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Group Sex Story पठन समय: 9 मिनट पढ़ा गया: 946 बार

घर के लौड़े-9

पिंकी सेन

09 Apr 2025 को प्रकाशित

घर के लौड़े-9
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Ghar ke Laude-9हम दोनों बिस्तर पर लेट गए.. चुंबन करते-करते मैंने विजय का पजामा निकाल प्रिया टी-शर्ट उसने पहले ही निकाल दी थी।

अब हम दोनों नंगे एक-दूसरे से लिपटे हुए थे जैसे कोई साँप चंदन के पेड़ से लिपटता है।

हम दोनों का चुसाई का प्रोग्राम चालू था, तभी अजय कमरे में आ गया।

हम वैसे के वैसे पड़े रहे।

अजय- वाह.. क्या बात है छोटे.. तू तो बहुत बड़ा हो गया.. बड़े मज़े से रानी के चूचे चूस रहा है।

विजय- बड़े भाई आप भी आ जाओ.. आज तक अकेले-अकेले में मज़ा लेते थे.. आज दोनों मिलकर इस राण्ड को चोदेंगे.. बड़े मज़े देने लगी है आजकल…

अजय हंसता हुआ अन्दर आ गया और अपने कपड़े निकालने लगा।

रानी- उफ़फ्फ़ क्या करते हो विजय.. ऐसे कोई चूचे दबाता है क्या..? आऊच भाई.. आप इसको कुछ सिख़ाओ ना.. आआइई..

अजय- साली छिनाल तेरे को ही दो का मज़ा लेना था.. अब दर्द से क्या डरती है.. ले पहले मेरा लौड़ा चूस.. तीन दिन से अकड़ा बैठा है.. विजय तब तक तू साली राण्ड की चूत चाट कर इसको गर्म कर!

अजय ने अपना लौड़ा मेरे मुँह में घुसा प्रिया और विजय मेरी टांगों के बीच आ गया और अपनी जीभ से मेरी चूत चाटने लगा।

बड़ा मज़ा आ रहा था।

अजय- आहह.. चूस उफ्फ साली.. क्या चूसती है तू.. मज़ा आ गया आअहह.. और..चूस…

विजय- भाई, ये साली तो पहले से ही गर्म है.. देखो कैसे आज चूत को चिकना किया है और इसकी चूत कैसे पानी छोड़ रही है। आप तो बस आ जाओ… घुसा दो लौड़ा इसकी चूत में और मुझे भी गाण्ड मारने दो.. मुझसे अब ज़्यादा देर तक बर्दाश्त नहीं होगा।

विजय की बात सुनकर मैंने लौड़ा मुँह से निकाला और विजय के बाल पकड़ कर उसको भी अजय के पास खड़ा कर प्रिया।

रानी- साला हरामी 5 मिनट हुआ नहीं कि अपनी औकात पर आ गया.. इतनी जल्दी थोड़े ही तुम दोनों से चुदवाऊँगी.. पहले मुझे ठीक से मज़ा तो लेने दो…

विजय- साली.. अब तू क्या करने वाली है.. कितनी ज़ोर से मेरे बाल खींचे.. दर्द हुआ ना मेरे को…

रानी- चुप साले.. इतने से दर्द से घबरा गया.. तूने मेरी गाण्ड में ये मोटा लौड़ा घुसाया था, तब नहीं सोचा कि मुझे कितना दर्द हुआ होगा…

अजय- तुम दोनों लड़ना बन्द करो.. साली राण्ड मेरे लौड़े को क्यों बाहर निकाल प्रिया.. चूस ना… मज़ा आ रहा था।

रानी- लौड़ा भी चूसूंगी.. मगर दोनों का एक साथ और उसके बाद तुम दोनों मेरी चूत और चूचे एक साथ चूसना.. उसके बाद एक साथ चूत और गाण्ड में लौड़े डालना.. तब आएगा असली मज़ा…

मेरी बात दोनों को पसन्द आई और मैं शुरू हो गई। कभी विजय का लौड़ा चूसती तो कभी अजय का कभी दोनों लौड़ों को एक साथ नज़दीक करके जीभ से चाटती.. मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था।

दस मिनट की चुसाई के बाद विजय के बर्दाश्त के बाहर हो गया। उसने मुझे धक्का देकर बिस्तर पर गिरा प्रिया और खुद मेरे चूचे दबाने लगा.. मेरे चूचुकों को चूसने लगा।

अजय- अरे वाहह.. छोटे तू तो बड़ा फुर्तीला निकला.. चल साली अब तेरी चूत को मैं चूस कर मज़ा देता हूँ।

दोस्तो, वो पल ऐसा था आपको क्या बताऊँ बड़ा ही मज़ा आ रहा था। मेरी चूत रिसने लगी थी.. अजय अपनी जीभ चूत के अन्दर तक घुसा कर चाट रहा था और विजय भी मेरे चूचुकों को बड़े मज़े से चूस रहा था।

यह सिलसिला ज़्यादा देर तक नहीं चला क्योंकि विजय बड़ा उतावला हो रहा था इसलिए अब अजय सीधा लेट गया और मैं उसके लौड़े पर बैठ गई.. सर्रररर करता हुआ लौड़ा चूत में समा गया।

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अब विजय पीछे आ गया और उसने अपना लौड़ा मेरी गाण्ड में घुसा प्रिया। अब दोनों ‘दे..दना-दन’ मुझे चोदने लगे।

रानी- आहह उहह चोदो बहनचोदो.. आह अपनी बहन को चोदो.. आआइई.. आज फाड़ दो मेरी चूत और गाण्ड आआईइ उउउइई.. आह.. मज़ा आ रहा है.. आह ज़ोर से उफ्फ आहह..

मेरी सिसकारियों से दोनों जोश में आ गए और तेज़ी से लौड़े आगे-पीछे करने लगे।

विजय तो पहले से ही किनारे पर था ज़्यादा देर तक मेरी गाण्ड की गर्मी ना सह पाया और मेरी गाण्ड में ही झड़ गया।

विजय- अईयाया मैं ग्ग्ग..गया.. उफफफ्फ़ सस्स्सस्स.. क्या मस्त.. अइई.. गाण्ड है तेरी…

रानी- चल हट हरामी.. साला थोड़ी देर भी नहीं टिक सकता.. नामर्द कहीं का.. अईउई.. चोदो अजय.. अईउई तुम बहुत अच्छे हो.. अईउई मेरी चूत में कुछ हो रहा है.. आआहह ज़ोर से… और ज़ोर से उफफफ्फ़ आआआ मैं गई आआहह…

अजय- मेरी रानी.. वो अभी छोटा है उह्ह उह्ह उह्ह ले.. उह्ह ले.. उसको क्या बोलती हो.. ले उह्ह उह्ह आ आ.. रुक रानी आहह.. मैं भी झड़ने के करीब हूँ.. आहह.. दोनों एक साथ झडेंगे.. आह… ले उह्ह उह्ह उह्ह उह्ह उफ़फ्फ़…

विजय तो एक तरफ़ हो गया था.. अब अजय और तेज़ी से झटके मारने लगा। मैं भी गाण्ड उछाल-उछाल कर लौड़े पर कूदने लगी..

सिर्फ 5 मिनट बाद ही दो नदियों का संगम हो गया.. हम दोनों झटके खा-खा कर झड़ने लगे। थोड़ी देर बाद ये तूफ़ान शान्त हुआ और हम निढाल से होकर लेट गए।

रानी- उफ़फ्फ़ कितनी गर्मी लग रही है.. कितना मज़ा आया आज.. कसम से चुदाई इसे कहते हैं एक साथ दो लौड़े लेने का मज़ा ही कुछ और है।

विजय- हाँ रानी.. मुझे भी बड़ा मज़ा आया थैंक्स भाई.. आपने ऐसा प्लान बनाया…

अजय- अरे मैंने कहाँ बनाया.. ये तो तूने बनाया ना…

उन दोनों की बात सुनकर मैं ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगी.. अजय सब समझ गया कि ये सब कुछ मेरा प्लान था।

अजय- साली रंडी मेरे साथ सोती है और मुझसे ही झूट बोला तूने.. ये सब प्लान तेरा था और हम दोनों भाइयों को चूतिया बना कर मज़े ले लिए तूने…

विजय- ओह माय गॉड.. भाई ये साली बहुत बड़ी राण्ड बन गई है.. देखो कैसे हम दोनों को एक-दूसरे का नाम लेकर तैयार कर लिया।

रानी- बस भी करो कुत्तों.. माना कि प्लान मेरा था.. मगर राज़ी तो तुम दोनों ही थे ऐसी चुदाई के लिए और मज़ा मैंने अकेले नहीं.. तुम दोनों ने भी लिया है.. शुक्र करो मेरा.. कि अब अलग-अलग चुदाई के बजाए एक साथ मज़े करेंगे।

मेरी बात सुनकर दोनों समझ गए कि मैं ठीक बोल रही हूँ और अब ज़्यादा बहस की गुंजायश भी नहीं थी क्योंकि आजकल मैं गाली देना सीख गई थी.. ज़्यादा बोलते तो दोनों की हालत खराब कर देती।

दोस्तों उस रात हमने तीन बार ये खेल खेला.. मगर विजय थोड़ा जल्दी झड़ जा रहा था। अजय भी इतना खास नहीं.. उसके 5 मिनट बाद वो भी झड़ जाता, मुझे लंबा वक्त सिर्फ़ पापा ही देते हैं मैं दो बार झड़ जाती हूँ तब भी वो चोदते रहते हैं।

रात दो बजे तक मेरी चूत और गाण्ड की बैंड बजाने के बाद हम अपने-अपने कमरों में चले गए और सुकून की नींद सो गए।

दोस्तों सुबह मैं एकदम फ्रेश हो गई थी क्योंकि अब चुदाई की मुझे लत पड़ गई थी, जब तक दो-तीन बार गाण्ड और चूत ना मरवा लूँ.. मेरे जिस्म में सुस्ती रहती है। सब काम निपटा कर मैं तैयार होने लगी। ओह.. आपको बताना ही भूल गई कि पापा ने जाते समय मुझे कहा था कि वो जल्दी वापस आकर मुझे ले जाएँगे, बस इसी वजह से मैं तैयार हो रही हूँ।

करीब 9 बजे तक मैं एकदम तैयार होकर पापा का इंतजार करने लगी। आज मैंने पापा की लाया हुआ गुलाबी टॉप और काला स्कर्ट पहना था, जिसमें मैं एक छोटी बच्ची लग रही थी और वैसे भी अभी मेरी उमर भी क्या थी.. बच्ची ही तो थी मैं.. बस मेरे हरामी घर वालों ने मुझे औरत बना प्रिया था।

पापा- अरे वाहह.. मेरी रानी आज तो एकदम गुड़िया जैसी लग रही हो.. कसम से आज मज़ा आ जाएगा.. मगर मेरी एक बात गौर से सुन.. वहाँ किसी को पता ना चले कि तू मेरी बेटी है.. मुझे बस अंकल बोलना वहाँ.. ओके.. आज से तेरा नया जीवन शुरू होने जा रहा है। अब तू फ्री में नहीं चुदेगी.. हम पैसे कमाएँगे तेरी चूत से.. बस तू उनकी हर बात मान लेना.. थोड़े पागल किस्म के लोग हैं वो लोग चुदाई की हर हद पार कर चुके हैं मगर पैसे भी खूब देंगे…

पापा की बात सुनकर मैं एकदम सन्न रह गई क्योंकि चुदाई के चक्कर में अब ना जाने मेरे साथ क्या-क्या होने वाला था। पापा ने तो मुझे सचमुच की रंडी बना प्रिया था।कहानी जारी रहेगी।मुझे आप अपने विचार मेल करें।

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पाठकों की राय

1 टिप्पणी

रीतेश सिंह

3 months ago

सच में बहुत ही हॉट और उत्तेजक कहानी है भाई। मजा आ गया पढ़कर।

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