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जवान लड़की पठन समय: 8 मिनट पढ़ा गया: 741 बार

गाँव की नासमझ छोरी की मदमस्त चुदाई -3

सुदीप्ता

20 Dec 2014 को प्रकाशित

गाँव की नासमझ छोरी की मदमस्त चुदाई -3
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अब तक आपने पढ़ा..मैंने फिर से बिल्लो को गोद में बैठा लिया और देखा कि बिल्लो लण्ड को पकड़ कर घुसाना चाहती है।गोद में ही बैठा कर मैंने उसे चोदना शुरू कर दिया। अभी तो पूरा लण्ड गया नहीं था.. पर उतने लौड़े से ही मैंने चूत में धक्के लगाने शुरू कर दिए।गोद में बैठकर बिल्लो बड़बड़ाने लगी- आह.. कितना मजा आ रहा है.. चाचा चोदो.. ज़ोर-ज़ोर से चोदो ना.. वो.. वो.. पूरा डाल दो.. मैं दर्द बर्दाश्त कर लूँगी.. चाचा पूरा लण्ड जबर्दस्ती घुसा दो..अब आगे..

बिल्लो मेरी गोद में ही बैठ कर अपनी कमर को आगे-पीछे करने लगी। मेरा लण्ड भी अन्दर-बाहर हो रहा था और ‘पुच.. पुच.. पुच.’ की आवाजें आ रही थीं।बिल्लो भी उचक-उचक कर लण्ड को ले रही थी और ‘चाचा.. चाचा..’ कह रही थी।‘आह कितना मजा देते हो चाचा.. ऐसे ही चोदते रहो मुझे..’

कुछ देर के बाद मैंने बिल्लो को लिटाया और कहा- अब पूरा लौड़ा घुसा देते हैं क्योंकि तुम्हारी बुर पूरी गीली हो गई है।

बिल्लो ने भी कहा- फिर देर क्यों करते हो.. घुसा दो पूरा का पूरा लण्ड.. तुम्हारी बिल्लो भी अब सह लेगी.. ज़ोर से धक्का लगा कर पेल दो.. आह्ह.. इतना मजा मुझे कभी नहीं मिला था।यह सुनकर मैं भी ताव में आ गया और लण्ड को बाहर निकाल कर एक ही धक्के में पूरा लण्ड बुर में डाल दिया, लण्ड भी ककड़ी की तरह बुर को चीरते हुए अपनी मंजिल पर पहुँच गया।

‘म..र.. ग..ई.. म..र… ग…ई… चाचा.. म..र.. ग..ई.. म..र…ग…ई.. चाचा.. लग रहा है.. गरम-गरम लोहे का सरिया मेरी बुर में घुस गया है.. आ..आहह.. आ..आ..आह्ह.. चाचा कुछ करो.. काफी दर्द हो रहा है।’

मैंने लौड़ा उसकी जड़ में फंसाए हुए कहा- मेरी बिल्लो रानी.. बुर में जब पहली बार लण्ड जाता है.. तब ऐसा ही दर्द होता है लेकिन दो मिनट में तुम खुद चोदने के लिए बोलोगी।‘चाचू.. लेकिन लण्ड तो पूरी तरह से इस छोटे सी बुर में फंस गया है.. इसे थोड़ा तो निकाल लो।’लेकिन मैंने उसके चूचुकों को मसलना शुरू कर दिया और कहा- लोहे का सरिया नहीं.. तुम्हारे चाचा का लण्ड बुर में है.. थोड़ी देर में लण्ड बुर का दर्द को कम कर देगा।

मेरी बातों में आकर वह चुप हो गई और चित पड़ी रही। लण्ड पूरा तन कर बुर में टाइट से फंसा था। मैं भी बिल्लो के ऊपर लेटा हुआ था और चूचियों को आहिस्ता-आहिस्ता दबा रहा था।कुछ ही देर में बिल्लो ने चाचा को अपनी बाँहों में कस लिया.. तो मैं समझ गया कि फिर से बिल्लो चुदना चाहती है।

बिल्लो ने भी मेरे होंठों को चूसना शुरू कर दिया और कहने लगी- आह्ह.. चाचा.. चाचा.. आपका लण्ड तो पूरा मेरी बुर में चला गया है.. और अब दर्द भी एकदम नहीं है।

तब मैं उठा और अपना लण्ड एक ही बार में झटके से ‘फच्च..’ की आवाज के साथ बुर से बाहर कर दिया।बिल्लो की बुर पूरी तरह फूल गई थी और लाल भी हो गई थी। बुर से इस तरह से लण्ड को निकालते हो बिल्लो भी ज़ोर से चिल्लाई- ..चा..चा.. चा…चा.. जल्दी से लण्ड को फिर से डालो.. देर मत करो.. बुर मेरी प्यासी है.. आधा क्यों चोद कर छोड़ रहे हो.. पूरी तरह से मुझे चोदो.. चोदो.. चा…चा.. चा..चा।

तब मैंने सब्र से काम लिया और कहा- अभी तुम्हारी चुदाई कहाँ हुई है.. अब शुरू होगी… यह तो.. तुम्हें चुदने के लिए तैयार किया है।बिल्लो भी बोल पड़ी- चाचा तो शुरू करो चुदाई.. आपका लण्ड भी अब मेरी बुर में पूरी तरह घुस गया है.. इसलिए आपको अब लण्ड घुसाने में दिक्कत नहीं होगी और मुझे भी दर्द नहीं होगा.. और पूरा मजा आएगा।

मैंने बिल्लो के कमर को ऊँचा किया और एक तकिया कमर के नीचे रख दिया जिससे बिल्लो की बुर ऊंची हो गई।बिल्लो ने पूछा- ऐसा करने से क्या होता है?तो मैंने बताया- इससे तुम्हें ज्यादा मजा आएगा। लेकिन सब मजा आज ही मत ले लो.. कुछ कल के लिए भी बाक़ी रखो..

‘कल क्या और मजा देंगे चाचा?’‘हाँ..’यह कहते हुए मैंने झट से लण्ड बुर में डाल दिया और एक ही धक्के में बिल्लो ने अपनी बुर में आठ इंच लंबे लण्ड को जगह दे दी। मैंने अब ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारना शुरू कर दिया। जैसे-जैसे लण्ड अन्दर-बाहर होता था.. बिल्लो भी कमर उचका कर लण्ड को जगह दे रही थी।

‘आ..आह.. आ.. चा..चा.. चूत का पूरा रस ले लो.. चाचा… चा…चा.. वाह कितना मजा आता है.. चाचा चुदवाने में.. चो..दो.. चो..दो.. चा…चा.. पूरा लण्ड इसी तरह से डाला करो..’बिल्लो ने मेरी गोद में बैठकर चोदने को कहा।

मैंने भी उसे गोद में उठा लिया और कस-कस कर चोदना चालू कर दिया। कुछ ही देर में बिल्लो झड़ गई तो उसने मुझसे बिस्तर पर लिटा देने को कही।

लेकिन मेरा लण्ड अभी गरम था इसलिए बिल्लो को बिस्तर पर लिटाकर ज़ोर-ज़ोर से धक्का लगाता रहा।

मेरा लण्ड ज़ोर-ज़ोर से पिस्टन की भांति बिल्लो की बुर में चोट मार रहा था और बुर की जड़ तक चला जा रहा था, बुर काफी गीली हो गई थी और बिल्लो बेसुध सी लेटी थी, मैं उसे बेरहमी से चोदे जा रहा था।

‘फ़च..फ़च…फ़च..’ की आवाज आ रही थी। तभी बिल्लो फिर से गरम हो गई और उसने मुझको कस कर चोदने को कहा- ‘आहह.. हाय..आ..ह..चाचू.. चोदे जा..’

कुछ ही देर में मेरे लण्ड ने पानी छोड़ दिया और बिल्लो की चूत भर गई। मैंने लण्ड बाहर निकाल लिया और बिल्लो को पूछा- कैसा लगा?बिल्लो शर्मा कर बोली- चाचा चुदने में इतना मजा आता है.. मैं जानती ही नहीं थी। फिर कल से मुझे रोज दो बार चोदिएगा.. अब तो दर्द भी नहीं होगा?मैंने कहा- अभी पूरा खेल खत्म नहीं हुआ है.. तुम थक गई हो.. इसलिए तुम्हें आराम करने दिया है। सुबह फिर से चोदेंगे।‘नहीं चाचू.. अभी कीजिए न..’

वो फिर से मेरे लण्ड को सहलाने लगी तो मेरा लण्ड कुछ ही देर में फिर से खड़ा हो गया।अब मैंने बिल्लो को उल्टा लिटा दिया और पीछे से लण्ड उसकी बुर पर रगड़ने लगा।कुछ ही समय में वह पनिया गई.. तो उसकी बुर में फिर से लण्ड एक बार में ही डाल कर चोदने लगा।लेकिन मेरा ध्यान उसकी गाण्ड पर था। बिल्लो तो जानती नहीं थी कि उसे पीछे से क्यों चोद रहा हूँ..

मैं बिल्लो को कुतिया की तरह चोदने के बाद उसकी बुर में जब धक्का लगाने लगा.. तो बोली- चाचा.. कुत्ता भी ऐसे ही करता है ना?‘हाँ..’मैंने उसकी चूचियों को पकड़ कर जब चोदना शुरू किया तो ‘चा..चा.. आ..आ.. ज़ोर से पे..ली…ये.. म..जा..आ.. र..हा…है.. मेरी चूत को पूरी तरह से रस से भर दीजिए..’ यह कह कर वह खड़ी हो गई और जब तक मैं समझ पाता.. उसने मेरे लण्ड को मुँह में ले लिया।

दोस्तो, इस कच्ची कली की चूत चुदाई ने मुझे इतना अधिक कामुक कर दिया था कि मैं खुद को उसे हर तरह से रौंदने से रोक न सका। प्रकृति ने सम्भोग की क्रिया को इतना अधिक रुचिकर बनाया है कि कभी मैं सोचता हूँ कि यदि इसमें इतना अधिक रस न होता तो शायद इंसान बच्चे पैदा करने में बिल्कुल भी रूचि न लेता और यही सोच कर की सम्भोग एक नैसर्गिक आनन्द है.. मैं बिल्लो के हर छेद के चीथड़े उड़ाने को आतुर हो उठा।

अब अगली कहानी में उसकी गाण्ड की सील खुलने वाली है.. आपके ईमेल की प्रतीक्षा मेंsupport@mohakkisse.com

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श्रृंखला

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गाँव की नासमझ छोरी की मदमस्त चुदाई

कुल भाग: 3
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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

साहिल सिंह

6 days ago

सच में बहुत ही हॉट और उत्तेजक कहानी है भाई। मजा आ गया पढ़कर।

इन्स्पेक्टर त्यागी

2 weeks ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

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