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मामी की रसीली पड़ोसन की चूत चुदाई- 1

राज हुडा

10 Nov 2020 को प्रकाशित

मामी की रसीली पड़ोसन की चूत चुदाई- 1
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देसी माल सेक्स कहानी में पढ़ें कि मैं मामा के घर गया तो वाहना मामी की सहेली मिली. मैं उसे चोदने की सोचने लगा क्योंकि वो भी मुझसे नजर लड़ा रही थी.

नमस्कार दोस्तो, मैं रोहतक से राज हुड्डा आपके सम्मुख पुन: प्रस्तुत हूँ. आज मैं फिर से एक नयी सेक्स घटना लेकर आया हूँ.

आपने मेरी पिछली सेक्स कहानीपड़ोसन चाची की गांड मारीपर अपने मेल भेजे, उनके लिए आप सबका हार्दिक धन्यवाद.

कुछ मित्र अपनी आदतों को नहीं सुधार रहे हैं.एक बार फिर से निवेदन कर रहा हूँ कि कृपया करके मुझसे किसी महिला का नम्बर न मांगें या उसकी चूत मुझे भी दिला दो, इस तरह के मेल ना करें … और ना ही मेरा असली पता पूछें.बस देसी माल सेक्स कहानी का मजा लें.

मैं कुछ हरियाणवी भाषा का प्रयोग करूंगा, आपकी समझने में कुछ दिक्कत जरूर हो सकती है लेकिन मुझे उम्मीद है कि आपको सब समझ में आ जाएगा.

ये घटना इस साल जून के महीने की है.

मेरे मामा के पड़ोस में ही उनकी सहेली मिहिका मामी (काल्पनिक नाम) रहती हैं, वो मेरी सगी मामी नहीं हैं.

मुझे अपने मामा के घर जाए कई साल हो चुके थे. मामा मामी और नानी जब भी फोन करते तो मुझे वहां आने की कहते.मैं हर बार उन्हें ‘आऊंगा …’ कहकर टाल देता.

एक बार नानी का फोन आया, वो बोलीं- बेटा, अब तो मेरे पास मिलने को आ जा या मेरे मरने के बाद आएगा!मैं बोला- अरे नानी, आप ऐसा ना कहो … मैं अगले हफ्ते पक्का आऊंगा.

फिर कुछ देर बात करके मैंने फोन रख प्रिया.मैंने सोचा कि मामा के घर सबसे मिलकर ही आता हूँ.

मामा का परिवार बेरी के पास गांव में रहता है. वो सब बहुत ही सीधे-साधे लोग हैं.हम लोग मामा के उस एरिया को बागड़ कहते है क्योंकि उनकी भाषा थोड़ी अलग किस्म की है.मैं अपने मामा के गांव का नाम नहीं बताऊंगा.

फिर तीन दिन बाद मैं मां पापा से पूछ कर बाइक लेकर मामा के घर एक हफ्ते रहने के लिए निकल गया.

लगभग 50 मिनट बाद मैं मामा के घर पहुंच गया.

मैं आपको मेरे मामा के बारे में बता दूँ. वो फौज में हैं, उनको एक लड़का व दो लड़कियां हैं.लड़कियों की शादी हो चुकी है और लड़के का नाम सोनू है वो अभी 12 वीं में है. वो बेरी पढ़ने जाता है.

घर में मेरी नानी और मामी हैं, मामी एक भैंस पाले हुए हैं. मामा के घर में 3 कमरे नीचे व एक कमरा ऊपर है. घर के आंगन को छत से ढक प्रिया गया है. कभी कभी मेरी नानी वहीं सोती थीं.

भैंस का कमरा अलग था.घर से भैंस के कमरे में जाने के लिए एक चौखट लगी थी, दरवाजा नहीं था. भैंस को बाहर ले जाने के लिए एक अलग गेट था. उसी गेट से उसे बाहर प्लाट में ले जाते थे.

मैं घर पहुंचा, तो वहां नानी मामी और एक सुंदर सी औरत और बैठी थी. मैंने सबको नमस्ते की और सबका हाल चाल पूछा.

मामी मेरे लिए चाय ले आईं … फिर चाय पानी पीकर मैं ऊपर कमरे में जाकर लेट गया.बाइक से चल कर आया था, तो थकान हो रही थी.लेटते ही मेरी आंख लग गई.

शाम को मैं उठा तो नीचे आ गया. उधर सोनू पढ़ रहा था तो उसने मुझे नमस्ते की.

मैंने देखा तो मामी के पास अभी भी वही औरत बैठी थी जो मेरे आने के समय बैठी थी.

मैंने सोनू से पूछा- ये कौन है?

तो उसने बताया ये आंटी पड़ोस में ही रहती हैं. पहले ये लोग गांव के अन्दर रहते थे, अभी 2 साल पहले ही यहां घर बनाया है. अपने घर के लिए सुबह शाम दूध लेने यहां आती हैं. इनके पति दिल्ली में नौकरी करते हैं और वो अंकल हफ्ते में एक बार ही घर आते हैं.

अब मैं आपको देसी माल मिहिका मामी के बारे में बता देता हूँ. उनकी उम्र 34 साल के आस पास थी. हाइट पांच फुट दो इंच की … और थोड़ी मोटी थीं मगर मस्त माल थीं. उनका रंग गोरा था.

आपको तो मालूम ही है कि शादीशुदा औरत मेरी कमजोरी थी.

उनका एक ही लड़का था, जो छटी कक्षा में था. ये मिहिका मामी मेरे मामा के घर कुछ ज्यादा ही आती रहती थी.अब मैं उसे सीधा मिहिका ही लिख रहा हूँ … मामी शब्द हटा रहा हूँ.

मिहिका दिखने में टकाटक माल थी तो मेरी भी नजर उस पर टिक गई.वो भी मुझसे बात करने को मरी जा रही थी तो जल्दी ही मेरी उससे बात होने लगी.

मैं ठहरा पक्का हरामी … बस बात शुरू होते ही मैं उसे चोदने की सोचने लगा.

एक तो स्कूल नहीं खुल रहे थे, तो शहर में ये लॉकडाउन भी सूखा ही निकला था.

मुझे काफी दिनों से नई चूत का स्वाद नहीं मिला था … तो मिहिका में मुझे उम्मीद दिखाई देने लगी.

मैंने मिहिका को पटाने की कोशिश शुरू कर दी.अब जब भी वो घर आती … और मामी नानी के पास बैठती, तो मैं भी वहीं आ जाता और उसे देखता रहता.

वो भी मेरे ऊपर नजर मार लेती.

ऐसा होते दो दिन निकल गए.

मैंने सोचा कि बेटा ऐसे तो काम ना चलेगा … अपनी और से ही पहल करनी पड़ेगी.

जब अगले दिन वो आयी तो मामी भैंस को प्लाट से लेने गई थीं. सोनू पढ़ने के लिए मास्टर जी के घर गया था. बस मैं और नानी ही घर में थे.

मिहिका, नानी के सामने कुर्सी डाल कर बैठ गई और मैं कमरे से बाहर निकल गया.मैं कमरे के दरवाजे के सामने खड़ा हो गया … इधर से मिहिका मुझे देख सकती थी जबकि नानी की पीठ मेरी ओर थी.

मुझे थोड़ा डर भी लग रहा था कि कुछ बवाल न हो जाए, मगर लंड में हरकत भी हो रही थी.

मैं सामने से मिहिका को देख रहा था, वो भी नानी से बात करती हुई मुझसे नजर मिला ले रही थी.

मैंने कामदेव का नाम लेकर सोचा, जो होगा देखा जाएगा.मिहिका की और मेरी नजर मिलते ही मैंने उसे आंख मार दी.

पहले तो उसने गुस्से में देखा, फिर वो नानी से बात करने लगी.

एक मिनट बाद उसने मेरी ओर फिर से देखा, तो मैंने फिर से आंख मारी और फ़्लाइंग किस कर दी.इस बार वो कुछ नहीं बोली, न गुस्सा दिखाया. अब वो बार बार मेरी ओर देखने लगी.

मैं हंसने लगा तो वो भी हंस दी और उसने नजर नीचे कर ली.

अब मैं दूसरे कमरे में आकर लेट गया.मेरा इरादा तो था कि मिहिका को लंड दिखा दूँ. पर मैं शाम तक इंतजार करने लगा कि कहीं मिहिका, मेरी मामी को कुछ बता ना दे.

मेरा लंड रूकने का नाम नहीं ले रहा था तो मैं बाथरूम में घुस गया और मुठ मारने लगा.मैं मुठ मारकर वापस कमरे में आकर सो गया.

शाम को मैं देर से सोकर उठा, तब तक मिहिका दूध लेकर जा चुकी थी.मुझे किसी ने कुछ नहीं कहा … मतलब मिहिका ने किसी को कुछ नहीं बताया.

मैं अब घूमने निकल गया.

अगले दिन से मिहिका मुझसे खुल कर बात करने लगी थी और ‘बेटा … या आरे …’ कहकर नहीं बोल रही थी. बस वो मेरा सीधा नाम ले रही थी.मैं तो हूँ ही कमीना, उसे फ़्लाइंग किस करके इशारा कर देता.

एक बार मेरे इशारे से वो मेरे पास से निकली … तो मैंने मौका देखकर उसके चूतड़ों पर हाथ को टच कर प्रिया.वो अपने होंठों को दांत से दबाती हुई चली गई.

ऐसा होते होते चार दिन हो गए, अब मुझे घर भी जाना था तो सोचा एक आध दिन में मिहिका को चोद लूं … नहीं तो फिर क्या पता टाइम मिले भी या नहीं.

उस दिन मैं नीचे कमरे मैं अकेला लेटा हुआ था और मामी भैंस का दूध निकाल रही थीं.

मिहिका हाथ में बर्तन लेकर घर आयी और मामी को दूध निकालते देख मेरे पास खाट के सिरहाने ही बैठ गई.

उसकी गांड की गर्मी पाते ही मेरे शरीर में करंट सा दौड़ गया और लंड खड़ा होने लगा.मैंने उसकी गांड पर हाथ फेर प्रिया.उसने भी अपनी गांड को मेरे हाथ से दबा प्रिया.इससे मामला सैट हो गया था.

मिहिका मुझसे बोली- घर कब जाओगे राज?मैं जानबूझ कर बोला- कल सुबह.

वो बोली- साच्ची कहे है के!मैं बोला- झूठ क्यों बोलूंगा!

वो बोली- के बात है … मन ना लग रहा के … जो तावला (जल्दी) जाव है.

इतना कह कर वो मेरे सिर पर हाथ घुमाने लगी. मेरा लंड पूरा अकड़ में आ गया.

मैं बोला- जाना तो है ही.ये कह कर मैं मिहिका की कमर पर हाथ घुमाने लगा.

मिहिका धीरे से बोली- रूका ना जाता कै … तेरी मामी लागु हूँ.मैं उसकी कमर में हाथ घुमाते हुए बोला- तो क्या हुआ दिल पर किसी का जोर ना चलता. क्या पता किस पर आ जाए.

इस पर वो हंसने लगी.मैं जल्दी से उठा और मिहिका की गर्दन पकड़ कर उसके होंठों को चूम लिया.मिहिका जब तक समझती कि क्या हो रहा है … मैं थोड़ा दूर को हो गया.

वो मेरी मामी की तरफ देखती हुई धीरे से बोली- बड़े कमीने हो … पता ही न लाग सका मने …तभी मामी कुछ काम से अन्दर चली गईं.

मैं हंसने लगा और उसकी जांघ सहलाते हुए बोला- तुमसे प्यार हो गया है मिहिका मेरी जान.वो बोली- बावला है के!

मैं बोला- हां, तेरे प्यार में बावला ही हो गया हूँ.वो थोड़ी गंभीर हो गई और बोली- ये सही बात ना है … किसे न बैरा लाग गया … तो मेरी बेज्जती हो ज्यागी.मैं बोला- भरोसा करो … अगर भरोसा ना कर सकती, तो मैं अब कुछ नहीं बोलूंगा.

वो कुछ नहीं बोली और उठ कर मामी के पास चली गई. मेरा भी मूड खराब हो गया. मैंने सोच लिया कि ये नहीं मिलने वाली है. मैं कल सुबह ही घर चला जाऊंगा.

कुछ देर बाद मिहिका दूध लेकर चली गई.

मैं कमरे से बाहर आया और मामी से कहा- मामी, कल मैं अपने घर जाऊंगा.मामी बोली- के हुआ … जी ना लाग रहा के … और रूक जा कुछ दिन.

मैं बोला- मामी, बस मां की याद आ रही है. जब फिर टाइम मिलेगा तो फिर आ जाऊंगा.मामी बोली- ठीक है तेरी मर्जी है.

मेरा दिमाग ही खराब हो गया था कि मिहिका ने कुछ नहीं बोला, साली चुपचाप चली गई.मैं फिर से चुपचाप लेट गया.

बस अब सुबह का इंतजार था. रात को सोनू खाना खाकर किताब लेकर ऊपर कमरे में चला गया.

थोड़ी देर में मिहिका कुछ लेने मेरी मामी के पास आयी.मैं लेटा रहा और फोन चलाने लगा.

मामी रसोई में काम करने लगी तो मिहिका मेरे कमरे में आई और बोली- मुं क्या त बना रहा है … ये ले मेरा फोन नम्बर.

उसने ब्रा से एक पर्ची निकाल कर मेरे हाथ में दे दी और बोली- मेरे घरा जाते ही फोन करना … बात करनी है तेर त.

मैंने थोड़ी देर में ही फोन किया तो मिहिका ने फोन उठाया और बोली- हैलो, कौन बोल रहे हो!मैं बोला- राज.

मिहिका बोली- मने पता चला के तुम कल घर जा रहे हो.मैं बोला- हां सुबह ही निकल जाऊंगा.

मिहिका बोली- के बात हो गी?मैं बोला- बस कुछ ना … मां की याद आ रही सै.

मिहिका बोली- मैंने पता है क्यों जा रहा है … नाराज हो गया शाम आली बात पै!मैं बोला- ना तो.

मिहिका बोली- देख राज जी (जी मतलब दिल) … तो मेरा भी कर है, पर मनै डर भी लाग रया है … जब त मैं बिन बोले उठ आई.मैं बोला- मिहिका, भरोसा करो और इंसान की जिंदगी बार बार ना मिलती. जी करै है तो कमी पूरी करने में के दिक्कत है.

मिहिका बोली- वो तो मने भी पता है … पर डर लागे है … कदै किसी को पता चल जाए और बदनामी हो मेरी.मैं बोला- मेरी ओर त बेफिक्र रहो … बात तुम्हारे और मेरे बीच की है और दोनों के बीच ही रहेगी.

मिहिका बोली- तो फैर के इरादा है!मैं बोला- मेरा तो नेक इरादा है, तुम बताओ.

मिहिका बोली- आजा रात को मेरे घर … मैं अकेली ही सोती हूँ. लड़का अपनी दादी के पास सोता है.मैं बोला- किस टाइम आऊं?

मिहिका बोली- बारा बजे के करीब आ जाना … लेकिन मैं फोन करूंगी, तब आना. फोन ना आए तो मत आना.मैंने कहा- ठीक है.

अब मैंने सोनू को बोला- भाई, मैं आज ऊपर सोऊंगा.तो सोनू बोला- ठीक है, मैं अपनी किताब नीचे ले आता हूँ.

मैं जग में पानी लेकर ऊपर पहुंच गया और पंखा चला कर लेट गया. मैं ऊपर वाले से प्रार्थना करने लगा कि हे कामदेव आज मिहिका का पति नहीं आना चाहिए.

मुझे नींद नहीं आ रही थी तो मैं छत पर घूमने चला गया.मेरा लंड तो अभी से चूत में घुसने के लिए तैयार था.

मैं छत पर घूमते घूमते लंड को मसल रहा था. पर वो शांत ही नहीं हो रहा था. बस मन कर रहा था कि मिहिका को अभी जाकर चोद दूं.

फिर मैं और जगह ध्यान लगाने की कोशिश करने लगा. मोबाइल चलाने लगा.

छत से मैं मिहिका के घर जाने का रास्ता सोचने लगा कि छत से कैसे उतरना है. मैंने सब प्लान बना लिया.उसके घर में जाने का एक ही रास्ता था, नीचे जाकर भैंस वाले कमरे की साइड से गेट खोलकर बाहर निकलना है.

मैं ऐसे ही कभी लेट जाता, कभी छत घूमने लगता … पर टाइम ही नहीं कट रहा था.

सब साथियों को पता है कि चूत मिलनी हो, तो इंतजार करना कितनी मुश्किल होता है. मैं 11 बजे चुपके से दबे पैर नीचे जाने लगा.मैं नीचे गया तो देखा सब सो रहे हैं. मैं आराम से भैंस वाले कमरे की साइड में गया और गेट की सांकल खोलने लगा.

आधी सांकल खोल कर मैं कुछ सोच कर रह गया और फिर से चुपके से ऊपर चला गया.

लगभग 11-35 पर मिहिका का फोन आया.मैंने पहली घंटी बजते ही फोन उठा लिया.

दोस्तो, अब इस देसी माल सेक्स कहानी के अगले भाग में मामी की रसीली पड़ोसन मिहिका की चूत चुदाई की गर्म कहानी लिखूंगा … आप मेल जरूर लिखें.आपका राज हुड्डाsupport@mohakkisse.com

देसी माल सेक्स कहानी का अगला भाग:मामी की रसीली पड़ोसन की चूत चुदाई- 2

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श्रृंखला

कहानी श्रृंखला (STORY SERIES)

मामी की रसीली पड़ोसन की चूत चुदाई

कुल भाग: 2
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पाठकों की राय

3 टिप्पणियां

राज खरे

1 month ago

गजब की आंटी है भाई, पढ़ते हुए मजा आ गया।

खुशबू

2 months ago

आंटी को पटाने का तरीका बहुत ही मस्त था। मजा आ गया पढ़कर।

माइसेल्फ

2 months ago

पड़ोसन आंटी की तो बात ही अलग है। बहुत ही गरमा-गरम कहानी!

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