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शादी में मिले दो नए लंड- 3

लेखक: अंकिता सिंह 7 दिनांक: 15-05-2021 पठन समय: 19 मिनट

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हाय फ्रेंड्स! मैं आपकी प्यारी फ्रेंड कपिला, फिर से हाजिर हूँ अपनी कहानी लेकर!

कहानी के दूसरे भागमैं सहेली के बॉयफ्रेंड से चुद गयीमें आपने देखा कि कैसे हर्ष ने मुझे और रमेश ने मीनू की चूत मारी।

घर में शादी का माहौल था। शादी घर से दूर, शहर में एक होटल में थी।सारे मेहमान एक दिन पहले ही पहुँच गए थे और दूसरे दिन बारात को आना था।

मीनू ने बताया कि हर्ष और रमेश भी शादी में आने वाले हैं।मीनू ने उन्हें इनवाइट किया था।

शादी का दिन आ गया।सभी लोग शादी में बिजी थे।

मैं और मीनू, हर्ष और रमेश के साथ मस्ती-मजाक कर रहे थे।

वो दोनों हमें देखकर खुश हो गए।रमेश पास आकर बोला, “एक फेयरवेल चुदाई हो ही जाए!”मैंने भी हामी भर दी.

पर कोई रिस्क नहीं लेना चाहती थी।मीनू बोली, “नहीं, शादी का समय है। किसी ने देख लिया तो गड़बड़ हो जाएगी!”

हर्ष बोला, “कपिला, तुम तो अब चली ही जाओगी। फिर पता नहीं कब मिलोगी! मीनू तो यहीं रहेगी। और आज तुम कयामत लग रही हो इस लहंगे-चोली में!”

मेरी लहंगा-चोली पर ढेर सारा वर्क था।वो मेरे बदन पर बहुत अच्छी लग रही थी।मैंने थोड़ा डीप नेक चोली पहनी थी लाल रंग की।

चोली छोटी थी, और अगर मैं थोड़ा झुकूँ तो मेरे बूब्स का क्लीवेज आसानी से दिख जाए!

मैं अपने मम्मी-पापा के साथ स्टेज पर फोटो खिंचवाने गई।

तभी मैंने देखा कि मीनू, हर्ष और रमेश कुछ बात कर रहे थे।

रमेश बोला, “मीनू, प्लीज कोई जुगाड़ करो ना!”मीनू बोली, “ठीक है। अभी सब मेहमान चले जाएँगे। कुछ शादी में रहेंगे, कुछ सो जाएँगे। बस वही समय मिलेगा। विदाई और फेरों के बीच का समय!”रमेश बोला, “ठीक है!”

करीब दो घंटे बाद मीनू के पास रमेश का फोन आया।मीनू बोली, “तुम होटल के बाहर मिलो, हम वहीं आ रहे हैं!”

रात के करीब 2 बज रहे थे।हम बाहर मिले।

रमेश बोला, “हुआ कोई जुगाड़?”मीनू बोली, “होटल में कमरे खाली हो गए हैं। किसी में भी जा सकते हैं!”

हर्ष बोला, “किसी ने देख लिया तो?”मीनू बोली, “एक-एक करके जाएँगे। मैं बाहर खड़े होकर देखूँगी कि कोई आ तो नहीं रहा!”

फिर होटल के फर्स्ट फ्लोर पर हम गए, जो स्टेज के ठीक पीछे था।वहाँ हमें कोई आसानी से नहीं देख सकता था।

पहले रमेश कमरे में चला गया।मीनू बोली, “कपिला, तू जा!”

मैंने कहा, “तू?”मीनू बोली, “कोई एक बाहर संभालने के लिए होना चाहिए!”

मीनू बोली, “बेस्ट ऑफ लक, कपिला!”मैंने कहा, “क्यों?”वो बोली, “पता चल जाएगा! अंदर तो जा!”

दरवाजे के पास पहुँची तो रमेश ने मुझे हाथ पकड़कर अंदर खींच लिया।मीनू ने बाहर से लॉक लगा प्रिया ताकि कोई दरवाजा न ठोके और गड़बड़ न हो।

अब मैं अकेली अंदर थी।हर्ष और मीनू बाहर थे।

लगता है, उस समय ये लोग यही प्लान बना रहे थे!

रमेश ने मेरी चिकनी कमर पर हाथ रखकर मुझे अपनी तरफ किया और बोला, “यार, आज तो तूने मुझे पागल कर प्रिया है! क्या लग रही है!”फिर उसने मेरे होंठों पर होंठ रख दिए और किस करने लगा!

वो मेरी कोमल गांड को दबा-दबाकर किस कर रहा था।

किस करते हुए रमेश बोला, “हल्के मेकअप के कारण तू और भी हॉट लग रही है!”

अब वो मेरे बूब्स को धीरे-धीरे दबाने लगा।उसने मेरी चोली को पीछे से खोलकर फेंक प्रिया और मेरे कबूतरों को आजाद कर प्रिया।

वह बोला, “कपिला, तुमने ब्रा नहीं पहनी?”मैंने कहा, “नहीं!”

उसने पूछा, “क्यों?”मैंने कहा, “एक तो गर्मी इतनी है, दूसरा बैकलेस चोली के कारण!”

अब रमेश ने पूरा नंगा होकर मेरे हाथ में अपना लंड दे प्रिया।वो मेरे बूब्स को अपने मुँह में लेकर एक बच्चे की तरह चूसने लगा।एक हाथ से बूब्स को मुँह में भरकर सक्शन करने लगा।

फिर उसने मेरी चूत में उंगली डालकर मेरे क्लिट को मसलना शुरू किया।

मेरे मुँह से मस्त सिसकारियाँ निकलने लगीं।मेरी चूत गीली हो चुकी थी।

उसने मुझे उठाकर बिस्तर पर गिरा प्रिया।वह मेरे बूब्स पर टूट पड़ा, जैसे नींबू को निचोड़कर पूरा रस निकालते हैं।कभी दाँत से काटता, कभी पूरा मुँह में लेने की कोशिश करता!

फिर धीरे-धीरे वो मेरी नाभि को चूसते हुए अपनी जीभ से मुझे चाटने लगा।

मेरे शरीर में सनसनी सी हो रही थी।

उसने मेरे घाघरे को ऊपर उठाकर मेरी चूत को पैंटी के ऊपर से ही चाटना शुरू कर प्रिया।मेरे हाथ उसके सिर को मेरी चूत की तरफ धकेल रहे थे।

उसने मेरी पैंटी को गीला कर प्रिया था।

फिर मैंने घाघरा खोलकर निकाल प्रिया।अब मैं सिर्फ पैंटी में थी।

उसने अपने लंड को मेरे मुँह के पास लाकर चूसने का इशारा किया।

मैंने मुँह में लिया तो वो मेरे मुँह को ही चोदने लगा।मैंने कहा, “धीरे, दर्द होता है!”

उसने कहा, “कपिला, आज का दिन तुम कभी नहीं भूलोगी! आज तुम्हारी अच्छे से लूँगा!”

कहते हुए उसने मुझे घुमा प्रिया, मेरी पैंटी को तुरंत निकालकर अलग किया।

मेरे दोनों पुट्ठों पर हाथ लगाकर सहलाने लगा।वह होंठ लगाकर चुम्मा ले रहा था।फिर मेरी गांड को अच्छे से ताड़ने लगा।

दोस्तो, आज तक किसी मर्द ने मेरी गांड नहीं चोदी थी।

अब रमेश का पारा चढ़ गया।जीभ लगाकर वह मेरी गांड का छेद चाटने लगा।मेरा छेद बहुत चिकना था।

रमेश तो देखकर ही पागल हो गया।

उसने मेरी गांड को ध्यान से देखा और बोला, “ये तो अभी कुँवारी है! सील तोड़ना पड़ेगी आज!”

मैं बोली, “नहीं!”मैंने कहा, “आज नहीं। सुबह घर जाना है। दर्द बहुत होगा। अगर पता चल गया तो गड़बड़ हो जाएगी। वैसे भी मुझे गांड में नहीं लेना!”इसलिए मैंने टाल प्रिया।

उसने कहा, “ठीक है, आज तो बच गई तुम्हारी गांड! अगली बार नहीं छोड़ूँगा, चाहे कुछ भी हो!”फिर उसने एक झटके में मेरी चूत में पूरा लंड घुसा प्रिया।

मेरे मुँह से चीख निकल गई, “आआआ उउउई ईईईई!”

वो मशीन की तरह शुरू हो गया।मुझ पर उसका पूरा वजन था।

फिर उसने मुझे घुमा प्रिया और दोनों टाँगों को फैलाकर सीधा लंड डाल प्रिया।वह मेरे बूब्स को जानवरों की तरह दबाता हुआ मुझे चोदता रहा।

तभी दरवाजा खोलने की आवाज आई।एक पल के लिए हम रुके।

देखा तो मीनू और हर्ष थे।

मीनू बोली, “सब सो गए हैं। बाकी फेरों में हैं। अभी यहाँ कोई नहीं आएगा!”

इधर रमेश मेरी चूत में धक्के दे रहा था।मीनू और हर्ष देखकर ही मजा लूट रहे थे।

रमेश जोर-जोर से धक्के देता, मेरे बूब्स जोर-जोर से हिलने लगते।मेरे मुँह से सिसकारियों की आवाज आ रही थी।

अब रमेश पूरी तरह मस्त हो चुका था।वो जोश में आकर धक्के देने लगा।

उसका लंड बहुत तेजी से अंदर-बाहर हो रहा था।

मेरे मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थीं।मैं भी धक्के खाकर बहुत मस्त हो चुकी थी।

मैं उछल-उछलकर चुद रही थी।इसी बीच मेरा पानी निकल गया।

मैं कुछ समय के लिए रुक गई।लेकिन वो नहीं रुका।गोली जो खाई थी!

रमेश थक गया, उसने हर्ष को इशारा किया।हर्ष पूरा नंगा होकर मुझे गर्म करने आया।

रमेश भी मेरी चूत में जीभ डालकर मुझे गर्म करने लगा।

हर्ष मेरे गले में किस करने लगा।मैं भी उसका साथ देते हुए उसके गले में किस करने लगी।

फिर उसने मेरे होंठों पर अपने होंठ रखकर चूसने लगा।

मैं भी उसका साथ देने लगी।

रमेश मेरी चूत को चाट रहा था।हर्ष का मुँह मेरे मुँह में था।

वो मेरे होंठ चूसने के साथ मेरे बूब्स दबा रहा था।

ऐसे ही 5 मिनट तक चूसता रहा।

फिर एक दूध को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा और दूसरे को हाथ में पकड़कर मसलने लगा।

मैं उसके सिर को सहलाती हुई अपने बूब्स चुसवा रही थी।

अब मैं गर्म हो चुकी थी।अपने चूतड़ों को आगे-पीछे कर रही थी।

रमेश समझ गया कि मैं तैयार हूँ।

उसने हर्ष को इशारा किया।हर्ष हट गया।

रमेश ने मुझसे कहा, “तैयार हो दूसरे राउंड के लिए?”मैंने हाँ में इशारा किया।

उसने तुरंत अपने खड़े लंड को एक झटके में सीधे अंदर डाल प्रिया, मुझे उठाकर अपनी गोद में बैठा लिया।

फिर धीरे-धीरे वो नीचे और मैं ऊपर आ गई।

अब मैं उठक-बैठक कर चुद रही थी।वो मेरे बूब्स से खेल रहा था।

फिर मैं मदहोश होकर उसकी छाती से चिपक गई।वो मुझे चोदे जा रहा था।

उसके दोनों हाथ मेरी गांड को दबा रहे थे।वो फिर चाँटे मारने लगा।मैं भी मस्त हो चुकी थी।

मेरी कमर को पकड़कर तेजी से धक्के लगाने शुरू कर दिए।लंड तेजी से अंदर-बाहर होने लगा।

मैं पूरी तरह मस्त हो चुकी थी।

रमेश बहुत तेजी से अपने लंड को मेरी चूत में अंदर-बाहर कर मुझे चोद रहा था।मैं अब झड़ने वाली थी।और फिर मैं झड़ गई।

रमेश बोला, “मेरा भी अब निकलने वाला है!”उसने अपने लंड को निकालकर मेरे सामने कर प्रिया, कहा, “मुँह में लो!”मैंने मना कर प्रिया।

उसने जबरदस्ती मेरे मुँह में लंड डाल प्रिया और सारा मेरे मुँह के अंदर निकाल प्रिया।मुझे गंदा स्वाद आया, मैंने सब बाहर निकाल प्रिया, जो मेरे मुँह से होते हुए मेरे बूब्स और नाभि तक आ गया।

फिर मैं वही उसी हालत में लेट गई क्योंकि काफी थक चुकी थी।

रमेश बोला, “आज तो मजा ही आ गया, कपिला!”हर्ष बोला, “मैं अभी बाकी हूँ!”

मैं घबरा गई, बोली, “नहीं, मेरी हालत नहीं है अब और चुदने की!”हर्ष बोला, “ये गलत है! रमेश ने पूरे मजे लिए, मैं रह गया! नहीं, मैं भी पूरे मजे लूँगा!”

उसने कहा, “मैंने गोली नहीं ली है। बस एक राउंड, प्लीज!”मैंने कहा, “नहीं, मेरी हालत समझो। तुम मीनू के साथ कर लो!”

हर्ष बोला, “सारी प्लानिंग तुम्हारे लिए की थी। मीनू के साथ करना होता तो कब का कर लिया होता। तुम मुझे बाद में नहीं मिलोगी!”

मैंने कहा, “अगर मेरा पानी निकल गया तो दोबारा तुम नहीं करोगे, चाहे कुछ भी हो जाए। तुम झड़ो या न झड़ो, फिर…”वो थोड़ा गुस्से में बोला, “ठीक है!”

वो खड़े लंड के साथ एक तरफ बैठ गया और मुझे आराम करने का मौक़ा प्रिया.

करीब आधे घंटे बाद हर्ष ने मुझे उठाया और बोला, “उठो कपिला, बाथरूम चलो!”

वह मुझे गोद में उठाकर बाथरूम में ले गया, शावर चालू कर प्रिया और मुझे साफ किया, साबुन लगाया, पूरे बदन में अच्छे से।

नहाने के बाद वह फिर गोद में उठाकर लाया और शुरू हो गया।मैंने कहा, “मेरे पूरे बाल गीले हैं, सुखाने दो!”मैंने बाल सुखाए।

मैंने कहा, “ठीक है, आओ अब। जल्दी करो!”

वो एक जंगली जानवर की तरह मुझ पर टूट पड़ा।

उसने मुझे सबसे पहले अपना लंड दे प्रिया चूसने के लिए।

मैं भी लंड को अच्छे से चूस रही थी।फिर हम दोनों पलंग पर आ गए।

हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गए।

उसके मुँह में मेरी चूत की फांकें रस छोड़ रही थीं।

मेरे मुँह में उसका लंड अपनी कबड्डी खेल रहा था।

हम दोनों लंड-चूत चुसाई का पूरा मजा लेने लगे।

कोई पाँच मिनट तक हमने 69 का मजा लिया।

वो जानबूझकर मेरे मुँह को चूत की तरह मार रहा था, जिससे मुझे दर्द हो रहा था और साँस लेने में तकलीफ होने लगी।फिर उसने लंड को मेरी चूत में सेट किया और पूरी ताकत से अंदर डाला।

मेरे मुँह से “उईईई… आआह्ह!” निकल गया।

वो मेरे बूब्स को दबाता हुआ लंड के धक्के मार रहा था।मैंने अपनी दोनों टाँगों को उसकी कमर में लपेट लिया था और उसकी पीठ को पकड़ लिया था।

कुछ देर इसी तरह चुदने के बाद उसने मुझे घुमा प्रिया, मेरी गर्दन को दबाते हुए और गांड पर थप्पड़ मारते हुए बोला, “ऊपर कर इसे!”

मैंने अपनी गांड को थोड़ा ऊपर किया।वो मेरी गांड पर हाथ से पूरा वजन देते हुए चूत को चोदे जा रहा था और मेरी गांड में थप्पड़ भी मारता।

अचानक उसने अपना लंड चूत से बाहर निकालकर मेरी गांड के छेद पर रख प्रिया और हल्का सा धक्का दे प्रिया।

मैं दर्द की वजह से जल्दी से पीछे हट गई।मैंने कहा, “नहीं, यहाँ नहीं! यहाँ मुझे बहुत दर्द होगा। बस चूत में ही डालो!”

मीनू भी बोली, “मत करो, प्रॉब्लम हो जाएगी। कल घर भी जाना है, समझो!”हर्ष बोला, “गलती से हुआ!”

मेरी आँखों में आँसू आ चुके थे।फिर हर्ष शांत होते हुए मुझे किस करते हुए गले लगाया और बोला, “मुझे माफ कर दो, कपिला। मैं अब आराम से करूँगा!”

तभी रमेश बोला, “गांड का मजा नहीं ले पाए आज। उसी का मन था!”मीनू बोली, “स्वार्थी कहीं के … तुम अपना ही देखो, हमारा मत सोचो!”

रमेश बोला, “तुम तो मरवा ही सकती हो!”मीनू बोली, “सोचना भी मत कभी!”

फिर हर्ष ने मेरी पोजीशन बदल दी, मुझे करवट लेने को कहा।

मेरी एक टाँग अपनी कमर में रख ली और दूसरी के ऊपर बैठकर लंड मेरी चूत में डालना शुरू किया।मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।धीरे-धीरे मजा आ रहा था।

मैं आँखें बंद कर खुद ही अपने बूब्स दबा रही थी और आनंद ले रही थी।

फिर हर्ष ने मुझे कहा, “अब सीधी हो जाओ!”मैं सीधी हुई तो उसने मुझे पलंग के किनारे टाँगों से घसीटा।मेरे दोनों पैर नीचे लटकने लगे।

उसने एक पैर अपने कंधे पर रखा और फिर शुरू हो गया।

मैं अब मुँह से हल्की-हल्की आवाज में “ऊईऊऊ… अह अह अह… आआआ… उई उई उई… हु हु हु…” की सिसकारियाँ लेने लगी।मुझे बहुत मजा आ रहा था।

मैंने उससे कहा, “मैं अब झड़ने वाली हूँ!”उसने तुरंत अपनी स्पीड बढ़ा दी।

कुछ सेकंड में मैं झड़ चुकी थी।वो मुझे चोदे जा रहा था।

मैं थक चुकी थी और उसका साथ नहीं दे रही थी।वो समझ गया कि अब मैं साथ नहीं दूँगी।

फिर मुझे छोड़कर वो मीनू के पास जाकर खड़ा हुआ।

मीनू अपने कपड़े उतारने लगी।उसने उसे पलंग पर धक्का प्रिया और घाघरे को ऊपर उठाकर पैंटी को खींचकर खिसका प्रिया।फिर लंड से जोरदार धक्का प्रिया मीनू की चूत में।

मीनू “आआ आआऐ ययईईई ईई!” करते हुए बोली, “धीरे-धीरे करो!”पर हर्ष कहाँ मानने वाला था! उधर रमेश का लंड फिर से खड़ा हो गया था।

वो इंतजार में ही था।

मैं तुरंत उठकर बाथरूम में गई।लेकिन वो मेरे पीछे-पीछे अंदर आ गया और मुझसे लिपट गया।

मैंने उसे धक्का देते हुए कहा, “दूर हटो! मुझसे अब नहीं होगा!”और धक्के मारकर उसे बाहर किया।

दरवाजा अंदर से बंद कर मैं नहाई और बाहर निकलकर अपने कपड़े पहन लिए।

बाहर का नजारा देखा तो मीनू के मुँह में रमेश लंड दे रहा था।हर्ष का पानी निकल चुका था।

वो भी बाथरूम में गया और बाहर आकर कपड़े पहनकर मेरे साथ बैठ गया।

रमेश मीनू के स्तनों को ड्रेस के ऊपर से स्पर्श करने लगा और दबाने लगा।थोड़ी देर बाद रमेश ने मीनू से ड्रेस निकालने को कहा।

मीनू ने ड्रेस निकाल दी।पैंटी को भी उतार प्रिया।ब्रा उसने भी नहीं पहनी थी।

अब वो मीनू की गीली चूत पर अपना लंड रगड़ने लगा और पूरी ताकत से लंड घुसा प्रिया।मीनू सीधी लेटी थी।रमेश उसके ऊपर था।मीनू ने अपनी टाँगों से रमेश की कमर को लपेट लिया था।

कुछ देर बाद रमेश नीचे आ गया और मीनू को ऊपर कर प्रिया।

मीनू अब रमेश के ऊपर थी।

देखने में यह दृश्य बहुत सेक्सी था।

मीनू के मम्मे रमेश के हाथ में झूल रहे थे।उसके लंबे बाल उसकी गांड को छूते हुए जाँघों को टच कर रहे थे।

मीनू लंड की सवारी करते हुए जूड़ा बनाया।

उसके बड़े-बड़े मम्मे हवा में झूल रहे थे।उसकी चौड़ी गांड जाँघों से चिपकी पड़ी थी।मजा ही आ गया देखकर!

उन दोनों की धकापेल चुदाई चल रही थी।

यह देखकर हर्ष का हाथ अपने लंड पर था।

उसका लंड खड़ा हो चुका था।वो पूरा नंगा हो गया।

उसने मेरी तरफ देखा।

मैं कुछ कह पाती, इतनी देर में उसने मुझे मीनू के पास पलंग पर धक्का प्रिया और मेरे घाघरे को ऊपर उठाकर मेरी चूत में सीधे लंड डाल प्रिया।

मैं एक बार चीखी, मगर लंड ले लिया।एक तो उसका लंड कड़क था और सीधा खड़ा था।

उसका लंड चूत की फांकों में कसता हुआ अंदर जा रहा था।धीरे-धीरे मेरी चूत ने उसका पूरा लंड निगल लिया।मैं “आह आह ओह” करने लगी।

अब मैं इतनी बार झड़ चुकी थी कि मुझे कुछ खास नहीं लग रहा था।

हम दोनों बहनें साथ में चुद रही थीं।

हर्ष ने मेरी चोली खोल दी, लेकिन मुझ पर से हटाई नहीं।वह मेरी चूचियों से खेल रहा था।वो उन्हें चूस रहा था, मसल रहा था।

उधर अब रमेश का निकलने वाला था; वो जोर-जोर से धक्के लगा रहा था।मीनू कुतिया बनी हुई थी।मीनू ने मेरे सामने ही पानी निकाल प्रिया।

अब रमेश की बारी थी।उसने मीनू की पीठ पर सारा वीर्य निकाला और उसी के ऊपर लेट गया।

इधर हर्ष मेरी चूत में लंड दे रहा था।

उसने अपनी लंबी जीभ मेरे मुँह में डाल दी।इस तरह हम दोनों एक-दूसरे की जीभ चूसने लगे।

मैं चुदासी और मदमस्त हो गई।“उफ्फ्फ… ये मुझे क्या हो रहा है!”मैं गर्म होने लगी थी।

इसी तरह करीब 10 मिनट चुदाई के बाद हम दोनों का पानी निकल गया।

उसने अपना पानी मेरी जाँघों पर निकाल प्रिया।

फिर मैंने घाघरा निकालकर बाथरूम गई और अपने आप को साफ कर बाहर आई।

फिर मीनू गई.मैं कपड़े पहनकर वहीं लेट गई।मुझे बहुत थकान हो गई थी।मीनू भी मेरे पास आकर लेट गई।

फिर हमने दोनों को बाहर किया और दरवाजा बंद कर सोने लगे।करीब 5 बज रहे थे।

सुबह 8 बजे हम उठी, दोनों बाहर गई तो विदाई हो चुकी थी।

अब हमने घर के लिए निकलना था।

थोड़ी देर में तैयार होकर मैं घर के लिए निकल गई।सफर में भी मैं सोई रही।

घर आकर कुछ खा-पीकर फिर सो गई।दूसरे दिन नींद पूरी हुई।

तो दोस्तो, यह थी मेरी एक और शादी में चुदाई की कहानी।