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भाभी की चुदाई पठन समय: 11 मिनट पढ़ा गया: 1,057 बार

गांव वाली विधवा भाभी की चुदाई की कहानी-3

महेश कुमार चूत फाड़

10 Aug 2025 को प्रकाशित

गांव वाली विधवा भाभी की चुदाई की कहानी-3
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अब तक आपने पढ़ा..मैंने अपना हाथ सुमन भाभी की कामुक और गोरी जाँघों से होते हुए उनकी झांटों से भरी चूत पर रख प्रिया था। भाभी जाग गई थीं और उन्होंने मेरा हाथ झटक कर अलग कर प्रिया था। कुछ देर बाद मैंने अपना हाथ फिर से भाभी की जांघ पर रख प्रिया।अब आगे..

मगर सुमन भाभी को नींद नहीं आई थी इसलिए उन्होंने तुरन्त मेरा हाथ झटक कर दूर कर प्रिया और चादर ओढ़ लिया और साधना के और पास को खिसक गईं।

अब तो मुझे यकीन हो गया था कि सुमन भाभी डर रही हैं इसलिए किसी से कुछ नहीं कहेंगी। मैंने उनके इसी डर का फायदा उठाने की सोचा, इससे मुझमें फिर हिम्मत आ गई।मैं सोने का नाटक करके सुमन भाभी को नींद आने का इन्तजार करने लगा। करीब आधे-पौने घण्टे तक मैं ऐसे ही इन्तजार करता रहा और जब मुझे लगा कि सुमन भाभी गहरी नींद सो गई हैं.. तो मैंने धीरे से उनकी तरफ फिर अपना हाथ बढ़ा प्रिया।

मगर अब वो मेरे हाथ की पहुँच से बाहर थीं। सुमन भाभी साधना के बिल्कुल पास होकर सो रही थीं.. जिस कारण लेटे-लेटे मेरा हाथ उन तक नहीं पहुँच पा रहा था।

जब लेटे-लेटे मेरा हाथ सुमन भाभी तक नहीं पहुँचा, तो मैंने धीरे से खिसक कर अपने आधे शरीर को उनके बेड पर कर लिया। अब धीरे, बिल्कुल ही धीरे से पहले तो उनके पैरों की तरफ से चादर को हटा प्रिया। फिर धीरे-धीरे उनकी साड़ी व पेटीकोट में हाथ डालकर ऊपर खिसकाने लगा।

मैं सुमन भाभी की साड़ी व पेटीकोट को उनके जाँघों तक ही ऊपर कर सका क्योंकि इसके ऊपर वो उनके कूल्हों के नीचे दबे हुए थे।

साड़ी व पेटीकोट को ऊपर करने के लिए मैंने उन्हें थोड़ा सा खींचा ही था कि तभी सुमन भाभी की नींद खुल गई, वो फिर से उठकर बैठ गई और जल्दी से मुझे हटाने लगीं।

मगर अब मैं कहाँ हटने वाला था, मैं दोनों हाथों को सुमन भाभी की जाँघों के नीचे से डालकर उनकी गोरी चिकनी जाँघों से लिपट गया। मैंने उनकी साड़ी व पेटीकोट में सर डालकर उनकी नंगी जाँघों पर चुम्बनों की झड़ी लगा दी।

मुझसे बचने के लिए सुमन भाभी अपने घुटने मोड़ना चाह रही थीं.. मगर मेरे शरीर का भार उनके पैरों पर था.. इसलिए वो ऐसा नहीं कर सकीं।

मैं सुमन भाभी की जाँघों को चूमते हुए धीरे-धीरे ऊपर उनकी पेंटी तक पहुँच गया जहाँ से उनकी योनि से मादक गंध फूट रही थी। मैं भाभी की पेंटी के ऊपर से ही उनकी योनि को चूमने लगा।

मैं सुमन भाभी की पेंटी को चूमते हुए उनके कूल्हों के नीचे से साड़ी व पेटीकोट में हाथ डालकर उनकी पेंटी को भी निकालने कोशिश कर रहा था।

मगर तभी सुमन भाभी ने मेरे बालों को पकड़ लिया और मेरे बालों को खींचकर मुझे हटाने की कोशिश करने लगीं। बाल खिंचने से मुझे दर्द होने लगा.. इसलिए मैं पीछे हटने लगा। मगर मेरे हाथ सुमन भाभी की पेंटी को पकड़े हुए थे इसलिए मेरे पीछे हटने के साथ-साथ उनकी पेंटी भी उतरने लगी।

सुमन भाभी एक साथ एक ही काम कर सकती थी या तो वो अपनी पेंटी को पकड़ लेतीं या फिर मेरे बालों को। वो मेरे बालों को छोड़कर जब तक अपनी पेंटी को पकड़तीं.. तब तक उनकी पेंटी जाँघों तक उतर चुकी थी।

सुमन भाभी उसे दोबारा ऊपर करें.. उससे पहले ही मैं उनकी जाँघों से चिपक गया और अपने सर को फिर से उनकी साड़ी व पेटीकोट में डालकर दोनों जाँघों के बीच घुसा प्रिया।

मैं फिर से सुमन भाभी की जाँघों को चूमने-चाटने लगा और साथ ही धीरे-धीरे जाँघों को चूमते हुए उनकी योनि की तरफ बढ़ने लगा।

सुमन भाभी का पूरा शरीर डर के मारे काँप रहा था, वो बार-बार साधना की तरफ देख रही थीं कि कहीं वो न जाग जाए।भाभी मुझे हटाने के लिए अपनी पूरी ताकत भी लगा रही थीं।

डर तो मुझे भी लग रहा था.. मगर एक तो साधना दीवार की तरफ करवट करके सो रही थी और दूसरा इतना कुछ होने के बाद मैं पीछे हटना नहीं चाहता था। इसलिए मैं सुमन भाभी की दोनों जाँघों को बांहों में भर कर उनसे चिपटा रहा।

सुमन भाभी भी विवश सी हो गई थीं, वो ना तो शोर मचा सकती थीं और ना ही मुझे हटा पा रही थीं।मैं भी अब तक सुमन भाभी की योनि के ऊपर पहुँच गया था.. जो कि अब नंगी थी। मगर उन्होंने अपनी दोनों जाँघों को भींच रखा था और दूसरा उनके बैठे होने के कारण मेरा मुँह उनकी योनि से दूर था इसलिए मैं उनकी जाँघों के जोड़ पर व योनि के ऊपरी भाग को ही अपनी जीभ व होंठों से सहलाने लगा। इसके साथ ही मैं दोनों हाथों से उनकी जाँघों को अन्दर की तरफ से सहला भी रहा था।

इस दोहरे हमले का जो असर होना था.. वही हुआ और कुछ ही देर में इसका असर सुमन भाभी पर भी दिखने लगा। उनकी जाँघों की पकड़ ढीली पड़ने लगी। मैं इसी मौके की तलाश में था।

मैंने धीरे धीरे सुमन भाभी की पेंटी को नीचे खिसका कर उसे उतार प्रिया और फिर दोनों हाथों को उनकी जाँघों के बीच में डालकर उन्हें थोड़ा सा फैला प्रिया।सुमन भाभी को शायद इस बात का अहसास हो गया था इसलिए उन्होंने फिर से अपनी टाँगों को सिकोड़ने की कोशिश की.. लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

मैंने दोनों हाथों से जोर लगा उनकी दोनों जाँघों को फैला प्रिया और जल्दी से अपना सर उनकी दोनों जाँघों के बीच घुसा प्रिया।

अब मेरा सर सुमन भाभी की जाँघों के बीच घुस चुका था और मेरा मुँह उनकी योनि के ठीक ऊपर था।

मैंने जल्दी से अपने प्यासे होंठ सुमन भाभी की बालों से भरी योनि पर रख दिए।

अपनी योनि पर मेरे होंठों का स्पर्श पाते ही एक बार तो सुमन भाभी भी सिहर सी उठीं.. मगर फिर वो मुझे हटाने के लिए फिर से धक्के मारने लगीं।पर अब मैं कहाँ रूकने वाला था, मैं उनकी जाँघों को पकड़ कर उनसे चिपटा रहा और धीरे धीरे भाभी की योनि को चूमता रहा।

कुछ पलों बाद सुमन भाभी का विरोध भी अब हल्का पड़ने लगा। मैं सुमन भाभी की योनि की दोनों फाँकों के अन्दर की तरफ चूम रहा था.. साथ ही योनि की फांकों को चूमते हुए होंठों से ही धीरे-धीरे योनि के अनारदाने को भी तलाश कर रहा था।

मगर थोड़ा सा नीचे बढ़ते ही मुझे कुछ गीलापन सा महसूस हुआ। इसका मतलब था कि सुमन भाभी को भी मजा आ रहा है.. इसलिए मैं सुमन भाभी की योनि को चूमते हुए धीरे-धीरे नीचे उनके प्रेम द्वार‌ की तरफ बढ़ने लगा।

सुमन भाभी के बैठे होने के कारण योनिद्वार नीचे दबा हुआ था.. इसलिए मैं उनके प्रेम‌द्वार तक नहीं पहुँच सका।

फिर भी सुमन भाभी के योनिरस को चखने के लिए मैंने धीरे से प्रेमरस से भीगे बालों को ही चाट लिया, जो कि बड़ा ही नमकीन व कसैला स्वाद युक्त था।

सुमन भाभी की योनि पर मेरी जीभ के लगते ही उनके मुँह से ना चाहते हुए भी एक हल्की सी सीत्कार फूट पड़ी और मेरी जीभ से बचने के लिए उन्होंने अपने दोनों हाथों का सहारा लेकर कूल्हों को हवा में ऊपर उठा लिया।

मैंने एक बार बस सुमन भाभी की योनि से रिसते हुए प्रेमरस को चखा और फिर वापस अपनी जीभ को ऊपर की तरफ ले जाकर योनि के अनारदाने को तलाश करने लगा।

मगर उनकी योनि इतने घने गहरे बालों से भरी हुई थी कि वो मेरे मुँह में आ रहे थे। शायद कई महीनों से सुमन भाभी ने उन्हें साफ नहीं किया था। इसलिए मैंने सुमन भाभी की जाँघों को छोड़ प्रिया और दोनों हाथों की उंगलियों से उनकी काम सुरंग के बाहर, दोनों फांकों को फैला प्रिया। अब मैंने फिर से अपनी जुबान को सुमन भाभी की योनि पर रख प्रिया।

अब की बार मेरी जुबान ने सीधा सुमन भाभी के अनारदाने को स्पर्श किया था इसलिए एक बार फिर उनके मुँह से हल्की सी सीत्कार फूट पड़ी।

इसी के साथ भाभी ने अपने कूल्हों को ऊपर हवा में उठा लिया। अब सुमन भाभी भी उत्तेजित हो गई थीं इसलिए उन्होंने मेरा विरोध करना बन्द कर प्रिया और मेरे हल्का सा धकेलते ही वो फिर से बैड पर लेट गईं।

सुमन भाभी अब पूरी तरह से मेरे वश में थी इसलिए मैं सुमन भाभी को अपनी चारपाई पर ले जाने के लिए धीरे-धीरे उन्हें अपनी तरफ खींचने लगा।सुमन भाभी खिसक कर थोड़ा सा मेरी तरफ आईं.. मगर फिर रूक गईं। शायद उन्हें अहसास हो गया था कि मैं उन्हें चारपाई पर ले जाकर क्या करना चाहता हूँ।

साधना के होते हुए शायद सुमन भाभी मुझे कुछ करने भी नहीं देंगी.. इसलिए मैंने सोचा कि जो मिल रहा है उसी से काम चला लिया जाए।अब फिर से मैंने उनकी योनि पर अपने होंठ रख दिए, साथ ही दोनों हाथों से धीरे-धीरे उनके उरोजों को भी सहलाने लगा।

सुमन भाभी अब भी बार-बार साधना की तरफ देख रही थीं। तभी उन्होंने जो चादर ओढ़ रखी थी उसे सही से करके ओढ़ लिया। मगर भाभी ने मुझे हटाने और अपने कपड़े सही करने की कोशिश नहीं की, बल्कि मुझ पर भी वही चादर डालकर मुझे उस चादर से छुपा लिया।

सुमन भाभी तक पहुँचने के लिए मेरा आधा शरीर बेड पर था और मेरे पैर चारपाई पर लटक रहे थे।

मैं और सुमन भाभी अग्रेजी के अक्षर टी (T) की तरह हो रखे थे.. जिस कारण मुझे सुमन भाभी की योनि तक पहुँचने में थोड़ी दिक्कत हो रही थी।

मैं सुमन भाभी का एक पैर उठाना चाहता था.. मगर तभी सुमन भाभी ने साधना की तरफ करवट बदल ली और अपने घुटने मोड़ लिए।

अब सुमन भाभी के कूल्हे मेरी तरफ हो गए थे.. इसलिए मैं उनके नंगे कूल्हों को ही चूमने लगा। फिर धीरे से मैंने भाभी की एक जाँघ को उठाकर उसके नीचे से उनकी दोनों जाँघों के बीच अपना सर डाल प्रिया.. जिसका उन्होंने कोई विरोध नहीं किया।

मुझे उम्मीद है कि आपको कहानी में मजा आ रहा होगा। आप मुझे ईमेल जरूर कीजिये।support@mohakkisse.comकहानी जारी है।

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