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Group Sex Story पठन समय: 13 मिनट पढ़ा गया: 313 बार

मोटे लंड की प्यासी घरवाली को साहब ने चोदा- 2

निशा दिव्येश

23 Nov 2017 को प्रकाशित

मोटे लंड की प्यासी घरवाली को साहब ने चोदा- 2
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ककोल्ड वाइफ फक कहानी में मेरी कम्पनी ने बॉस जांच के लिए आये. उन्होंने शाम को लड़की की मांग रख दी. मेरी बीवी भी मेरे लंड की चुदाई से खुश नहीं थी.

दोस्तो, मैं दिव्येश पुनः आपको अपनी सेक्स कहानी का मजा देने हाजिर हूँ.

कहानी के पिछले भागबॉस का लंड चूसामें आपने पढ़ लिया था कि कंपनी के सर रात को मेरे घर रुके और उन्होंने मुझे अपना लंड चुसवाना शुरू कर प्रिया.मुझे उनके लौड़े को चूसने में मजा आने लगा.

अब आगे ककोल्ड वाइफ फक कहानी:

इस बीच सर ने मेरी और निशा की सेक्स लाइफ के बारे में पूछा.मैंने खुलकर बता प्रिया कि कैसे मेरी कमज़ोरी की वजह से निशा अक्सर अधूरी रह जाती है.

सर सुनते रहे और उनकी आंखों में एक अजीब-सी चमक थी, जैसे वे कुछ और ही सोच रहे हों.

विशाल सर ने धीमी, गहरी आवाज़ में कहा- दिव्येश, बस चूसना ही ठीक है. गांड मारने का मूड नहीं. लेकिन अगर तू कोई चूत का जुगाड़ कर दे, तो मज़ा आ जाए.

मैंने हंसते हुए उन्हें समझाया- सर, यहां ऐसा कुछ नहीं मिलता. ये बॉर्डर का इलाका है, जुगाड़ भूल जाइए.लेकिन सर का मन जैसे कहीं और ही अटक गया था.

वे बोले- अच्छा, तो निशा को भेज दे. बस एक बार … मैं मज़े ले लूँगा और चुपचाप निकल जाऊंगा. वह भी खुश, तू भी खुश. और हां, कंपनी में तेरा भी कुछ भला कर दूँगा.मैं एकदम सन्न रह गया.Cuckold Wife Fuck Kahaniमैंने साफ मना कर प्रिया- नहीं सर, ये नहीं हो सकता. निशा ऐसा नहीं मानेगी.सर ने आंखों में चमक लाते हुए कहा- अरे, तुझे तो कोई दिक्कत नहीं ना? फिर मैं उसे मना लूँगा.

मैं कुछ जवाब न दे सका. मन में एक तूफान सा उठ रहा था. सर का चूत का भूत सवार था और मैं प्यासा ही बिस्तर पर लेट गया.न जाने कब आंखें भारी हुईं और मैं नंगे बदन ही नींद की आगोश में चला गया.

अचानक निशा की सिसकारियों ने मुझे झकझोर प्रिया.मैं हड़बड़ाकर उठा.

नाइट लैंप की हल्की रोशनी में देखा तो निशा विशाल सर के बिस्तर पर थी, उनकी बांहों में सिमटी हुई, आंसुओं से चेहरा भीगा हुआ.

सर उसकी पीठ पर धीरे-धीरे हाथ फेर रहे थे, जैसे कोई पुराना दोस्त हो.मैं नंगा ही था, लेकिन सोने का नाटक करते हुए चुपचाप सब देख रहा था.

सर निशा से कह रहे थे- देख, दिव्येश को कोई दिक्कत नहीं. उसकी इजाज़त से ही मैं तुझसे दोस्ती करना चाहता हूँ. उसकी भी अपनी मजबूरी है. वह समलैंगिक है, ये तू जानती है. डरने की कोई बात नहीं.

निशा की आवाज़ काँप रही थी.वह बोली- मुझे डर है कि कहीं वह मुझे छोड़कर न चला जाए. मैं उसे ताने मारती हूँ, लेकिन सचमुच उससे प्यार करती हूँ.

सर ने उसे तसल्ली दी- अरे, कुछ नहीं होगा. आज रात तो वह मुझसे गांड मरवाने को कह रहा था, लेकिन मैंने सिर्फ़ मुँह में प्रिया. तू भरोसा कर, वह नंगा इसलिए सोया है.मैं चुपचाप सुन रहा था, मन में उथल-पुथल मची थी.

तभी सर ने धीरे-धीरे निशा के कपड़े उतारने शुरू कर दिए.निशा डरी हुई मेरी ओर देख रही थी जैसे मुझसे कोई इशारा माँग रही हो.

लेकिन उसका जादू सर के ऊपर चल चुका था.

वे पागलों की तरह निशा की गोरी-गोरी चूचियों को दबा रहे थे, जैसे कोई भूखा शिकारी अपनी मंज़िल पा गया हो.निशा ने भी धीरे-धीरे अपने आप को उनके हवाले कर प्रिया.

सर का हाथ जब निशा की चूत पर गया तो निशा ने काँपती आवाज़ में कहा- सर, एक बार दिव्येश से सामने बात कर लीजिए. मुझे तसल्ली हो जाएगी.

सर ने मुझे आवाज़ दी- दिव्येश!मैंने थोड़ा हिलकर सोने का नाटक तोड़ा और उठकर बैठ गया.इधर निशा ने जल्दी से कंबल ओढ़ लिया ताकि उसका नंगा बदन न दिखे.

मैंने भी फटाफट कपड़े पहने और पूछा- क्या हुआ, सर? कोई प्रॉब्लम है?सर ने निशा की ओर इशारा करते हुए कहा- मुझे तो कोई दिक्कत नहीं, लेकिन तुझे तो नहीं ना?मैंने धीरे से कहा- नहीं सर, मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं.

मैं बाहर जाने को हुआ, तभी निशा ने मेरा हाथ पकड़ लिया.उसकी आंखें मेरी आंखों में कुछ ढूँढ रही थीं.

सर ने मुझे वहीं बिठा प्रिया और बोले- दिव्येश, ये बात साफ़ हो जाए. कल कोई झगड़ा नहीं होना चाहिए.मैंने कहा- बस सर, प्रॉमिस करो कि ये बात बाहर नहीं जाएगी.

सर ने मुस्कुराते हुए मेरा हाथ पकड़ा और निशा का हाथ मेरे हाथ में दे प्रिया.

फिर निशा का हाथ धीरे से अपने तगड़े औज़ार पर रखवा प्रिया.इसके बाद सर ने निशा के होंठों पर अपने होंठ रखे और कंबल फेंककर उसके पूरे बदन पर हाथ फेरने लगे.

निशा का बदन गर्मी से तप रहा था, वह पूरी तरह सर के रंग में रंग चुकी थी.

मैं बाहर वाले कमरे की ओर जाने लगा.तभी सर ने टोका- अरे दिव्येश, रुक! हमारे साथ जॉइन कर ले.

मैंने एक पल सोचा और फिर अपने कपड़े उतार दिए. सर के कपड़े भी निकाल दिए और लाइट को फुल ऑन कर प्रिया.

कमरे में एक अजीब-सी गर्मी थी.सर ने 69 की पोज़ीशन ली और निशा की चूत को चाटने में डूब गए, उसकी चूत को चाट-चाटकर उन्होंने गुलाबी कर प्रिया.

इधर मैं और निशा बारी-बारी सर के मस्त औज़ार को चूस रहे थे.निशा तड़प रही थी, वह अब बस डलवाने को बेताब थी.

मैं भी उस पल में खो गया था.निशा की वह जंगली सी हालत देखकर मेरा भी मन मचल रहा था.

निशा सर के ऊपर आना चाहती थी लेकिन सर तो उसके पूरे बदन को चूमने और हल्के-हल्के काटने में मस्त थे.वे हर इंच को जैसे अपने नाम कर रहे थे.

निशा की सिसकारियां और सर की भारी सांसें कमरे में गूँज रही थीं.मैं बस देख रहा था और मन में एक अजीब-सा मज़ा भी ले रहा था.

निशा उस रात मस्ती के समंदर में गोते लगा रही थी.उसका हर सिसकना, हर आह, कमरे में एक नया राग छेड़ रही थी.

अचानक विशाल सर ने उसे घोड़ी की तरह झुकाया और पीछे से उसकी चूत पर टूट पड़े.उनकी जीभ निशा की चूत में इतनी गहराई तक जा रही थी कि निशा का बदन सिहर उठता था.

उसकी चूत रस छोड़ रही थी और सर उसकी मिठास को चखने में डूबे थे.इधर मैंने निशा के मुँह में अपना लंड प्रिया और वह आगे-पीछे की ताल में खो गई.

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सर ने फिर खड़े होकर एकदम से अपना तगड़ा औज़ार निशा की चूत में उतार प्रिया. दो-तीन झटकों में ही वह पूरा अन्दर था.निशा के मुँह से दर्द भरी चीख निकली, लेकिन सर पर तो जैसे जुनून चढ़ा था.

वे बिना रुके, बिना रहम के धक्के पर धक्के लगाते रहे और हंसते हुए बोले- आज तुझे असली मज़ा देता हूँ.निशा भी अब दर्द को मज़े में बदल चुकी थी.

वह चीखती हुई बोली- सर, आज मेरी चूत फाड़ दो. सालों से प्यासी हूँ. आपका औज़ार तो कमाल है. दिव्येश तो चार-पांच मिनट में ढेर हो जाता है.

काफी देर तक सर ने निशा को हर तरह से चोदा. फिर उन्होंने निशा के कंधों पर उसके पैर रखे और और गहरे धक्के लगाने लगे.निशा की चीखें अब और तेज़ हो गई थीं, वह बार-बार चिल्ला रही थी- और अन्दर तक डालो, सर आह और अन्दर तक पेलो आह जोर से आह.

सर भी जोश में थे, बोले- आज तुझे दिखाता हूँ, मर्द किसे कहते हैं!मैं भी बीच-बीच में सर के लंड को चूम लेता था, जो निशा की चूत में अन्दर-बाहर हो रहा था.

लंड चुत की गर्मी मेरे होंठों को छू रही थी.

लम्बी चली इस जंगली मस्ती ने दोनों को थका प्रिया.आखिर में चार-पांच तेज़ झटकों के बाद सर और निशा दोनों शांत हो गए.वे एक-दूसरे से लिपटकर गहरी नींद में चले गए.

सुबह के चार बज रहे थे.निशा की चूत से हल्का-सा खून और सर का माल रिस रहा था.

सालों की प्यासी निशा आज तृप्त हो चुकी थी.वह सर की बांहों में सिमटकर सो रही थी, चेहरे पर एक अजीब-सी सुकून भरी मुस्कान लिए.

मैं उन्हें देख रहा था और मन में शर्म का एक तूफान उठ रहा था.शायद दुनिया में मेरे जैसे पति गिनती के होंगे, जो न तो अपनी बीवी को खुश कर पाएं और न ही उसे दूसरों के हवाले करने से रोक पाएं.वे दोनों नंगे ही सो गए थे.

मैं चुपचाप बाहर वाले कमरे में चला गया और सो गया.

सुबह तीन-चार घंटे की नींद के बाद मैं बिना उन्हें जगाए कंपनी के लिए निकल गया.

करीब दस बजे सर का फोन आया- दिव्येश, घर आ. मुझे ले जा!

मैं जल्दी से घर पहुँचा.वहां का नज़ारा देखकर मेरी आंखें ठहर गईं.

दोनों अभी भी नंगे सो रहे थे.

लेकिन निशा के चेहरे पर एक अलग ही रौनक थी, जैसे सालों बाद उसे कोई खोया हुआ खज़ाना मिल गया हो.

मैंने निशा को जगाया और सर के लिए चाय बनाने को कहा.लेकिन सर ने हंसते हुए टोका- अरे, चाय बाद में. एक आखिरी बार मज़ा कर लूँ. तू चाय बना, मैं तब तक …

मैं दूध लेने चला गया और रसोई में चाय बनाने लगा.

इधर कमरे से निशा की सिसकारियां और फच-फच की आवाज़ें गूँज रही थीं.मैंने चाय बनाई और दोनों को दी.

सर और निशा ने एक ही कप से चाय पी, जैसे कोई पुराना जोड़ा हो.

फिर सर नंगे ही उठे बाथरूम गए और निशा को भी नंगी ही अपने साथ बाथरूम में खींच ले गए.

उसकी खिलखिलाती हुई मदमस्त जवानी मुझे अन्दर तक सुख दे रही थी.

बाथरूम में पुनः चुदाई आरंभ हो गई.चूंकि दरवाजा आधा खुला था और आधे दरवाजे से अन्दर का नजारा साफ साफ दिख रहा था.

सर मेरी बीवी को कुतिया बना कर पीछे से पेल रहे थे और वह नल को पकड़ कर ऊंह आह करती हुई अपनी जवानी कुचलवा रही थी.

कुछ देर बाद चुदाई समाप्त हुई और सर ने पलट कर मेरी तरफ देखा.वे हंस कर बोले- सच में दिव्येश, निशा मस्त माल है.

मैं हंस प्रिया.निशा शर्मा कर अपने बदन को ढकने लगी.

जब सर तैयार होकर निशा को बाय बोलने लगे, तो निशा की आंखें छलक आईं.सर ने उसे गले लगाया और बोले- अरे, अभी तो चार दिन और यहीं हूँ. तेरे साथ और मज़े करेंगे.

निशा का चेहरा खुशी से खिल उठा.Cuckold Wife Fuck Kahaniफिर वह मेरे पास आई और मेरे गले लगकर बोली- तुम्हें बुरा लगा हो तो माफ करना. ये सब पहली और आखिरी बार था. अब तुम जो कहोगे, वही होगा.मैंने ककोल्ड वाइफ को समझाया- निशा, इसमें कुछ गलत नहीं. जो हुआ, उसे भूल जा. अगले चार दिन सर के साथ मज़े कर.

तभी सर ने बीच में टपकते हुए कहा- अरे, चार दिन क्या? जब भी मैं इस साइड आऊंगा, मुझे हर बार तेरा साथ चाहिए.

निशा की आंखों में फिर से चमक आ गई.फिर हम कंपनी की ओर निकल पड़े.

अगले चार दिन सर, निशा और मेरे लिए जैसे कोई सपना थे.मुझे भी निशा की चूत और सर के लंड का रस चखने का मौका मिला.

निशा के सामने सर ने मेरी भी गांड मारी और हर रात एक नया रंग लेकर आई.

लेकिन अब तीन-चार महीने बीत गए.सर ने वादा तो किया था लेकिन वे फिर नहीं आए.

निशा आज भी उनकी राह देखती है, लेकिन सर अब काम में व्यस्त हैं.उनके मैसेज का जवाब भी ठीक से नहीं आता.

मैं जैसे-तैसे निशा की प्यास बुझाने की कोशिश करता हूँ, पर वह बात कहां?

तो दोस्तो, कैसी लगी आपको मेरी और निशा की ये ककोल्ड वाइफ फक कहानी?अपने विचार ज़रूर बताएं. मेरा ईमेल नीचे है, अपनी राय भेजना मत भूलना!support@mohakkisse.com

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कहानी श्रृंखला (STORY SERIES)

मोटे लंड की प्यासी घरवाली को साहब ने चोदा

कुल भाग: 2
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Us din fir main Ankit ka wait ka rha tha, par wo nhi aaya. Maine jab use call kiya toh mujhe pata chala, ki wo 2 din ke liye out of city gya hua hai. Ab maa toh meri puri mureed ban chuki thi.

21 मिनट 780

पाठकों की राय

3 टिप्पणियां

विजेश बिश्नोई

2 months ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

विशेष राय

2 months ago

सच में बहुत ही हॉट और उत्तेजक कहानी है भाई। मजा आ गया पढ़कर।

बृजेन्द्र यादव

2 months ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

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