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भाभी की चुदाई • पठन समय: 10 मिनट • पढ़ा गया: 960 बार

चुदासी भाभी ने चोदना सिखाया-1

रत्न अकोला

19 Sep 2024 को प्रकाशित

चुदासी भाभी ने चोदना सिखाया-1
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यह उस समय की बात है जब मैं 20 साल का था। मैं तब लॉ की पढ़ाई कर रहा था।

मेरे माता-पिता बहुत ही धार्मिक विचारों के हैं और हमेशा धर्म-करम में लगे रहते हैं।

हम दो भाई और एक बहन हैं, बहन की शादी पहले ही हो गई है।

मेरे बड़े भाई का रेडीमेड कपड़ों का कारोबार है और अक्सर वो अपने काम के सिलसिले में दूसरे शहर में टूर पर जाते रहते हैं।

बड़े भाई की शादी को सिर्फ़ एक साल ही हुआ था।

मेरी भाभी मुझको बहुत चाहती थीं.. क्योंकि एक मैं ही तो था.. जिससे भाभी बातचीत कर सकती थीं।खास कर जब भैया.. बिजनेस के काम से टूर पर बाहर जाते थे।

मेरी भाभी बहुत प्यार से हमारा ख्याल रखती थीं और कभी यह अहसास नहीं होने देतीं कि मैं घर पर अकेला हूँ।

वो मुझे प्यार से लल्ला या लाला कह कर पुकारती थीं और मैं हमेशा उनके पास ही रहना पसंद करता था।

वो बहुत ही सुंदर हैं.. एकदम गोरी-चिट्टी लम्बे-लम्बे काले बाल.. करीब 5’5″ का कद और जिस्म का कटाव 38-24-38 के नाप का।

मैं उनकी गर्व से उठी हुई चूचियों पर फिदा था और हमेशा उनकी एक झलक पाने के लिए बेताब रहता था।

जब भी काम करते वक़्त उनका आँचल उनकी छाती पर से फिसल कर नीचे गिरता था या वो नीचे झुकती.. मैं उनकी चूची की एक झलक पाने की कोशिश करता था।

भाभी को इस बात का पता था और वो जानबूझ कर मुझे अपनी चूचियों का जलवा दिखा देती थीं।

मेरी इस कहानी में घटित यह बात तब हुई जब मेरे भैया काम के सिलसिले में शादी के बाद पहली बार बाहर गए।

माँ और बाबूजी पहले से ही तीर्थ यात्रा पर हरिद्वार गए हुए थे और करीब एक महीने बाद लौटने वाले थे।

भाभी पर ही घर संभालने की ज़िम्मेदारी थी।

भैया ने मुझे घर पर रह कर पढ़ाई करने की सलाह दी.. क्योंकि मेरे इम्तिहान नज़दीक थे और साथ ही भाभी को भी अकेलापन महसूस ना हो।

अगले दिन सुबह के 10 बजे की बस से भैया चले गए।

हम दोनों भैया को बस-स्टैंड तक विदा करने गए हुए थे।

भाभी उस दिन बहुत ही खुश थीं।

जब हम लोग घर पहुँचे तो उन्होंने मुझे अपने कमरे में बुलाया और कहा- लाला.. मुझे अकेले सोने की आदत नहीं है और जब तक तुम्हारे भैया वापस नहीं आते.. तुम मेरे कमरे में ही सोया करो।

उन्होंने मुझसे अपनी किताब वगैरह वहीं ला कर पढ़ने को कहा।

मैं तो ख़ुशी से झूम उठा और फटाफ़ट अपनी टेबल और कुछ किताबें उनके कमरे में पहुँचा दीं।

भाभी ने खाना पकाया और हम दोनों ने साथ-साथ खाना खाया।

आज वो मुझ पर कुछ ज़्यादा ही मेहरबान थीं और बार-बार किसी ना किसी बहाने से अपनी चूचियों का जलवा मुझे दिखा रही थीं।

खाने के बाद भाभी ने मुझे संतरा खाने को प्रिया.. संतरा देते वक़्त उन्होंने मेरा हाथ मसल प्रिया और बड़े ही मादक अदा से मुस्कुरा प्रिया।

मैं शर्मा गया क्योंकि यह मुस्कान कुछ अलग किस्म की थी और उसमें शरारत झलक रही थी।

खाने के बाद मैं तो पढ़ने बैठ गया और वो अपने कपड़े बदलने लगीं।

उन दिनों गर्मी के दिन थे और गर्मी कुछ ज्यादा ही थी।

मैं अपनी शर्ट और बनियान उतार कर केवल पैन्ट पहन कर पढ़ने बैठ गया।मेरी टेबल के ऊपर दीवार पर एक शीशा टंगा था और भाभी को मैं उस शीशे में देख रहा था।

वो मेरी तरफ देख रही थीं और अपने कपड़े उतार रही थीं।

वो सोच भी नहीं सकती थीं कि मैं उनको शीशे के माध्यम से देख रहा हूँ।

उन्होंने अपना ब्लाउज खोल कर उतार प्रिया।

हाय.. क्या मदमस्त चूचियां थीं..

मैं पहली बार लेस वाली ब्रा में बँधे उनके मम्मों को देख रहा था।

उनकी चूचियाँ बहुत बड़ी-बड़ी थीं और वो ब्रा में समा नहीं रही थीं, आधी चूचियां तो ब्रा के ऊपर से झलक रही थीं।

कपड़े उतार कर वो बिस्तर पर चित्त लेट गईं और अपने सीने को एक झीनी सी चुन्नी से ढक लिया।

एक पल के लिए तो मेरा मन किया कि मैं उनके पास जा कर उनकी चूचियों को देखूँ.. फिर सोचा यह ठीक नहीं होगा और मैं पढ़ने लग गया।

बिस्तर पर लेटते ही वो सो गईं और कुछ ही देर में उनका दुपट्टा उनकी छाती से सरक गया और साँसों के साथ उठती-बैठती उनकी मस्त रसीली चूचियाँ साफ-साफ दिख रही थीं।

रात के बारह बज चुके थे, मैंने पढ़ाई बंद की और बत्ती बुझाने ही वाला था कि भाभी की सुरीली आवाज़ मेरे कानों में पड़ी- लाला.. यहाँ आओ ना…

मैं उनकी तरफ बढ़ा।

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अब उन्होंने अपनी चूचियों को फिर से दुपट्टे से ढक लिया था।

मैंने नजदीक जाकर पूछा- क्या है भाभी?

उन्होंने कहा- लाला ज़रा मेरे पास ही लेट जाओ ना.. थोड़ी देर बात करेंगे.. फिर तुम अपने बिस्तर पर जा कर सो जाना।

पहले तो मैं हिचकिचाया लेकिन फिर मान गया।

मैं लुँगी पहन कर सोता था और अब मुझको पैन्ट पहन कर सोने में दिक्कत हो रही थी।

वो मेरी परेशानी ताड़ गईं और बोलीं- कोई बात नहीं.. तुम अपनी पैन्ट उतार दो और रोज जैसे सोते हो.. वैसे ही मेरे पास सो जाओ.. शरमाओ मत.. आओ ना..

मुझे अपने कानों पर यकीन नहीं हो रहा था।

लुँगी पहन कर मैंने लाइट बंद कर दी और नाइट लैंप जला कर मैं बिस्तर पर उनके पास लेट गया।

जिस बदन को महीनों से निहारता था.. आज मैं उसी के पास लेटा हुआ था, भाभी का अधनंगा शरीर मेरे बिल्कुल पास था।

मैं ऐसे लेटा था कि उनकी चूचियाँ बिल्कुल नंगी मालूम दे रही थीं.. क्योंकि थोड़ा सा हिस्सा ही ब्रा में छुपा था।

क्या हसीन नज़ारा था…

तब भाभी बोलीं- इतने महीने से अकेले नहीं सोई हूँ और अब अकेले सोने की आदत नहीं है।

मैं बोला- मैं भी कभी किसी के साथ नहीं सोया..

वो ज़ोर से खिलखिलाईं और बोलीं- जब भी मौका मिले.. अनुभव ले लेना चाहिए.. बाद में काम आएगा..

उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर धीरे से खींच कर अपने उभरी हुए चूचियों पर रख प्रिया और मैं कुछ नहीं बोल पाया.. लेकिन मैंने अपना हाथ उनके चूचियों पर रखा रहने प्रिया।

‘मुझे यहाँ कुछ खुजा रहा है.. लाला.. ज़रा सहलाओ ना…’

मैंने ब्रा के ऊपर से ही उनकी चूचियों को सहलाना शुरू किया।

भाभी ने मुझसे हाथ ब्रा के कप में घुसा कर सहलाने को कहा और मेरा हाथ ब्रा के अन्दर कर प्रिया।

मैंने अपना पूरा हाथ अन्दर घुसा कर ज़ोर-ज़ोर से उनकी चूचियों को रगड़ना शुरू कर प्रिया।

मेरी हथेली की रगड़ पाकर भाभी के निप्पल कड़े हो गए।

उनके मम्मों के मुलायम माँस के स्पर्श से मुझे बहुत अच्छा लग रहा था.. लेकिन ब्रा के अन्दर करके मसलने में मुझे दिक्कत हो रही थी।

अचानक वो अपनी पीठ मेरी तरफ घुमा कर बोलीं- लाला यह ब्रा का हुक खोल दो और ठीक से सहलाओ न…

मैंने काँपते हुए हाथों से भाभी की ब्रा का हुक खोल प्रिया और उन्होंने अपने बदन से उसे उतार कर नीचे डाल प्रिया।

मेरे दोनों हाथों को अपने नंगी छाती पर ले जाकर वो बोलीं- थोड़ा कस कर दबाओ ना…

मैं भी काफ़ी उत्तेजित हो गया और जोश में आकर उनकी रसीली चूचियों से जम कर खेलने लगा।

क्या बड़ी बड़ी चूचियाँ थीं.. कसी हुई चूचियाँ और लम्बे-लम्बे कड़े निप्पल.. पहली बार मैं किसी औरत की चूचियों को छू रहा था।भाभी को भी मुझसे अपनी चूचियों की मालिश करवाने में मज़ा आ रहा था।

मेरा लंड अब खड़ा होने लगा था और अंडरवियर से बाहर निकलने के लिए ज़ोर लगा रहा था।मेरा 6.5″ का लंड पूरे जोश में आ गया था।

भाभी की चूचियों को मसलते-मसलते मैं उनके बदन के बिल्कुल पास आ गया था और मेरा लंड उनकी जाँघों में रगड़ मारने लगा था।

अचानक वो बोलीं- लाला.. यह मेरी टाँगों में क्या चुभ रहा है?

मैंने हिम्मत करके जबाब प्रिया- यह मेरा हथियार है… तुमने भैया का हथियार तो देखा होगा ना?

‘हाथ लगा कर देखूं?’ उन्होंने पूछा!

और मेरे जबाब देने से पहले अपना हाथ मेरे लंड पर रख कर उसको टटोलने लगीं।

अपने हाथ से लवड़े को पकड़ लिया और अपनी मुट्ठी में मेरे लंड को बंद कर लिया और बोलीं- बाप रे.. बहुत कड़क है..

वो मेरी तरफ घूमी और अपना हाथ मेरे अंडरवियर में घुसा कर मेरे फड़फड़ाते हुए लंड को इलास्टिक के ऊपर निकाल लिया।

लंड को कस कर पकड़े हुए वो अपना हाथ लंड की जड़ तक ले गईं जिससे सुपारा बाहर आ गया।

सुपारे की साइज़ और आकर देख कर वो बहुत हैरान हो गईं।

मेरे प्यारे पाठको, मेरी भाभी का यह मदमस्त चुदाई ज्ञान की अविरल धारा अभी बह रही है।

आप इसमें डुबकी लगाते रहिए.. और मुझे अपने पत्र जरूर लिखते रहिए।मेरा ईमेल पता नीचे लिखा है।support@mohakkisse.com

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चुदासी भाभी ने चोदना सिखाया

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