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जीजा साली की चुदाई पठन समय: 9 मिनट पढ़ा गया: 945 बार

चूची से जीजाजी की गाण्ड मारी-10

अलीशा सुधा

28 Dec 2014 को प्रकाशित

चूची से जीजाजी की गाण्ड मारी-10
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अलीशा सुधा

इधर चमेली ने भी एक सिगरेट जलाई और एक कश ले कर मेरी बुर में खोंस दी।

जीजाजी ने उसे हाथ बढ़ा कर निकाल ली और धुंए के छल्ले बनाने लगे।

कामिनी ने मुझे अपनी सिगरेट पकड़ा कर गिलास उठा लिया और एक गिलास में ही जीजा-साली पीने लगे।

टीवी पर ब्लू-फिल्म के शुरूआती दृश्य में तीन लड़कियाँ और दो मर्द ड्रिंक के साथ चूमा-चाटी के बाद सभी नंगे हो चुके थे और एक लड़की को एक युवा ने टेबल पर खड़ा कर उसकी झांट रहित बुर को खड़े-खड़े चाटने लगा।

दूसरी लड़की ने उसके लण्ड को मुँह में ले लिया और उसे कभी चूसती, कभी चाटती और कभी हाथ में लेकर सहलाती तीसरी लड़की जो सिगरेट पी रही थी, नंगी टेबल पर टिक कर अधलेटी थी, ने अपने सिगरेट को बुर में खोंस दिया, जिसे दूसरे लड़के ने निकाल कर पी और फिर उसे लड़की को पकड़ा कर उसकी चूत चूसने लगा।

फिर दोनों टेबल पर लेट कर 69 करने लगे अर्थात एक-दूसरे की चूत और लण्ड चूसने और चाटने लगे।

इधर हम चारों भी गरमा-गरम दृश्य देख कर मस्त हो रहे थे।

जीजाजी अपने गिलास से थोड़ी सी शराब कामिनी की चूची पर गिरा कर उसे चाटने लगे।

थोड़ी देर विहस्की के साथ चूची पीने के बाद चूची से छलके जाम को पीने के लिए कामिनी को गोद से उतार कर टेबल पर बैठा दिया और बुर तक बह आई मदिरा के धार को चाटते-चाटते बुर की टीट को मुँह में ले लिया।

अब कामिनी धार बना कर शराब अपने ऊपर गिराने लगी, जिसे जीजाजी बुर के रस के साथ मिक्स कर पीने लगे।

देखा-देखी चमेली ने मुझे कामिनी के बगल में टेबल पर बैठा कर कामिनी की तरह शराब गिराने के लिए कहा।

मैंने जैसे ही थोड़ी सी मदिरा अपने बुर पर छलकाई; जीजाजी कामिनी की बुर छोड़ कर मेरी बुर की तरफ झपट पड़े और मेरी बुर के छेद से अपनी जीभ सटा दी और बुर के इस रस से शराब को मिला कर कॉकटेल का मज़ा लेने लगे।

चमेली अब कामिनी की बुर में मुँह लगा कर शराब पीने लगी।

मैं जीजाजी के बुर चाटने और दो पैग पीने के बाद बहक कर बोली- ओ मेरे चुदक्कड़ राजा ज़रा ठीक से अपनी साली के मिक्स सोड़ा को पियो … ओह राजा ज़रा जीभ को और गहराई तक पेलो… ओह अहह हाईईईई राजा ज़रा स्क्रीन पर देखो… साला बहनचोद चूत में लण्ड पेल रहा है … और तुम भोसड़ी के…बिना झांट की बुर को चाट-चाट कर मेरी मुतनी को झड़ने पर मजबूर कर रहे हो… ओह मेरे चोदू … अब लौड़े का मज़ा दो ना…!”

मैं मेज पर पैर फैला कर लेट गई और जीजाजी खड़े-खड़े मेरी बुर में लण्ड डाल कर चुदाई करने लगे, वे जबरदस्त शॉट लगा रहे थे।

मैं चिल्लाई, “हाँ राजा हाँ फाड़ दो इस साली बुर को… राजा तुम्हारा लौड़ा बड़ा दमदार है… क्या चुदाई करता है… राजा आज रात भर चुदाना है… ओह मेरे चुदक्कड़ सनम शादी तो मेरी बहन से की है, लेकिन अब मैं भी तुम्हारे लौड़े की दासी बन कर रहूंगी… जब भी मौका मिलेगा ये साली चूत तुम्हारे लौड़े से चुदवाती रहेगी… मारो राजा कस-कस कर धक्का … फाड़ दो बुर को … मसल दो इन चूचियों को… ओह माई डियर फक मी हार्ड …फक मी…!”

जीजाजी सटासट लौड़ा मेरी बुर में पेल रहे थे, तभी उनकी निगाह कामिनी की बुर पर गई। जो उसी मेज पर अधलेटी चमेली को अपनी बुर चटवा-चटवा कर शराब पिला रही थी। जीजाजी अचानक मेरी बुर से लौड़ा निकाल कर बगल में मेज के सहारे अधलेटी कामिनी के बुर में ठूँस दिया और चमेली को भी बगल में लिटा लिया।

अचानक मेरी बुर से लण्ड निकाले जाने से मुझे बहुत बुरा लगा, लेकिन स्क्रीन पर चल रहे दृश्य को देख कर जीजाजी के मंशा का पता चला, जिसमें तीनों लड़कियाँ मेज पर झुकी थीं और पहला आदमी बारी-बारी से उन तीनों को चोद रहा था और दूसरा आदमी मेज पर लेट कर अपना लौड़ा चुसवा रहा था।

सारा गिला-शिकवा समाप्त हो गया और मैं भी कामिनी के बगल में लेट अपनी बारी का इंतजार करने लगी। कामिनी की दूसरी तरफ चमेली थी, कामिनी के बुर में दस बारह-बारह धक्का लगाने के बाद चमेली की बुर में लौड़ा पेल कर कई बार धक्के लगाए, फिर मेरी बारी आई।

मैं अब तक बहुत गरम हो गई थी।

मैं जीजू से बोली- जीजाजी अब मैं रुक नहीं सकती… पहले मेरा गिरा दो फिर इन दोनों के साथ मुँह काला करते रहना… राजा निकलना नहीं… मैं बहुत जल्दी आ रही हूँ… प्लीज़ जीजू ज़रा और …ओह माँ मैं गइईईईईईईईई.. आह राजा बहुत सुख मिलाआाअ..!

और मैं भलभला कर झड़ गई।

जीजाजी अभी नहीं झड़े थे। मेरी बुर से अपने खड़े लण्ड को निकाल कर उन्होंने कामिनी की बुर में डाल दिया और फिर कामिनी और चमेली को बराबर चोदना शुरू किया।

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मैं थक गई थी। मैंने अपने लिए एक पैग बनाया और एक सिगरेट सुलगा कर ब्लू-फिल्म देखने सोफा पर बैठ गई।

स्क्रीन पर घमासान चुदाई का दृश्य चल रहा था।

मुझे पेशाब लग रही थी, पर मैं सिगरेट और विहस्की खत्म कर बाथरूम जाना चाह रही थी।

इसी समय स्क्रीन पर दूसरा दृश्य उभरा अब पहला युवक लेटा था और एक लड़की उसके ऊपर चढ़ कर उसके लण्ड को अपनी बुर में ले लिया, उसकी गाण्ड की छेद दिखाई पड़ रहा था, दूसरा युवक पास आया और अपने खड़े लण्ड पर थूक लगा कर उसकी गाण्ड में पेल दिया।

तीसरे आदमी ने अपना लण्ड उसके मुँह में लगा दिया और दूसरी लड़की उसकी चूचियाँ एक-एक करके चूस रही थी।

मैंने एक-दो ब्लू-फिल्म देखी थीं, पर दुहरे-चुदाई वाले इस दृश्य को देख कर मैं नशे से सराबोर हो गई, वहाँ से हटने का मन नहीं हो रहा था, पर पेशाब ज़ोर मार रही थी।

मैंने पास ही रखे गिलास को बर के नीचे लगा कर उसमें पेशाब कर लिया और उसे उठा कर सोफा के बगल स्टूल पर रख दिया, यह सोच कर कि जब फिल्म खत्म होगी तो उठ कर बाथरूम में फेंक आऊँगी।

जब गिलास को रखा तो पेसाब की बू आई, तब उस बू को दबाने के लिए मैंने उस गिलास में बॉटल से विहस्की डाल दी और फिल्म देखने के साथ विहस्की और सिगरेट पीती रही।

इस दुहरे-चुदाई को देखने के लिए मैंने सब से कहा।

तो कामिनी और चमेली जो आगे से चुदवा रही थीं घूम कर टेबल पर झुक कर खड़ी होकर पिक्चर देखने लगीं और जीजाजी उन दोनों को बारी-बारी से डॉगी स्टाइल में चोदने लगे। कामिनी के बाद जब वे चमेली के पीछे आ कर जब उसकी बुर चोद रहे थे, तब एक बार उनका लण्ड चमेली की बुर से बाहर निकल आया और उसकी गाण्ड के छेद पर टिक गया।

जीजाजी ने चुदाई की धुन में धक्का मारा तो बुर के रस से सने होने के कारण चमेली की गाण्ड में घुस गया।

चमेली दर्द से कराह उठी, “जीजाजी पिक्चर देख कर गाण्ड मरने का मन हो आया क्या..! अब जब घुसा ही दिया है.. तो मार लो, आपकी ख़ुशी के लिए दर्द भी सह लेंगे..!”

फिर क्या था..! जीजाजी शेर हो गए और हचा-हच उसकी गाण्ड मारने लगे।

कामिनी बोली- जीजाजी इसकी गाण्ड जम कर मारना, सुना है इसने आपकी गाण्ड चूची से मारी थी..!

“क्या दीदी..! चूची से जीजाजी की गाण्ड तो सुधा दीदी ने मारी थी और फँसा रही हैं मुझे..!”

अब जीजा जी का ध्यान कामिनी की तरफ गया। चमेली की गाण्ड से लण्ड निकाल कर वे कामिनी के पीछे आए।

कामिनी समझ गई अब उसके गाण्ड की खैर नहीं पर बचाने के लिए बोली- जीजाजी मैंने कभी गाण्ड नहीं मराई है, अभी रहने दीजिए, जब एक लौड़े का इंतजाम और हो जाएगा तो दोहरे मज़े के लिए गाण्ड भी मरवा लेंगे..!

पर जीजाजी कहाँ मानने वाले थे। उन्होंने कामिनी की गाण्ड के छेद पर लण्ड लगाया और एक जबरदस्त शॉट लगाया और लण्ड गाण्ड के अन्दर दनदनाता हुआ घुस गया।

कामिनी चीख उठी, “उई माँ..! बड़ा दर्द हो रहा है निकालिए अपने घोड़े जैसे लण्ड को..!”

इस पर चमेली व्यंग्य करती हुए बोली- जब दूसरे की में गया तो भूस में गया और जब अपनी में गया तो उई दैया..!”

मैं खिलखिला कर हँस पड़ी।

प्रिय पाठको, आपकी मदमस्त सुधा की रसभरी कहानी जारी है। आपके ईमेल की प्रतीक्षा में आपकी सुधा बैठी है।

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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

विनी

1 week ago

बहुत ही उत्तेजक और रोमांचक कहानी लिखी है भाई। मजा आ गया।

बोब सिंह

3 weeks ago

रिश्तों की ये कहानी सच में बहुत ही कामुक थी। अंत बहुत ही गर्म था।

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