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चूत चुदाने को बेताब पड़ोसन भाभी-1

राज शर्मा चण्डीगढ़

25 May 2018 को प्रकाशित

चूत चुदाने को बेताब पड़ोसन भाभी-1
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मेरी यह पहली कहानी है। यह कहानी 4 साल पुरानी.. सर्दियों के दिनों की है जब मैं दिल्ली के जमरूदपुर इलाके में किराए के मकान में अपने दोस्त के साथ रहता था।वह पूरा चार-मंजिला मकान किराएदारों के लिए ही बना हुआ था.. इसलिए मकान-मालकिन वहाँ नहीं रहती थी।

दूसरे फ्लोर पर जीने के साथ ही मेरा पहला कमरा था। सभी के लिए टायलेट, बाथरूम व पानी भरने के लिए एक ही जगह बनी थी.. जो ठीक जीने के साथ मेरे कमरे के सामने थी।एक फ्लोर में 5 कमरे थे व चारों फ्लोर किराएदारों से भरे हुए थे.. जिनमें अधिकतर फैमेली वाले ही रहते थे।

कहानी यहीं से शुरू होती है। मेरे कोने वाले कमरे में एक उड़ीसा की भाभी.. अर्चना अपने 2 छोटे-छोटे बच्चों के साथ रहती थी। जिसकी उम्र 22 साल व लम्बाई 5’6″ फिट थी वो देखने में काफी सुन्दर और मनमोहनी थी दो बच्चे होने पर भी उसका फिगर मस्त था।

उसका पति शादी व पार्टियों में खाना बनाने का ठेका लेता था.. इसलिए वह अक्सर दो-तीन दिन तक घर से बाहर ही रहता था। वह सारा दिन मेरे कमरे के सामने जीने में बैठकर बाकी औरतों से बातें करती रहती थी।वो उन औरतों से बातें करते समय.. मुझे चोर नजरों से देखती रहती थी।

मैं और मेरे दोस्त की शिफ्ट में ड्यूटी होने के कारण हम जल्दी ही कमरे में आ जाते थे.. या कभी देर में जाते थे.. वो मुझसे कुछ ही दिनों में जल्दी ही खूब घुलमिल गई थी।

कुछ दिन बातें करते हुए एक दिन उन्होंने मुझसे पूछा- तुम्हारी कोई गर्ल-फ्रेण्ड है?मैंने मना कर प्रिया साथ ही मैंने बात भी बदल दी.. पर दूसरे दिन उन्होंने फिर वही सवाल पूछा तो मैंने कहा- आप हो तो.. गर्ल-फ्रेण्ड की क्या जरूरत..

वो शरमा गई।मैंने अपना नम्बर उन्हें यह कहकर दे प्रिया कि कभी बाजार से कोई सामान मंगवाना हो तो मुझे बता देना.. मैं ले आऊँगा।

धीरे-धीरे हमारी फोन पर बातें होने लगीं। एक दिन कपड़े धोते समय उन्होंने शरारत करते हुए मेरे ऊपर पानी डाला और भागने लगीं। मैंने तुरन्त उनका हाथ पकड़ा और उन्हें भी भिगो प्रिया।

वो जल्दी से हाथ छुड़ाकर बोली- बेशरम..और अपने कमरे में भाग गई और वहाँ से मुस्कुराने लगी।

अगले दिन वो मुझे फिर छेड़ने लगी।मैंने कहा- भाभी मुझे बार-बार मत छेड़ा करो.. नहीं तो मैं भी छेड़ूँगा।

भाभी- तो छेड़ो ना.. किसने मना किया है।यह कहते हुए वो मुस्कुराने लगी।

मैंने इधर-उधर देखा.. सभी दिन में आराम कर रहे थे.. बाहर कोई नहीं था। मेरा दोस्त भी ड्यूटी गया था। मौका अच्छा था.. मैंने उनको लपक कर पकड़ लिया और उनका एक मम्मा सूट के ऊपर से ही दबा प्रिया।

उनके मुँह से एक ‘आह’ निकली। मैंने फिर दूसरे मम्मे को भी जोर से मसल प्रिया।भाभी बोली- क्या करते हो.. कोई देख लेगा।

मैं समझ गया कि भाभी का मन तो है.. पर डर रही हैं। मैं उन्हें खींचते हुए सामने बाथरूम में ले गया। दरवाजा बंद करके उन्हें बाहों में भर लिया और बोला- मेरी गर्ल फ्रेण्ड बनोगी भाभी..भाभी ने मादकता भरे स्वर में कहा- मैंने कब मना किया।

इतना सुनते ही मैंने उनके गालों व होंठों पर चुम्बनों की झड़ी लगा दी।भाभी- हटो.. यह क्या कर रहे हो।मैंने कहा- गर्लफ्रेण्ड को चुम्मी कर रहा हूँ।

भाभी इठलाते हुए बोली- कोई ऐसा करता है.. भला।

मैं कहाँ मानने वाला था। चुम्बन के साथ साथ उनके दोनों मम्मों को लगातार दबाने लगा।वो गरम होने लगी.. पर बार-बार ‘ना.. ना.. मत करो..’ कह रही थी।

मैंने अपना एक हाथ उनकी सलवार के ऊपर से ही उनकी चूत के ऊपर फिराना शुरू कर प्रिया। तो वह और गरम हो गई व अजीब सी आवाजें निकालने लगी।

फिर वह मेरा साथ देने लगी व मुझे भी चुम्बन करने लगी। मैंने उनके पजामे का नाड़ा खोल प्रिया और हाथ अन्दर ले गया तथा पैन्टी के अन्दर हाथ डालकर उनकी चूत सहलाने लगा।

उनकी चूत बहुत ज्यादा गरम हो रही थी। मैंने चूत में उंगली करनी शुरू कर दी। उन्हें मजा आने लगा। वो जोर-जोर से आवाजें निकालने लगी।

मैंने तुरन्त अपने होंठ उनके होंठों से लगा लिए और उनका हाथ पकड़ कर अपने पैन्ट के ऊपर से ही लण्ड पर रख प्रिया.. जो कि अब तक रॉड जैसा सख्त हो गया था।

वो भी मतवाली होकर मेरी चैन खोलकर मेरा लण्ड सहलाने लगी। थोड़ी ही देर में उनकी चूत में से पानी रिसने लगा।

मैं जोर-जोर से अंगुली करने लगा। अब हम दोनों ही बहुत ज्यादा गरम हो गए थे.. पर डर भी रहे थे कि कोई आ ना जाए। थोड़ी ही देर में भाभी की चूत से पानी चूने लगा।

वो झड़ने के बाद निढाल सी होते हुए बोली- प्लीज राज अब मत करो मैं पागल हो जाऊँगी।मैं उसके चूतरस से भीगी ऊँगली को चूसता हुआ बोला- भाभी मजा आया।वो बोली- बहुत ज्यादा।मैं बोला- और मजे लोगी।

वो बोली- यहाँ नहीं.. इधर हम पकड़े जाएगें बाकी बाद में.. आज रात को करेंगे।मैं- भाभी मैं कब से तड़प रहा हूँ.. अभी इसे शान्त तो करो।भाभी मुस्कुरा कर बोली- इसे तो मैं अभी शान्त कर देती हूँ.. बाकि बाद में.. सब्र करो.. सब्र का फल मीठा होता है।

वो झुक गई और मेरे लिंग को अपने मुँह में ले लिया और मॅुह को आगे-पीछे करने लगी। मैंने फिल्में में ऐसा तो दोस्तों के साथ बहुत देखा था.. पर मैं पहली बार ये सब कर रहा था। बड़ा मजा आ रहा था.. पर डर भी रहा था। थोड़ी ही देर में मैंने अपना सारा लावा उनके मुँह में भर प्रिया।

जिसे वो पी गई और बोली- तुम्हारा माल तो बहुत ज्यादा निकलता है और बहुत गाढ़ा और टेस्टी भी है। आज के बाद इसे बरबाद मत कर देना।उन्होंने चाट कर पूरा लिंग साफ कर प्रिया।

फिर हमने फटाफट कपड़े ठीक किए व जाने से पहले एक-एक चुम्मी ली और एक-एक करके बाथरूम से बाहर आ गए।हम दोनों ने रात में मिलने का वादा किया था।

कहानी जारी रहेगी.. आपको कहानी कैसी लगी। अपनी राय मेल कर जरूर बताइएगा।support@mohakkisse.com

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चूत चुदाने को बेताब पड़ोसन भाभी

कुल भाग: 4
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मैं सीमा जोशी, बीस वर्षीया युवती ऋषिकेश की रहने वाली हूँ मैं रुड़की के एक इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ती हूँ और वहीं एक कमरा किराए पर लेकर रहती हूँ। नीचे की मंजिल पर मकान मालिक रहते हैं और ऊपर एक कमरा, रसोई, बाथरूम मेरे पास है।

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यह कहानी मेरे साथ हमबिस्तर हो चुकी औरत की है.. जिसे मैंने हचक कर चोदा था। उसकी सच्ची कहानी को मैंने अपने शब्दों में ढाला है.. उसी की जुबानी सुनिए।

9 मिनट 940

पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

हरप्रीत गर्ग

1 month ago

देवर भाभी की ये कहानी सच में कमाल की थी। लेखक ने बहुत बारीकी से लिखा है।

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thehunkman

2 months ago

क्या भाभी सच में मान गई थी? अगला भाग जल्दी लाओ!

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