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रिश्तों में चुदाई पठन समय: 17 मिनट पढ़ा गया: 1,154 बार

गर्ल्स हॉस्टल की लड़कियां- 3

माधुरी सिंह मदहोश

26 Jan 2026 को प्रकाशित

गर्ल्स हॉस्टल की लड़कियां- 3
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हिंदीXxx फैमिली स्टोरी में हॉस्टल की सेक्सी लड़कियों को वार्डन अपनी चुदाई की कहने सुना रही है. जब वार्ड के जेठ ने उसे अपने देवर और उसके दोस्तों से चुदती देखा तो …

कहानी के पिछले अंकहॉस्टल की वार्डन देवर से चुदीमें आपने पढ़ा कि हॉस्टल वार्डन फातिमा, नई लड़कियों से दोस्ती करने के लिए, अपनी कामुक गाथा उन को सुनाती है कि कैसे एक देवर से चुदते हुए देख लेने के कारण उसे, उसके दो जुड़वा देवरों से भी चुदवाने की सहमति देनी पड़ी। दोनों देवर उस के बूब्स पर पिल पड़ते हैं।एक शानदार चुदाई से पस्त फातिमा अपने दूसरे देवर की उतावली देख के, उसे थोड़ा रुकने के लिए कहती है लेकिन वह मानने को राजी नहीं होता है।

अब आगे हिंदीXxx फैमिली स्टोरी:

दूसरे देवर की बेताबी देखकर मैंने नैपकिन से अपनी चूत साफ की और उसे चुदाई शुरू करने का इशारा किया।वह चोदने के लिए आगे बढ़ा.वह पहली चूत मिलने के कारण इतना उत्तेजित हो चुका था कि चुदाई शुरू करने के 2 मिनट के अंदर मेरी चूत में अपना वीर्य उड़ेल कर नीचे सरक गया।मैंने फिर उस का वीर्य नेपकिन में समेटा.

अब तीसरा देवर मुझ पर चढ़ा।वह भी आखिर जुड़वां भाई था, उस का भी चूत चोदने का यह पहला अनुभव था, घुसते ही उसकी टोटी खुल गई।इन दोनों देवरों के लौड़ों का तो मेरी चूत में घुसने का अहसास भी मुझे ठीक से नहीं हो पाया।

वैसे एक तरह से यह अच्छा ही हुआ क्योंकि कुछ देर पहले ही मैंने फोरसम का जो मजा लिया था, उस कारण मेरा शरीर और दिमाग अभी किसी चुदाई के लिए बिल्कुल तैयार नहीं था।

उसके बाद यह जरूर हुआ कि मैं बदल बदल के उन तीनों देवरों के लौड़ों के मजे लेने लगी।दोनों जुड़वां भी बाद में तो ठीकठाक चुदाई करने लगे।

जिस तरह फूलों की महक को फैलने से रोका नहीं जा सकता, उसी प्रकार इस तरह के जिस्मानी ताल्लुकातों की खुशबू को भी कब तक बांध के रखा जा सकता था?

फातिमा अपना किस्सा सुना रही थी- तीनों देवरों की नई चूत के लिए दीवानगी और हर समय मेरी चुदने की आतुरता के कारण मेरे जेठ को शक होने लगा।

एक दिन की बात है, मेरी जेठानी कुछ दिनों के लिए मायके जा रही थी, जाते हुए मेरी जेठानी ने मुझ से कहा- तेरे जेठ जी को सुबह चाय जरा जल्दी दे प्रिया करना।मैंने हामी भर ली।

उनकी बात मानकर जब सुबह सुबह मैं उनके कमरे में चाय देने गई.जेठ ने सुनहरा अवसर पाकर मुझ से मेरे तीनों देवरों के बारे में पूछताछ प्रारंभ कर दी।

पहले तो मैंने छुपाने की बहुत कोशिश की और गोल-मोल बातें करने लगी।

जब जेठ जी ने दबाव डाला और कहा कि मैं सब कुछ जानता हूं लेकिन मैं तुमसे इस बारे में सुनना चाहता हूं तो मैं घबरा गई।मैंने टालने की बहुत कोशिश की थी पर वे भी इस सुनहरे अवसर का लाभ उठाकर हर मर्द की तरह हाथ आई नई चूत को चोदना चाहते थे।

वे माने नहीं, उन ने फिर कहा- मैं बहुत दिनों से तीनों भाइयों की हरकतों को गौर से देख रहा हूं और मुझको यह भी लगता है जैसे तुमको भी उनकी छिछोरी छेड़छाड़ से कोई परेशानी नहीं है। इसलिए अच्छा तो यही होगा कि तुम बिना कुछ छुपाए सारी बात मुझे खुलकर बताओ।

मैंने सोचा कि अब ज्यादा नौटंकी करने की जरूरत नहीं है. जेठ जी अधिक से अधिक मेरे रहस्य को अपने तक रखने के लिए मुझे चोदना ही तो चाहेंगे. तो मुझे इसमें क्या दिक्कत हो सकती थी?

मेरी चूत एक और नया लंड मिलने की संभावना से रिसने लगी।मैंने उनको असलम के ढीले होने, एक देवर द्वारा मुझे हस्तमैथुन करते देखने के बाद गुसलखाने में मुझे चोदने और उसके बाद में दूसरे दो देवरों द्वारा ब्लैकमेलिंग के जरिए मेरी चुदाई करने के बारे में इस तरह बताया जैसे कि मैंने यह सब मजबूरी में किया था।

उनको उत्तेजित करने के लिए मैंने यह भी बता प्रिया कि मुझे मजबूरी में उन तीनों भाइयों से अभी भी लगातार और कभी-कभी तो दिन में कई कई बार चुदवाना पड़ता है।

सोनिया की एक तरफ रोज़ी और दूसरी तरफ सलमा बैठी हुई थी।उन दोनों ने सोनिया की बेचैनी को समझा और उसके स्तनों से खेलने लगीं।

आज तो सोनिया के एक एक स्तन पर दस दस उंगलियों का स्पर्श, उस के बदन में कामवासना का तूफान उठा रहा था।

उसके बाद दोनों ने सोनिया की एक-एक निप्पल को मुंह में लिया और उसे चूसने लगीं।उसके पूरे बदन में सनसनी सी मची हुई थी; उसके लिए यह सब एक अद्भुत अनुभव था।

आज उसे एक किस्म का पछतावा हो रहा था कि उसने तथाकथित नैतिकता-अनैतिकता के जंजाल में फंसकर ऐसे मस्ती भरे अनुभवों को लेने की बिल्कुल कोशिश नहीं की।सोनिया की नजर में भी अब यह कामुकता, यह शरीर में होने वाली सनसनी, कुदरत की दी हुई नेमत बन चुकी थी।

हरप्रीत और नादिरा ने वातावरण को और उत्तेजना से भरने के लिए फातिमा को पूरी तरह नंगी कर प्रिया और उसके भारी भरकम स्तनों को मसलने लगीं।

सलमा और रोज़ी की हरकतों के कारण सोनिया के मुंह से सिसकारियां निकलने लगी थीं.फातिमा भी अब कहानी सुनाने के साथ-साथ अपनी नई-नई बनी हुई कामुक सहेलियों के स्पर्श का मजा ले रही थी।

फातिमा ने आगे कहा- मेरे जेठ ने मुझे दिलासा देते हुए कहा कि घबरा मत फातिमा, अब तुझे कम से कम मुझ से डरने की कोई जरूरत नहीं है। मैं तेरे हालात को समझता हूं यार, तूने अब तक जो कुछ भी किया, इसमें तेरी कोई गलती नहीं है।

उसके बाद उन्होंने मजाक में एक बात कही जिससे मेरी चूत में गुदगुदी होने लगी।सब लड़कियां फातिमा की ओर देखने लगी कि वह क्या कहने वाली है?

फातिमा ने मुस्कुरा कर कहा- जेठ जी बोले कि फातिमा तुझे यह तो पता होगा कि 12 महीनों में एक महीना जेठ का होता है?

हिंदीXxx फैमिली वाली बात पर मुझे उनकी इस बात पर हंसी आ गई, मैंने हां मैं सिर हिलाया।जेठ जी समझ चुके थे कि अब मैं और मेरी चूत उनका लंड लेने के लिए तैयार हो चुके हैं।

वह बोले, मुझे अच्छा लगेगा यदि मैं भी तेरी दबी हुई हसरतों को पूरा करने में, तेरे को जिस्मानी सुकून देने में, तेरे किसी काम आ सकूं, आखिर छोटे भाइयों की तरह मेरा भी तो तेरे जिस्म पर हक़ बनता है।

मैं फिर अपनी प्रचंड कामवासना के आगे कमज़ोर पड़ गई और फिर वही हुआ, जिसका सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है।

यानि मेरे जेठ ने पलंग पर बैठे-बैठे मुझे अपने पास खींचा और मेरे होंठ पर अपने होंठ रख दिए।उनके दोनों हाथ कुर्ती के ऊपर से ही मेरे बूब्स दबाने लगे।

मेरी गर्म चूत उन के इस फोरप्ले के कारण कुलबुलाने लगी।मैं भी अब पूरी तरह एक और नए लंड का मजा लेने का मन बना चुकी थी।

उसके बाद उन्होंने मेरी कुर्ती उतार दी.अंदर मैं ब्रा तो पहनती नहीं हूं, मेरे वजनी स्तन उनके चेहरे के सामने झूलने लगे।

जेठ जी देवरों की तरह कच्चे खिलाड़ी नहीं थे, उन्होंने पूरे धैर्य के साथ मेरे दोनों स्तनों को मसलते हुए, बारी-बारी से दोनों निप्पलों को चूसा।मेरे पूरे बदन में कामवासना का संचार होने लगा।

मेरा ध्यान उनकी जांघों के जोड़ पर गया, जहां लूंगी में तंबू तन चुका था।मेरी उनके लंड को देखने की इच्छा होने लगी।

तभी उन्होंने लूंगी में से अपना लंड निकाला और मुझे घुटनों के बल बैठा कर उसे चूसने का इशारा किया।

मैंने देखा कि उनका झाँटें साफ किया हुआ, सुर्ख मोटे सुपारे वाला लंबा चिकना सुडौल लंड, बहुत खूबसूरत दिखाई दे रहा था, शायद उन्होंने रात को ही मुझे चोदने का मन बना लिया था।

मेरी चूत भी अब जेठ जी के लंड के घुसने की राह देख रही थी।देवरों के लंड चूसते चूसते मुझे तो अब लंड चूसने में भी मजा आने लगा था।उस पर फिर जेठ जी का नया लंड!

मैं दीवानों की तरह उनका आधा तन्नाया लंड चूसने लगी.और वे मेरी इस दीवानगी से मदहोश होने लगे।उनके मुंह से लगातार सिसकारियां निकल रही थीं।वे अपनी मस्ती को ‘ओह फातिमा … आह फातिमा … आह … आह …’ जैसे शब्दों से व्यक्त कर रहे थे.

मेरे होठों का प्यार पाकर उनका लंड भुट्टे की तरह अकड़ के साढ़े छः इंच का हो चुका था।उसके बाद वे पलंग से उठे और उन्होंने मेरे को घोड़ी बनाकर, अपने लंड पर थोड़ा सा थूक लगाया और एक ही झटके में उसे मेरी चूत में घुसेड़ प्रिया।

उसके बाद जेठ जी ने करीब 15 मिनट तक मुझे जी भर के पेला।वे पूरे जोश ख़रोश के साथ धक्के लगा रहे थे, मैं भी घुटनों के बल आगे पीछे हो होकर उनके लंड से अपनी चूत को घर्षण सुख दिलवा रही थी।

चूत में लंड के घर्षण के साथ मैंने अपनी दाहिने हाथ की बीच वाली उंगली से अपने काम ऊर्जा केंद्र क्लिटोरिस को सहलाना शुरू किया, जिससे मैं अपने आर्गज्म की तरफ जल्दी पहुंच गई।

जेठ जी भी अब अपने चरम पर पहुंचने वाले थे।उन्होंने अपने दमदार धक्कों की गति बढ़ाई और जल्दी ही मेरी चूत की गहराई में अपना वीर्य का जखीरा खाली कर प्रिया।हम दोनों ने अपनी इस पहली चुदाई में अद्भुत चरम सुख प्राप्त किया।

जब हमारी चुदाई समाप्त हो गई तो मैं जेठ जी की बाहों में लेटी हुई, बेइंतहा राहत का अनुभव कर रही थी।कुछ देर तक हम दोनों का ध्यान एक दूसरे की सांसों और दिल की धड़कनों पर था।

छोटे भाई की बीवी की नई चूत केवल एक बार चोदने से उनका मन नहीं भरा था।इसके पहले कि घर के बाकी लोग उठते, जेठ जी ने मुझे दूसरी बार चुदवाने के लिए मना लिया.मना क्या लिया … मैं तो खुद यही चाहती थी कि जेठ जी कम से कम एक बार और मुझे कस के चोद दें।

अपने वीर्य और मेरी चूत रस में सना लंड, उन्होंने मेरे मुंह में दे प्रिया।मेरे दिमाग में इतनी वासना चढ़ी हुई थी कि मैंने बिना मुंह बिगाड़े उनका नर्म लंड अपने मुंह में ले लिया और मज़े ले ले कर चूसने लगी और उसे अगली चुदाई के लिए तैयार करने में जुट गई।

जब जेठ जी का लंड फिर से कड़क हो गया तो इस बार उन्होंने मुझे चित्त लिटाया और मेरे पैर घुटनों से मोड़ कर, मेरी चूत में अपना कड़क लंड घुसेड़ा और मुझे दबोच के मेरी घमासान चुदाई शुरू की।

जेठ जी का नंगा, भारी, कसरती बदन मुझे अपार सुख पहुंचा रहा था।मुझे उनके चेहरे पर मेरे भरे बदन और नई चूत को चोदने की मस्ती बरसते हुए देखकर अजीब सी खुशी हासिल हो रही थी।

इस बार हमारी चुदाई करीब बीस मिनट चली।दोनों चरम सुख के क्षणों में पसीना पसीना हो चुके थे।

जेठ जी दो बार चोद कर अपनी और मेरी शारीरिक भूख को शांत कर चुके थे।मुझे अब उन के कमरे से निकलना भी ज़रूरी था क्योंकि घर के बाकी सदस्य भी उठने वाले थे।

जब मैं कमरे से जाने के लिए पलंग से उतरी तो जेठ जी ने मुझे एक बार फिर अपनी आगोश में ले कर कहा- फातिमा तेरा बदन, तेरी चूत, मस्ती का खजाना है, आज मैंने अपनी जिंदगी का सब से बड़ा, सब से नायाब शारीरिक सुख पाया है।मैंने खुश हो कर उन को चूम लिया और चली आई।

फातिमा कह रही थी- मुझे तीनों देवरों में सबसे अधिक मजा पहले देवर से चुद के आया था. क्योंकि ससुराल में पति के अलावा वह मेरा पहला लंड था और मैं उस समय अत्यधिक उत्तेजित भी थी। उसकी थोड़ी जबरदस्ती के साथ, गुसलखाने में खड़े-खड़े की गई, पहली चुदाई मैं कभी भूल नहीं सकती लेकिन जेठ जी से चुदवा के तो मुझे पहले देवर से भी अधिक आनन्द मिला।

सलमा और रोज़ी ने सोनिया के निप्पल को मुंह में ले लिया था.इधर नादिरा और हरप्रीत ने भी फातिमा के बोबों को चूसना शुरू कर प्रिया।

सोनिया और फातिमा की उंगलियां अपनी चूत पर तेजी से चलने लगीं।

कुछ ही देर में दोनों की सांसें फूलने लगीं, चूत पर उन की उंगलियों की गति बढ़ गई।कुछ देर की इस मस्ती भरी मेहनत के बाद उन के शरीर अकड़े और ढीले पड़ गए।

सोनिया और फातिमा एक बार झड़ने के बाद सामान्य हो चुकी थीं।

सोनिया ने अब सलमा को पकड़ा और उसके बूब्स से खेलने लगी।रोज़ी ने इस बार सलमा की चूत पर धावा बोला।नादिरा और हरप्रीत दोनों 69 की मुद्रा में एक दूसरे की चूत में मुंह देकर लेस्बियन सेक्स का नज़ारा पेश कर वातावरण को अत्यधिक रंगीन बना रही थीं।

एक बार जब फातिमा सामान्य हो गई तो उसने फिर अपनी कहानी के बारे में बताना शुरू किया- तुम लोग यह भी जानती हो कि हमारे घर में एक ही कमरे में कई कई लोग सोते हैं। एक रात मेरा मर्द मुझे चोदने के लिए मुझ पर चढ़ा और हमेशा की तरह, जल्दी जल्दी कुछ धक्के लगा के डिस्चार्ज करके उतर गया।

मैं उस पर गुस्से में गालियां बकने के बाद सोने की कोशिश कर रही थी।

तभी मेरी चूत में फिर लंड घुसा, मैं चौंक गई कि आज अचानक मेरे मर्द का निर्जीव लंड, इतनी जल्दी फिर से खड़ा कैसे हो गया?मैंने आंखें खोली तो मुझे एक करारा झटका लगा।मेरे ऊपर मेरा मर्द नहीं बल्कि मेरा बेटा चढ़ा हुआ था।

सलमा नादिरा और हरप्रीत तीनों के तन बदन में फातिमा के बेटे द्वारा चुदने की बात सुनकर अत्यधिक उत्तेजना का संचार होने लगा।सलमा ने रोज़ी को भग को चूसने के लिए कहा।ऐसे उत्तेजक वातावरण में नादिरा हरप्रीत की जुबानें भी एक दूसरे की चूत में तेज़ी से चलने लगीं।

रोज़ी ने सलमा की चूत में मुंह देने के पहले सोनिया को इशारा किया.सोनिया ने रोज़ी के उरोजों को मसला, रोज़ी को भी अब उस की चूत में कुछ जबरदस्त हलचल चाहिए थी।वह सोनिया को झड़ा चुकी थी और सलमा को चरम सुख देने की कोशिशें में लगी हुई थी।

सोनिया भी समझ रही थी कि ऐसे वातावरण में रोज़ी अंदर ही अंदर वासना के तूफान को समेटे हुए थी।उसने रोज़ी की चूत में उंगली डाल के उसे हस्तमैथुन का सुख पहुंचाना शुरू कर प्रिया।

फातिमा कह रही थी- अब जब मेरे बेटे का लंड मेरी चूत में घुस ही गया था और उस समय मैं जिस तरह कामवासना की आग में झुलस रही थी, मैंने अपने बेटे की इस हरकत का जानबूझ के विरोध नहीं किया क्यों कि मेरी दहकती चूत मेरे बेटे के लंड के भी मज़े लेने लगी थी।

एक बार तो मेरा मन हुआ भी कि उसे धक्का देकर अपने ऊपर से हटा दूं लेकिन फिर मैंने सोचा कि जब मेरा बेटा मेरी चूत में अपना लंड घुसेड़ के रगड़े लगा ही चुका है, ऐसे में मैं यह तो कह नहीं सकती थी कि मेरे बेटे ने मुझे नहीं चोदा तो उस को रोक के भी मुझे क्या फायदा हो जाना था?

अतः मैं भी बेटे के धक्कों का जवाब उछल-उछल के देने लगी.मेरा बेटा तो कमसिन और नया खिलाड़ी था।

उस पर वह न केवल पहली बार अपनी मां चोद रहा था बल्कि उसने चुदाई की शुरुआत मुझसे ही की थी।इसलिए वह ज्यादा टिक नहीं पाया और बिना मुझे झड़ाये बाप की तरह जल्दी ही ढेर हो गया।

मेरे कामुक पाठको, मुझे पूरा विश्वास है कि आप लोग कहानी के पात्रों से जुड़कर, सनसनी प्राप्त कर रहे होंगे।अगले अंक में पढ़िए कि बेटे के जल्दी ढेर होने के बाद फातिमा ने क्या किया?

इसके अलावा आप लोग जानेंगे कि सलमा और चावला सर के बीच में कैसी रोमांचक घटना घटती है।हिंदीXxx फैमिली स्टोरी पर अपने विचार भेज कर मेरा उत्साहवर्धन करते रहें,मेरी आईडी हैsupport@mohakkisse.com

हिंदीXxx फैमिली स्टोरी का अगला भाग:गर्ल्स हॉस्टल की लड़कियां- 4

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19 मिनट 354

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