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जवान लड़की पठन समय: 12 मिनट पढ़ा गया: 1,205 बार

विलेज के मुखिया का बेटा और शहरी छोरी-1

नीतू पाटिल

29 Jan 2019 को प्रकाशित

विलेज के मुखिया का बेटा और शहरी छोरी-1
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मेरी यह हिंदी एडल्ट स्टोरी विलेज़ सेक्स की कहानी है.वो मार्च का महीना था, मैं अपनी रूम पार्टनर मिताली के साथ उसके गांव जाने की तैयारी कर रही थी। मैं और मिताली दोनों ही लास्ट ईयर मैं पढ़ रहे थे। और हमारी कॉलेज के लास्ट ईयर में हमें एक प्रोजेक्ट करनी थी जिसमे हमें गांव में जाकर पशुपालन, गांव के लोगों का रहन सहन के ऊपर स्टडी करनी थी। उस प्रोजेक्ट में मैं, सीमा और मिताली थे।

पर जाने से दो दिन पहले सीमा बीमार पड़ गयी इसलिए अब सिर्फ मैं मिताली के साथ उसके विलेज जा रही थी।

मैं नीतू, मेरी उम्र 19 साल है, मेरे पापा का पुणे में बहुत बड़ा बिज़नेस है। कॉलेज के लिए मैं मुम्बई में पढ़ती हूँ और होस्टल में रहती हूं। मेरी हाइट 5’4″ है, रंग गोरा है। भूरी आँखें, लंबे बाल, मेरा फिगर 34C 26 35 है। मैं कमर मैं छोटी सी चांदी की चें पहनती हूँ, पैरो में पायल और नाक में छोटी सी नथ पहनती हूँ।

जाने का दिन आया तब मिताली के साथ बस से उसके गांव चले गए। उस दिन मैंने सफेद रंग की कुर्ती और डार्क ब्लू जीन्स पहनी थी। कुर्ती के ऊपर के खुले बटन में से मेरे गले में पहनी चेन दिख रही थी और उसमें पहना हुआ पैंडेंट मेरे फेस के साथ और भी जच रहा था। मिताली भी मेरे ही हाइट की है पर मुझसे थोड़ी सांवली है। उसकी फिगर 32B 26 34 है।

हम मिताली के घर पहुंचे, उसके छोटे से घर में हम ठीक से एडजस्ट हो गए। ट्रिप के पांचों दिन मैं मिताली के घर में ही रहने वाली थी।

दोपहर के खाने के बाद, लगभग दो बजे मिताली बोली- चलो नीतू, हम विलेज में घूम कर आते हैं!“ये तो मेरे मन की बात बोली तुमने, आज से ही प्रोजेक्ट स्टार्ट करते हैं!” मैं बहुत एक्साईटेड थी।

हम दोनों गांव में घूम रही थी। मैंने अभी भी वही ड्रेस पहनी थी।खेतों में घूमते हुए मिताली ने मुझे बहुत सारी चीजें बताई, बहुत सारे लोगों से भी मिलाया जो हमें हमारा प्रोजेक्ट पूरा करने में मदद करेंगे। मैं अपनी डायरी में सब नोट कर रही थी।

दो दिन घंटे बाद मिताली बोली- चलो नीतू, हम गांव के मुखिया जी को मिल कर आते हैं!मुखिया मतलब गांव की बहुत बड़ी हस्ती थी, मैं भी उनसे मिलने के लिए एक्साईटेड थी। पर मुझे ये देखकर आश्यर्य हो रहा था कि मिताली मेरे साथ मुम्बई में होस्टल में रहती है फिर भी गांव में सब उसको पहचानते हैं।

हम दोनों घर की तरफ जा ही रहे थे कि अचानक बिन मौसम बारिश होने लगी, हम दोनों के पास छतरी नहीं थी, हम भागती हुई मुखिया जी के घर पहुँची। तब तक हम सर से पाँव तक पूरा भीग चुकी थी.

उनका बहुत बड़ा घर था। घर के आंगन में उस का लड़का राघव 2-3 लोगों से बाते कर रहा था।राघव गांव के मुखिया का बेटा तो था ही, वो खुद भी गांव की एक बड़ी हस्ती था। दो साल बाद विधायक के चुनाव लड़ने को इच्छुक राघव आकर्षक पर्सनेलिटी का लड़का था। उसकी उम्र 30 साल थी, उसका बदन कसरती था। मैं बिना पलक झपके उसको देखती ही रही। लाइफ में पहली बार में किसी लड़के की तरफ आकर्षित हुई थी।

वो बरामदे में कुर्सी पर बैठा था। उसने सिर्फ लुंगी पहनी हुई थी। उसके सीने पे पेट पे घने बालों का जंगल था। उसके गोरे चेहरे पर मूंछें जच रही थी।मैं बस उसके कसे हुए शरीर को मोहित होकर देख रही थी।

तभी अचानक उसकी मर्दानी आवाज मेरे कानों में पड़ी, सामने खड़े लोगों को वो कुछ समझा रहा था।अचानक उसकी आवाज सुनते ही मैं घबरा गई, उसी घबराहट में मैं दो कदम पीछे हो गयी।उसी वक्त मेरे पैर बर्तन से टकरा गए।

बर्तन की आवाज से राघव की नजर हम दोनों पर पड़ी; उसकी भेदक नजर मुझ पे पड़ते ही मुझे यह एहसास हुआ कि बारिश की वजह से भीगी हुई कुर्ती में से मेरे 34″ के मम्मे और मेरी काली ब्रा दिखाई दे रहे हैं।यह एहसास होते ही मैं मेरे हाथ फोल्ड करके खड़ी हो गई। फिर भी उनकी पारखी नजर ने मुझे ऊपर से नीचे तक स्कैन किया; हल्के से मुस्कुराते हुए उन्होंने अपनी नजर मिताली की तरफ घुमाई।मिताली मुस्कुराती हुई बोली- नमस्ते राघव भैया!“अरे… मिताली… नमस्ते नमस्ते। कब आयी तुम मुम्बई से?” वो मिताली को पूछने लगे।“आज ही आई हूँ, दरअसल काम के लिए आई हूं, ये मेरी सहेली नीतू, हम होस्टल में साथ में रहते हैं। हमारा कॉलेज का प्रोजेक्ट करने हम गांव में आये है। गांव में घूम रहे थे तो मैंने बोला मुखिया जी से मिल कर आते हैं.”

राघव ने सामने खड़े लोगों को जाने के लिए बोला और हमसे बात करने लगा- अरे आप दोनों बाहर क्यों खड़ी हो, अंदर आओ ना, मुखिया जी काम से बाहर गए हैं। पर आप चिंता मत करो, मैं आपको सब कुछ दिखा दूंगा।“और नीतू, कैसा लगा तुमको हमारा गांव?” पहली ही मुलाकात में राघव मुझसे बहुत ही प्यार से बातें करने लगा था, मुझे भी यह सब अच्छा लगने लगा था।“बहुत ही अच्छा साहब… आज ही आयी हूँ ना… अभी पूरा गांव नहीं देखा!” मैंने जवाब दिया।

“अरे साहब नहीं, मुझे राघव ही बुलाओ, सारे गांव की लड़कियां मुझे राघव ही बुलाती है, क्यों मीतू… बराबर ना। और कितने दिन हो तुम यहाँ?” राघव ने पास में रखे केले हमको दिए- यह लो हमारे खेतों में से आये हैं, इतने लंबे और बड़े केले आपको शहर में नहीं मिलेंगे.”शायद राघव भी मेरी तरफ आकर्षित हो रहा था, केले लेने के लिए हाथ खोलते ही उनकी नजर फिर से मेरे मम्मे पे जा अटकी।

तभी मैं बोली- पांच दिन के लिए रुकेंगे!“चलो मैं आपको हमारी खेती, गाय और बैल दिखाता हूँ.” ऐसा बोल कर राघव कुर्सी से खड़ा हो गया। उसका वो मर्दाना बदन देख कर मुझे कुछ कुछ होने लगा था जो मैं भी समझ नहीं पा रही थी। उनकी हाइट लगभग 6 फ़ीट थी।

हम तीनों अब खेतों की तरफ जाने लगे।बारिश लगभग थम गई थी।

राघव जी का बहुत बड़ा खेत था, बहुत दूर तक फैला था। वहाँ की जानकारी देकर वो हमें गाय के शेड की तरफ लेकर चले गए। एक तरफ एक नौकर गाय का दूध निकाल रहा था तो दूसरी तरफ गाय की ब्रीडिंग चल रही थी। एक बड़े से सांड को गाय के ऊपर चढ़ाने का काम कुछ लोग कर रहे थे। मैं दोनों कामों को बारीकी से देख रही थी।

राघव अब मेरे पीछे बिल्कुल सटकर खड़े हो गए।

एक नौकर ने सांड का लिंग हाथ में पकड़ कर गाय की योनि पर रख दिया। मेरे लिए यह सब बिल्कुल नया था। मैं आँखें फाड़ कर सब नजारा देख रही थीं तभी राघव जी ने अपने दोनों हाथ मेरे कंधे पर कखकर मेरी ब्रा के पट्टे से खेलते हुए मुझे पूछा- कभी किया है क्या तुमने?

मेरा उनकी तरफ बिल्कुल ध्यान नहीं था, फिर भी मैंने ना में सिर हिलाया। मुझे समझ भी नहीं आ रहा था राघव किस बारे में पूछ रहे थे दूध निकलने के बारे में या फिर ब्रीडिंग के बारे में।

मेरी नजर अब भी उस नौकर पर और उस सांड पर टिकी हुई थी। इतना बड़ा लिंग गाय की योनि में कैसे जाएगा, यही सोच रही थी मैं।

तभी मुझे एहसास हुआ कि राघव जी ने अपना हाथ कंधे से नीचे बाँहों पर लेकर आ गए, उनके हाथों के मेरे जिस्म पे हुए टच से मुझे झटका सा लगा और मैंने ऊपर राघव जी की तरफ देखा। वो सीधे मेरी आंखों में देख रहे थे।मुझे बहुत शर्म आने लगी थी, एक पराये मर्द के सामने में यह सब देख रही थी; शर्म से मेरे गाल अब लाल होने लगे थे।

राघव जी अब पीछे से थोड़ा और आगे हुए और लुंगी में खड़ा हुआ अपना लंड मेरे चूतड़ों पर दबाया।पीछे से क्या चुभ रहा है, यह मुझे झट से समझ में आ गया। मैंने पहले कभी सेक्स नहीं किया था पर मिताली ने मुझे अपने मोबाइल पे बहुत सारी अंग्रेजी हिंदी ब्लू फिल्म दिखाई थी, और बहुत सारी जानकारी दी थी।

सामने घट रही घटनाओं से मैं भी थोड़ी गरम हो गयी थी इसलिए मैंने राघव जी के हरकतों को कोई रिप्लाई नहीं दिया।मेरे रिप्लाई ना करने को मेरी सहमति समझकर राघव जी मेरे कान में बोले- कैसा लगा?और अपना लंड मेरी गांड पे दबा दिया।

मुझे यह खयाल आया कि जीन्स की जगह मैंने सलवार क्यों नहीं पहनी, लेकिन जीन्स मैं भी में उनकेलंड का कड़कपनमहसूस कर सकती थी।“पहले कभी देखा नहीं था मैंने…” मैंने शर्माते हुए बोल कर मिताली की तरफ देखा।“ह्म्म्म अब शाम हो गयी है, अब तुम दोनों घर जाओ… मिताली, कल तुम नीतू को हमारे गांव के पास के जंगल में जो मंदिर है, वो दिखा के लाओ!” मेरे गांड पे हल्के से हाथ घुमाते हुए अपना लंड लुंगी में सेट करते हुए राघव जी बोले।

राघव जी ने जाने के लिए बोला पर मुझे यह समझ नहीं आ रहा था कि मैं नाराज क्यों नहीं हो रही थी। क्या मुझे यह सब अच्छा लगने लगा था? मुझसे 10-11 साल बड़े आदमी के प्रति मैं इतना आकर्षित क्यों हो रही थी, मुझे खुद ही समझ नहीं आ रहा था।

राघव जी के साथ सेक्स करने में कैसा फील होगा यह ख्याल मेरे मन में आया; मैंने शर्माते हुए यह खयाल मेरे मन से निकाल दिया। ‘कुछ भी सोचती हो नीतू…’ यह सोच कर उनसे दुबारा न मिलने की ठान ली।

फिर हम दोनों घर की तरफ निकल गयी।

घर जाते समय मिताली बार बार राघव जी के बारे में मुझे बता रही थी कि कैसे वो अपने पिताजी की तरह गांव का लाडला है, कैसे वो गांव मैं सबकी मदद करता है। कैसे सब पुलिस और पॉलिटिशियन उनकी रिस्पेक्ट करते हैं।मैं भी बहुत ध्यान से सुन रही थी। सब सुनते हुए मुझे उनके प्रति फिर से आकर्षण पैदा होने लगा।

फिर मिताली ने बताया कैसे गांव की सभी लड़कियाँ राघव जी पे फिदा हैं।

घर पहुँचने तक रात हो गयी थी, तब तक खाना भी तैयार हो गया था।खाना खाकर हम रूम में सोने को गई; रूम में एक ही बेड था; उस पे हम दोनों लेट गयी थी। मिताली मुझे उसके विलेज के एक दो सेक्स अफेयर्स के बारे में बता रही थी, कैसे उसने उन लड़कों के साथ चुदाई की।फिर उसने राघव के बारे में बताना शुरू कर दिया, वो गांव का कैसेनोवा है। कैसे मिताली के विलेज की एक सहेली राघव के साथ सेक्स किया, कैसे राघव ने उसे थका देने तक खुश किया। यह सुन कर मेरे टाँगों के बीच गीलापन महसूस हो रहा था। फिर हम दोनों जैसे होस्टल में सोती थी, वैसे ही एक दूसरी की बांहों में सो गई।

मुझे सपनों में भी राघव जी दिखाई दे रहे थे कि एक ही मुलाकात में मैं उनके प्रति सम्मोहित हो गयी थी.

विलेज़ सेक्स की एडल्ट कहानी जारी रहेगीsupport@mohakkisse.com

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विलेज के मुखिया का बेटा और शहरी छोरी

कुल भाग: 3
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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

सुनीता भदौरिया

3 weeks ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

पूनम बंसल

3 weeks ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

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