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भाभी की चुदाई • पठन समय: 24 मिनट • पढ़ा गया: 256 बार

चुदाई का जोरदार मजा प्रिया बीवी बनी भाभी को-2

कमल पाठक

28 May 2025 को प्रकाशित

चुदाई का जोरदार मजा प्रिया बीवी बनी भाभी को-2
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चुदाई का जोरदार मजा प्रिया बीवी बनी भाभी को-1

जब आँख खुली तो शाम हो चुकी थी, बाहर बदल हो रहे थे इसलिए थोड़ा अँधेरा हो गया था।

‘हाय राम राजू… उठ… तूने कैसा नाश दे प्रिया मेरे राजा… मैं इतनी गहरी नीद में सो गई… हां ऐसा कोई ख़ास काम भी नहीं था… कुछ करने को भी नहीं है सिवाय तेरे मस्ती भरे प्यार के… क्यों राजू करेगा ना प्यार?’

माला नंगी बाथरूम में खड़ी अपनी काली काली झांटें और चूत धो रही थी।राजू यह देख कर झट से उठा कर उसके पास आ गया, वो भी नंगा था- हां भाभी बहुत सारा… किसी भी समय… जब भी तू कहेगी मेरी प्यारी भाभी जान… बस जरा सा इंतज़ार कर।

उसने बाथरूम में ही रखा अपना शेविंग का सामान उठाया और माला के सामने अपने घुटनों पर बैठ गया।‘हाय राम… ये क्या कर रहा है… उफ़… साला बदमाश…’ माला हंस रही थी जब राजू उसकी झांटों की शेविंग कर रहा था।

‘भाभी तेरी झांटें मूंड रहा हूँ… तेरे इस जंगल में तेरी यह प्यारी-प्यारी चूत दिखाई ही नहीं देती… अब देख क्या सुन्दर लग रही है और दिखाई भी दे रही है। अब आएगा मजा जब तू अपना लहँगा उठा कर अपनी चूत दिखायगी…’ राजू हंस रहा था।राजू ने माला की जांघों को… टांगों को और बाज़ू के भी बालों को साफ कर प्रिया- देख भाभी, अब कितनी चिकनी-चिकनी लग रही है।

‘हाय राम राजू! तूने तो चूत को एकदम नंगी कर डाला…’ माला हंस रही थी। उसकी नंगी चुची हिल रही थी और बड़े मुलायम चूतड़ नाच रहे थे। वो बहुत खुश नज़र आ रही थी।माला को खुश देख कर राजू को बहुत अच्छा लग रहा था।

दोनों ने एक दूसरे को धोकर साफ़ कर प्रिया और माला ने अपना लहँगा चोली पहन लिया… उसको अपने मस्त जिस्म पर राजू की गर्म निगाहें बहुत अच्छी लग रही थी- हाय राजू, ऐसे मत घूर… नहीं तो चूत में फिर से आग लग जाएगी। तेरी आँखों में बदमाशी है और छूने में जादू।

‘इसमें मैं क्या कर सकता हूँ भाभी… तू इतनी सुन्दर सेक्सी है कि निगाहें तेरे ऊपर से हटती ही नहीं… मैं तुझे हर समय छूना चाहता हूँ, अपनी बांहों में ले कर चूम चूम कर प्यार करना चाहता हूँ…’ उसने भी अपना पजामा पहन लिया।

‘हां मेरे राजा… हां छू ले… अपनी बांहों में लेकर मसल डाल… और निचोड़ दे इस जिस्म का रस… खूब प्यार कर ले राजा। आज तो जवानी का असली मजा आ रहा है… मैं अपने आपको बिल्कुल नया सा महसूस कर रही हूँ… ऐसी जवान लड़की जिसकी अभी शादी हुई है। वो हंस कर राजू को अपनी बांहों में लेकर चूमने लगी।

‘राजू जल्दी से बाजार जा कर चिकन ले आ… आज कुछ मज़ेदार खाना बनाती हूँ… आज तो अपनी सुहागरात का जश्न मनाने का दिन है।’ माला के चहेरे पर शरारत थी।‘क्यों भाभी… आज क्या इरादा है… लगता है आज अपनी इज़्ज़त लुटने वाली है…’ राजू ने शरारत से उसके चूतड़ पर चपत लगा कर चुची मसल दी।‘हाय राम… अब मैं क्या तेरी इज़्ज़त लूटूँगी… आज तो मैंने अपना सब कुछ लूट प्रिया तेरे ऊपर… तूने ही मेरी इज़्ज़त फाड़ डाली…पर उसमे भी मजा आ गया!’

राजू जल्दी से पाजामे के ऊपर कमीज डाल कर बाजार चला गया। वो हंस रहा था और बहुत खुश था।माला भी बहुत खुश थी। वो अपने घर के बाहर खड़ी चारों तरफ बड़े-बड़े हरे हरे पेड़ों को देख रही थी, उसको मस्ती में अपनी कमर पर चूतड़ पर चूची हल्का सा दर्द महसूस हो रहा था। पहली बार किसी मज़बूत मर्द ने उनको मसला था, दबाया था।वो अपना हाथ अपनी जांघों पर और चूत पर सहला कर उनकी चिकनाई को महसूस कर रही थी। उसे यह सब बहुत अच्छा लग रहा था।

थोड़ी देर बाद जब तक राजू वापिस आया तो बारिश होने लगी थी और वो भीग गया था।‘हाय राम राजू, तू तो एकदम भीग गया रे…’ माला उसको देख कर बोली- जल्दी से अपने कपड़े निकाल दे।माला चिन्तित लग रही थी और वो जल्दी से तौलिया ले आई।

राजू अपना कमीज और पजामा निकाल कर बिस्तर पर टाँगें लटका कर बैठ गया। उसको यह सब बहुत अच्छा लग रहा था और वो मुस्करा रहा था… कि कोई तो उसकी चिंता करने वाला है। यह उसके लिए एक नया था।माला उसके सामने खड़े होकर उसका सर सुखाने लगी।

राजू उसकी कमर पकड़ कर अपने गर्म होंठों से उसके सपाट पेट पर और कमर पर चूमने लगा… चाटने लगा, हाथ माला के चूतड़ों पर चले गए और उसका लहंगा ऊपर खिसका कर उसकी केले जैसी चिकनी जांघों को चूमने लगा।माला उसके प्यार से गर्म हो कर उछल पड़ी- हाय राम… उफ़… सी… रुक जा मेरे जालिम राजा… मुझे तुझे सुखाने दे।वो दोनों अपनी पहाड़ी भाषा में बात कर रहे थे।

‘हां… हां… तू सुखा ले… तब तक मैं तुझे गीला करता हूँ।’ राजू हंस रहा था… उसके चूतड़ों को चूस रहा था, चूम रहा था… थपथपा रहा था और मस्ती में बोला- सच भाभी, तेरी चूत में बहुत दम है, क्या मस्त घोड़ी की तरह धमा धम चुदाई का मजा ले रही थी।

‘मेरे राजा, यह तो तेरे मस्त तगड़े लंड का कमाल है… जो ऐसी मस्त चुदाई करके दो दो बार चूत का पानी निकाल सकता है।” माला ने अपने चूतड़ हिलाते हुए कहा- उफ़ सच में राजू, तू जब ऐसे छूता है, चूम चूम कर दबाता है तो बहुत अच्छा लगता है।’ माला उसको सुखा कर पीछे हट गई।

‘मुझे भी भाभी… तुझे छू कर… चूमने में… चूस-चूस कर प्यार करने में बहुत अच्छा लगता है… तेरी जवानी का रस बहुत मीठा है।’ राजू भी उठ कर खड़ा हो गया और उसने लुंगी और बनियान पहन ली।

माला रसोई में खाना बना रही थी, राजू रसोई में खड़ा उसकी नंगी लचकती कमर को हिलते हुए चूतड़ों को निहार रहा था। माला उसकी निगाहें अपने जिस्म पर महसूस करके सिहरन महसूस कर रही थी।

वो मुस्कारते हुए मुड़ कर उसको देख कर बोली- हाय राजा, ऐसे क्या देख रहा है… यहां आ ना… मेरे पास आकर मुझे अपनी बांहों में लेकर दबा ले… मसल डाल अपनी बांहों में।‘वाह भाभी, तू तो सच में बहुत मस्त माल है।’ राजू ने झटसे उसे साइड से अपनी बांहों में दबा लिया। उसका लंड माला की कमर के कटाव रगड़ रहा था। राजू अपना एक हाथ उसकी चोली के ऊपर से चुची दबा रहा था और दूसरा माला की कमर, चूतड़ों पर था और वो उसको गर्दन कंधों और गालों पर चूम रहा था- सच भाभी, खूब मजा आ रहा है।

‘हां राजा… हां… तू भी तो इतना मस्त गबरू जवान तगड़ा मर्द है… तुझे देख कर ही दिल में कुछ होता है।’ माला ने भी उसको चूम लिया- एक बात बता राजू… तू शहर में रह कर चुदाई में इतना अनुभवी कैसे हो गया, मैंने सोचा था कि तू बुद्धू है… पर तू तो मस्त चोदू निकला… सच बता शहर में कितनी लड़कियों को चोदा।

माला ने मस्ती में उसका हाथ अपनी चोली में घुसा प्रिया, राजू उसके निप्पल को उंगली में पकड़ कर कर गोल-गोल घुमाने लगा। माला खुश से नाचने लगी और सिसकारने लगी- सी… सी… हाई राम… क्या मस्ती चढ़ रही है।

राजू ने माला को गाल पर चूम लिया- भाभी शहर में अनुभवी लड़कियों की, औरतों की कमी नहीं है। बस पास में पैसा होना चाहिए… और उनके साथ सेक्स करने के लिए सावधानी भी रखनी पड़ती है… हमेशा कंडोम पहन कर ही सेक्स करना पड़ता है।‘हम तीन लड़के एक कमरे में रहते थे और जब हमारे पास पैसा होता तो हम एक औरत को लाते थे और तीनों बारी-बारी से उसकी चूत मारते थे… कभी-कभी वो तीनों से एक साथ मरवाती थी… एक के लंड के ऊपर चढ़ कर दूसरे को गांड में घुसवा कर… और तीसरे लंड को मुँह में ले कर चूस कर…’

पुरानी बातों को याद करके राजू को जोश आ गया, उसने माला का लहँगा सामने से ऊपर उठा कर उसकी बिना बाल की चूत का दाना रगड़ प्रिया।माला में मुँह से सिसकी निकल गई- हाय राम… सी… .ई… सी… सच राजू… तूने गांड भी मारी है… तुझे गांड मारने में मजा आता है… मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगता… तेरा भाई हर समय गांड मारता था।

उसकी बात सुन कर राजू को माला के दिल का दर्द महसूस हो रहा था। राजू ने माला को जोर से चूम कर कहा- नहीं भाभी, मुझे गांड मारना अच्छा नहीं लगता… बस एक बार तजुरबा करने के लिए मारी थी। पर ज्यादातर उन लड़कियों को मेरा लंड बहुत पसंद आता था और वो मुझे चूत मारने के लिए कहती थी। उन्होंने ही मुझे यह अलग-अलग तरीके चूत मारना, औरत को गर्म करना, इतना गर्म करना कि वो खुद मचल कर चुदाई के लिए कहे। पर उसके लिए लुगाई को भी खूब मस्त और चुदासी होना चाहिए, तभी असली मस्त चुदाई का मजा आता है।

‘ओह… सच… मैं तो कभी भी गर्म और चुदासी नहीं थी… पर तूने मुझे इतनी गर्म और चुदासी कर प्रिया था कि मैंने तेरे मस्त खड़े लंड पर चढ़ कर चुदाई कर डाली… वाह सच राजू, उसमें तो सच में मजा आया था… और उसके बाद जो तूने पीछे से घोड़ी चुदाई की… वाह राजा, वो तो बहुत हो मज़ेदार थी।’ माला को राजू की मस्त भरी बातों में और उसका हाथ अपनी चूत पर बहुत मजा दे रहा था।

‘अरे भाभी, बात लंड पर चढ़ कर चुदाई या घोड़ी चुदाई की नहीं है। वो तो तेरे अंदर मस्त चुदाई की एक इच्छा, एक सपना…एक चाहत छुपी थी और वो जब तुझ को मिली तो तुझे बहुत मजा आया। इसी को तो कहते है प्यार की चुदाई… जिसमें तू भी वही चाहती है जो मैं, और यही तो मुझे तेरे अंदर पसंद है।’

‘भाभी अब तू मुझे अपने बारे में बता… चार साल तक बाबू भाई के साथ शादी के बाद भी प्यार और सेक्स के बारे में इतनी बुद्धू क्यों है? कुछ भी मालूम नहीं है, लंड का चूसना… चूत चुसवाना… लंड के साथ खेलना… अपने मर्द को अपनी गर्म मस्त जवानी दिखा कर तड़फाना। ताकि वो तेरी चूत मारने के लिए मचल उठे।’

‘ओह राजू, अब मुझे लगता है कि मैं सच में बुद्धू हूँ। मैंने ऐसा कभी महसूस नहीं किया जैसा अब कर रही हूँ, इतनी चुदासी और मस्त… क्योंकि बाबू ज्यादातर नशे में रहता था… वो घर आता था, मुझे लिटा कर लहँगा ऊपर उठा अपना लंड खड़ा हो या नहीं बस अंदर घुसा धक्के लगा कर अपना निकाल देता था और सो जाता था। मुझे कुछ महसूस ही नहीं होता था, मैं भी करवट करके सो जाती थी। पर कभी-कभी जब मैं बंदरों को… घोड़ों को… सांड को… या कुत्तों को चुदाई करते देखती थी, मेरा बदन भी गर्म हो जाता था… और बस चुपचाप बैठ कर अपना चूत का दाना रगड़ कर अपना पानी निकाल लेती थी। पर मेरे अंदर कोई इच्छा या चुदास नहीं थी। पर अब लगता है कि मैं तेरे इस मस्त लंड के बिना नहीं रह सकती। अब तो इतनी गर्म चुदासी जंगली और गीली-गीली हो रही हूँ। जैसे तू दबा कर चूस कर मेरी चूत को गर्म कर रहा है… उफ़… राजू… अब रुक जा मेरे राजा… ऐसे उंगली से मत निकाल।’

‘क्यों… निकल जाने देना भाभी, मुझे तेरी चूत का पानी निकालना बहुत अच्छा लगता है… ख़ास कर जब तू मस्ती में सिसकार कर अपनी चूत भींच कर चिल्लाती है।’‘नहीं अभी नहीं मेरे राजा… आज हम सुहागरात मनायेंगे… तब तू मेरी चूत अपनी लुगाई की तरह मार कर मेरा निकाल देना।’ माला ने हंस कर उसको चूम लिया।

थोड़ी देर में माला ने काम ख़त्म कर लिया, राजू पीछे के बरामदे में खड़ा सिगरेट पी रहा था और खिड़की से अपनी गर्म आँखों से माला की नंगी कमर जहाँ पर लहँगा और भी नीचे खिसक गया था और सपाट पेट… गहरी सेक्सी नाभि… चूत का ढाल… और साइड से थोड़े-थोड़े चूतड़ दिख रहे थे… चोली में तनी हुई चूची देख कर मजा ले रहा था।

माला भी बाहर आकर राजू को पीछे से बांहों में लेकर अपनी चुची उसकी कमर से और चूत उसके चूतड़ों से रगड़ने लगी और आगे हाथ ले जा कर लुंगी में डाल उसके थोड़े से खड़े लंड से खेलने लगी।

‘वाह मेरी भाभी जान… तू तो एक बार की चुदाई में ही एकदम मस्त हो गई… देख तेरे हाथ में आते ही साला लंड क्या तन कर खड़ा हो गया।’ राजू अपने हाथ पीछे ले जा कर माला के मुलायम चूतड़ मसल रहा था- पर तू कर क्या रही है? मेरी गांड मार रही है क्या?

‘वाह राजू… क्यों नहीं…’ माला अपना लहँगा पूरा ऊपर खिसका कर अपनी नंगी चूत उसके चूतड़ों पर रगड़ने लगी और राजू के लंड को हिला कर हंसते हुए जवान लड़की तरह उछाल रही थी और मस्ती में प्यार के खेल का खूब मजा ले रही थी।

‘चल न भाभी, अब अंदर चलते हैं, अब तो तेरी सुहागरात मनाने का दिल हो रहा है… उसके बाद अगर तेरे अंदर कुछ जोश बचेगा तो तू मेरी गांड भी मार लेना। राजू हंस कर माला के चूतड़ मसल रहा था।‘हाई राम, तो क्या सुहागरात को इतनी जोर से चुदाई करेगा कि बाद में और कुछ करने का दम नहीं बचेगा?’ माला हंस कर उसकी पीठ पर चढ़ गई- ठीक है, ले चल अंदर!

राजू माला को अपनी पीठ पर लेकर अंदर उसके कमरे में आ गया। माला ने अपने कमरे में बिस्तर ज़मीन पर दीवार के साथ लगाया था। राजू ने माला को नीचे उतार कर बिस्तर पर खड़ा कर प्रिया और उसका लहंगा और चोली निकाल कर नंगी कर प्रिया।माला ने भी उसकी लुंगी और बनियान निकाल डाला।

‘यह बता भाभी, सुहागरात को क्या क्या होता है… ऐसा क्या है जो इसको इतना अलग बना देता है?’ राजू अपने नंगे सीने से उसकी चुची रगड़ रहा था, उसके हाथ माला के चूतड़ों से और कमर से खेल रहे थे और उसका बड़ा खड़ा लंड उसके पेट पर छू रहा था।

माला मस्ती और उसके प्यार में मस्त हो कर सिसक रही थी- उह्ह्ह… उम्म्ह… अहह… हय… याह… अह्ह्ह… सीई… एई और अपने चूतड़ों को दबा रही थी- होता क्या है मेरे राजा चोदू राजा, बस मर्द लुगाई को खूब प्यार करता है और फिर प्यार से उसकी चूत में लंड घुसा देता है। चूत फटती है, दर्द होता है, खून निकलता है, थोड़ी देर के बाद दोनों को मजा आने लगता है और दोनों चुदाई का मजा लेते हैं और एक दूसरे का पानी निकाल देते हैं। दोनों का मन हो तो सारी रात चुदाई करते हैं और नंगे एक दूसरे की बांहों में सो जाते हैं… यह ही बस स्वर्ग जैसा लगता है।

‘ओह वाह भाभी, तुझे सब मालूम है, अब देख मैं तुझे क्या स्वर्ग दिखाता हूँ!’‘आह मेरे राजा दिखा दे स्वर्ग…मैं तो पहले से ही स्वर्ग में हूँ… और अब तो न कोई खून या दर्द होने वाला है तो बस घुसा कर चोद डाल और मना दे मेरी सुहागरात और निकाल दे अपने लंड का अमृत मेरी चूत में!”

राजू ने माला को बिस्तर पर उसकी कमर पर लिटा प्रिया उसके सर के नीचे तकिया लगा प्रिया। वो बराबर में बैठ उसके ऊपर झुक कर उसकी चुची चूसने लगा, उसके हाथ पूरे मस्त चिकने बदन पर फिसल रहे थे, धीरे-धीरे होंठ पेट पर, कमर पर, जांघों पर, और फिर चूत पर चूमने लगे।

माला ने अपनी जांघों को दूर तक खोल प्रिया था… माला मस्ती में मदहोश थी, उसके मुँह से सिसकारियां निकल रही थी, चूतड़ उछल रहे थे, उसका सारा जिस्म मस्ती में नाच रहा था।जब राजू ने उसके चूत के दाने को चूसना शुरू किया और गीली रस से भरी चूत में दो उंगलियाँ घुसा दी तो वो मचल उठी- हाय मेरे जालिम चोदू राजा… उई… उई… सी… अह्ह्ह… हाई क्या कर डाला। मैं तो अपने आपको स्वर्ग में महसूस कर रही हूँ। सारे बदन में आग लगी है… उफ़ हाई राम मेरी चूत तो पानी छोड़ने वाली है… ओह बस अब घुसा दे ना अपना लंड को!’ माला ने लंड पकड़ रखा था और वो उसको खींच रही थी हिला रही थी।

‘तो निकलने दे न मेरी प्यारी भाभी जान… लंड भी अभी घुस जाएगा।’राजू उसकी जांघों को दूर तक खोल कर पीछे को मोड़ प्रिया और उनके बीच में बैठ उसकी चूत पर मुँह लगा प्रिया। जैसे ही उसकी जीभ ने दाने को छुआ… माला मस्ती में लहराने लगी… वह अपने चूतड़ों को उठा कर झटके मारने लगी- उई… ईईए… ओह… हाई गई मेरे राजा… माला ने चूतड़ उठा दिए।

राजू झट उसके ऊपर आ गया और अपना वज़न कोहनी पर डाल अपना मस्त खड़ा लंड माला की चुदासी रस भरी गर्म-गर्म चूत में एक ही झटके में पेल प्रिया।माला अकड़ गई और उसने अपनी जांघों को राजू की कमर में लपेट लिया और चूतड़ उठा कर चूत भींच कर झटके मार कर झड़ गई, उसकी बाहें राजू के गर्दन पर लिपटी थी।

‘यह क्या भाभी… लंड के घुसते ही झड़ गई… अभी तो असली सुहागरात का मजा आना था।’ उसने हंस कर माला के होंठों को चूम लिया।राजू ने एक तकिया माला के चूतड़ों के नीचे लगा प्रिया और अपना मस्त मोटा तगड़ा लंड जड़ तक घुसा प्रिया- क्यों भाभी अब प्यार की चुदाई में मजा आ रहा है ना? तेरी चूत क्या चप-चप कर रही है।राजू धीरे-धीरे लंड को अंदर बाहर करने लगा और लंड से चूत के दाने को रगड़ रहा था।

‘हां मेरे राजा… हां बहुत मजा आ रहा है… तेरी चुदाई में ही नहीं चुसाई में भी जादू है… सारा रस तो चूस-चूस कर निकाल प्रिया… और अब अंदर तक घुसा कर चोट मार रहा है… उफ़ क्या लंड है… मोटा तगड़ा… गर्म-गर्म… साली चूत तो शांत ही नहीं हो रही है… यही तो असली प्यार की मस्त चुदाई है राजा… हां… हां… घुसा दे पूरा अंदर तक… और निचोड़ दे इस गदराई चुदासी जवानी का सारा रस!’

‘अभी ले भाभी… अभी निकालता हूँ तेरी इस मस्त चुदासी चूत का रस! बहुत मजा आ रहा है इस समय मारने में… इस तेरी सुहागरात में… उफ़ क्या पूरा अंदर तक घुस रहा है लंड… वाह भाभी वाह… तू भी खूब मस्त चुदासी माल है… ले बस अब तो अपने लंड का भी पानी निकलने वाला है… ले… हु… ले हू!’

‘हां… राजा… हां… हां… राजा… हां… निकाल दे… अपनी चूत भी फिर से पानी छोड़ने वाली है… हां… हां!’ और जैसे ही राजू ने अपनी पिचकारी माला की चूत की जड़ में मारी, माला ने भी अपने चूतड़ उठा कर चूत भींच कर पानी छोड़ प्रिया और राजू को अपने ऊपर जांघों और बांहों में भीच लिया। उसके हाथ उसकी कमर प्यार से सहला रहे थे, वो राजू को गर्दन और कंधों पर चूम रही थी।

‘वाह राजू! अब तूने मुझे असली अपनी सुहागन और चुदासी रानी बना प्रिया मेरे राजा…’ वो ख़ुशी से मुस्करा रही थी, माला ने उसको अपने ऊपर कसके पकड़ रखा था।‘हाई राम राजू, अब तो छोड़ दे!’ थोड़ी देर के बाद माला ने मुस्कराते हुए कहा- सारी जान तो निकाल डाली आज तो तूने, क्या जोरदार चोदा है। बस राजा, अब तो मैं तेरी गुलाम हो गई।

‘क्या मतलब गुलाम हो गई… अरे भाभी अब तो तू मेरी प्यारी भाभी जान बन गई और मैं तेरा गुलाम! अब तो तू जैसे कहेगी वैसा ही करुँगा। मैं कैसे छोड़ूं, पकड़ तो तूने रखा है अपनी बांहों और जांघों से…” राजू ने हंस कर माला की चूची पर काट लिया।

‘हाई राम, सच में! मैं तो तेरे प्यार में पागल हो गई हूँ। माला ने अपनी जांघों को खोलते हुए हंस कर कहा।राजू उसकी चूत में धंसा अपना लंड निकाल कर उसके ऊपर से फिसल कर बराबर में लेट गया, माला की चूत से रस बाहर बहने लगा और चादर पर फैल गया।राजू ने देखा और हंस कर बोला- वाह भाभी, बहुत माल भर रहा है तेरी चूत में!

‘सब तेरे लंड का कमाल है राजा, ऐसे जोरदार तरीके से जबरदस्त पानी निकाला है और अपना माल मेरी चूत में भरा है अब सारा बाहर निकल रहा है।’ माला ने उठा कर अपनी चूत से बहती नदी को देख कर मुस्करा उठी- यही तो है राजा मेरी असली सुहागरात का प्रसाद!

‘अच्छा चल छोड़ यह सब भाभी, यह बता… प्यार की सुहाग चुदाई का मजा आया या नहीं?’ राजू उसके बराबर में लेटा अपना सर उठा कर, उसकी मुस्कराती आँखों को और चमकते चेहरे को देख रहा था।‘हाय राम… बहुत… बहुत मजा आया मेरे चोदू राजा! अब ऐसे मत देख, नहीं तो फिर से कुछ हो जाएगा।’ उसने राजू की तरफ मुड़ कर उसे चूम लिया।‘बस भाभी यही तो मुझे चाहिए। तुझे अच्छा लगा, मजा आया। अब तो तुझ से प्यार हो गया। अब तो मैं तेरी सारी रात चूत मार सकता हूँ। तूने ही कहा था।’ राजू ने हंस कर माला को छेड़ते हुए उसकी चुची और चूतड़ों को मसल प्रिया।

थोड़ी देर बाद माला ने अपनी और राजू को बाथरूम में जाकर धोकर सफाई कर कपड़े पहन खाना खाया। दोनों बहुत खुश थे और बार-बार एक दूसरे को चूम कर, छू कर प्यार कर रहे थे। खाने के बाद दोनों बाहर बरामदे में खड़े खुली हवा, चारों तरफ बड़े-बड़े पेड़, एकदम शांत वातावरण का आनन्द ले रहे थे।

राजू सिगरेट पी रहा था, माला उसको साइड से अपनी बांहों में लेकर खड़ी चूम रही थी। राजू उसकी चुची, चूतड़ों और चूत से खेल रहा था।माला ने उसका लंड हाथ में लेकर हिला कर खड़ा कर प्रिया था- राजू, तेरा तो फिर से खड़ा हो गया है राजा!‘हां भाभी, तेरी चूत भी तो फिर से गीली होकर मचल रही है, बोले तो यहीं बाहर तेरी फिर से सुहागरात मना दूँ?’

‘हाय सच राजू, कर डाल मेरे जालिम चोदू राजा! मेरी कब से तमन्ना थी, कहे तो… सपना था कि कोई तेरे जैसा मस्त चोदू सांड बाहर ही मस्त जोरदार चुदाई का मजा दे दे… अब तो रोज़ ही… हर जगह ही… सुहागरात मनेगी राजा… चल अब यहीं मना दे1’ माला ने झट से अपना लहँगा उठा कर अपने चूतड़ जांघों और चूत को नंगी कर प्रिया।

राजू ने उसे थोड़ा आगे झुका कर पीछे से अपना कड़क लंड उसकी गीली मस्त चूत में घुसा कर धीरे-धीरे वाली मस्त चुदाई का खूब देर तक चोद कर मजा प्रिया। दोनों साथ झड़ने के बाद अंदर आ कर नंगे हो कर एक दूसरे की बांहों में सो गए।

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Hi, friends mai apka apna Aaryan sabse phele to sabi Readers ko mera thanx. jino ne meri pichli story ko padha or us ko like kiya , Regarding my Last Story Experience certificate k liye chudi. Sabhi Readers’ ne pada or mujhe bade mail bhi aaye kuc...

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