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फौजी अफसर की नवविवाहिता बीवी ने अपने घर में चूत चुदवाई-1

चूतेश

25 Apr 2015 को प्रकाशित

फौजी अफसर की नवविवाहिता बीवी ने अपने घर में चूत चुदवाई-1
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दो मर्दों से चुदी नीलम रानी की बहननीलम रानी का नक़ली देह शोषणसेक्रेटरी की ऑफिस में चुदाईऔरनई चूत का मज़ा लेने का नशा

जब मोना ने अनुजा रानी का रेफेरेंस दिया तो मैंने भी दिलचस्पी लेते हुए बात आगे बढ़ाई।पता चला कि मोना और अनुजा रानी काफी पक्की सहेलियाँ हैं। अनुजा रानी की बहन नीलम रानी से भी उसकी अच्छी जान पहचान है। इनका तीनों का आपस में कई बार समलैंगिक यौन सम्बन्ध भी हो चुका है।

शादी के समय उसका पति दिल्ली में पोस्टेड था परन्तु शादी के डेढ़ महीने के बाद उसकी बदली जम्मू कश्मीर में बारामूला में हो गई। बारामूला एक नॉन फैमिली स्टेशन है अर्थात वहाँ पर पोस्टेड फौजी अपने परिवार को साथ नहीं रख सकते हैं। इसलिए मोना दिल्ली में ही है और उसका पति बारामूला में।दिल्ली में मोना आर्मी अफसरों के क्वाटर्स में रहती है।

उसका पति चुदाई में अच्छा है लेकिन जैसी चरम आनन्द से भरी चुदाई के बारे में अनुजा रानी और नीलम रानी ने वर्णन किया था वैसी मज़ेदार चुदाई उसको नहीं मिली और इसलिए वो भी अपनी दोनों सहेलियों की तरह खूब चुदाई की मस्ती लूटना चाहती है।

धीरे धीरे बातें आगे बढ़ती गई और अगले शनिवार को हमने दिल्ली हवाई अड्डे के पास पांच सितारा होटल रैडिसन की कॉफी शॉप में मिलने का प्रोग्राम बना लिया। मोना ने अपनी कुछ फोटो मुझे मेल कर दीं ताकि मैं उसको पहचान लूँ। मेरी बहुत सी फोटो उसने अनुजा रानी और नीलम रानी के पास देख रखी थीं इसलिए वो बोली कि मुझे आराम से पहचान लेगी।

मैं समय से आधा घंटा पहले ही पहुँच गया और होटल की लॉबी में बैठ कर मोना का इंतज़ार करने लगा।मोना सही वक़्त पर होटल में दाखिल हुई, भीतर आकर वो थोड़ा हड़बड़ा सी गई जैसा कि अक्सर पांच सितारा होटल में पहले बार जाने पर होता है कि इंसान वहाँ के आलीशान वैभव से चकाचौंध होकर थोड़ा सा नर्वस सा हो जाता है, मोना के साथ भी वही हुआ।वो नर्वस होकर इधर उधर खोजती हुई नज़रों से देखने लगी।

मैंने उसको देखते ही पहचान लिया और पहले अच्छे से उसका मुआयना किया।खिलता हुआ गेंहुआ रंग, क़द करीब 5 फुट 3 इंच, छरहरा मस्त फिगर वाला शरीर, एक आकर्षक चेहरा, बड़ी बड़ी आँखें, और यारों उम्म्म्म्म !!! अच्छे सुडौल दिखने वाले मस्ताने चूचे जो रानी के ब्लाउज में से बाहर टूट पड़ने को हुए जा रहे थे।

मोना रानी ने हल्के हरे रंग की एक अच्छी सी बारीक प्रिंट वाली साड़ी और मैचिंग गहरे हरे रंग का स्लीवलेस ब्लाउज पहन रखा था, पैरों में मध्यम एड़ी की एक सुन्दर सी चप्पल।उसके कपड़े और चप्पल कोई बहुत क़ीमती नहीं थे परन्तु देखने में सुन्दर थे और रानी के बदन पर खूब जम रहे थे।हाथ और कोहनी तक बाहें मेहँदी में सजी हुई… एक खूबसूरत सा डिज़ाइन मेहँदी में बनाया गया था। पैर दिख नहीं रहे थे लेकिन एक नई ब्याही हुई लड़की के हिसाब से अंदाज़ था मेरा कि वे भी मेंहदी से सजे होंगे।

इसके आगे की कहानी अब मोना रानी के शब्दों में है। मोना रानी ने मुझसे कहा था कि यह कहानी वो लिखना चाहती है, उसे भी लिखने का शौक़ है और वो यह कहानी एक लड़की के दृष्टिकोण से लिखना चाहती है।मैंने मोना रानी की बात मान ली, भला मैं इसमें ऐतराज़ क्यों करता?

फिर भी अंतिम निर्णय पढ़ने वालों का होगा कि वो मोना रानी के शब्दों में कहानी पसंद करते हैं या नहीं।यदि करेंगे तो भविष्य में सभी कहानियाँ मोना रानी ही लिखा करेगी अन्यथा यह चूतेश तो है ही आपकी सेवा में।

मोना रानी के शब्द:

पाठकों को मोना का नमस्कार!मैं नहीं जानती कि मैं चूतेश जी जैसा लिख पाऊँगी या नहीं लेकिन प्रयास अवश्य करुँगी कि आपको पता ही न चलने दूँ कि कहानी चूतेश जी ने नहीं बल्कि किसी और ने लिखी है।एक बात ज़रूर कहूँगी कि मैं एक लड़की के मन में चुदाई के समय और चुदाई के दौरान उफनती हुई भावनाओं का वर्णन बेहतर कर सकूंगी परन्तु शायद एक पुरुष की भावनाएँ मैं उतनी भली प्रकार न बता पाऊँ!

तो कहानी आगे बढ़ाते हैं।

जैसा राजे ने बताया, मैं होटल में प्रवेश करके थोड़ी सी नर्वस हो गई थी। मैं पहली बार किसी 5-स्टार होटल में गई थी। मुझे लग रहा था मैं किसी ऐसी जगह आ गई हूँ जहाँ के लिए न तो मैं खुद और न मेरा पह्नावा उपयुक्त है। इस जगह का दर्जा मुझ सी मध्यम वर्ग की लड़की से बहुत अधिक ऊँचा है।

थोड़ी सहमी सहमी सी मैं अभी सोच ही रही थी कि क्या करूँ, किस से पूछूँ कि कॉफ़ी शॉप कहाँ है कि अचानक दो भारी भरकम, पत्थर से सख्त हाथों ने मेरे कंधे जकड़ लिए और मेरे कानों में एक मर्दानी आवाज़ आई ‘हाय मोना रानी…’इसके पहले कि मैं कुछ समझ पाती या संभल पाती, उन हाथों ने मुझे पलट दिया।राजे मेरे सामने खड़ा था… मैंने फ़ौरन पहचान लिया।करीब छह फुट का बलिष्ठ मर्द मेरे सामने खड़ा हुआ मुस्कुरा रहा था। उसकी सफ़ेद दाढ़ी ने उसकी सूरत अमिताभ बच्चन जैसी बना दी थी।

हालाँकि अनुजा ने बताया था कि राजे बहुत स्मार्ट है फिर भी किसी के बताने और साक्षात देखने में बहुत फर्क होता है। वो स्मार्ट ही नहीं बहुत स्मार्ट था। उसके कपड़े, जूते भी बहुत कीमती थे जैसे बहुत महंगे शो रूम्स में ही दीखते हैं। दोनों हाथों में एक एक अंगूठी और दाईं कलाई में सोने की एक चेन!

तभी वो दोनों हाथ कन्धों से हटे और उन्होंने मेरा चेहरा थाम लिया।गर्म हाथ थे जिनकी गर्मी से मेरा चेहरा भी गर्म हो गया।

मैं कुछ सोचने समझने की कोशिश ही कर रही थी कि मुझे अपना मुंह ऊपर उठता हुआ महसूस हुआ और आगे ही क्षण राजे ने मेरे होंठ चूम लिए, उसके गर्म, गीले होंठ जैसे ही मेरे होंठों से मिले, मेरे तन बदन में बिजली की तरंग बड़ी तेज़ी से ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर दौड़ गई।

उसकी कहानियाँ पढ़ कर मैं मानसिक रूप से तैयार तो थी कि वो कोई ऐसी वैसी हरकत अवश्य करेगा लेकिन वो मुझे होटल की लॉबी में चूम ही लेगा और वो भी होंठ, ये तो मैं कल्पना भी नहीं कर सकती थी।मैं शर्म से पानी पानी हो गई।

होटल की लॉबी में इतने सारे जनों के मौजूद रहते राजे ने मेरे होंठ चूम लिए… ये सब क्या सोचते होंगे मेरे विषय में।मैं शर्म के मारे धरती में गड़ी जा रही थी। दिल के किसी कोने में राजे की इस धृष्टता पर ताव आता था वहीं उसी दिल के किसी और कोने में उसकी इस हरकत पर प्यार भी।मैं फैसला ही नहीं कर पा रही थी कि दिल के किस कोने का पलड़ा ज़्यादा भारी है।

उसने कुछ ही समय में मुझे विश्वास दिला दिया था कि स्त्री सौंदर्य मुझ से ही शुरू होकर मुझ पर ही ख़त्म हो जाता है। अर्धसुध सी मैं भी स्वयं को स्वप्न सुंदरी मान बैठी थी। कुछ ही समय के लिए सही किन्तु यह अहसास था तो बड़ा मधुर ही।

मेरा मस्तिष्क मुझे बार बार कटोच रहा था कि मोना होश में आ। तू एक साधारण शक्ल सूरत की, साधारण से परिवार की, साधारण सी लड़की है, तू कोई खूबसूरती की पहचान नहीं है।परन्तु जब दिल और भावनाएँ आकाश में ऊँची उड़ान में हों तो दिमाग की आवाज़ तो नक्कारखाने में तूती की बेअसर आवाज़ सरीखी ही हो जाती है।

उसके बाद तो स्थिति मेरे हाथ से निकल गई, मंत्रमुग्ध सी मैं, राजे जैसा करता गया, वैसे ही उसका साथ देती रही। मेरे होश-ओ-हवास मेरा साथ छोड़ चुके थे। मेरे होंठ उस मधुर चुम्बन के बाद से सुलग रहे थे, मेरे वक्ष में भयंकर अकड़न महसूस होने लगी थी, मेरी चूत में तेज़ सुरसुराहट हो रही थी।

मुझे धुंधला सा याद है कि राजे ने चुम्बन लेकर कहा कि मोना रानी चल कॉफ़ी शॉप में चलकर आराम से बातें करेंगे।मुझे याद है कि उसने मेरी बाज़ू थाम ली और मुझे कॉफी शॉप की ओर ले चला।मैं तैरती हुई सी, उसकी बांह से टंगी हुई सी उसके साथ चलती चली गई।

उसके बाद यह याद है कि राजे ने एक कुर्सी पीछे खिसका के मुझे बैठा दिया और एक कुर्सी खींचकर मेरी वाली कुर्सी से सटाकर बैठ गया।कब कॉफ़ी का आर्डर हुआ, कब कॉफ़ी आई, हमने कब और कितनी कॉफ़ी पी, कुछ पता नहीं।बस यह याद है कि राजे धीरे धीरे मेरे कानों में मेरी प्रशंसा के प्यार भरे शब्द बोले जा रहा था। मेरा हाथ उसके हाथ में था जिसे वो सहलाता रहता था, कभी बायाँ हाथ तो कभी दायाँ!

मेरी तन्द्रा तब टूटी जब मुझे अपनी टांग ऊपर उठती हुई महसूस हुई, देखा तो राजे ने मेरा पैर उठकर अपनी गोदी में रख लिया था और उसने मेरी चप्पल उत्तर दी थी।मैं हड़बड़ा गई कि कहीं यह बुलबुल की तरह होटल में मेरे भी पैर न चूम ले, मैंने पैर वापिस खींचना चाहा मगर उसकी फौलादी पकड़ से मैं पैर हिला भी न सकी।

‘मेरी जान… मोना रानी तेरे इन हसीं पैरों के लिए मैं एक पायजेब का जोड़ा लाया हूँ… वो पहना कर देखना चाहता हूँ!’

मुझे फ़ौरन शिखा की जन्मदिन पर चुदाई वाली कहानी याद आ गई जिसमें राजे ने शिखा को भी इसी प्रकार पायजेब पहनाई थी। शायद ये सभी लड़कियों को रानी बनाने से पहले सोने की पायजेब का तोहफा देता होगा।इसके पहले मैं कोई जवाब देती, उसने तपाक से पायजेब मेरे पैर में पहना दी। फिर उसने मेरी चप्पल उठाई और वो पहना कर मेरा पैर नीचे कर दिया।दूसरा पैर उठाकर राजे ने उसमें भी उसी प्रकार पायजेब पहनाई।बहुत भारी सोने की पायजेब थी। 60-70 हज़ार रुपये से कम की तो न होगी।

मैं बोली- राजे, तुम यह क्या कर रहे हो… इतनी महँगी पायजेब… मैं क्या बताऊँगी अपने पति को? कहाँ से आई इतनी वज़नी सोने की पायजेब… राजे प्लीज़ ये वापस ले लो… मैं उतार रही हूँ।’राजे खिलखिला के हंसा और बोला- अरे रानी, इसमें क्या मुश्किल है… कह देना मेरी सहेली अनुजा के पापा दिल्ली आये थे, उन्होंने दी है… मैं उनको ताऊजी कहती हूँ… बहुत पक्की बचपन की सहेली है मेरी!

उसकी ऐसी निडरता से मेरी भी हिम्मत बढ़ी और सच कहूँ तो राजे ने जो मेरे पैरों में पायजेब पहनाई, उससे मेरी चुदास भी भयंकर बढ़ चुकी थी।इस मादरचोद चूत की धृष्टता की कोई सीमा भी है या नहीं।

जोश जोश में मैं भी हद से ज़्यादा निडर हो गई और बोली- अब बताओ आगे का क्या प्लान है… कॉफ़ी पी ली… मिल भी लिए अब मैं चलूँ वापिस?राजे मेरा हाथ थाम के सहलाते हुए बोला- चलो इसी होटल में कमरा ले लेते हैं… वहीं मैं तुझे अपनी रानी बनाऊंगा… अभी तो सिर्फ रानी कह रहा हूँ…. रानी बनना तो अभी बाकी है ना!

अब तक तो मैं बेबाकी की हद तक पहुंच चुकी थी, मेरे दिल में आया कि मैं राजे की रानी अपने ही बैडरूम में बनूँगी… कितना मज़ा आएगा ना जब मैं अपने ही पति के बिस्तर पर इस महा चोदू से चुदूँगी जैसे इसकी कई रानियाँ इसके बैडरूम में इसकी पत्नी जूसी रानी के बिस्तर पर चुद चुकी हैं।यह सोच के ही मेरी चूत में रस का प्रवाह होने लगा।अपने बिस्तर पर अपने पति के स्थान पर एक ग़ैर मर्द को चोदने के विचार ही अत्यधिक उत्तेजित करने वाले थे।

मैंने आव देखा न ताव और इससे पहले कि डर से मेरा इरादा बदल जाये, मैंने राजे से कहा- होटल की कोई ज़रूरत नहीं है, हम घर चलते हैं।बड़ा मज़ा आया जब राजे ने चौंक कर आँखें फाड़ कर मुझको देखा।‘क्यों चूतेश जी, क्या सिर्फ आप ही बेधड़क हो सकते हैं, आप देखते जाइये कि यह मोना भी कुछ कम नहीं है।’

अब जब मैं यह घटना का वर्णन कर रही हूँ मुझे खुद बहुत आश्चर्य हो रहा है कि इतनी बड़ी बात मैं कैसे कह पाई।कहानी जारी रहेगी।

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श्रृंखला

कहानी श्रृंखला (STORY SERIES)

फौजी अफसर की नवविवाहिता बीवी ने अपने घर में चूत चुदवाई

कुल भाग: 4
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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

हासिब

1 week ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

वर्जिन जनरल

1 week ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

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