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चुदाई की कहानी पठन समय: 6 मिनट पढ़ा गया: 1,053 बार

जेब में सांप-2

मोहित पवार

15 Apr 2016 को प्रकाशित

जेब में सांप-2
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कहानी का पहला भाग:जेब में सांप-1मैंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी, हम दोनों एक साथ झड़ गए। मैंने अपना सार माल उसके पेट पर निकाल प्रिया।वो बोली- भैया, यह क्या कर प्रिया? मेरा पेट गन्दा कर प्रिया?मैंने कहा- पागल, अगर अन्दर निकालता तो तू मम्मी बन जाती।उसने कहा- ठीक है।

हम दोनों एक दूसरे को चूमने लगे, मैं उसके होंटों का रस पी रहा था। हमें शाम हो गई थी मस्ती करते हुए!

हम दोनों ने कपड़े पहने, उससे चला नहीं जा रहा था। मैंने एक दर्द की गोली उसको खाने के लिए दी तो उसके मम्मी-पापा के आने से पहले वो ठीक हो गई।

जब तक उसका भाई नहीं आया, मैं उसको रोज स्कूल से लाता और उसी के घर पर रोज चोदता।

एक दिन उसकी एक सहेली भी उसके साथ स्कूल से घर तक आई।

सुनीता ने बोला- आ जा घर में! पानी पीकर चली जाना!वो भी घर में आ गई।

सुनीता मुझसे बोली- भैया, यह लड़की कैसी लगी?मैंने कहा- ठीक है! क्यों क्या हुआ?

मैंने उससे उसका नाम पूछा, उसने अपना नाम सरिता बताया।मैंने कहा- अच्छा नाम है।सुनीता बोली- भैया, आज हम तीनों मिलकर रोज वाला खेल खेलें?

मैंने उससे कहा- सुनीता, ऐसे सबको बताना ठीक नहीं है, अगर किसी को पता चलेगा तो गड़बड़ हो जायेगी।फिर उसने कहा- भैया, यह मेरी पक्की सहेली है, यह किसी से नहीं कहेगी। इसका भी खेलने का दिल कर रहा है।मैंने कहा- ठीक है! चलो शुरू करते हैं।सरिता मैंने से कहा- चलो, आज तुम से शुरू करते हैं।

मैंने सरिता को उसके कपड़े खुद उतारने को कहा।वो बोली- मुझे शर्म आती है!मैंने कहा- यहाँ आओ, मैं तुम्हारे कपड़े उतारता हूँ।

धीरे धीरे मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिए। उसके चूचे तो सुनीता से भी बड़े थे।मैंने उससे कहा- क्या बात है? कहाँ से इतने बड़े करवा लिये!वो शरमा गई और बोली- जब मैं नहाती हूँ तो इन दोनों को मसल कर नहाती हूँ।

मैंने उसकी चूची को पकड़ लिया और धीरे धीरे दबाने लगा। मैंने उसके चूचे भी चूसे। मैंने उसके पूरे जिस्म को चाटा।

उसके बाद सुनीता ने भी अपने कपड़े उतार दिए और मेरी पैंट खोल कर मेरा लण्ड चूसने लगी।सरिता ने कहा- यह क्या कर रही है? तुझको गन्दा नहीं लगता?वो बोली- पागल! पहले मैं भी यही बोली थी लेकिन चूसने के बाद मजा आता है। तू भी करके देख!

सरिता ने मेरा लण्ड पकड़ा और अपने मुंह में डाल लिया, मुझे मजा आने लगा। दोनों मेरा लण्ड बड़ी मस्ती से चूस रही थी, मुझे मजा आ रहा था। मैं झड़ने वाला था, मैंने कहा- अब दोनों हट जाओ, मैं झड़ने वाला हूँ।

सरिता ने कहा- वो सफ़ेद पानी निकलता है ना?मैंने कहा- तुझे कैसे पता?उसने बोला- मैंने एक फिल्म में देखा था, मैं उसको पियूँगी।

उसने चूसने की स्पीड बढ़ा दी। सुनीता मेरे होंट चूस रही थी। एकदम से मेरा शरीर निढाल हो गया और सरिता सारा वीर्य पी गई और चाट कर सारा साफ़ कर प्रिया।

मेरा लण्ड अब आराम कर रहा था। थोड़ी देर बाद सुनीता मेरे लण्ड को चूसने लगी और सरिता मुझे पूरा नंगा करके मेरे सारे शरीर को चूसने लगी।

लण्ड फिर खड़ा होने लगा, इस बार लण्ड में कुछ ज्यादा ही पॉवर आ गई थी। सरिता ने जैसे ही देखा कि लण्ड खड़ा हो गया है तो उसने अपनी पैंटी उतारी और मेरे मुँह पर अपनी चूत रख दी।

मैं उसकी चूत चाटने लगा। कुछ समय बाद वो खड़ी हुई और मेरे लण्ड पर बैठ गई। एक बार तो वो थोड़ा सा चिल्लाई, फिर वो आराम से बैठ गई और खुद ही ऊपर नीचे होने लगी। सुनीता अब सरिता के चूचे चाट रही थी, अनिता कभी मेरे होंठों पर चूमती, कभी सरिता के!

मुझे चूत-चुदाई का पूरा मजा मिल रहा था, मेरा दिल बहुत खुश था। मैं आराम से सरिता की चूत चोद रहा था।

इतने में सुनीता अपनी चूत मेरे मुँह के सामने ले कर आ गई और बोली- भैया इसको चाटो ना!मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू कर प्रिया।

सरिता जोर से ऊपर-नीचे होने लगी। थोड़ी देर में वो झड़ गई लेकिन मैं अभी वहीं का वहीं था।

मैंने सुनीता को कहा- सुनीता अब तुम यहाँ बैठ जाओ।सुनीता बोली- भैया, किसी दूसरे तरीके से करते हैं।

मैंने उसकी टाँगें फैला दी और उसकी चूत में अपना लण्ड डाल प्रिया।15 मिनट की चुदाई के बाद वो और मैं एक साथ झड़ गए।

सुनीता बोली- भैया, इस बार आपका माल मैं पियूँगी।

मैंने सुनीता के मुँह में सारा पानी डाल प्रिया, इसके बाद वो सारा माल पी गई और चाट कर सारा साफ़ कर प्रिया।

इसी तरह हर बार जब भी मौका मिलता, सुनीता किसी ना किसी को लेकर आती किसी के भी घर में कोई नहीं होता था तो पढ़ने के बहाने से सारे वही आ जाते थे। मैंने सरिता की मम्मी से उसको पढ़ने की बात की थी, जब अभी मैं उसको पढ़ने के लिए जाता उसको चोद कर आता था।मेरी जिन्दगी अभी भी ऐसे ही चल रही है, अभी हमारे ग्रुप में सुनीता के स्कूल की 16 लड़कियाँ है। मुझे रोज किसी ना किसी लड़की की चूत मिल ही जाती है।

आगे की कहानी बाद में!मेरी कहानी कैसी लगी, मुझे मेल करना मत भूलियेगा।support@mohakkisse.com

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जेब में सांप

कुल भाग: 2
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पाठकों की राय

3 टिप्पणियां

साजिद मुंबई

3 months ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

आर्यन मिश्रा

3 months ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

राहुल दीवाना

3 months ago

सच में बहुत ही हॉट और उत्तेजक कहानी है भाई। मजा आ गया पढ़कर।

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