा से- विकास भाई, क्या मैं इतनी बुरी दिखती हूँ कि आप मुझे छू भी नहीं सकते। प्लीज देखिये न मुझे?

मैं उठकर गीता के करीब गया।मेरी पूरी नजर दोनों लड़कियों पर ही थी।गीता का हाथ पकड़ कर उसे खड़ा किया और उसकी कमर में हाथ डाल प्रिया और बॉलीवुड का रोमांटिक का डांस करने लगे।

पूजा ने मोबाइल पर सालसा का म्यूजिक भी लगा प्रिया।

मैं धीरे धीरे गीता की पीठ सहलाने लगा, मैंने गीता के गले पर चुम्मा लिया और थोड़ा सा काट लिया।सभी लोग हम दोनों को बड़े ध्यान से देख रहे थे।

नीलेश ने अपनी बात को साबित करने के लिए जोर से बोला- क्या यार विकास इतना ठण्डा बर्ताव? गीता को अपनी बीवी समझो… मान लो कुछ देर के लिए वही मीनू है… अब करो डांस!

पूजा और शिखा दोनों स्तब्ध होकर नीलेश की ओर देखने लगी।मैंने गीता के कूल्हे दबा दिए और दूसरे हाथ से गीता के उभारों को मसल प्रिया।गीता ने भी मेरी टी-शर्ट के अंदर हाथ डाल के मेरी पीठ को सहलाना शुरू किया।

पूजा धीरे से मीनू से बोली- उनकी तो शर्त लगी थी तो बेचारे साबित कर रहे हैं पर आपके सामने आपके पति गैर औरत से गले लगे हुए हैं और देखो उनको कहाँ कहाँ हाथ लगा रहे हैं। आपको भी बुरा नहीं लग रहा, आप कितने आराम से देख रही हो?

मीनू बोली- मैं भी अपने पति की ख़ुशी में खुश हूँ… और तुमने देखा नहीं वो तब जाकर हाथ लगा पाये जब उन्हें महसूस कराया गया कि वो मीनू है।

मैंने गीता की टी-शर्ट निकाल कर हवा में उछाल दी, वो जाकर गिरी मीनू के पास फिर उसको वहीं घास पर लिटा प्रिया और उसके ऊपर चढ़ गया और अपने होंठों से गीता के बदन पर हर जगह चुम्मी लेने लगा।

शिखा की कांपती हुई आवाज़ आई- भैया, इनकी ब्रा भी निकाल दो! और फिर देखो नीलेश भाई कुछ करते हैं या नहीं।इधर से नीलेश बोला- भाई, पहले ब्रा नहीं इसकी जीन्स उतार, फिर देख क्या जांघें हैं साली की।

इस पर आँखें बंद करके सबके सामने अधनंगी हालत में पड़ी हुई गीता ने आँख खोल कर गुस्से में नीलेश की ओर देखा और मुझे अपने ऊपर से हटा कर लेटे लेटे अपनी जीन्स उतार फेंकी।और फिर मुझे पकड़ के अपने ऊपर खींच लिया।अब गीता सिर्फ अपनी ब्रा पैंटी में थी और मैं अभी तक कपड़ों में ही उसके बदन के साथ खेल रहा था।

मीनू बोली- अरे आप भी तो कपड़े उतारो… सिर्फ गीता के कपड़े उतरे हैं।मैंने भी जल्दी ही अपनी टीशर्ट जीन्स और बनियान उतार फेंकी।अब तो गुफ़ानुमा कमरे में सन्नाटा छा गया था।

उनके सामने दो बदन एक दूसरे से इतनी करीब और चिपके हुए थे जैसे लाइव ब्लू फिल्म देख रहे हों।

मीनू उठकर नीलेश के पास गई, उसके कान में कुछ कहा और वापस जाकर अपनी जगह पर बैठ गई।मैंने गीता के ब्रा के स्ट्रिप्स को भी उसके कंधे से उतार प्रिया और उसके कंधे और गले तक उसे बेतहाशा प्यार और चुम्मियाँ करने लगा।मैंने पीठ के पीछे हाथ डाला और ब्रा के हुक भी खोल डाले।

जैसे ही ब्रा ढीली हुई और गीता ने उसे उतार कर फेंका।नीलेश मायूस हो गया और दुखी दिखने लगा।

शिखा तुरंत बोली- विकास भैया, रुको… नीलेश भैया रोने वाला है।फिर नीलेश की तरफ देखकर बोली- देखो तुम चाहो तो अपनी बात अभी भी वापस ले सकते हो और अपनी बीवी को विकास से बचा सकते हो।नीलेश बोला- मैं दुखी नहीं हूँ!

इतनी गजब की एक्टिंग की नीलेश ने जिसमें उसके चेहरे पर दुखी होने के भाव साफ़ दिखाई पड़ रहे थे, वहीं उसके चेहरे पर रोती हुई मुस्कराहट।

शिखा बोली- विकास भैया, ये ऐसे नहीं मानेगा… आप लगे रहो। अगले 2-3 मिनट में ही ये अपने शब्द वापस ले लेगा। अगली बार आपको कोई भी रोके तो मत रुकना बस नीलेश कहे तो ही रुकना।

मैं फिर से गीता के ऊपर लेट गया और अपने हाथों से गीता के बूब्स भी मसलने लगा।अब मेरे लिए भी कंट्रोल करना मुश्किल था, मैंने अपने होंठ गीता के होंठों पर रख दिए और उसके होंठों से टपकती शराब को पीने लगा। उसके होंठों में नशा ही इतना था कि शराब में क्या होगा।

मुझे पर कामदेव प्रसन्न होने लगे थे, मैं अपने होंठों को उसकी गर्दन से होते हुए उसके बूब्स पर ले आया और उसके निप्पल को अपने होंठों के बीच दबा लिया और अपनी जीभ से छेड़ते हुए चूसने लगा और दूसरे निप्पल को अपनी उंगली से सहला रहा था।

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नीलेश की शक्ल पर बारह बजे हुए थे जिसको देख पूजा और शिखा बोली- अरे कितना इंतज़ार कराओगे? कर दो भाभी को नंगी… हम भी तो लाइव ब्लू फिल्म देखेंगे। आज तक जो टीवी और मोबाइल पर देखने को तरसते थे वो आज लाइव देखने का मौका मिल रहा है। क्यूँ है न नीलेश भैया… आपकी बीवी की चुदाई आपके सामने हो रही है और आप कुछ नहीं कर सकते।

ये दोनों ही लड़कियाँ नीलेश को भड़का रही थी, जिससे नीलेश हार जाए। पर यही तो हमारे खेल की और उनकी एक्टिंग की साजिश थी। नीलेश चुप रहा और डबडबाती आँखों से तमाशा देखने लगा।

मैं अपनी जीभ को गीता के बदन पर सरकता हुआ उसके बूब्स के उसकी नाभि तक आ गया। नाभि पर गीता को चूमा और अपने दोनों हाथ से गीता के बूब्स पकड़ कर धीरे धीरे मसल रहा था।

मैं सरकता हुआ थोड़ा और नीचे आया तो गीता की जालीदार पैंटी के करीब थे मेरे होंठ।उसकी पेंटी के ऊपरी भाग को दांत से पकड़ा और नीचे सरक कर उसकी पेंटी उतारने की कोशिश करने लगा।पेंटी को दांत से पकड़ने की कोशिश में गीता के बदन के उस हिस्से पर भी थोड़े दांत लग गए थे।

गीता आँखें बंद करी हुई अपने हाथों को पूरा सीधा सर के ऊपर किये हुए अपने धीरे धीरे पाँव चला रही थी और अपने पूरे बदन को लहरा रही थी।

कामाग्नि में तड़पती हुई गीता की हालात इस समय पानी से निकाली हुई मछली की भाँति थी, वो हिल रही थी, वो मटक रही थी पर बेचारी बोल कुछ नहीं पा रही थी। उसे डर था कि हम लोगों का राज़ कहीं खुल न जाए।

मेरी कोशिश थी कि गीता की पेंटी को उतार फेंकूँ पर दांतों से उसे निकाल पाना थोड़ा मुश्किल था, मैंने अपने दोनों हाथ से उसकी पेंटी नीचे की तो गीता ने भी अपने चूतड़ उठा कर उसमे मेरा साथ प्रिया।

ताज़ी ताज़ी वैक्स की हुई चिकनी टांगों से सरकाते हुए मैंने गीता की पेंटी को गीता से अलग कर प्रिया।

गीता अब पूरी तरह नंगी और कामवासना से तड़पती हुई मेरे सामने हिचकोले खा रही थी।

बोलते के साथ ही उसे महसूस हुआ कि उसने कुछ ऐसा बोल प्रिया है जिसकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी।

नीलेश बोला- लगता है तुझे गीता को मेरे सामने चुदवाने की इतनी तमन्ना नहीं जितनी खुद चुदने की इच्छा हो रही है। मेरे सामने मेरी बीवी तो क्या अगर बहन भी चुद जाये तो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। बस मैं इतना ही कहना चाहता हूँ।

शिखा अपनी कामवासना के आगे बेबस और उसके ऊपर होने वाले हमले से निराश होकर झुंझला कर बोली- तुम्हारी बीवी तुम्हारे भाई की बाँहों में हम सबके सामने नंगी पड़ी है और तुम अपनी जगह से हिले नहीं हो, यह बात प्रूव करती है कि तुम अपनी बीवी की इच्छा के लिए कुछ भी कर सकते हो…पर क्या तुम सच में खुश हो? तुम्हारे चेहरे पर तो मातम छाया हुआ है।तुम मेरी बात करते हो? मुझे अगर सिर्फ अधनंगी हालत में भी अगर किसी और मर्द ही बाँहों में देख लिया तो तुम्हारी जान निकल जाएगी।

इधर इन बातों में दिमाग न लगाते हुए मैं भी अब तक पूरी तरह नंगा होकर गीता की चिकनी टांगो पर अपने लंड से रगड़ कर रहा था। गीता के मुंह से सिसकारियाँ फुट रही थी।

तभी गुस्से में शिखा हमारी तरफ आई और बोली- भैया आप मेरे बदन के साथ खेल सकते हो या नहीं?मैंने कहा- खड़े लंड पर अगर कोई भी लड़की आकर खुद पूछे कि मेरे बदन से खेलना चाहोगे तो कौन चूतिया है जो मना करेगा।यहाँ के इतने गरम माहौल को देख पूजा भी अपने आप को न रोक सकी और उसने अपनी पेंटी में हाथ डाल कर अपनी चूत को सहलाना शुरू कर प्रिया था।

तभी जैसे एकदम सब कुछ बदल गया जब गीता बोली- हाँ मैं मान गई कि मेरा पति मेरे लिए कुछ भी कर सकता है। आई लव यू नीलेश!बोल कर उठी और नीलेश की बाहों में चली गई।

नीलेश ने किसी फ़िल्मी हीरो की तरह गीता को अपनी बाहों में भरा हुआ था।

मैं भी उठा और जल्दी से अपनी अंडरवियर पहन ली और ऐसे ही जाकर अपनी जगह पर बैठ गया।पूजा ने भी अपनी पेंटी से अपने हाथ बाहर निकाल लिए और शिखा भी अपनी जगह पर जा बैठी।

मैंने सिगरेट जलाई और अपने पेग को एक घूंट में खत्म करके पूछा- हाँ तो अब किसी बारी है?

नीलेश बोला- अब मेरी बारी है, जबाब देना है तुझे और सवाल पूछूँगा मैं!मैंने कहा- हाँ भाई पूछ, तेरा सवाल मुझे पता है और जवाब भी तैयार ही है।

नीलेश बोला- तुझे इस बंगले के बारे में इतना सब कैसे पता है? क्या तू पहले भी यहाँ आ चुका है? आखिर सीन क्या है बॉस?मैंने कहा- मुझे पता था कि तेरा सवाल तो यही होगा। हाँ, मैं पहले भी यहाँ आ चुका हूँ। यह बंगला किसी और का नहीं, मेरा ही है। इसलिए मुझे इसके बारे में सब पता है।

नीलेश बोला- बहनचोद कमीने, इतनी बड़ी बात तूने साले मुझे आज तक नहीं बताई? तू तो लोड़ू करोड़पति आदमी है।मैंने कहा- इसीलिए नहीं बताई थी क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि तुम मेरे बारे में इस तरह सोचो। मैं चाहता था कि तुम मुझसे जैसे पहले मिलते थे वैसे ही मिलो। लो बहनचोद एक सवाल से तो मैंने अपने आप को बचा लिया, अब सवाल करूँगा मैं और जवाब देना है शिखा को।

शिखा बोली- हाँ भैया पूछो बिंदास जो पूछना चाहो।मैं- जब मैं तेरी भाभी पर नंगा पड़ा हुआ था तो तूने आकर कहा कि क्या आप मेरे बदन से खेल सकते हो? क्या तुम अपने भाई भाभी और फ्रेंड जैसी बहन के सामने मेरे साथ ऐसा खेल खेल सकती थी?शिखा- शायद हाँ!

नीलेश गुस्से में- शायद नहीं !! हाँ या ना?शिखा आँखें तरेरते हुए- हाँ…

कहानी जारी रहेगी।support@mohakkisse.com

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8 मिनट 830

पाठकों की राय

2 टिप्पणियां
t

thehunkman

3 months ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

अवि6150

3 months ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

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