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पहली बार चुदाई पठन समय: 14 मिनट पढ़ा गया: 543 बार

वो चौदह दिन- 5

राजीव खन्‍ना

19 Apr 2020 को प्रकाशित

वो चौदह दिन- 5
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हॉट बॉय मसाज़ स्टोरी में मेरी तबियत खराब हुई तो मेरे बेटे का दोस्त मेरी तीमारदारी करने लगा. वह मेरे जिस्म को ललचाई नजर से देख रहा था. उसका लंड खड़ा हो गया था.

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कहानी का पिछला भाग:मेरे पति की गर्लफ्रेंड दो लंड से चुदी

अब आगे हॉट बॉय मसाज़ स्टोरी:

नैना भाभी के जाने के बाद मैं दवाई लेकर फिर से सो गई।

दोपहर को करीब 2 बजे मेरे घर की घंटी बजी।मैंने उठकर खिड़की से बाहर देखा तो बाहर गौरव खड़ा था।वो शायद मेरे लिए लंच लाया था।

मैंने दरवाजा खोला.मुझे “आंटी नमस्ते” बोलकर गौरव अंदर आ गया।वो मेरे लिए खाना लाया था।

टिफिन वहीं रखकर वो किचन में गया, बर्तन लाकर उसने मेरे लिए वहीं खाना लगा दिया।मैंने गौरव को बोला, “अभी खाना खाने का मन नहीं है। मेरे सिर में बहुत दर्द है। मेरा बदन टूट रहा है। तू सब यहीं रख दे। मैं खाना बाद में खा लूंगी।”गौरव ने कहा, “आंटी मम्मी ने बोला है कि शशि आंटी का ख्याल रखना है, और उनको खाना अपने सामने खिला कर आना है। अगर आपके सर में दर्द है तो मैं आपका सर दबा देता हूं।”

इतना कहकर गौरव मेरे बराबर में आकर खड़ा हो गया और मेरा सर दबाने लगा।मैं सोचने लगी कि अब गौरव को यहां से कैसे भगाया जाए।

मैंने उसको हटाते हुए कहा, “चल मैं खाना खा लेती हूं।”मैं खाना खाने बैठ गई।

अभी मैंने आधी रोटी ही खाई थी कि अचानक मुझे उल्टी आ गई.जो खाया था वो सब भी निकल गया, साथ ही सारा फर्श भी खराब हो गया।

मेरी हालत देखकर गौरव तुरंत मेरे लिए पानी लेकर आया।मैंने गौरव के हाथ से पानी लिया और उठकर वॉश बेसिन में कुल्ला करने जाने लगी.पर मेरे शरीर में इतनी भी जान नहीं थी कि मैं खुद से उठकर वॉश बेसिन तक जा सकूं।

गौरव ने मुझे पकड़ कर उठाया और मेरी बगल से मुझे पकड़ कर धीरे-धीरे वाश बेसिन तक ले गया।वाश बेसिन पर जाकर मैंने कुल्ला किया और वहीं पास रखी कुर्सी पर ही बैठ गई।

तब तक गौरव ने पोछा लगाकर उल्टी वाली पूरी जगह साफ कर दी।मैंने गौरव को कहा, “मेरी अलमारी में से मेरे कपड़े ला दे तो मैं अपने कपड़े भी बदल लूं।”क्योंकि मेरे कपड़ों पर भी उलटी गिर चुकी थी।

गौरव तुरंत उठकर मेरे कमरे में गया और मुझे अलमारी खुलने की आवाज आई.दो-तीन मिनट बीतने के बाद भी गौरव मेरे कपड़े लेकर बाहर नहीं आया तो मैं खुद ही अपने कपड़े लेने जाना उचित समझा।

मैं जैसे ही अपने कमरे के दरवाजे पर पहुंचे तो मैंने देखा गौरव अभी तक मेरी एक अलमारी में कपड़े टटोल रहा था।

मैंने गौरव को पूछा’ “क्या हुआ? मेरे कपड़े नहीं मिले।”गौरव बोला, “आंटी कपड़े तो बहुत सारे हैं पर मुझे यह नहीं पता कि आप अब क्या पहनोगी।”मैंने सामने पड़ी नाइटी की तरफ इशारा करते हुए कहा, “फिलहाल तो कहीं जाना नहीं है, यही दे दे, यही पहन लूंगी।”गौरव ने नाइटी उठाकर मुझे दे दी।

मैंने गौरव को बाहर जाने को कहा।मैंने कमरे का दरवाजा हल्के से लगाया और अपने कपड़े उतार कर नाइटी पहन ली।

नाइटी पहनकर मैं बाहर आ गई.मेरे बाहर आते ही गौरव फिर मेरे कमरे में गया और मेरे उतरे हुए कपड़ों को ले जाकर वॉशिंग मशीन में रख आया।

पहली बार मैंने महसूस किया की गौरव मेरे कपड़ों में बहुत इंटरेस्ट ले रहा है।मैंने गौरव को अपने पास बुलाया।“जी आंटी!” बोलकर गौरव मेरे पास आया।

जैसे ही गौरव मेरे सामने आकर खड़ा हुआ, मैंने महसूस किया की गौरव की पैन्ट के उसे हिस्से में तनाव था।पहली बार गौरव मुझे कोई ब.च्चा ना लग कर एक मर्द लग रहा था।यह हो सकता है शायद यह मेरी गलतफहमी थी।

पर मैंने गौरव को आजमाने का निर्णय किया।मैंने गौरव को कहा, “मेरे सिर में बहुत दर्द है। पूरा बदन दर्द कर रहा है। क्या तू मेरा बदन दबा देगा?”उसने कहा, “हां जी आंटी, आप लेट जाओ।”

मैं वहीं सोफे पर औंधे मुंह लेट गई।मैंने जानबूझकर अपना मुंह गौरव की तरफ नहीं किया।

गौरव पीछे से मेरी टांगें दबाने लगा।इस तरह टांगें दबाने से मुझे बहुत आराम मिल रहा था बहुत अच्छा महसूस हो रहा था।मेरी पिंडलियों में होने वाला दर्द भी कम होने लगा था।

पिंडलियां दबाते दबाते अचानक गौरव के हाथ ऊपर मेरी जांघों तक पहुंच गए और अब वह मेरी जांघों को हल्के-हल्के दबा रहा था.या यूं कहूं कि वह मेरी जांघों को सहला रहा था।

गौरव के इस तरह मेरी जांघों को सहलाने से मुझे शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से बहुत आराम महसूस हो रहा था.पर मैं अभी भी समझ नहीं पा रही थी कि मुझे क्या करना चाहिए?

मैंने गौरव को कहा, “मेरी पीठ में भी बहुत दर्द है।”गौरव ने कहा, “हां जी आंटी, मैं दबाता हूं।”

और वो मेरी जांघें सहलाने के बाद धीरे-धीरे ऊपर की तरफ बढ़ा और मेरे चूतड़ दबाता हुआ मेरी पीठ पर आ गया वह मेरी पीठ भी धीरे-धीरे दबाने लगा।

जब गौरव मेरी पीठ दबा रहा था तो बार-बार उसके हाथ मेरी ब्रा के हुक पर जा रहे थे।फिर भी गौरव लगातार मेरी ब्रा के हुक के हिस्से में ही दबा रहा था।

मैं देखना चाहती थी कि गौरव किस हद तक जाता है।मैंने कहा, “1 मिनट रुक, मैं अभी आती हूं।”

मैं वहां से उठकर अपने कमरे में गई और अपनी ब्रा उतार दी ताकि मेरी पीठ दबाते समय गौरव को ब्रा का हुक परेशान ना करे।

मैं बाहर आई तो देखा गौरव वहां नहीं था।मैंने एक बार उसको इधर-उधर देखा शायद वह जा चुका था।मुझे अपनी सोच पर बहुत ग्लानि हो रही थी।

अभी मैं सोच ही रही थी कि मुझे अपने वॉशरूम में पानी की आवाज आई।तो मैं समझ गई कि गौरव वॉशरूम गया है।

मैं चुपचाप अपने सोफे पर पहले की तरह जाकर उल्टी लेट गई।और गौरव फिर से आकर मेरी पीठ दबाने लगा।

जैसे ही गौरव को महसूस हुआ कि मैंने ब्रा नहीं पहन रखी है उसके हाथ मेरी कमर के चारों तरफ चलने लगे।मैंने महसूस किया कि गौरव कमर के बीच में ना दबाकर बार-बार कमर के दोनों साइड में हाथ ले जाने की कोशिश कर रहा था या शायद कमर के बहाने मेरे बूब्स तक पहुंचने की कोशिश कर रहा था।

मैं हतप्रभ थी.जिसको मैं अभी तक ब.च्चा समझ रही थी, उसके छूने से भी मुझे कितना आनंद महसूस हो रहा था।

मैंने गौरव से कहा, “बस कर अब तू थक गया होगा।”गौरव बोला, “नहीं आंटी, आप कहो तो मैं आपकी मालिश कर दूं। आपको आराम मिलेगा तो आप जल्दी ठीक हो जाएंगी।”

मुझे गौरव का प्रस्ताव अच्छा लगा।मैंने गौरव को कहा, “ये ठीक है, तू अंदर से जाकर सरसों का तेल ले आ।”

गौरव तुरंत दौड़कर मेरे कमरे में गया और तेल कि शीशी ढूंढ कर ले आया।

मैंने भी अपने नाइट गाउन को घुटने से थोड़ा सा ऊपर उठाकर अपनी दोनों टांगें गौरव के हवाले कर दी।गौरव तेल लेकर मेरी दोनों टांगों पर रगड़ने लगा.

पहले तो उसका हाथ सिर्फ मेरे घुटनों तक ही चल रहा था।पर जब उसने देखा कि मेरी आंखें बंद है और मैं कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रही हूं तो उसने धीरे-धीरे अपने हाथ घुटने से थोड़ा ऊपर ले जाने शुरू किये।शायद उसको भी अपने हाथों से मेरी टांगें सहलाना अच्छा लग रहा था।

मैंने जानबूझकर अपनी नाईटी थोड़ा और ऊपर कर ली।जहां तक मेरी नाइटी चली गई, अब गौरव भी अपने हाथ बढ़ा कर वहां तक ले आया और तेल लगाकर मेरी टांगें सहलाने लगा।

राजीव को गए आज छठा दिन था और पहली बार ऐसा था कि 6 दिन के बाद कोई पुरुष मुझे छू रहा था।मैं हॉट बॉय मसाज़ से आनंद के सागर में गोते लगा रही थी।

फिर भी मैं कोई रिस्क नहीं लेना चाहती थी।

गौरव मेरे बिल्कुल बराबर में स्टूल पर बैठा था।मैंने जानबूझकर करवट बदलते हुए गौरव की पैन्ट के आगे के उसे भाग पर अपना हाथ अंजाने में टच किया।अरे यह क्या?मैंने महसूस किया गौरव तो पूरे तनाव में था।

तभी अचानक वहां से गौरव उठा और सीधे टॉयलेट की तरफ भागा।मैंने पूछा, “क्या हुआ?”तो बोला, “आंटी बस टॉयलेट होकर आ रहा हूं।”और वह सीधा टॉयलेट में घुस गया।

मैं उठकर गौरव के पीछे-पीछे टॉयलेट के दरवाजे पर गई।मुझे गौरव के पेशाब की कोई धार की आवाज़ नहीं आ रही थी।

जब मैंने कान लगाकर बहुत गौर से सुना तो गौरव के मुंह से “आह… आह…” की आवाज निकल रही थी।मैं समझ गई कि मेरा हाथ टच होने की वजह से गौरव खुद को रोक नहीं पाया और वह टॉयलेट में जाकर मुठ मार रहा है।

अब ये तो मेरी समझ में आ चुका था कि गौरव को बहुत आराम से सेट किया जा सकता है।पर कैसे?यह मैं नहीं समझ पा रही थी।

5 मिनट बाद गौरव बहुत थका थका सा टॉयलेट से बाहर आया।मैंने उसकी हंसी उड़ाते हुए पूछा, “टॉयलेट में इतनी थकान हो जाती है क्या?”गौरव ने कहा, “नहीं नहीं, बस पेट थोड़ा खराब है।”

मैंने पूछा, “मेरी और मालिश करेगा या नहीं?”गौरव ने कहा, “आंटी अगर आपको आराम मिल रहा है तो जरूर करूंगा।”मैंने बोला, “अभी तो मैं थोड़ा आराम करूंगी। तू एक काम कर, शाम को दुकान के बाद आ जाना। मेरे लिए डिनर भी ले आना और मेरी मालिश भी कर देना।”“ओ के आंटी.” बोलकर गौरव तुरंत वहां से चला गया।

अब मुझे एक उम्मीद की किरण दिखाई देने लगी।गौरव के जाते ही मैं तुरंत सोफे से उठी और अपने काम में जुट गई मैंने अपनी बगल के बाल साफ किये अपनी योनि भी साफ करके बिल्कुल चिकनी बनाई।अपनी एक दो सेक्सी नाइटी निकाल कर बाहर रख ली।अपने बेडरूम में भी अच्छा सा रूम फ्रेशनर लगा लिया।

मुझे बुखार भी बिल्कुल महसूस नहीं हो रहा था।शरीर में ताकत आ गई थी।

मैंने अपने लिए चाय बनाई और साथ में हल्का सा स्नेक्स लिया और शाम होने का इंतजार करने लगी।

समय काटे नहीं कट रहा था।मैं अपने कमरे में जाकर लेट गई।

थोड़ी देर में मुझे फिर से नींद आ गई.रात को 8 बजे मेरे घर की घंटी बजी।‘गौरव आ गया लगता है.’ सोचकर मैं तुरंत दरवाजे पर पहुंची।

बाहर देखा तो नैना भाभी खड़ी थी।वो मेरे लिए डिनर लेकर आई थी.“अरे भाभी, आपने क्यों कष्ट किया। अब मुझे ठीक महसूस हो रहा है।” मैंने कहा।उन्होंने जवाब दिया, “अभी तुम बिल्कुल ठीक नहीं हो, डॉक्टर ने 5 दिन आराम करने के लिए बोला है। तो तुम्हें आराम की जरूरत है।”

“पर डिनर तो आप गौरव के हाथ भी भेज सकती थी। आपको कष्ट करने की क्या जरूरत थी।” मैंने फिर से जवाब दिया।“अरे हां, दरअसल गौरव ही आने वाला था पर उसके पापा ने उसको रोक लिया दुकान पर काम थोड़ा ज्यादा है तो मैंने सोचा मैं ही आ जाती हूं। थोड़ी देर तुम्हारे साथ बैठूंगी। गप्पे मारुंगी, तो तुम्हारा मन भी बदल जाएगा। गौरव और उसके पापा आज रात को देर से ही घर आएंगे।”

मैं और नैना भाभी अंदर आ गए.पर मेरे तो अरमानों पर पानी ही फिर गया।लेकिन अब क्या हो सकता है।

मैंने अनमने मन से नैना भाभी के साथ बैठकर खाना खाया और इधर-उधर की बात करती रही।रात को 10 बजे नैना भाभी बोली, “काफी देर हो गई है। गौरव और उसके पापा आने वाले होंगे. अब मुझे चलना चाहिए।”

नैना के जाते ही मैंने अपने पति राजीव को कॉल लगाया।पहली घंटी पर राजीव ने मेरा कॉल उठा लिया।

मैं तो जैसे पूरी भरी बैठी थी मैंने आज दिन भर का घटनाक्रम विस्तारपूर्वक राजीव को बताया.वे मेरी बात सुनकर हंसते हुए बोले, “अरे पगली, मैंने तो तुझे पहले ही कहा था कि गौरव तेरे लिए सबसे सॉफ्ट टारगेट है। पर तू मानने को ही तैयार नहीं थी। अभी भी देर नहीं हुई है। गौरव को बुलाना तेरे लिए सबसे आसान भी है। अपनी तैयारी करके गौरव को सेट करने की कोशिश कर। बाहर इधर-उधर कोई दूसरा मर्द देखने से तो अच्छा गौरव ही है. और अब तो 6-7 दिन की बात रह गई है. फिर मैं भी आ ही जाऊंगा।

मैं आज बहुत खुश थी.मैंने राजीव से पिछली रात के बारे में फिर विस्तार से पूछा और आज का दिन कैसा रहा, यह भी पूछा।

राजीव ने फोन शालिनी को पकड़ा दिया.फिर मेरी बात शालिनी से हुई.

शालिनी ने बताया, “इसमें कोई शक नहीं कि हार्वी देखने में बहुत सुंदर और हैंडसम आदमी है। पर सेक्स के मामले में राजीव के आगे वह कहीं नहीं टिकता। राजीव काफी मजबूत और अच्छा खिलाड़ी है।”

मैं अपने पति की तारीफ सुनकर खुश तो हो गयी.पर मेरी नजरों में हार्वी भी एक बांका नौजवान था।

मैंने पूछा, “आज रात का क्या प्लान है तुम लोगों का?”तो शालिनी ने बताया, “हम लोग एक डिनर के लिए जा रहे हैं। जितने लोग इंडिया से आए हुए हैं। उन सबके लिए यहां एक ग्रुप डिनर प्लान किया गया है। तो आज वहां रात हम लोग वहीं रहेंगे और शायद देर तक ही वापस आएंगे।”मैंने कहा, “ठीक है जाओ तुम लोग, मैं भी आज रात सो जाती हूं। कोशिश करूंगी कल तुम्हें कोई नई न्यूज़ जरूर सुनाऊं।”हम दोनों ने एक दूसरे को बाय बोलकर फोन काट दिया।

मैं अपने बिस्तर में आ गई और सोने की कोशिश करने लगी।

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वो चौदह दिन

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