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भाभी की चुदाई पठन समय: 20 मिनट पढ़ा गया: 556 बार

और आखिर भाभी चुद गई

चूतेश

08 Jun 2024 को प्रकाशित

और आखिर भाभी चुद गई
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और आखिर भाभी चुद गईचूतेश

मेरे पास कई पढ़ने वालों के मेल आये जिसमें वे चाहते थे कि मैं उनके अनुभव कहानी के रूप में सभी पाठक पाठिकाओं के साथ शेयर करूँ। इन में से एक पाठक हैं श्री चन्दनकुमार शर्मा, बिहार के निवासी हैं, उन्होंने अपना एक चुदाई के अनुभव का ब्योरा मुझे लिख कर भेजा, उसी का मैं कहानी रूपान्तर प्रस्तुत कर रहा हूँ।

मैं इस घटना की सत्यता का दावा नहीं कर सकता क्योंकि यह किसी अन्य व्यक्ति का अनुभव है मेरा नहीं।

इसके आगे का वर्णन श्री चन्दनकुमार शर्मा के ही शब्दों में लिख रहा हूँ।

श्री चन्दनकुमार शर्मा-

मैं चन्दनकुमार हूँ, बिहार का रहने वाला हूँ, मैं शहर में कौलेज में पढ़ता हूँ, हॉस्टल में रहता हूँ और छुट्टी के दिनों में घर चला जाता हूँ, वैसे देखने में ठीक ठाक हूँ और शरीर से बलिष्ठ भी हूँ।

यह घटना इसी दिसम्बर की है। गांव में मेरे घर के पास ही मेरे दूर के रिश्ते के बड़े भाई साहब रहते हैं जो मुम्बई में काम करते हैं और हर तीन महीने में कुछ दिन के लिये घर आ जाते हैं परिवार से मिलने के लिये।

अगर वो आये होते हैं तो उनसे मिलने मैं कभी कभी चला जाता हूँ।

मेरी भाभी बहुत सुन्दर है और उसकी फिगर भी बहुत अच्छी है, 36-32-38, जब भी मैं भाई साहब से मिलकर लौटता, तो घर आकर भाभी के बारे में सोच सोच के मुट्ठ मारा करता था और अर्चना करता था कि भाभी मेरे साथ लिपटी हुई है, रात को स्वप्नों में बहुत बार मैं भाभी को चोद कर झड़ा भी।

इस बार जब मैं गाँव गया हुआ था तो भैया नहीं थे। फिर भी मैं इस बात से अनजान होने का नाटक करता हुआ उनके घर जा पहुँचा।घर पर कोई नहीं था, उनका बेटा स्कूल गया हुआ था और उनकी बेटी अपने नाना नानी के यहाँ गई हुई थी।

इससे बढ़िया मौका फिर कहाँ मिलता तो मैंने सोचा कि भाभी से दिल की बात कह ही दूँगा, बुरा मानेगी तो पैर पकड़ कर माफी मांग लूँगा।

वैसे भी भैया तो तीन या चार महीने में एक बार आते हैं बेचारी पीछे से चुदाई की प्यासी ही रहती होगी। सम्भव है कि बुरा ना माने और तैयार ही हो जाये!

भैया के यहाँ पहुँचा तो भाभी घर के सामने सब्ज़ी गार्डन में चारपाई डाल के धूप सेक रही थी। मैं भी वहीं जाकर चारपाई के पास रखी हुई बेंच पर बैठ गया।

भाभी बोली- लल्ला, तुम आराम से बैठो, मैं तुम्हारे लिये चाय लेकर आती हूँ।

भाभी घर के भीतर चली गई और थोड़ी देर में चाय का एक ग्लास और खाने को लड्डू और मठरी एक प्लेट में ले आई।

चाय पीते पीते मैं भाभी को ध्यान से निहारा, मोटे मोटे गोल गोल मस्त चूचे भाभी का ब्लाउज़ फाड़ के बाहर टपकने को हो रहे थे।नहाई धोई भाभी बला की खूबसूरत लग रही थी।

मेरा लौड़ा उत्तेजना में अकड़ चुका था और मेरी लुंगी को तम्बू की तरह उठा रहा था।

बातों बातों में मैंने कहा- भाभी, तुम्हारे बाग़ के बैंगन इतने लम्बे हो रहे हैं इनकी सब्ज़ी क्यों नहीं बना देती?

भाभी बोली- अरे लल्ला, हो तो रहे हैं बैगन लम्बे, लेकिन एक ही सब्ज़ी कितनी बार खाऊँ?

मैंने कहा- भाभी, चलो आप मत खाओ, मुझे ही दे दो, मैं अम्मा को देकर बनवा कर खा लूँगा।

भाभी ने कनखियों से देखते हुए कहा- लल्ला, तुम क्या करोगे बैंगन लेकर? तुम्हारे पास तो वैसे ही एक लम्बा सा बैंगन है।

मेरे दिल में खुशी की लहर दौड़ गई कि आज शायद भाभी कि चूत मिल ही जाये, मैं बोला- भाभी है तो लेकिन लम्बा होने से क्या फायदा… इसे कोई पूछता तो है नहीं।

तो भाभी ने पूछा- तुम तो लल्ला शहर में रहते हो, तुमने कोई लड़की नहीं फँसाई?

मैं भी अब थोड़ा थोड़ा खुलने लगा था, मैंने कहा- क्या लड़की पटाऊँ? कोई लड़की मिली ही नहीं जो तुम जैसी खूबसूरत और सेक्सी हो।

भाभी ने हंस कर कहा- लल्ला हम तो अब 35 साल के हो गये हैं, और ओल्ड हो चुके हैं जबकि तुम अभी नौजवान हो।

म़ैं बोला- भाभी जी, पहली बात तो आप ओल्ड नहीं हैं, अभी तो आपकी जवानी पूरे शवाब पर है… और अगर एक बार को मैं आपकी बात न काटूं तो भी मेरा तो यह मानना है कि ओल्ड इज़ गोल्ड… तुम भाभी दो दो बच्चे जन कर भी ऐसी लगती हो जैसे कि कुंवारी हो अभी तक… तुम्हारी बॉडी बिल्कुल 18 साल की कमसिन छोकरी जैसी कसी हुई लगती है। यह तो बताओ आप इतनी हसीन क्यों दिखना चाहती हो? भाई साहब तो यहाँ कभी कभी आते हैं।

भाभी ने इतरा के कहा- लल्ला तुम्हारे लिये!

सुन कर मेरा दिल बल्लियों उछलने लगा, भाभी सच में मुझ पर लाइन मार रही थी, शायद उसका मेरे से चुदाई करने का मन था।

मैं बोला- भाभी, मैं ही क्यों? तुम तो इतनी सेक्सी हो कि जिस किसी पर भी ज़रा सी लाइन मार दोगी वो भागा चला आयेगा तुम्हारे पास।

भाभी ने मुस्कराते हुए कहा- अरे लल्ला हर किसी के पास तुम्हारे जितना लम्बा मोटा बैंगन है या नहीं इसका कैसे पता चलेगा मुझे। तुम्हारा तो सब मालूम है।

मैं चौंक कर बोला- मेरा मालूम है भाभी, तुमने मेरा कब देखा?

भाभी फिर से इतरा के बोली- लल्ला, तुम जितने सीधे लगते हो उतने हो नहीं। पिछली बार जब तुम आये थे और बाहर बैठ कर भैया से गप्पें मार रहे थे तब तुमने अपना मोबाइल यहाँ चार्जिंग के लिये रखा था। मैंने चोरी से तुम्हारे फोन मे सारी फोटो देख ली थीं। तुमने अपने बैंगन की भी तो आठ दस फोटो लगा रखी हैं। सब पता चल गया मुझे कितना लम्बा है और कितना मोटा है। तुम लल्ला मेरे आगे पूरे नंगे हो चुके हो। अब मुझ से कुछ भी छुपा नहीं है।

मेरा लंड अब तक तो बड़े ज़ोर से अकड़ चुका था लेकिन मैंने नक़ली गुस्से से कहा- भाभी, क्या किसी के फोन पर उसकी फोटो चुपके से देखना कोई अच्छी बात है? ऐसा अपने क्यों किया?

भाभी हंसते हुए बोली- मेरी मर्ज़ी… क्या मैं अपने लल्ला से इतना भी नहीं खेल सकती? अच्छा मेरा फोटो देखना तुम्हें इतना ही बुरा लगा है तो मैं भीतर जा रही हूँ। तुम जो तुम्हारा जी करे सो करो। अब मैं तुमसे नहीं बात करूँगी।

भाभी उठ कर जल्दी जल्दी भीतर चली गई, मैं भी उठ के भाभी के पीछे पीछे भागा।

घर में घुस कर मैंने भाभी को पकड़ लिया और कहा- भाभी, मैं तो हंसी कर रहा था। भला मैं तुमसे गुस्सा हो सकता हूँ? मैं तो रोज़ तुम्हारे सपने देखता हूँ।

भाभी इठलाई और बोली- तो लल्ला, हम कौनसे सच में गुस्सा हुए थे। हम भला हो सकते हैं अपने लल्ला से गुस्सा। हम भी तो रोज़ लल्ला के बैंगन से खेलते हैं सपने में।

मेरी जान में जान आई, मैंने राहत की सांस लेते हुए कहा- तुमने तो मुझे डरा ही प्रिया था भाभी। तुम्हें कसम है अपने लल्ला की, तुम खफा ना हुआ करो। अगर मैं गलती करूं तो डांट के सज़ा देने का तुमको पूरा हक़ है। जो भी सज़ा दोगी खुशी से कबूल करूंगा। क्या मजाल जो माथे पर शिकन भी आ जाये।

भाभी ने शरारत भरे अंदाज़ में कहा- लल्ला, तुमने जो बनावटी गुस्सा दिखाया था, अब मैं उसकी असली सज़ा दूंगी।

मैं बोला- भाभी तुम जो कहो, मेरे सिर माथे पर।

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‘तुम्हारी यही सज़ा है कि अब मैं तुम्हारे बैंगन से सारा दिन खिलवाड़ करूँगी।’ और भाभी ने अपना हाथ मेरे तन्‍नाये हुए लौड़े पर रख प्रिया, कहने लगी- लल्ला अब लुंगी तो खोलो, ज़रा स्वाद तो चखूँ अपने बैंगन का।

मैंने तपाक से अपनी लुंगी खोल दी तो पूरा अकड़ा हुआ लंड हुमक पड़ा।भाभी ने उसे प्यार से अपने हाथ में लेकर सहलाना शुरू किया और पूछा- क्यों लल्ला, कितनी लड़कियों को यह मूसल मज़ा दे चुका है?

मैंने कहा- किसी को भी नहीं ! मैंने तो इसे अपनी प्यारी सी भाभी के लिये सुरक्षित रखा है।

भाभी ने झुक कर अकड़ाए हुए लौड़े को प्यार से चूमा, चमड़ी पीछे करके टोपा पूरा नंगा किया और जीभ पूरी बाहर निकल के टोपा चाटा।

इससे पहले किसी लड़की ने मेरे लंड को छुआ भी नहीं था, चूमना चाटना तो दूर की बात रही। मेरी उत्तेजना सातवें आसमान पर जा उड़ी, लगा कि बस अब झड़ा और अब झड़ा।

मैं बड़ी दिक्कत से अपने आप को काबू करने की कोशिश कर रहा था कि भाभी ने अचानक घुटनों के बल बैठ कर लंड को पूरा मुंह में ले लिया और लगी चूसने।

उसके गरम गरम और गीले गीले मुंह में लंड को रख कर जैसे ही भाभी ने अपनी जीभ सुपारे पर फिराई तो यार, रूका ही नहीं गया बहनचोद और मैं बड़ी ज़ोर से धमाधम स्खलित हो गया।

मेरा ढेर सारा गाढ़ा गाढ़ा वीर्य भाभी के मुंह में झड़ता चला गया और भाभी सब पीती चली गई।

जब मैं सारा का सारा खाली हो गया तो भाभी ने मुरझाये हुए लौड़े को मुंह से निकाला और अपनी धोती के पल्लू से पोंछ प्रिया।

मैं इतनी जल्दी झड़ जाने पर कुछ शर्मिंदा सा हो रहा था लेकिन भाभी ने कहा- लल्ला मुझे पता था कि यही होगा क्योंकि तुमने अभी तक किसी लड़की के साथ कुछ भी नहीं किया है। पहली बार ऐसा ही होता है उत्तेजना काबू नहीं रह पाती। इसी लिये मैंने अपने लल्ला को सबसे पहले चूस के ठंडा कर प्रिया। अब तुम लल्ला चोदने में बहुत देर तक मेरा साथ दोगे।

भाभी ने मेरे गाल पर एक चुटकी काटी और मस्ता के बोली- वैसे लल्ला, तुम्हारे बैंगन का स्वाद बहुत बढ़िया है। जब बैंगन फूटा तो इसकी मलाई खा के भी आनन्द आ गया।

मैंने पूछा- भाभी, यह तो बताओ कि भैया का बैंगन कैसा है उनकी भी तो मलाई चखी होगी तुमने। बताओ ना कैसी है?

भाभी थोड़ी सी उदास होकर बोली- रहने दो लल्ला, क्यों ऐसे सवाल पूछते हो जिनसे मैं दुखी हो जाऊँ।

मैं बोला- भाभी, तुम क्यों दुखी होती हो इस सवाल से, मैंने तो यूं ही पूछ लिया था।

भाभी बोली- लल्ला, तुम्हारे भैया का लंड तुम्हारे से कम से कम दो इंच छोटा तो है ही साथ में तुम्हारे से काफी पतला भी है। उनकी मलाई भी पतली है। मुम्बई में उनका खाने पीने का ढर्रा ठीक नहीं है। इसी लिये उनका वीर्य का गाढ़ापन बहुत घट गया है। पीकर ज़रा भी मज़ा नहीं आता… अच्छा छोड़ो इन बातों को। पहले मैं तुम्हारे लिये खूब मलाई वाला दूध लाती हूँ… पियोगे तो खूब ताक़त बनी रहेगी।इतना कह के भाभी लहराती हुई रसोई की तरफ चल दी और मैं पीछे से उसके हिलते हुए मस्त नितंबों को देख देख के मज़ा लेने लगा। यार, क्या गज़ब के ऊपर नीचे ऊपर नीचे भाभी के चूतड़ हिलते थे, मेरे लंड में दुबारा से कुछ कुछ हरकत होती हुई अनुभव होने लगी।अभी मैं अपनी खुशनसीबी पर इतरा ही रहा था जो मेरी भाभी आज मुझसे चुद जाने को राज़ी हो गई कि मेरी आँखें फटी सी रह गईं।

सामने रसोई से भाभी बिल्कुल नंगी हाथ में एक बड़ा सा गिलास पकड़े मटकती हुई आ रही थी।मैं आँखें फाड़े उस हसीन बला को एकटक देखे गया।

नंगी मेरी तरफ बढ़ती हुई भाभी का दर्शन से मेरा लंड अब फुंकारें मारने लगा।भाभी का गठा हुआ देहाती बदन, उभरता गेंहुआ रंग, मदमस्त बड़े बड़े मम्मे और उन पर सीधी बंदूक की तरह तनी हुई निप्पलें, सुडौल बाहें व टांगें और एक शेरनी के जैसी मतवाली चाल !!!कौन ऐसा मर्द होगा जो इस सेक्सी पटाखे को देख कर इसे जीवन भर चोद देने के लिये व्याकुल ना हो जाये। शहरों की बड़ी बड़ी मॉडेल लड़कियाँ इस गज़ब की गांव की सुंदरी के सामने फेल हैं। भाभी को कोई कीमती मेकअप का समान उपलब्ध न था लेकिन वो मेहनत ताज़ी हवा और ताज़ी फल सब्ज़ियाँ की बदौलत किसी भी मेक अप आइटम की मोहताज न थी। उसकी खूबसूरती 35 वर्ष की आयु में भी गज़ब की थी।‘लो लल्ला… यह गाढ़ी मलाई का खूब कढ़ा हुआ दूध पियो। तुम्हारे बैंगन में ज़बरदस्त ताक़त आयेगी और इस मलाई की तरह तुम्हारे लौड़े की मलाई भी हो जायेगी… दूध पीते जाओ और मुझे निहारते जाओ।भाभी ने दूध का वो बड़ा सा गिलास मेरे हाथों में थमाते हुए कहा।

वैसे तो भाभी अगर न भी कहती तो मैं उनको निहारने ही वाला था क्योंकि मेरी नज़रें तो बगावत पर उतरी हुई थी।ज़बरदस्ती करने पर भी हरामज़ादी भाभी के मस्त शरीर से हटने का नाम नहीं लेती थी, मैंने दूध का गिलास मुंह से लगाया और बिना पलक झपके भाभी के नंगे बदन को देखता ही रहा।

दूध अति स्वादिष्ट था, खूब अच्छे से कढ़ाई में काफी देर तक कढ़ाया गया था और उस में काफी सारी गाढ़ी मलाई आ चुकी थी जबकि उस हल्के गुलाबी हो चुके दूध की सुगंध ने मुझे इतना मजबूर कर प्रिया कि मैं उसे एक ही सांस में गट गट करके पी गया।

जब मैं दूध पी चुका तो भाभी ने कहा- अब लल्ला, मुझे कस के अपनी बाहों में बाँध लो। मैं तुमसे ऐसे लिपटना चाहती हूँ जैसे कि कोई बेल किसी पेड़ से लिपटी रहती है… लो लल्ला अब देर न करो… मैं बहुत बेचैन हूँ किसी तगड़े मर्द की बाहों में लिपटने को।

मैंने भाभी को कस के बाहुपाश में जकड़ लिया और अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिये।यह मेरा पहला चुम्बन था तो तुरंत ही मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया।भाभी ने भी बड़े आवेश से मेरे मुंह को चूमा। कुछ देर तक मैं यूँही भाभी के रसीले होंठ चूसता रहा। भाभी मेरा लंड धीरे धीरे सहला रही थी। तभी भाभी ने मेरा मुंह परे हटा के कहा- लल्ला, अब जल्दी से अपना बैंगन मेरे अंदर दे दो… अब सबर नहीं हो रहा।

इतना कह कर भाभी बिस्तर पर लेट गई और अपनी टांगें चौड़ी कर लीं।भाभी कि मस्त गुलाबी गीली भीगी चूत के दर्शन होते ही मेरा हाल खराब हो गया। मैंने कहीं पढ़ा था शायद अन्तरवासना की ही किसी कहानी में कि जिस लड़की की चुदाई करनी हो, उसकी बुर भी ज़रूर चूसनी चाहिये।

मैंने प्यास से व्याकुल होकर भाभी की सुहावनी चूत पर अपना मुंह लगा प्रिया और जीभ घुसकर लगा चूसने।भाभी तो पहले से ही चुदास से बेहाल थी, मेरी जीभ घुसते ही लगी ज़ोर ज़ोर से आहें भरने।चूतरस पान करने में बेतहाशा मज़ा आ रहा था। रस निकल भी काफी रहा था क्योंकि भाभी बहुत ज़्यादा गर्म हो चुकी थी।भाभी अब मचल रही थी और अपनी टांगें कभी इधर कभी उधर कर रही थी।चूत रस इतना अधिक स्वादिष्ट होता है इसका मुझे अंदाज़ भी नहीं था, रस पीकर इतना मज़ा आ रहा था कि मैं उसका ठीक प्रकार से बयान भी नहीं कर सकता।

तभी भाभी ने मेरे बाल जकड़ लिये और बोली- लल्ला, जल्दी करो ना… अपने लंड को मेरी चूत में डाल दो… मुझ से रूका नहीं जा रहा है।उसके मुंह से ऐसे शब्द सुन कर मैं हैरान रह गया, मैंने लंड चूत जैसे शब्द भाभी के मुंह से पहली बार सुने थे।

मैंने लंड का सुपारा भाभी की रिसती चूत की पंखड़ियों पर लगाया और लगा आस पास घुमाने।

भाभी उत्तेजना से उछल पड़ी, तड़प कर बोली- लल्ला, क्यों तरसा रहे हो अपनी भाभी को? मैं कितने दिन की प्यासी हूँ… अब देर न करो लल्ला… बस पेल दो अपना लम्बा सा बैंगन।

मैंने तपाक से अपना सात इंच का लौड़ा एक ही शॉट में भाभी की तर चूत में ठेल प्रिया.. जड़ तक घुसा प्रिया, भाभी के मुंह से गहरी गहरी आहें निकलने लगीं। भाभी ने एक काम तो बड़ा अच्छा किया था कि चूस के मुझे एक बार झाड़ प्रिया था इसलिये मैं अब काफी देर तक टिक सकता था। अगर उसने वो न किया होता तो पहली बार चूत में लंड देते ही मेरा खलास हो जाना पक्का था।

‘ज़ोर ज़ोर से धक्का लगाओं लल्ला…’ भाभी की आवाज़ आई।

मैंने चार या पांच तगड़े धक्के मारे। मैं पूरा लंड चूत के बाहर ले गया और फिर ज़ोर से लंड को घुसेड़ा।पानी पानी हो रही चूत में जब लौड़ा घुसता तो फच्च फच्च की मस्त कर देने वाली आवाज़ आती थी।

कुछ तगड़े धक्के देकर मैं ज़रा रुक गया और लौड़े को सिर्फ तुनके देने लगा लेकिन भाभी चुदाई की सख्त प्यास में बहुत उतावली हो रही थी, उसने कहा- लल्ला, रुक क्यों गये… बस चोदे जाओ तेज़ तेज़… पूरे ज़ोर से धक्का मारो।

मैंने भी जोश में आकर तेज़ तेज़ तगड़े धक्के मारने शुरू कर दिये। साथ साथ मैं भाभी की उन्नत चूचियाँ भी मसलने लगा जिससे भाभी की बेताबी और भी ज़्यादा बढ़ गई।भाभी बोल रही थी- हाँ… हाँ… जोर से…हार्ड और हार्ड… हार्ड…हाँ… ऐसे ही लल्ला पूरी ताक़त से लौडा ठोको… हाँ हाँ… ऐसे ही… ऐसे ही… ऐसे…ऐसे…

मैं सरपट धक्के पे धक्का ठोके जा रहा था और अब भाभी भी अपने चूतड़ उछाल उछाल के लंड को अपने अंदर ठुकवाये जा रही थी।भाभी ने एक तेज़ लम्बी सी आह भरी, ‘लल्ला लल्ला’ पुकारते हुए वो स्खलित हो गई, चूत से रस का एक फव्वारा छूटा और इस गरम जूस से अंधाधुंध मस्ता कर मैं भी झड़ गया।

थोड़ी देर के बाद जब लंड शांत हो कर मुरझा गया तो अपने आप भाभी की चूत से बाहर फिसल आया। मैंने एक तौलिया लेकर अपने लंड और भाभी की चूत को पोंछा और बोला- भाभी, तुम ये क्या बोल रहीं थीं…हार्ड हार्ड… यग तुमने कहाँ सुना?

भाभी ने कहा- मैं मोबाइल पर ब्लू फिल्म देखती हूँ उसमें चुदाने वाली लड़कियाँ ऐसे बोलती हैं।

मैंने अपने कपड़े पहने और कहा- अच्छा भाभी, अब मैं चलता हूँ।

भाभी उठी और मेरे मुंह को चूमकर बोली- ठीक है लल्ला, आज तुमने बहुत मज़ा कराया और अब शाम को 5 बजे फिर आ जाना !!

मैं उनके घर से निकला और वापिस अपने घर आ गया।

तो यह था दोस्तो, मेरी पहली चुदाई का किस्सा…चन्दनकुमार शर्मा जी के शब्द यहीं समाप्त हुए।

आशा है पढ़ने वालों को चन्दनकुमार शर्मा जी की यह आपबीती पसंद आयेगी। कोई त्रुटि हो तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ क्योंकि कहानी चन्दन कुमार शर्मा जी की है, यह उचित ही होगा यदि कहानी को पसंद करने वाले पाठक/पाठिकायें अपनी प्रतिक्रिया सीधे चन्दन कुमार शर्मा जी को ही मेल कर दें।उनकी EMAIL ID हैchandankumarsharma60@ gmail.comधन्यवादचूतेश

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