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Hindi Sex Story पठन समय: 15 मिनट पढ़ा गया: 800 बार

गोवा में गैर-मर्द संग मस्त हनीमून- 2

अंजलि शर्मा सेक्सी

02 Feb 2022 को प्रकाशित

गोवा में गैर-मर्द संग मस्त हनीमून- 2
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हनीमून इन गोवा का मजा लेने मैं एक पराये मर्द के साथ आई और हम एक रिसोर्ट में रुके. हम थके हुए थे पर कमरे में आते ही उन्होंने मुझे पकड़ लिया.

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फ्रेंड्स, मैं अंजलि शर्मा एक बार पुनः आपके सामने अपनी मस्त सेक्स कहानी के अगले भाग के साथ हाजिर हूँ.

कहानी के पहले भागनए बने दोस्त के साथ हनीमून की तैयारीमें अब तक आपने पढ़ लिया था कि मैं सुमेश जी के साथ सेक्स से भरपूर हनीमून मनाने के लिए गोवा आ गई थी.

अब आगे हनीमून इन गोवा का मजा:

चूंकि हम दोनों ने फ्लाइट में ही लंच कर लिया था, इस वजह से अभी भूख नहीं थी.इस टाइम मुझे सिर्फ चुदाई की भूख लगी थी.

हम दोनों ही चुदास से तप्त थे.

कमरे में अन्दर आते ही मैं बिस्तर के करीब चली गई और सुमेश डोर लॉक करके मेरे पास आ गए.

सुमेश ने मुझे पीछे से पकड़ कर हग कर लिया और वे मुझे अपनी बांहों में जकड़ कर शीशे के सामने ले गए.वे मुझे देख रहे थे.

मेरे चेहरे पर ख़ुशी अलग ही नजर आ रही थी.सुमेश जी ने मेरी चाहत को भांप लिया था और वे मुझे पीछे से अपने लौड़े से चिपका कर खड़े हुए थे.उनका सख्त और मोटा लंड मेरी गांड की दरार में चुभता सा महसूस हो रहा था.

कुछ देर तक ऐसे ही हग करके खड़े रहने से सुमेश जी का लंड और कड़क व सख्त होने लगा था, जो मुझे मेरी गांड में घुसता सा महसूस हो रहा था.

मैं भी चुदासी थी लेकिन नींद पूरी न हो पाने के कारण अभी बहुत थकी हुई महसूस कर थी.मैं सुमेश जी की बांहों में लेट कर आराम करना चाहती थी.

इसलिए मैंने सुमेश जी से कहा- सुमेश जी पहले थोड़ा आराम कर लेते हैं.सुमेश ने भी हां बोल प्रिया- हां अंजलि, रेस्ट कर लेते हैं … चलो कोई दिक्कत नहीं है.

उनकी आवाज से मैं ये महसूस कर पा रही थी कि सुमेश इस समय मेरी चुदाई करना चाहते हैं.मैं भी चुदने की सोच कर उनका साथ देने को राजी हो गई थी.

अब मैंने अपने हाई बूट्स उतार दिए और बेड पर आ गई.सुमेश जी भी मेरे साथ बेड पर आ गए.

अब मैंने अपने छोटे से क्रॉप टॉप के बटन खोल कर उसको भी उतार प्रिया और नीचे से मैंने अपनी स्कर्ट भी उतार दी.

अब सुमेश के सामने मैं सिर्फ ब्रा पैंटी में रह गई थी.वे मुझे ही देख रहे थे और मेरे अधनंगे बदन को निहार रहे थे.

वे मेरी ब्रा पैंटी में कसे मेरे मादक जिस्म को जिस नजर से मुझे देख रहे थे, उससे मुझे बहुत शर्म आ रही थी.

हालांकि मैं पहले एक बार सुमेश जी से चुद चुकी हूँ, पर फिर भी मुझे बहुत शर्म आ रही थी … ना जाने ये अहसास मुझे क्यों हो रहा था.शायद हो सकता है कि उस समय हमारे रिश्ते को एक नया नाम मिल रहा था.

तभी सुमेश जी बोले- अंजलि, अपने ये दोनों ढक्कन भी उतार दो … तो मैं आंखों से तुम्हें चोद सकूँ!

जब उन्होंने मेरी ब्रा पैंटी को ढक्कन कहा तो मुझे हंसी आ गई.वे भी हंस कर बोले- हां अंजलि जान, अब कैसी शर्म!

मैं समझ गई थी कि सुमेश जी अब मुझे पूरी नंगी देखना चाहते हैं.पर मैंने उन्हें तड़फाने के नजरिए से कहा- नहीं सुमेश जी, मुझे आपके साथ अभी ऐसे रहने में ही थोड़ी शर्म आ रही है. प्लीज आप लाइट बंद कर दो. मैं ब्लैंकेट के अन्दर खुद ही उतार लूँगी.

सुमेश ने मेरी बात का सम्मान करते हुए मुझसे नंगी होने को जिद नहीं की.उनकी ये बात मेरे मन को भा गई.

फिर मैं ब्लैंकेट में घुस कर लेट गई.

सुमेश ने मेरे सामने ही अपनी शर्ट और जीन्स उतार दी.वे मेरे सामने सिर्फ अब एक ब्लैक रंग की फ्रेंची अंडरवियर में खड़े हुए थे जिसमें उनका लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका था.उनका खूंखार सा लंड मुझे डरा रहा था.

फिर सुमेश जी ने लाइट्स बंद कर दी.

मैंने भी अन्दर हाथ डाल कर ब्रा का हुक खोल प्रिया और अपने रसभरे बड़े व तने हुए बूब्स को आज़ाद कर प्रिया.

ब्रा उतारने के बाद मैंने अपनी पैंटी में हाथ डाल कर उसको भी अपनी चिकनी जांघों से नीचे सरका प्रिया.मैंने ब्रा पैंटी दोनों उतार कर नीचे फर्श पर गिरा दीं जिसे सुमेश जी ने देख लिया.

उस वक्त मैं ब्लैंकेट के अन्दर पूरी नंगी हो गई थी और ये चीज सुमेश भांप चुके थे.सुमेश भी ब्लैंकेट के अन्दर आ गए और मेरे साथ लेट गए.

मैंने दूसरी साइड अपनी पीठ की हुई थी, जिसकी वजह से मेरी पीठ सुमेश जी की छाती पर रगड़ रही थी.सुमेश जी धीरे से मेरे पास को सरक आए और उन्होंने मुझे पीछे से कस कर अपने बदन से चिपका लिया.

सुमेश जी अब मेरे से पूरी तरह लिपट चुके थे और मैं उनके साथ.मैं ब्लैंकेट के अन्दर नंगी थी तो सुमेश जी का एक हाथ मेरे पेट पर आ गया था.

मैं सोने की कोशिश कर रही थी पर सुमेश जी का खड़ा हुआ लंड मुझे मेरी गांड की दरार में चुभ रहा था जो मुझे साफ महसूस हो रहा था.मुझे पता था कि सुमेश का मुझे चोदने का मन हो रहा है पर मैं फिलहाल कंट्रोल करना चाहती थी.

हमें साथ में लेटे हुए लगभग 10-15 मिनट हो चुके थे और सुमेश जी का खड़ा लंड अभी भी मुझे टच हो रहा था.उसकी वजह से मुझे नींद नहीं आ रही थी.

कुछ पल बाद सुमेश जी मुझसे थोड़े से अलग हो गए तो मुझे लगा कि चलो शुक्र है.सुमेश जी का मूड शांत हो गया.

पर मैं गलत थी.सुमेश ने अपना हाथ ब्लैंकेट के अन्दर डाल कर अपनी फ्रेंची भी उतार दी और अब वे भी पूरे नंगे हो गए.वे फिर से मुझसे एकदम चिपक कर लेट गए.

उनका लंड अब बिना चड्डी के था तो मेरी नंगी गांड की दरार में घुसता हुआ महसूस होने लगा था.लंड का चिपचिपा पानी मेरी गांड के छेद को भी गीला कर रहा था.

पहले तो सुमेश अपना लंड अंडरवियर के अन्दर से मेरी गांड की दरार में रगड़ रहे थे परन्तु मेरी टांगों ने लौड़े को लिफ्ट दी तो अब मुझे मेरी चुत पर सुमेश के खड़े लंड का अहसास होने लगा था.वे भी अब मेरी चुत की फांक में अपना लंड रगड़ने लगे थे.उनके सुपारे की गर्मी चुत पर पाकर मुझे अपने चेहरे पर स्माइल आ रही थी.

पर ये स्माइल सुमेश जी नहीं देख पा रहे थे.

अब मेरा भी मन नहीं माना और मैंने सोचा कि अब इस तरह से सुमेश जी को परेशान करना ठीक नहीं है.मैं एकदम से मुड़ी और सुमेश जी के ऊपर आकर लेट गई.

मैंने सुमेश जी की आंखों में आंखें डाल कर सुमेश जी को एक प्यारी सी स्माइल दी और उनके माथे को चूमा.

फिर धीरे से उनके होंठों से अपने होंठों को मिला प्रिया.साथ ही मैंने अपने एक हाथ में सुमेश का लंड पकड़ लिया और उनके लंड के टोपे को उसकी खाल से बाहर निकाल कर मेरी गीली चुत के छेद पर रख लिया.

मैं धीरे से सुमेश के लंड पर बैठती चली गई.सुमेश का लंड भी मेरी चुत की फांक को खोलता हुआ मेरी चुत के अन्दर पूरी तरह समा गया.

हम दोनों एक दूसरे को किस कर रहे थे.

मैंने उन्हें किस करते करते ही उनके सख्त लंड पर उछलना शुरू कर प्रिया.मैं सुमेश जी के लौड़े पर बैठ कर उछल उछल कर चुदाई के मजे लेने लगी.

‘आह सुमेश जी आह आह …’मेरे मुँह से चुदाई की सिसकारियां निकल रही थीं.

मुझे सुमेश जी से चुदने में बहुत मजा आ रहा था.सुमेश जी का लंड रोहण के लंड से काफ़ी बड़ा और मोटा है.

मेरी हमेशा से इच्छा थी कि मेरे पति का लंड मोटा हो, जो कि आज पूरी हो रही थी.मैंने अब अपनी सारी शर्म उतार कर फेंक दी थी और हम दोनों के ऊपर से ब्लैंकेट भी हटा प्रिया था क्योंकि हम दोनों के बदन की गर्मी से मैं बहुत ज़्यादा गर्म हो गई थी.

अब सुमेश जी मुझे नंगी देख पा रहे थे.

मैंने भी अब पूरी बेशर्मी दिखाती हुई सुमेश जी की आंखों में आंखें डाल दीं और अपनी प्यारी सी मुस्कान देती हुई जोरदार तरीके से सुमेश जी के लंड पर उछलने लगी.

मैं लौड़े की घुसवारी करती हुई सुमेश जी को मजा देने लगी और आहें भरने लगी- आह सुमेश जी आह कितना मस्त मजा दे रहे हो आप!मेरे मुँह से कामुकता से भरे शब्द निकल रहे थे जो सुमेश जी के अन्दर भी जोश भर रहे थे.

सुमेश जी के अन्दर एकदम से जोश की आग जली और उन्होंने खेल को थोड़ा बदल प्रिया.अब वे मेरी कमर पर अपने दोनों हाथ रख कर मुझे और जोरदार तरीके से चोदने लगे.

मुझे भी इस दर्दनाक मीठी चुदाई का मजा आ रहा था.सुमेश जी ने मेरे एक बूब्स को अपने हाथ में ले लिया था और अपने लंड के झटके मेरी चुत के अन्दर दमदार तरीके से पेल रहे थे.

मेरी चुत की कलियां पूरी तरह से सुमेश जी के लंड के झटकों से खुल झुकी थी.

मैंने भी अपने बालों में लगा क्लचर खोल प्रिया और अपने बाल खोल कर सुमेश जी के लौड़े से चुदाई का मजा लेने लगी.मैं खुद भी अपनी कमर को उछालने लगी.

हालांकि अभी तक मैं बहुत से लौड़ों से चुद चुकी हूँ, पर सुमेश जी के लंड का अहसास कुछ अलग ही था.मुझे सुमेश जी से चुदते हुए लगभग आधा घंटा हो चुका था और मैं सुमेश जी के लंड पर झड़ने के लिए तैयार थी.

मैं चुदाई की उत्तेजना से जोश में आ गई थी और सुमेश जी के लंड पर जोरदार झटके देती हुई उछलने लगी.मैं आहें भरती हुई ‘आह आह आह सुमेश सुमेश बेबी आह चोदो मुझे … आह सुमेश और अच्छे से चोदिये प्लीज आह सुमेश…’ करती हुई मैं सुमेश जी के लंड पर झड़ने लगी.

चुत झड़ गई तो मैं थक कर सुमेश जी के लंड पर ही लटक गई.अब सुमेश जी के झड़ने की बारी थी.

सुमेश जी ने मेरी कमर पर अपने हाथ रखे और मुझे अपने लंड पर उछालना शुरू कर प्रिया.मैं फिर से उत्तेजित होकर आहें भरने लगी ‘आह सुमेश आह आअह्ह्ह …’

उनके झटके मेरी चुत में सटासट चल रहे थे और लगभग एक मिनट और ऐसे ही चोदने के बाद सुमेश जी ने मेरी चुत को अपने अमृत से भर प्रिया.

उनका सफेद अमृत मेरी चुत से बहता हुआ बाहर आ रहा था.मेरी दमदार चुदाई हो गई थी और मेरा मूड एकदम फ्रेश हो गया था.

मैंने ख़ुशी से सुमेश जी के माथे को चूमा और उन्हें आई लव यू बोला.सुमेश जी ने भी मुझे आई लव यू टू बोला.

सुमेश जी का लंड मेरी चुत के अन्दर ही था.मेरी चुदाई लगभग 40-45 मिनट तक हुई थी.मैं थक कर सुमेश जी के ऊपर ही लेटी हुई थी.

तभी एकदम से रोहण जी का फ़ोन आ गया.

मैंने सुमेश जी से एकदम चुप रहने के लिए कहा और रोहण का फ़ोन उठाया ‘हैलो.’रोहण- कैसी हो बेबी तुम?मैं- मैं ठीक हूँ रोहण, आप कैसे हो!रोहण- मैं तो ठीक हूँ, तुम बताओ शादी कैसी हुई?

मैं- शादी ठीक हुई बस अभी यहीं दीपा के घर पर हूँ. रोहण मैं सोच रही हूँ कि एक दो दिन रुक कर आउंगी.मैंने रोहण से झूठ बोला.

रोहण- हां बेबी, कोई दिक्कत नहीं है, आप आराम से रुको और एन्जॉय करो.मैं- रोहण, मुझे आपकी बहुत याद आ रही है चार दिन हो गए हैं और मैं आपसे चुदी नहीं हूँ .. मन नहीं लग रहा बिल्कुल भी!

मेरी ये बात सुन कर सुमेश मुस्कुराते हुए मुझे देखने लगे कि कितनी सफाई से मैं अपने पति से झूठ बोल रही हूँ.

रोहण बोले- अंजलि, तुम फ़िक्र मत करो, तुम दुबई आओ … फिर मैं तुम्हारी मस्त चुदाई करता हूँ … इस बार अच्छे से दमदार तरीके से चोदूंगा.मैंने कहा- ठीक है, रोहण मैं जल्दी आती हूँ और आपसे बाद में बात करती हूँ. फिलहाल मैं फोन रखती हूँ … आंटी जी बुला रही हैं.रोहण बोले- ठीक है बेबी तुम जाओ.

फिर मैंने रोहण का फ़ोन कट कर प्रिया और मुस्कुराने लगी.

सुमेश बोले- वाह अंजलि, तुमने तो सारी बात संभाल ली और रोहण को शक भी नहीं हुआ!मैंने कहा- हां बात तो संभालनी ही थी आपके लिए … आपके साथ जो टाइम बिताना है. मुझे कुछ दिन अपने नये पति से चुदना भी तो है!सुमेश जी बोले- हां बात तो सही है.

मैंने सुमेश जी से कहा- अब तो आप खुश हो … कर ली आपने अपनी बीवी की चुदाई? अब बीवी को सोने दोगे आप या नहीं?सुमेश मेरे दूध मसलते हुए बोले- मन तो नहीं है, पर हां अभी आप सो जाओ अंजलि.

मैंने स्माइल के साथ सुमेश जी का माथा फिर एक बार चूमा और उन्हें तसल्ली दिलाती हुई बोली- आप फ़िक्र पर मत करो, आपकी बीवी आपके पास ही है. जी भर के चोद लेना आप मुझे … कोई जल्दबाज़ी नहीं है!ऐसा बोल कर मैं सुमेश जी के सीने पर अपना सर रख कर सो गई.

दोस्तो, सेक्स कहानी के अगले भाग में मैं अपनी हनीमून इन गोवा का मजा कहानी के सम्पूर्ण वृतांत को मस्ती से लिखूँगी.आप अपने मेल व कमेंट्स जरूर भेजेंsupport@mohakkisse.com

हनीमून इन गोवा का मजा का अगला भाग:गोवा में गैर-मर्द संग मस्त हनीमून- 3

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गोवा में गैर-मर्द संग मस्त हनीमून

कुल भाग: 5
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