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जीजा साली की चुदाई पठन समय: 11 मिनट पढ़ा गया: 1,148 बार

दीदी ने ही जीजा साली की चुदाई करवा दी-2

अमोल जाधव

03 Jan 2013 को प्रकाशित

दीदी ने ही जीजा साली की चुदाई करवा दी-2
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दीदी ने ही जीजा साली की चुदाई करवा दी-1

अब तक आपने जीजा जी के संग मेरी चुदाई की कहानी में पढ़ा था कि जीजा जी मेरे ऊपर चढ़ गए थे।

अब आगे..

वो पागलों की तरह मुझ पर टूट पड़े और मेरे सिर, गालों पर और होंठों जोर-जोर से चूमने लगे। मुझे ये सब बड़ा ही अजीब लग रहा था लेकिन मैं चुपचाप पड़ी रही।लगभग 15 मिनट तक वो मेरे साथ वैसे ही चूमा-चाटी करते रहे। फिर उन्होंने धीरे से अपना एक हाथ मेरे ब्लाउज के अन्दर डाल प्रिया और मेरे मम्मों को धीरे-धीरे दबाने लगे। इससे मुझे बहुत अजीब लगने लगा और मैंने उनको थोड़ा धक्का देकर उन्हें अपने ऊपर से बाजू कर लिया।

मैं बोली- जीजाजी ये सब मुझसे नहीं होगा.. मैं तो आपको अपना भाई मानती हूँ.. प्लीज ये सब मुझसे नहीं होगा।तो जीजाजी थोड़े गुस्से से बोले- क्या प्राब्लम है यार, जीजा और साली का रिलेशन अलग ही होता है, साली तो आधी घरवाली होती है.. तो वो भाई-बहन कैसे बन सकते हैं। तुम्हें कुछ नहीं करना है, तो ठीक है मैं जाता हूँ उसी लड़की के पास।

मुझे तो लग रहा था कि यहाँ से निकल जाऊं लेकिन तभी मुझे स्पूजा का रोता हुआ चेहरा याद आया और मैं चुपचाप बेड पर लेट गई।अब मैं थोड़े गुस्से से ही बोली- ठीक है जो करना है कर लो।

जीजाजी फिर से मेरे ऊपर लेट गए और मुझे चूमते हुए ही एक हाथ से मेरे मम्मों को जोर-जोर से दबाने लगे।

शायद 5 मिनट के बाद उनका मन दूध दबाने से भर गया तो उन्होंने मुझे उठाया और बिस्तर पर ही खड़ा कर प्रिया।, वो खुद घुटनों के बल बैठ गए। मैंने देखा कि मेरी साड़ी का पल्लू उनके हाथ में था.. इससे मैं समझ गई कि अब वो मेरी साड़ी उतारने वाले हैं।

यही हुआ.. दूसरे ही क्षण उन्होंने धीरे-धीरे मेरी साड़ी को खोल प्रिया और मेरे पेटीकोट में अन्दर हाथ डाल कर मेरी जाँघों तक हाथ को ले जाकर सहलाना शुरू कर प्रिया। इससे मुझे एक अजीब सी सिहरन होने लगी।

फिर जीजा जी ने मेरे पेटीकोट के नाड़े को पकड़ा और एकदम से खींच प्रिया, पेटीकोट मेरी टांगों से नीचे गिरा गया और मैं नीचे सिर्फ पेंटी में रह गई।मैंने लज्जा से अपना हाथ अपनी पेंटी पर बुर के ऊपर रख लिया।

तभी जीजाजी बेड पर खड़े हो गए और मुझे बांहों में भर कर मेरे होंठों को चूमने लगे। फिर उन्होंने मेरे ब्लाउज के बटन खोल कर उसे अलग कर प्रिया।

इसके बाद उन्होंने मुझे बेड पर लिटा प्रिया और खुद पलंग से नीचे होकर अपना कच्छा उतारने लगे।

अगले ही पल जीजाजी बिलकुल नंगे हो गए और उनका मोटा लम्बा लंड नब्बे डिग्री का कोण बनाता हुआ मेरी तरफ गुर्राने सा लगा।

जीजाजी ने लंड को हाथ से पकड़ कर मुठियाया और बोले- देख तेरी सील तोड़ने का औजार कितना बेकरार है।

मैंने आँखें बंद कर लीं तो जीजा जी मेरे साथ लेट गए।

अब उन्होंने मुझे अपनी बांहों में खींच कर मेरी पीठ पर हाथ ले जाकर ब्रा का हुक खोल प्रिया और मेरे कबूतर खुल्ला हो गए।

जीजाजी ने मुझे सीधा लिटाया और अपने मुँह से मेरे एक निप्पल को चूसना शुरू कर प्रिया। मेरी सिसकारी निकल गई। अब मुझे कुछ-कुछ मजा सा आने लगा था.. हालांकि अब भी मेरा मन डरा हुआ था।

जीजाजी ने मेरे दोनों दूध खूब चूसे, जिससे मेरी बुर ने भी पानी छोड़ प्रिया था। तभी जीजा जी ने एक हाथ मेरी पेंटी पर फेरा और पेंटी पर गीलेपन का अहसास होते ही वो मुस्कुरा उठे और उन्होंने मेरी पेंटी के अन्दर हाथ डाल कर मेरी बुर को सहला प्रिया.. मेरी सिहरन एकदम से बढ़ गई और मैं रोने लगी।

जीजा जी बोले- रो क्यों रही हो, आज नहीं तो कल तुमको चुदना तो था ही बस लंड का फर्क है.. कोई और लंड तुम्हारी बुर को चोदे या मैं चोदूं इससे क्या फर्क पड़ता है।

मैं कुछ नहीं बोली और चुपचाप पड़ी रही। अब जीजाजी ने नीचे को होकर मेरी नाभि को चूमा और अपने हाथ से मेरी पेंटी को नीचे खींच प्रिया और अपने एक हाथ से उसे बाहर निकाल कर फेंक प्रिया।

मेरी चिकनी बुर उनके लंड के शिकार के लिए उनके सामने रोते हुए आँसू रही थी।

जीजा जी ने बुर की दरार में उंगली लगाई और गच से अन्दर घुसेड़ दी।

‘आह्ह..’ करके मेरी चीख निकल गई और जीजाजी हंस दिए। मानो उन्हें पता चल गया हो कि एक सील पैक बुर ही उनके सामने थी।

जीजा जी मेरी बुर पर अपनी जीभ लगा दी और बुर को चूसना शुरू कर प्रिया।

उनकी जीभ के स्पर्श से मेरी बुर एकदम से कंपकंपा सी उठी और मेरी टांगें बरबस सिकुड़ने लगीं, लेकिन जीजा जी ने अपने हाथ से मेरी टांगों को पकड़ रखा था।

कुछ देर तक बुर को चूसने के बाद मेरी बुर भी मानो राजी हो चली और मैंने पैरों को थोड़ा और खोल प्रिया।

अब जीजा ने मेरी बुर के दाने को अपने होंठों में पकड़ कर खींचा तो मैं मन ही मन उत्तेजना से भर उठी और पता नहीं कैसे मेरी गांड ने उचक कर जीजा के मुँह में बुर को दबा प्रिया।

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करीबन पांच मिनट में ही मेरी बुर ने पानी छोड़ प्रिया और मैं निढाल हो गई।

अब जीजा जी ने मेरी बुर को चूसना छोड़ प्रिया और मेरे मुँह की तरफ लंड करके नीचे खड़े हो गए। मेरी आँखें मुंदी हुई थीं। तभी उनके लंड का अहसास मुझे अपने होंठों पर हुआ, मैं डर गई।

मैंने आँखें खोल कर उनसे कुछ कहने के लिए मुँह खोला तो उनके लंड का सुपारा मेरे मुँह में घुस गया।

मैंने मुँह घुमाया तो उन्होंने मेरे गालों को पकड़ लिया और न चाहते हुए भी मुझे उनका लंड चूसना पड़ा।

काफी देर से उनका लंड तनतनाया हुआ था, तो मेरे मुँह की गर्मी पाकर अगले ही पल लंड ने मेरे मुँह में पानी निकाल प्रिया।

मैंने खांसा और उनका माल थूकने को हुई तो जीजा जी ने मेरे मुँह पर अपना मुँह लगा प्रिया। मैंने उनके लंड का माल उनके मुँह में ठेला तो उन्होंने वापस माल को मेरे मुँह में कर प्रिया।

कुछ ही पलों में मेरे गले में उनका माल जा चुका था। हम दोनों ही एक-एक बार स्खलित हो चुके थे।

लगभग पांच मिनट तक जीजा जी यूं ही मुझसे लिपटे पड़े रहे फिर वो मुझे अपनी गॉड में उठा कर बाथरूम ले गए।

वहां शावर चला कर उन्होंने मुझे खुद से चिपका कर खूब नहलाया। उधर ही तौलिया से मेरे शरीर को पोंछ कर बोले तुम पलंग पर जाकर लेटो, मैं अभी आकर तेरी सील तोड़ता हूँ।

मैं फिर डर गई और जाकर बेड पर लेट गई। एक मिनट जीजा जी वापस अन्दर आए और अब मुझे कुछ खुशबू सी आ रही थी उन्होंने लंड को मेरे मुँह की तरफ किया तो मुझे लगा कि उन्होंने अपने लंड में कोई सेंट लगाया है। बाद में मुझे मालूम हुआ कि देर तक चुदाई करने वाला कोई स्प्रे था।

मैंने मुँह फेर लिया तो उन्होंने मुझसे कहा- अच्छा इसे हाथ से सहला तो दो।जबरन उन्होंने मेरे हाथ में अपना लंड थमा प्रिया और अपने हाथ को मेरे हाथ पर रख कर लंड को हिलवाने लगे।

कुछ ही देर में लंड खड़ा हो गया और वे मेरी टांगों के बीच में आ गए।

अब मैंने आँखें खोल लीं क्योंकि मुझे बहुत अधिक डर लग रहा था और साथ ही मैं बुर को अपने पैरों से छुपाने की कोशिश कर रही थी।

तभी जीजाजी ने मेरे पैरों को फैलाया और लंड को मेरी बुर के मुहाने पर टिका प्रिया। लंड का स्पर्श होते ही मेरी घिग्घी सी बंध गई पर मैं बेबस थी।

फिर जीजा जी ने अपने लंड के सुपारे को मेरी बुर की दरार में ऊपर से नीचे तक फेरा तो मुझे मजा तो आया पर इस वक्त मुझे बहुत डर लग रहा था इसलिए मैं घबरा रही थी।

जीजा जी मेरे ऊपर झुक कर मेरे होंठों को चूमा और कहा- डरना मत.. कुछ नहीं होगा बस थोड़ा सा दर्द होगा लेकिन फिर मजा भी बहुत आएगा।

उनकी इस बात से मुझे लगा कि जीजा को प्यार से चोदना भी आता है और मुझे कुछ राहत भी मिली।

इसके बाद उन्होंने मेरी चुची चूसीं तो मुझे हल्का सा मजा आया.. और उसी वक्त मुझे लंड बुर में हरकत करते सा महसूस हुआ।

तभी जीजा जी ने थोड़ा सा लंड को सैट करते हुए मेरे होंठों पर अपने होंठ जड़े और लंड को झटका दे प्रिया।

उनके इस झटके से लंड का सुपारा मेरी बुर में पेवस्त हुआ ही थी कि मुझे लगा कि कोई दहकता अंगारा मेरी बुर में घुस गया हो। मेरी चीख निकलने को हुई पर जीजा ने मेरे मुँह को बंद कर रखा था तो मैं छटपटाने लगी। इसी बीच जीजाजी ने एक बार और प्रहार किया तो लगभग आधा लंड बुर में घुसता चला गया। मैं इस बार बेहोश सी हो गई और तभी जीजा जी ने पूरा लंड बुर में घुसेड़ प्रिया मुझे कुछ गीला सा लगा मगर मैं जीजा के लंड के नीचे दबी हुई छटपटा रही थी तो मुझे अहसास ही नहीं हुआ कि मेरी बुर ने खून उगल प्रिया है।

फिर अचानक ऐसा लगा कि मैं एकदम से अकड़ सी रही हूँ मुझे मजा का अतिरक्त अनुभव होने लगा और मैंने अपनी बुर से कुछ निकलता सा महसूस किया इसी के साथ मैं ढीली हो गई।

पर जीजाजी मुझे रौंदते रहे.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… और कुछ ही धक्कों बाद मैं फिर से गरम हो कर उनके धक्कों का जबाव अपनी गांड उछाल कर देने लगी।

लगभग दो या तीन मिनट में ही एकदम से मानो जलजला सा आ गया और जीजाजी और मैं एक साथ झड़ते हुए एक-दूसरे की बांहों में लिपट गए। जीजा जी ने मुझे चोद प्रिया था मेरी सील तोड़ दी थी।

अब जीजा जी को किसी और लड़की की बुर के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता था। रात को बिस्तर पर हम दोनों चुदाई का खेल खेलते थे और दीदी सामने बैठी अपनी बुर में उंगली करते हुए हम दोनों की चुदाई देखती रहती थीं।

मेरा जीजा बहुत ही मादरचोद किस्म का इंसान निकले। उन्होंने मेरी सील तोड़ने के बाद कुछ ऐसा भी किया जो मैं आपको अपनी अगली कहानी में लिखना चाहती हूँ।

मेरी इस चुदाई की कहानी पर आपके कमेंट्स का इन्तजार रहेगा।support@mohakkisse.com

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दीदी ने ही जीजा साली की चुदाई करवा दी

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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

अनुज गंगवार

2 months ago

रिश्तों की ये कहानी सच में बहुत ही कामुक थी। अंत बहुत ही गर्म था।

अमित कुमार21

2 months ago

क्या दीदी को पता चल गया था? अगला पार्ट जल्दी डालो यार।

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