तभी अनिल ने मेरी कमर पकड़ी और मुझे अपनी गोद में खींच लिया और बोला- आज तो देख ही लिया जाए, तुम आगे-पीछे, ऊपर-नीचे से कितनी अच्छी हो..!मैंने कहा- हाँ..हाँ.. देख लो..!
तभी उसने मेरे सूट के अन्दर हाथ डाला और मेरे दुद्धू को मसलने लगा। आज तो मैं भी बेशर्मो की तरह मज़े ले रही थी। मैंने भी उसके हाथ पर अपना हाथ रख प्रिया और आँखें बंद करके मज़े ले रही थी।फिर उसने मेरा कमीज़ उतार प्रिया और मुझे लेटा प्रिया। मैंने भी उसके सर को पकड़ा और उसके होंठों को अपने होंठों से सटा प्रिया और और उसे चूसने लगी।
इस बार तो मैं नौसीखिया भी नहीं थी, क्योंकि मैं एक बार चुदाई कर चुकी थी, इसलिए मैंने आनन्द लेना भी शुरू कर प्रिया।इधर मैं उसके होंठों को चूस रही थी, उधर वो मेरे मम्मों को ऐसे मसल रहा था जैसे मानो कोई गेंद को दबाता है।करीब 5 मिनट तक हमने यह किया। फिर वो अपने मुँह को मेरे मम्मों के पास ले गया और उन्हें चूसने लगा।
मैंने उसके बाल पकड़ लिए और इसका मज़ा लेने लगी। उसने मेरे मम्मों को बहुत देर तक चूसा।फिर जब मुझसे रहा न गया तो मैंने कहा- अब मेरी बारी है, तुम चुपचाप लेट जाओ मुझे बहुत देर से भूख लगी है और अब मुझसे इंतज़ार भी नहीं हो रहा।
मैंने अनिल को नीचे लेटाया और उसकी जीन्स खोल दी। जीन्स में से उस साण्ड के लाण्ड ने नाग की तरह मुझे फन मारा।फिर क्या था मैं भी तो मुरैना की थी। कोई हमें फुफकारे तो हम पीछे हटने वालों में से थोड़े न हैं…! हम ही पहुँच गए मैदान में और उससे दो-दो हाथ करने का मन बना लिया।
फिर क्या था… मैंने उसके लौड़े को दोनों हाथों से पकड़ा और मेरे दो-धारी तलवार जैसी जीभ से उसको चाटने लगी। फिर मैं उसे अपने बिल में ले गई, जहाँ मैं उसको पटखनी देने वाली थी यानि यह अब मेरे मुँह में था।अब उसका लण्ड और मेरा मुँह… बस शुरू हो गए..!
मैं बार-बार उसको मुँह में डालती अन्दर तक ले जाती और फिर वो जैसे ही बाहर आता, मैं फिर उसको अन्दर ले जाती और अच्छी से चूसती।इस बार तो मैं अपनी पूरी भूख मिटाने वाली थी, सुबह से भूखी शेरनी की तरह थी, जिसे शिकार का इंतज़ार था।पर बीच-बीच में मेरे सर के बाल इसमें रोड़ा डाल रहे थे। फिर भी मैंने हार नहीं मानी और लगी रही और जम कर चूसती रही।
तभी अनिल ने कहा- रुको, आज तुम्हें एक नई चीज़ सिखाता हूँ…69..!मैंने कहा- यह क्या है?उसने मेरे पजामा और पैन्टी उतार दी और लेट गया और मुझे बोला- तुम मेरे ऊपर उल्टा लेट जाओ, मेरे लण्ड के पास अपने मुँह को ले जाओ और अपनी चूत मेरे मुँह के पास कर लो। इससे हम दोनों एक-दूसरे की अच्छे से चुसाई के मज़े ले पाएंगे।मैंने कहा- यह तो मस्त चीज़ है।
मैं उसके ऊपर लेट गई और फिर से अपनी जंग चालू कर दी। इस बार मैंने बालों को बिल्कुल भी नहीं पकड़ा और खुला छोड़ प्रिया। बालों से मेरा सर पूरा ढका था, पर मुझे कौन सी सुध थी। मैं तो लंड के साथ जंग लड़ रही थी, जिसमें कभी वो मेरे मुँह के अन्दर तो कभी बाहर आ रहा था।
वहीं दूसरी ओर मेरे साथ अनिल अपनी चूत की खातिरदारी में लगा हुआ था और उसे जम के चाट रहा था।हमने काफी समय तक लंड-चूत चाटे। फिर अनिल ने चुदाई के काम को आगे बढ़ाते हुए मेरी चूत पर सीधे लंड से वार करने की ठान ली। अब मुझे थोड़ा डर लगने लगा क्योंकि पिछली बार जब यह अन्दर था तो मेरी सांस रुक गई थी।मुझे थोड़ी सी घबराहट होने लगी, अनिल ने मेरी घबराहट भाँप ली, वो मेरे होंठों पर अपने होंठों को ले गया और चूसने लगा और एक हाथ से अपने लंड को मेर चूत के ऊपर फिराने लगा।
देखते ही देखते उसकी गति बढ़ती गई। मेरा ध्यान धीरे-धीरे चूत से कम होता गया और इसी समय का फायदा उठा कर अनिल ने तुरन्त अपने लंड को मेरी चूत के अन्दर डाल प्रिया।अब मुझे दर्द सा हुआ- आअह्ह्ह्ह हाअय्य मर गईई उई उम्मा…मार डाला रे..!
थोड़ी देर बाद दर्द कम हो गया, तब अनिल ने अपने होंठ हटा लिए और सीधा खड़ा हो गया पर उसका लंड अभी भी मेरी चूत में था।अब मुझे दर्द तो हो रहा था, पर बहुत ज्यादा दर्द नहीं हो रहा था।मैंने मन ही मन सोचा कि यह बाज़ी तो लंड ने मार ली और जीत भी ली।
अनिल ने अब अपना लंड बाहर निकाला और एक हाथ से पकड़ कर उसे मेरी चूत पर ऊपर थपथपाने लगा।‘चट..चट’ की आवाज़ आ रही थी।
फिर जब उसने देखा मैं नार्मल हो रही हूँ तो उसने मेरा ध्यान टीवी की ओर किया और कहा- वो देखो कैसी चुदाई कर रहा है, उस औरत की…!मैंने उधर देखा और जैसे ही 2-3 सेकंड गुज़रे उसने फट से अपना लंड मेरी चूत में घुसेड़ प्रिया। तभी मैंने पलट कर देखा तो उसका लंड मेरे चूत में आराम कर रहा था और मुझे बहुत हल्का सा दर्द हुआ, ऐसा लगा किसी ने चिकोटी काटी हो।इस बार मैंने भी कुछ नहीं बोला और मज़े लेने लगी।
तभी अनिल अपना लण्ड जोर से अन्दर-बाहर करने लगा, उसने अपने दोनों हाथों से मेरे मम्मों को दबा रखा था। दूसरी ओर उसका लंड मेरी चूत की मालिश करने में व्यस्त था।अनिल तो मुझे पागल सांड की तरह लगातार चोदे जा रहा था, वो जोर-जोर से अपनी गांड को ऊपर-नीचे कर रहा था और हर धक्के के साथ उसका लंड और अन्दर घुसता जा रहा था।
पड़ोस की दीदी की चूत चुदाई का खेल
क्या मारू लंड था…!थोड़ी देर में मैं झड़ चुकी थी, मुझे आज इतना मज़ा आया कि मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकती।
अनिल ने अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाल लिया और हस्तमैथुन करने लगा और झड़ने के समय अपना लंड मेरे मुँह पर लाकर सारा वीर्य मेरे चेहरे पर गिरा प्रिया।उसके बाद अनिल अपना लंड हाथ से पकड़ कर मेरे मुँह पर गिरे हुए वीर्य को मेरे चेहरे पर मलने लगा। मुझसे अपने लंड को लॉलीपॉप की तरह चुसवाने लगा। अब लंड और मेरे मुँह की जंग भी खत्म हो गई थी और दोनों बहुत अच्छे दोस्त बन गए थे।अब अनिल बाथरूम गया और वहाँ से आया तो उसने सिगरेट जलाई और पास में आकर बैठ गया।
अभी हम दोनों बिल्कुल नंगे बिस्तर पर लेटे थे और कभी ब्लू-फिल्म को तो कभी एक-दूसरे को और कभी खुद को देख रहे थे। उसकी सिगरेट खत्म होते ही अनिल ने चुदाई फिर शुरू कर दी।अब मुझे भी चुदाई में मज़ा आने लगा और दर्द बिल्कुल न के बराबर हो रहा था, मैंने भी खूब चुदवाया फिर अनिल ने मेरी बायीं टांग पकड़ी और अपने हाथों से मेरे बायीं टांग को अपने सर के ऊपर ले गया और फिर अपने लंड को मेरी चूत में डाल कर फिर से चोदना शुरू कर प्रिया।
यह पोजीशन काफी अलग सी थी। सच कहूँ तो मुझे ज्यादा मज़ा भी नहीं आया, पर फिर भी चुदाई तो चुदाई ही होती है, उसका मज़ा पोजीशन थोड़े न खराब कर सकती थी।फिर जब मैंने अनिल से इस पोजीशन का कारण पूछा तो अनिल ने कहा- वैसे तो ये भी चुदाई के आनन्द लेने का एक जरिया है, पर क्योंकि तुम्हारी चूत नई है तो इससे थोड़ी फ़ैल जाएगी और तुम्हें दर्द नहीं होगा।यह बात अनिल ने जो कही, वो मुझे ठीक लगी क्यूंकि अब मुझे जरा सा भी दर्द नहीं हो रहा था।
फिर हमने थोड़ी देर चुम्बन किया और फिर ब्लू-फिल्म देखने में लग गए।कुछ देर और रुकने के बाद मैंने अनिल से कहा- मुझे हॉस्टल छोड़ दो अब तो !अनिल ने फट से कहा- आज तुम तभी जाओगी, जब मैं कहूँगा। याद है सुबह तुमने मुझे क्या कहा था?मैंने कहा- ठीक है।
अनिल ने कहा- देखते जाओ अभी तो सिर्फ आगे और ऊपर से टेस्ट किया है तुम्हें, पीछे और नीचे से तो बाकी है।मैं समझ नहीं रही थी कि अनिल कहना क्या चाहता है, पर मैंने सोचा ठीक है, जो होगा देखते हैं। मैं तो अच्छी हूँ ही, तो मुझे क्या फर्क पड़ता है।उस दिन अनिल से चुदने के बाद वो मुझे हॉस्टल छोड़ गया।
उस दिन के बाद से मेरी चूत की खुजली बढ़ती ही जा रही थी। जब मैं अनिल से पहली बार चुदी थी तब तो मेरी चूत कुंवारी थी। बार-बार धीरे-धीरे मेरी चूत ने जैसे-जैसे लंड का स्वाद चखना शुरू किया, उसे तो जैसे लंड की लत ही लग गई।अब मैं जब चाहे अनिल को बुला कर उसके साथ उसके फ्लैट या कहीं और जाकर खूब चुदाई का आनन्द लेती थी।
पर अब मेरी चूत का मन जैसे अनिल के लंड से नहीं भर रहा था, वो मानो अनिल के लंड से ऊब सी गई थी, पर क्या करें, जब तक अनिल जैसे अच्छा मर्द नहीं मिलता, तब तक तो अनिल से ही काम चलाना पड़ता।एक दिन जब मैं अनिल से मिली तो मैंने अनिल से पूछ ही लिया- अनिल, यह बताओ क्या सभी मर्दों के लंड एक जैसे होते हैं… बिल्कुल तुम्हारे जैसे?
अनिल ने हँस के जवाब प्रिया- नहीं जान किसी का मुझसे बड़ा और किसी का मुझसे छोटा भी होता है। लंड का नाप उसके शारीरिक और पारिवारिक हारमोंस से बनता है, इसलिए कभी भी किसी का एक जैसा नहीं होता, वैसे ये बताओ तुमने यह सवाल क्यों पूछा..! तुम्हें दूसरा लंड तो नहीं चाहिए?मैंने झट से कहा- नहीं, मैंने तो बस ऐसे ही पूछा।
अनिल ने तुरन्त बोला- नहीं अगर चाहिए तो बता देना, मैं तुम्हें अपने दोस्तों से मिलवा दूंगा, जिसका बोलोगी उस का लंड भी तुम्हारे हाथ में दे दूंगा। फिर जो करना है और देखना है खुद देख लेना और परख भी लेना।मैंने कहा- नहीं यार… कोई अगर तुमसे अच्छा हो, तो कोई बात भी हो… नहीं तो अभी तो तुम से ही काम चला लूँगी।अनिल ने भी हंसते हुए जवाब प्रिया- है ना.. विकास नाम का एक लड़का है, मेरा रूममेट है। लड़कियाँ उसके शरीर और लंड पर फ़िदा हैं।
मैंने तुरन्त पूछा- ऐसा क्या है भला उसमें?अनिल ने फिर बताया- वो कॉलेज के पास ही एक जिम है, वहाँ का वो ट्रेनर है और उसका शरीर बहुत गठीला है। कॉलेज की लड़कियाँ और जिम में आने वाली लड़कियाँ और यहाँ तक कि शादीशुदा औरतें भी विकास के लंड के लिए मरती हैं।मैंने मन ही मन सोचा अगर अनिल ऐसा है तो विकास कैसा होगा?
“तो फिर कब मिला रहे हो मुझे तुम विकास से?”“अभी मिला दूँ क्या?”“अरे अभी नहीं, अभी तो बहुत लेट हो गया है। तुम एक काम करो, परसों सन्डे है। मेरे कॉलेज की भी छुट्टी है, तभी मिलती हूँ मैं।”अनिल ने कहा- यही ठीक रहेगा, सन्डे को जिम भी बंद रहती है, तो वो भी फ्री रहेगा।“ठीक है तो फिर सन्डे ही को मिलते हैं…ओके..!”अनिल ने भी कहा- ठीक है, चलो फिर मैं अभी तुम्हें हॉस्टल छोड़ देता हूँ।
फिर उसने बाइक स्टार्ट की और मुझे हॉस्टल छोड़ा और अपने फ्लैट चला गया। मैं रविवार का इंतज़ार करने लगी और सोचती रही विकास कैसा दिखता होगा, जिम में ट्रेनर है लोगों की बॉडी बनवाता है, तो उसकी खुद की बॉडी कितनी मस्त होगी।मैं दो दिनों तक दिन-रात यही सोचती रही।
कहानी जारी रहेगी।मुझे आप अपने विचार यहाँ मेल करें।support@mohakkisse.com