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Lesbian Sex पठन समय: 7 मिनट पढ़ा गया: 435 बार

गरिमा और अंकिता – जवान चूतों की गंदी दोस्ती(Garima aur Ankita - jawan chuton ki gandi dosti)

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27 Oct 2012 को प्रकाशित

गरिमा और अंकिता – जवान चूतों की गंदी दोस्ती(Garima aur Ankita - jawan chuton ki gandi dosti)
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मैं गरिमा हूँ, 25 साल की, मेरी जवानी अब काबू से बाहर हो चुकी थी। कल रात अकेले में डिल्डो से अपनी चूत और गांड फाड़ने के बाद भी मेरी तड़प शांत नहीं हुई। सुबह उठते ही चूत में खुजली हो रही थी। ऑफिस जाने का मन नहीं था। मैंने अंकिता को मैसेज किया।

अंकिता मेरी सबसे अच्छी सहेली थी, 24 साल की, गोरी, लंबे बाल, 36 डी के भारी स्तन, पतली कमर और मोटी-मोटी गांड। वो भी मेरी तरह ही जवान और गंदी स्वभाव की थी। हम दोनों अक्सर पोर्न शेयर करती थी और हँसते-हँसते गंदी बातें करती थी।

मैंने लिखा: “अंकिता आज तेरे घर आ रही हूँ, अकेली है ना? बहुत तड़प रही हूँ यार…”

उसने रिप्लाई किया: “आजा रंडी… मेरी चूत भी सूज रही है। आज तेरी चूत चाटूँगी।”

मेरा बदन गर्म हो गया। मैंने जल्दी से शावर लिया, सिर्फ एक लूज टॉप और शॉर्ट्स पहने, नीचे कुछ नहीं। अंकिता के फ्लैट पहुँचते ही दरवाजा खुला। वो सिर्फ एक शॉर्ट नाइट सूट में थी, उसके बड़े स्तन उभरे हुए थे, निप्पल साफ दिख रहे थे।

“आ गई मेरी जवान रंडी?” उसने मुझे अंदर खींचा और दरवाजा बंद कर दिया।हम दोनों एक-दूसरे को देखते ही गर्म हो गए। मैंने उसे दीवार से लगा दिया और उसके होंठों को चूस लिया। “उफ्फ्फ अंकिता… तेरे बूब्स देख कर मेरी चूत गीली हो गई…”

अंकिता हँसी और मेरे टॉप को ऊपर करके मेरे 34 डी स्तनों को बाहर निकाल लिया। “वाह गरिमा… कितने बड़े और सख्त हैं तेरे निप्पल… आज इन्हें चूस-चूस कर लाल कर दूँगी।”

वो झुक गई और मेरे दाएँ निप्पल को मुंह में ले लिया। जोर-जोर से चूसने लगी।

“आह्ह्ह… हाँ यार… चूस ले अपनी गरिमा की छातियाँ… काट ले…” मैं उसके बालों में हाथ घुमाते हुए कराह रही थी।

उसके हाथ मेरी शॉर्ट्स में घुस गए। “अरे… कोई पैंटी नहीं? कितनी गंदी है तू!” उसने मेरी चूत पर उँगलियाँ फेरी। “पूरी तर हो चुकी है रे… कितना पानी निकल रहा है।”

मैंने उसे बिस्तर की तरफ धकेला। हम दोनों लेट गए। अंकिता ने अपना नाइट सूट उतार दिया। उसके 36 डी स्तन झूल रहे थे, गुलाबी निप्पल सख्त हो चुके थे। मैंने एक स्तन पकड़ कर जोर से मसला। “तेरी छातियाँ तो मेरे से भी बड़ी हैं… आज इन्हें दूध निकालूँगी।”

“हाँ निकाल… चूस मेरे निप्पल… काट… दर्द दे मुझे!” अंकिता कराह रही थी।

मैंने उसके निप्पल को मुंह में लेकर जोर से चूसा, दाँतों से काटा। वो चीखी: “आह्ह्ह… फाड़ दे मेरी छाती… हाँ और जोर से!”

हम दोनों एक-दूसरे के स्तनों को मसलते, चूसते, चबाते रहे। कमरा हमारी कराहों से भर गया था। “गरिमा तू मेरी चूत चाटेगी आज?” अंकिता ने पूछा।

“हाँ रंडी… तेरी पूरी चूत चाटूँगी, अंदर तक जीभ डालूँगी।”

अंकिता लेट गई, जाँघें फैला दी। उसकी चूत साफ शेव की हुई थी, गुलाबी और पहले से गीली। मैं घुटनों के बल उसके बीच बैठ गई। पहले तो उँगलियों से उसकी क्लिट रगड़ी। “देख कितनी सूजी हुई है तेरी चूत… कितनी गंदी हो चुकी है तू।”

“तेरी वजह से… अब चाट ना… अपनी सहेली की चूत चाट!”

मैंने अपना मुँह उसकी चूत पर रख दिया। जीभ से क्लिट चाटी। “उफ्फ्फ… स्वाद कितना मीठा है तेरी चूत का…” मैंने जोर-जोर से चाटना शुरू किया। जीभ अंदर डाली, अंदर-बाहर करने लगी। अंकिता मेरे बाल पकड़कर मेरे मुँह को अपनी चूत पर दबा रही थी।

“हाँ… चाट… और गहरा… अपनी जीभ से फाड़ दे मेरी चूत… आह्ह्ह गरिमा तू बहुत अच्छी चूत चाटने वाली रंडी है!”

मैंने दो उँगलियाँ भी अंदर डाल दी और तेजी से अंदर-बाहर करने लगी। चूसती रही उसकी क्लिट को। अंकिता का बदन काँपने लगा। “मैं आ रही हूँ… चूत का पानी पिया… पी ले सब… आह्ह्ह्ह!!!”

उसका पहला ऑर्गेज्म आ गया। चूत से गर्म पानी मेरे मुँह में छूटा। मैंने सारा पिया, चाटा। “कितना स्वादिष्ट है तेरा चूत का रस…”

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अब मेरी बारी थी। अंकिता ने मुझे लिटाया और मेरी जाँघें चौड़ी की। “अब तेरी बारी रे… तेरी जवान चूत आज मेरे मुंह की रानी बनेगी।”

उसने मेरी चूत को चाटना शुरू किया। जीभ से क्लिट पर घुमाया, फिर पूरा मुँह लगा दिया। “आह्ह्ह… अंकिता… हाँ… चूस ले मेरी चूत… मैं बहुत तड़प रही थी कल रात से…”

वो तेजी से चाट रही थी। “तेरी चूत कितनी गर्म है… कितना पानी बह रहा है… मैं तेरी चूत को फाड़ दूँगी आज।” उसने तीन उँगलियाँ अंदर डाल दी और तेज-तेज हिलाने लगी।

“आह्ह्ह… फाड़ दे… अपनी सहेली की चूत फाड़ दे… मैं तेरी गंदी रंडी हूँ आज!” मैं चीख रही थी।

अंकिता ने अपना डिल्डो निकाला – एक डबल एंडेड, दोनों तरफ लंड जैसा। “आज हम दोनों साथ में चोदेंगे।”

उसने एक सिरा अपनी चूत में डाला, दूसरा मेरी चूत में। हम दोनों आमने-सामने बैठ गए, जाँघें मिला कर। “अब हिल… अपनी चूत मेरी चूत से रगड़…”

हम दोनों हिलने लगे। डिल्डो दोनों चूतों में अंदर-बाहर हो रहा था। “पच… पच… पच…” आवाजें आ रही थी।

“हाँ… चोद मुझे… अपनी सहेली को चोद… तेरी चूत मेरी चूत से मिल रही है… कितना मज़ा आ रहा है!” मैं गंदी बातें कर रही थी।

अंकिता ने मेरे स्तनों को पकड़ लिया। “तेरे बोब्स दबाती हूँ… निप्पल खींचती हूँ… तू मेरी जवान लेस्बियन रंडी है… आज तेरी गांड भी चोदूँगी।”

हम दोनों का दूसरा ऑर्गेज्म साथ में आया। चीखते हुए हम एक-दूसरे से लिपट गए।लेकिन रुकने का नाम नहीं। अंकिता ने मुझे घुटनों के बल किया, मेरी गांड ऊपर। “अब तेरी गांड की पूजा करूँगी।”

उसने डिल्डो को थूक से गीला किया और मेरी टाइट गांड में धीरे से डाला। “आह्ह्ह… दर्द हो रहा है… लेकिन और डाल…” मैंने कहा।

“ले रंडी… अपनी गांड फाड़ रही हूँ तेरी… कितनी टाइट है तेरी गांड… मेरी उँगलियाँ भी डाल रही हूँ तेरी चूत में।”

वो डिल्डो से मेरी गांड चोद रही थी और उँगलियों से चूत। मैं पागल हो रही थी। “हाँ… फाड़ दे दोनों छेद… मैं तेरी गंदी सहेली हूँ… चोद मुझे… दर्द दे… मज़ा दे!”तीसरा ऑर्गेज्म आया, बहुत जोरदार। मैं बिस्तर पर गिर पड़ी।

अंकिता अभी नहीं मानी। उसने मुझे अपनी गोद में बिठाया, फेस टू फेस। डिल्डो फिर से दोनों चूतों में। हम किस्स करते हुए हिल रहे थे। “गरिमा… मैं तुझे प्यार करती हूँ… लेकिन तेरी चूत चोदना चाहती हूँ रोज…”“मैं भी… तू मेरी लेस्बियन लवर है… तेरी चूत चूसूँगी, गांड चूसूँगी… हम दोनों रोज नंगी सोएंगे।”

हम घंटों तक चोदती रहे। अलग-अलग पोजीशन – 69 में एक-दूसरे की चूत चाटते हुए, सिसर्स पोजीशन में चूत रगड़ते हुए, एक-दूसरे के स्तनों पर चूत रगड़ते हुए।

“तेरी चूत का स्वाद पागल कर देता है…”“तेरी गांड चाटते हुए मर जाना चाहती हूँ…”

गंदी बातें करते-करते हम थक गए। लेकिन खुश थे।

अंत में हम नंगी लेटे हुए थे, एक-दूसरे को चूम रहे थे। “कल फिर आएगी ना?” अंकिता ने पूछा।

“हाँ… रोज आऊँगी… हमारी जवान चूतों की दोस्ती कभी खत्म नहीं होगी।”

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