नमस्कार दोस्तो, मैं राजवीर एक बार फिर आपके सामने हाजिर हूँ अपनी सेक्सी कहानी का दूसरा भाग लेकर!
अभी तक आपने जो कहानी पढ़ी, वो रोहित ने लिखी थी, अब आगे की कहानी आप मुझसे यानि राजवीर से सुनेंगे.
कुछ समय बातों का सिलसिला चला हेंग आउट्स पर वॉइस कॉल हुई दोनों में … और वो दिन भी आ गया जब मैं अपने किसी काम से देहली गया था.अब आगे की कहानी जो घटित हुई!
रोहित ने मुझे कॉल कर पूछा- राजवीर आप कहाँ हो?मैं- जी देहली में हूँ फिलहाल, जिस काम के लिये आया था, वो हुआ नहीं … कल शाम को बुलाया है तो आज यहीं पर रुकूँगा.रोहित- राजवीर जी, अगर आप बुरा न माने तो आज आप हमारे घर आ जाइए.मैं- नहीं नहीं रोहित जी, आप क्यों परेशान हो रहे हो, मैं रह लूंगा होटल लेकर!
काफी देर इसी मसले को लेकर बात हुई लेकिन अंत में रोहित की जिद के आगे मुझे झुकना पड़ा.
कुछ देर बाद रोहित ने हेंगआउट पर अपना पता भेज प्रिया.रात 8 बजे मैंने रोहित को कॉल की- मैं आपके घर से कुछ दूर खड़ा हूँ, क्या आप आ सकते हैं?रोहित जल्दी ही मुझे लेने बाहर सड़क पर आ गया.
रोहित- आप राजवीर हो?मैं- जी आप रोहित?रोहित- हेल्लो राजवीर आने का शुक्रिया!मैं- शर्मिंदा मत कीजिये रोहित जी.रोहित- चलिये घर तो चलिये.
रोहित ने घर के बाहर पहुँचकर डोरबेल बजायी. दरवाजा खुला, लाल रंग की साड़ी पहने बिना बाजू और गहरे गले व कमर पर पट्टी वाले ब्लाउज़ में नेहा का सफेद जिस्म ऐसा दमक रहा था कि मानो बिजली के गुल हो जाने पर भी बिजली की भी जरूरत महसूस न हो. होंठ सुर्ख लाल, सुंदर चेहरा, गदराया हुआ जिस्म देख कर बस लार ही टपक पड़े.
मैंने उसे एक नज़र देखा, नमस्ते की और उसने भी नमस्ते का जवाब मुस्कुरा कर प्रिया.
कुछ लोग महिलाओं को ऐसे ताड़ते हैं मानो आँखों से ही चोद देंगे. लेकिन यह गलत आदत है. महिला का सम्मान करना चाहिए. वो इतना साज-सिंगार इसलिये करती है कि लोग उसे देखें. लेकिन उसे एकटक ताड़ते रहना उसे भी बिल्कुल पसंद नहीं होता. देखना ही है तो उन्हें चोरी से देखिये … जिस तरह वो मर्दों को ताड़ लेती है और मर्दों को पता भी नहीं चलता.
खैर कहानी पर आते हैं.
नेहा ने मुझे पानी प्रिया और चाय के लिए पूछने लगी.तभी रोहित बोल पड़ा- पहले आप फ्रेश हो जाइए. फिर आराम से चाय पीते हैं.
मैं नहाकर बाहर निकला और लोअर टीशर्ट पहन ली.तभी रोहित की आवाज आई- राजवीर जी, अगर आप फ्रेश हो गए हो तो आईये; आपका इंतजार हो रहा है.
मैंने देखा रोहित ने मेज पर विहस्की और चखना सलाद पनीर सब सजा के रखा है.मैं- रोहित जी, इस सब की क्या जरूरत थी?रोहित- राजवीर जी, अब महफ़िल में शिरकत कीजिये, खास आपके लिए किया है और आप ही ऐसा बोल रहे हैं.मैं- चलिये रोहित जी, ठीक है पेग बनायें आप फिर!इतना कहकर दोनों हंस पड़े.
कुछ देर बाद नेहा आयी और बोली- रोहित खाना भी तैयार है; आप कहो तो लगा दूँ?रोहित- नेहा डॉलिंग, अभी तो शुरू हुआ है. तुम खाने की बात कर रही हो. आओ तुम भी तो थोड़ी सी लो ना!
नेहा न नुकर करने लगी लेकिन मेरे और रोहित के जोर देने पर वो मान गयी. दो पेग लगाने के बाद नेहा उठी और बोली- रोहित मैं खाना लगाती हूँ!
रोटी, दाल, चावल, पनीर, चखना, सलाद जब ढेर सारा खाना मुँह के आगे हो तो पेट देख कर ही भर जाता है.
रोहित था कि नेहा को जबरदस्ती एक पेग और पिला गया. नेहा अभी भी ऐसी लग रही थी मानो उसे चढ़ी न हो. लेकिन उसकी जुबान बयाँ कर रही थी कि मदिरा ने अपना काम करना शुरु कर प्रिया है.
हम लोगों ने थोड़ा थोड़ा खाना खाया और बाद बैठ कर बातें करने लगे. और करते भी क्यों नहीं … जब नशे में हों तो बात अपने आप निकलने लग जाती है. तीनों को ही नशा था.रोहित- राजवीर जी, आपकी कहानी पढ़ कर मज़ा आ जाता है.मैं- धन्यवाद रोहित जी!
रोहित- नेहा तुम भी तो बोलो … तुमको मज़ा नहीं आता क्या?नेहा सर झुका के मुस्कुरा दी और न में सर हिलाया.रोहित- अच्छा … तुमको मज़ा नहीं आता तो कहानी पढ़कर दो दो बार हस्तमैथुन कौन करता है?नेहा सकपका गयी और अंदर वाले कमरे में भाग गयी.
रोहित- राजवीर जी, मेरी बीवी को भी आपकी कहानी पसंद है सच में!मैं- जी शुक्रिया!रोहित- राज यार, आज आप भी हो, मैं भी हूँ और मेरी बीवी भी … तो क्या मेरा सपना सच हो सकता है?
यारों का महायाराना- मन की बातें
अंधा क्या मांगे दो आँखें … जिसे देख के लार टपक पड़ी हो भला उसे कौन मना करेगा.मैं- जी बिल्कुल … मैं खुद को ख़ुशनसीब समझूँगा अगर नेहा जी की हामी हुई तो!रोहित- वो मान जायेगी. रुको मैं बात करता हूँ!
रोहित अंदर रसोई में गया और कुछ देर में वापस लौटा.मैं- क्या हुआ?रोहित- यार, वो नहीं मान रही है; वो बोल रही है कि उसे शर्म आ रही है. मैंने आपके सामने हस्तमैथुन वाली बात बोल दी ना! अरे यार, ये मुझसे क्या हो गया, सारा प्रोग्राम चोपट कर प्रिया मैंने! यार, मैं उसे तुमसे चुदते हुए देखना चाहता हूं. यही तो मेरी इच्छा है.
मैं- रोहित, तुम नेहा को लेकर अंदर जाओ और उसे गर्म करो. दरवाजा खुला रखना और उसे गर्म करते रहना, जैसे करते हो. आगे तुम समझदार हो.इतना कहते ही राजवीर ने रोहित को आंख मार दी.रोहित समझदार था, उसे सारा मसला समझने में देर नहीं लगी.
रोहित नेहा को कमरे ले गया और लाइट बन्द कर नाइट बल्ब जला प्रिया!नेहा- रोहित क्या कर रहे हो? छोड़ो मुझे … दरवाजा खुला है राजवीर देख लेगा तो?रोहित- नहीं देखेगा जान, वो सो गया है. और देखता है तो देखने दो. उसे भी तो पता चले तुम कितनी खूबसूरत दिखती हो.
नेहा अपनी तारीफ सुनकर खुश हो गयी. होती भी क्यों नहीं … बीवी की कमजोरी ही उसकी तारीफ जो है. और नेहा तो खुद में एक कामुक बला थी.
रोहित ने अब नेहा को चूमना चाटना शुरू कर प्रिया. उसकी सिसकारियाँ बाहर कमरे तक आने लगी थी. उसकी सिसकियों की कामुक आवाज सुन सुन कर मैं अपने बेड से उठकर उनके दरवाजे पर ऐसा खिंचा चला आया मानो कोई नाग सपेरे की धुन को सुन कर आपने बिल से निकल कर सपेरे के पास जा खड़ा होता है!
उधर रोहित नेहा के जिस्म से एक एक कपड़ा उतार रहा था इधर मैं नेहा को नंगी होती देख देख कर खुद ब खुद नंगा होता जा रहा था. मेरा लिंग नेहा को आलिंगन देने के लिए बेचैन हो चला था.
तभी रोहित ने नेहा की पेंटी उतार दी और उसकी जाँघों को चाटने लगा. अब नेहा बेकाबू होती जा रही थी.नेहा ने रोहित का मुँह अपनी चूत पर रख प्रिया. रोहित ने भी मौके की नजाकत को समझते हुए नेहा की चूत में पूरी जीभ डाल दी और चूसने लगा.
अब नेहा की वासना उसके बर्दाश्त के बाहर हो चुकी थी. उसने रोहित के बाल पकड़ कर ऊपर अपनी तरफ खींचा और उसे लन्ड डालने के लिए कहने लगी!रोहित ने भी देर न करते हुए जोर के एक झटके से ही नेहा की चूत में अपना लन्ड घुसेड़ प्रिया.
नेहा- आहह … आहहह आराम से रोहित … फाड़ दोगे क्या?रोहित- मेरी जान तुम्हरी चूत है ही इतनी टाइट कि दो दो लंड भी एक साथ डालने के बाद भी ढीली न हो!नेहा- शस्श्ह रोहित!
रोहित- हाँ मेरी जान, सोचो अभी राजवीर भी हमारे साथ बिस्तर में होता तो तुम्हरी गर्दन पर ऐसे चूमता! ऊऊमहा!नेहा अब चुप होकर मजे लेने लगी.
रोहित- जान, जब तुम दो दो मर्दों से चुदाई का मज़ा लोगी तो कितना मज़ा आएगा. तुम्हारे शरीर को दो दो मर्द एक साथ मसलेंगे, एक एक कर झटके मारेंगे.ऐसा बोलते हुए ही एक जोर का झटका मार प्रिया.नेहा बहक गयी- आहह … तेज … और तेज करो.रोहित- कौन करेगा तेज मेरी जान? मैं या राजवीर या दोनों?नेहा- दोनों करो अहह …
रोहित- मेरी जान, मैं तो तेज ही कर रहा हूँ.रोहित के झटके तेज से तेज होते चले गये. नेहा भी पूरा साथ दे रही थी. नेहा का होने ही वाला था कि रोहित उससे पहले स्खलित हो गया.
नेहा झड़ने के लिए छटपटाने लगी- रोहित करो … करो … मेरा भी होने वाला है. प्लीज़ जल्दी करो!ये दारू का नशा था जो नेहा स्खलित होने के लिये लालायित थी. नहीं तो शायद बिना पिये तो पत्नीव्रता स्त्री ऐसी स्थिति में मन मार कर रह जाती है. लेकिन काम के वश में नेहा भी सम्भोग का आनन्द लेना चाहती थी. लिहाजा वो रोहित से चिपक कर झटके मारने के असफल प्रयास करने लगी.
रोहित से उम्मीद हार कर वो खुद की उंगली से ही प्रयत्न करने लगी. उसने अपनी आखें बन्द की ही थी कि तभी मैंने मौके का फायदा उठाते हुए उसके जिस्म को ढक लिया.
नेहा चौंक उठी, उसने मुझसे खुद को छुड़ाने की एक असफल कोशिश की. लेकिन तब तक देर हो चुकी थी.एक नग्न गर्म औरत के जिस्म पर एक नग्न पुरुष चिपक जाए और कुछ न हो ऐसा सम्भव नहीं!
मैंने नेहा के दोनों हाथों को पकड़ कर उसके सर से ऊपर कर प्रिया और बेतहाशा उसके गाल गर्दन को चूमने चाटने लगा.नेहा- राज नहीं … ऐसा मत करो.
लेकिन जब शेर के जबड़े में शिकार आ गया हो तो कभी भी बचता नहीं.नेहा के लिए एक के बाद एक हमले बर्दाश्त कर पाना मुश्किल हो रहा था. एक तरफ मैं उसके दोनों हाथों को अपने एक हाथ से कस कर दबाये हुए था और दूसरे हाथ से अपने लन्ड को उसकी चूत में रगड़ रहा था. साथ ही मैं उसके गालों पे चुम्बनों को बारिश कर रहा था.
नेहा जवान थी, कमसिन थी और अभी अभी अपने पति से चुदते हुए स्खलित नहीं हुई थी लिहाजा इस समय उसके जिस्म की गर्मी भी बाहर निकलने को आतुर थी.
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