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Group Sex Story पठन समय: 10 मिनट पढ़ा गया: 713 बार

चूत की आग के लिए मैं क्या करती-9

सुरभि तिवारी

10 Apr 2020 को प्रकाशित

चूत की आग के लिए मैं क्या करती-9
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फिर हम लेटे लेटे बात करने लगे, मैंने कहा- कल और मजा आएगा, कल सुशील भी आ जायेगा।अनीता- अब यह सुशील कौन है?मैंने कहा- यहीं पास में रहता है, काफी अच्छा लड़का है और हम तीनों खेल चुके हैं।

अनिल- हाँ अनीता जी, काफी अच्छा लड़का है और उसका लंड काफी सुंदर और बड़ा है, आपको आज से ज्यादा मजा आएगा, बहुत अच्छे से चोदन करता है।और उसकी तारीफ करते हुए हम तीनों कब सो गए पता ही नहीं चला।

तीनों बिना कपड़ों के थे, रात को अनिल की नींद खुली तो वो अनीता को फिर चोदने की तैयारी में था, अनीता भी इसके लिए जैसे तैयार थी, पलंग हिलने से मेरी नींद खुली तो मैंने कहा- अनिल क्या बात है, काफी मर्दानगी आ रही है?

अनिल- क्या करूँ भाभी! आप दो दो हसीनाओं के बीच होने के बाद भी मर्दानगी जोश नहीं मारेगी तो कब मारेगी! और फिर अनीता की सुन्दरता मुझे पागल कर रही है, मैं आपको तो फिर भी कभी भी रगड़ लूँगा पर इनको चोदने का मौका कब मिलने वाला है पता नहीं और यह कभी मेरे साथ सेक्स का हाँ भरे या नहीं?

अनीता- क्या बात करते हैं? अनिल जी आपके साथ जो मजा आया है शायद कभी ऐसा मजा नहीं आया था और आज से मैं आपकी गुलाम हूँ, आप जब भी आदेश करेंगे, मैं आपके नीचे बिछने के लिए तैयार हूँ, बस आप चोदते रहे, कभी आपका लंड मेरे अन्दर से बाहर ना निकले, ऐसा मन करता है।

मुझे कुछ नहीं सूझा, मैं अपने हाथ से अपनी चूत सहलाने लगी तो अनीता ने मुझे इशारा करके अपने पास बुला कर मेरी चूत अपनी जुबान से रगड़ने लगी, मुझे मजा आने लगा।

इधर अनिल के धक्के तेज हो रहे थे, उसके धक्के से अनीता की जुबान भी तेज चल रही थी और हम दोनों अनीता और मैं साथ साथ झड़ गए। अनिल ने अनीता की चूत से बाहर निकाल कर लण्ड मेरी चूत में डाल प्रिया और तेज तेज प्रहार करने लगा।

थोड़ी देर में मैं फिर झड़ गई। अनिल ने फिर अपना लंड बाहर निकाल कर अनीता की चूत में डाल प्रिया और उसकी सेवा करने लगा। थोड़ी देर में अनीता की चूत में ही अनिल झड़ गया तो मैं उससे लड़ते हुए बोली- मुँह में क्यों नहीं प्रिया?

और मैं अनीता की चूत चाटने लग गई। दोनों के रस का स्वाद और भी मजेदार था। मैंने थोड़ा सा रस मुँह में लेकर अनीता को भी चखाया, अनीता को भी मजा आ गया, बोली- वाह सुरभि! मजा आ गया! तुम्हारी वजह से मेरा जीवन धन्य हो गया! अनिल जी, थैंक्स!

अनिल- आप जैसे खूबबसूरत औरत पाकर मैं धन्य हो गया, कल सुशील मैं आप और भाभी सभी मिल कर और ज्यादा मजा करेंगे।

मैंने बीच में कहा- तुम दोनों के लिए एक और सरप्राइज है, वो कल ही पता लगेगा और इतना मजा आएगा कि बस…

दोनों आश्चर्य से मेरी ओर देखने लगे और पूछने लगे तो मैंने कहा- यह तो कल ही पता चलेगा।

अनिल और अनीता बस पूछते रहे पर मैंने नहीं बताया।

खैर रात को हम सो गए, अगले दिन तो अनीता अकड़ गई थी, उसकी इतनी ज्यादा चुदाई पहली बार हुई थी।

शाम को सुशील का फोन आया- भाभी, मैं आ गया हूँ, क्या आदेश है मेरे लिए? क्या करूँ क्या नहीं?

मैं- अरे सुशील, आ जाओ ना! मैं कब से इन्तजार कर रही हूँ तुम्हारा!

सुशील- और रवि को..?

मैं- जरूर लेकर आओ! और तुम्हारे लिए एक तोहफा भी है, शायद तुमको अच्छा लगे, सब काम से निपट कर आना, बार बार जाने का काम मत रखना।

रात करीब आठ बजे सुशील आ गया। उस समय अनिल टीवी देख रहा था, उसने आते ही अनिल से नमस्ते किया, अनीता मेरे साथ रसोई में थी।

वो सीधा मेरे पास आया- भाभी, मैं आ गया!

ऐसा कहता हुआ आ ही रहा था कि अनीता को देख कर ठिठक गया और नमस्ते भाभी नमस्ते दीदी!

उसको लगा कि कोई मेरी ननद वगैरह कोई होगी।

सुशील- अच्छा भाभी, मैं यह कहने आया था कि कोई काम हो तो बोल देना, मैं आ गया हूँ, और मैं अब चलता हूँ।

मैं- अरे सुशील, कहाँ जा रहे हो? रुको! यह अनीता है, मेरी सहेली! और तुम रवि को लेन वाले थे? क्या हुआ उसका?

सुशील- वो अब आएगा भाभी! मैं उसको फोन करूँगा तब!

खाना बन चुका था, मैंने कहा- रवि को भी बुला लो, वो भी साथ खाना खा लेगा।

सुशील ने उसको फोन लगाया, उसने कहा आता हूँ! पाँच मिनट में पहुच जाऊँगा, तुम्हारे फोन का ही इन्तजार था।

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अनिल और अनीता कुछ नहीं समझे थे, तब तक अनिल ने मुझे अंदर आने का इशारा किया, हम दोनों अंदर गए, उसने पूछा- यह कौन है? और सब क्या है?

मैंने कहा- यह भी हमारी राजदार है और तुम लोग इसको भी भोग सकते हो।

सुशील ख़ुशी से उछल पड़ा- सच भाभी?

और उसने मुझे ख़ुशी से चूम लिया। घंटी बजी, यह रवि ही था, सुशील ने दरवाजा खोला, रवि अंदर आ गया, वह इतने सब लोग देख कर घबरा गया- नमस्ते भाभी!

बोल कर एक तरफ बैठ गया। अनिल रवि को देख रहा था, वो मेरी तरफ आश्चर्य से देख रहा था। मैंने कुछ नहीं बोला।

सुशील ने परिचय कराया- यह रवि है मेरा दोस्त! और ये अनिल भैया हैं, और ये अनीता दीदी हैं।

थोड़ी देर में ही रवि हम सबमें घुलमिल गया। रात के 9.30 बज चुके थे, टीवी चल रहा था, कुछ मजेदार देखते हैं!

माहौल को सेक्स की तरफ ले जाने के लिए मैंने सेक्सी फिल्म लगा दी, सब मजे से देखने लगे, सब गर्म होने लगे।

अनिल ने अनीता के कबूतर दबा कर कहा- क्या हो रहा है अनीता जी? क्या हाल है?

सुशील मेरे पास आ गया और मेरे साथ मजे लेने लगा। रवि बैठा सब देख रहा था, उसको कुछ समझ नहीं आ रहा था तो वो टीवी देख रहा था।

मैंने सुशील से कहा- रवि को बुला लो, बेचारा अकेला बैठा है।

रवि मेरे पास आ गया, मैंने उसके लण्ड पर हाथ रख प्रिया, वो पूरी तरह से कड़क हो रहा था, मैंने कहा- वाह रवि बाबू! बिन कुछ करे इतना कड़क?

रवि बोला- क्या करूँ भाभी! सब कुछ देख देख कर मेरा हाल बुरा है, मैंने आज से पहले ये सब नहीं देखा था।

अनिल ने अब तक अनीता को उपर से नंगा कर प्रिया था, उसके दूध बाहर आ चुके थे, उस पर सुशील की नजर पड़ गई, सुशील बोला- वाह क्या कबूतर हैं अनीता जी के!

मैंने कहा- छू कर देखो और मजा आएगा।

सुशील अनीता के पास गया अब मैं और रवि रह गए थे। सुशील अनीता के बूब्स पर लग गया और रवि मेरे! रवि मुझ पर मरता था, वो मुझे बेतहाशा चूम रहा था और जोर जोर से मेरे बूब्स दबा रहा था, मुझे मजा आ रहा था।

सुशील और अनिल ने अनीता के एक एक स्तन पकड़ रखा था और दोनों दबा रहे थे।

मैंने पूछा- क्यों अनीता, कैसा लग रहा है?अनीता बोली- मजा आ रहा है यार! ऐसा लग रहा है कि मैं किसी अंग्रेजी फिल्म की हिरोइन हूँ।

अब अनीता का हाथ सुशील के लिंग पर जा पहुँचा था, वो भी धीरे धीरे सुशील को नंगा कर रही थी, उसने उसका लिंग बाहर निकाल लिया और अनिल खुद ही नंगा हो गया। अनिल का ध्यान सुशील के लिंग पर गया, उसने उसके लिंग को छू लिया, बोला- सुशील, क्या मजेदार लिंग है तुम्हारा!

और आगे पीछे करने लगा। सुशील को मजा आया वो बोला- अनिल भैया, आपने रवि का नहीं देखा न इसलिए ऐसा कग रहे हो, एक बार उसका देख लोगे तो मजा आ जायेगा!

इतना कहते ही मैंने रवि की पैंट खींच दी और रवि को नंगा कर प्रिया। अब सबका ध्यान रवि के ऊपर गया। अनीता सुशील-रवि दोनों का लिंग बारी बारी देख रही थी, उससे रहा नहीं गया, उसने कहा- सबके लिंग अलग अलग तरह के होते हैं, यह मुझे आज पता लगा। जब भी यह बात होती थी कि सबके साथ अलग अलग मजा आता है तो मैं नादान नहीं समझ सकती थी। अगर सुरभि तू नहीं मिलाती तो!

अनीता ने अनिल का लिंग मुँह में ले लिया, मैंने रवि का! सुशील अकेला था तो अनिल ने उसको पास बुलाया और अनिल ने सुशील का लिंग मुँह में ले लिया। सब मजे कर रहे थे।

थोड़ी देर में रवि से नहीं रहा गया, उसने कहा- प्लीज भाभी, मुझे आपकी चुदाई करनी है, फिर जितना चाहे चूस लेना। मुझ से नहीं रहा जाता है अब और!

वो मेरे मुँह से हट कर जल्दी से मेरी चूत पर आ गया। उसका सात इंच लम्बा, पतला, एकदम सीधा लिंग था, काफी सुंदर और आकर्षक! कोई भी देख कर मुँह में लेने का मन बना ले।उसने अंदर डालते ही बस…

कहानी अभी बाकी है।आपके मेल के इन्तजार मेंsupport@mohakkisse.com

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चूत की आग के लिए मैं क्या करती

कुल भाग: 4
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14 मिनट 729

पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

आर्यन कुमार

3 months ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

मालिनी शर्मा

4 months ago

सच में बहुत ही हॉट और उत्तेजक कहानी है भाई। मजा आ गया पढ़कर।

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