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अंतहीन प्यास-9

सारिका कंवल

20 Jul 2012 को प्रकाशित

अंतहीन प्यास-9
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आपकी सारिका कंवलमैंने उसे अपनी बाँहों में कस लिया और टांगों से उसे अपनी और खींचते हुए कराह कर बोली- और तेज़ और तेज़ आह्ह्ह आह्ह्ह चोदो मुझे, मेरी बेबी को  चोदो, मेरा पानी निकाल दो.. अपने लंड से..आःह्ह्ह आह्ह्ह चोदो न…!उसने भी पूरे जोश से धक्के देते हुए कहा- हाँ.. हाँ.. हाँ.. लो.. ये लो चुद लो , आज आपको मुता दूँगा चोद-चोद कर, सारा रस निचोड़ दूँगा बेबी की, ये लो ये लो..!मैं ‘ओह ओह ओह ओह’ करती अपने शरीर को ऐंठने लगी, मेरी योनि की मांसपेशियाँ सिकुड़ने और ढीली होने लगीं और मैंने उसे अपनी पूरी ताकत से पकड़ कर अपनी योनि को ऊपर उठाती हुई झड़ गई।मैं अभी शांत हुई भी नहीं थी कि उसने भी जोरों के धक्के लगाए और अपना रस मेरी योनि के भीतर छोड़ दिया और मेरे ऊपर निढाल हो कर लेट गया।मैं भी अपनी आँखें बंद किए शांत लेट गई। मैंने उसे अपने ऊपर से हटाया वो मेरे बगल में पीठ के बल लेट गया और सुस्ताने लगा। मैं भी अपने साँसों पर काबू पाने की कोशिश में थी।मुझे अब ठण्ड लगने लगी थी, मेरी योनि भी ‘लसलस’ करने लगी थी, सो मैंने कम्बल ओढ़ने और योनि को साफ़ करने सोच उठ कर बैठ गई। तभी मेरी नज़र उसके लिंग पर पड़ी।मैंने देखा कि उसका लिंग अभी भी तनतनाया हुए खड़ा था जबकि उसे झड़े कुछ ही मिनट हुए थे। मैं इससे पहले कि कुछ समझ पाती उसने झटके से पकड़ अपने ऊपर गिरा दिया और कहा- अभी कहाँ जा रही हो जान, अभी तो मजा बाकी है।और उसने मेरी टांगों को अपनी कमर के दोनों तरफ फैला कर मुझे अपनी बाहों में भर लिया और फिर अपना लिंग मेरी योनि में घुसा दिया और कहा- चलो अब चुदो।मैं हैरान थी कि यह कैसे हो रहा है क्योंकि अक्सर मर्द झड़ने के बाद इतनी जल्दी दुबारा तैयार नहीं होते, उन्हें दुबारा तैयार होने में काफी समय लगता है।मैंने उससे पूछा- क्या आपने कोई दवा खाई है?उसने कहा- हाँ.. आपको चोदने के ख्याल से मैं पागल हुआ जा रहा था, तो मैंने एक कैप्सूल मैनफोर्स का खा लिया है। क्योंकि मैं रात भर आपको चोदना चाहता था।मैंने उससे कहा- अपनी मर्दानगी पर शक था क्या आपको?उसे शायद मेरी यह बात बुरी लग गई और वो आक्रामक रूप लेने लगा। उसने मुझे मेरे बालों से पकड़ कर अपनी ओर खींचा और मेरे एक स्तन को बेरहमी से मसलते हुए कहा- अब नाटक बंद भी करो और चुदो।मैं सोचने लगी कि यह क्या हो गया, अभी तक तो अच्छा खासा माहौल था।फिर मेरे मन में ख्याल आया कि औरत के लिए भला यही होता है कि मर्द का साथ दे, क्योंकि मर्द औरतों से शारीरिक रूप से अधिक ताकतवर होते हैं तो मैंने भी अपनी भलाई के लिए उसी की भाषा अपना ली।मैंने कहा- अच्छा यह बात है… तो लो।मैंने भी जोर का एक धक्का दिया।फिर क्या था उसने भी जवाब में नीचे से धक्का दिया और हम दोनों धक्के पे धक्के देने लगे। वो मुझे नीचे से धक्के दे रहा था और मैं ऊपर से, साथ ही वो मेरी जीभ को चूसने लगा।वो इतनी जोश में था जैसे उसके रगों का खून दुगनी रफ़्तार से दौड़ रहा हो, पागलों की तरह से मुझे नोचने-खसोटने लगा। वो मेरे मुँह से निकलती लार को पी जाता।उसके ऐसे जोश ने मुझे भी जोश में ला दिया और मैं भी उसके लिंग को पूरी तेज़ी के साथ अपनी योनि में अन्दर-बाहर करने लगी और अपने नाख़ून उसके पूरे जिस्म में चुभाने लगी।उसने मुझे धक्का दे कर नीचे गिरा दिया और मेरी टांगों को पकड़ कर मुझे पेट के बल उल्टा कर दिया। उसने मेरे हाथों और पैरों को बिस्तर पर फैला दिया, ऐसे जैसे कोई मेंढक मरने के बाद हो जाता है।उसने मेरे पीछे झुक कर मेरी पीठ को चूमना शुरू कर दिया और फिर जहाँ-तहाँ दांतों से काटने लगा। मैं तड़प उठी और कराहने लगी, वैसे तो मैं चीखना चाहती थी पर बच्चों की वजह से अपनी आवाज दबा दे रही थी, पर अपनी कराह नहीं रोक पा रही थी।वो ऐसी हरकतें कर रहा था, जैसे आज मुझे मार डालेगा, तो मैंने अपनी समझ लगाई और उससे कहा- जानू.. क्या करते हो.. प्यार से करो न.. मैं कहीं भागी थोड़े जा रही हूँ, तुम्हारे लिए ही तो हूँ।मेरी बातों का उस पर कुछ असर सा दिखने लगा और उसने मेरे कूल्हों को दबाते हुआ पूछा- ये बड़े और मोटे चूतड़ किसके लिए हैं?मैं समझ गई कि ये दवा का असर है, सो मौके को समझते हुए कहा- आपके लिए जानू।उसने कहा- अगर मेरे लिए हैं, तो मैं इन्हें खा जाना चाहता हूँ।मैंने कहा- ठीक है.. तुम्हारी मर्ज़ी, पर प्यार से।उसने कहा- हाँ.. जान प्यार से ही खाऊँगा.. इतनी प्यारे जो हैं।फिर उसने मेरे कूल्हों को चाटना शुरू कर दिया, उसकी जीभ ने मेरे कूल्हों को गीला कर दिया और दांतों से काटने की वजह से कूल्हों पर निशान बनने लगे थे।उसने मेरी योनि में दो ऊँगलियां घुसा दीं और फिर पूछा- यह पावरोटी सी बुर किसके लिए है जान?मैंने कहा- आप ही तो चोद रहे हो तो और किसके लिए होगी, आपके लिए ही है।उसने कहा- इसमें क्या जाएगा?मैंने कहा- आपका लंड…इसके बाद उसने मुझे कूल्हों को ऊपर उठाने को कहा, फिर मेरी योनि में लिंग घुसेड़ दिया और जोर-जोर से धक्के देने लगा। वो मुझे बड़ी बेरहमी से धक्के देता रहा, मुझे ऐसा लगने लगा कि मैं मर ही जाऊँगी। पर कुछ ही देर में मैं फिर से गर्म हो गई।उसने कहा- मैं आज तुम्हारी बेबी को चोद कर सारा रस निकाल दूँगा।मैंने भी जोश में आकर कह दिया, “हाँ.. निकाल दो.. मेरी बुर से पसीना.. चोद-चोद कर, मेरी बेबी को चोदो।उसके धक्के इतने तेज़ होते कि मैं सरक के आगे चली जाती। तब उसने मेरे बालों को एक हाथ से पकड़ा और दूसरे से मेरे कंधे को जोर से थामा, फिर तेज़ी से धक्के देने लगा। उसके तेज़ धक्कों से मैं दस मिनट के भीतर दो बार झड़ गई और कुछ देर बाद वो भी।मैं हाँफते-हाँफते गिर गई और कुछ देर यूँ ही पड़े रहने की सोची, पर उसने मुझे पल भर का आराम नहीं करने दिया। सुबह चार बजे तक मुझे जैसे-तैसे उठा-पटक करके मेरे साथ सम्भोग करता रहा।अंत में वो थक कर इतना चूर हो गया कि उससे हिला नहीं जा रहा था और सो गया। मैंने भी चैन की साँस ली और सो गई।मैं सुबह उठ कर संतुष्ट लग रही थी पर मुझे इस बात का बुरा लगा कि उसने दवा खाई, सो मैंने उससे कह दिया था कि हम दुबारा कभी नहीं मिलेंगे, जिसकी वजह से उसे भी बुरा लगा। करीब एक हफ़्ते तक उसने मुझसे बात नहीं की, लेकिन हम लाख किसी से दूर जाना चाहें मुमकिन तभी होता है जब किस्मत चाहे और हुआ भी वही, दो हफ्ते बाद हमारी बात-चीत फिर शुरू हो गई और इस बीच सम्भोग भी हुआ। कुछ दिनों ये चलता रहा, जब तक कि अमर वापस नहीं आए।मेरी इस कहानी के बारे में अपने विचार जरूर भेजें।support@mohakkisse.com

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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

ज़ेज़ी कूल

2 weeks ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

महेन्द्र चौधरी

2 weeks ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

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