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जवान लड़की पठन समय: 16 मिनट पढ़ा गया: 865 बार

सेक्सी हॉट माल दिखने के चक्कर में चुत चुदवा ली- 2

शरद सक्सेना

10 Mar 2023 को प्रकाशित

सेक्सी हॉट माल दिखने के चक्कर में चुत चुदवा ली- 2
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हॉट कॉलेज गर्ल सेक्स स्टोरी में पढ़ें कि कैसे मैं अपने जिस्म के उभारों को निखारने के लिए डॉक्टर के पास गयी. उस डॉक्टर ने मेरा इलाज कैसे किया?

साथियो, मैं शरद अपनी सेक्स कहानी में आपको बता रहा था कि एक लड़की की चूचियों को बड़ा करने को लेकर परेशान थी. हॉट कॉलेज गर्ल सेक्स स्टोरी के पहले भागडॉक्टर ने मुझे नंगी कर प्रियामें आपने पढ़ा कि नंदिनी नाम की लड़की एक डॉक्टर के पास गई और उसने नंदिनी को नंगी करके उसकी चूचियों को मसल कर उसे गर्म कर प्रिया था.

कुछ देर बाद उसने नंदिनी को फ्री कर प्रिया और कुछ दिन तक रोज क्लिनिक में आने का कहा.

अब आगे आप नंदिनी की जुबान से सुनिए:

मैंने पूछा- डॉक्टर, क्या आना जरूरी है. अगर आप मुझे इलाज बता दें, तो मैं घर में ही कर लूं.डॉक्टर- अगर घर में इलाज करने के लिए होता … तो मैं आपको घर का इलाज बता देता.

मैंने सशंकित होते हुए पूछा- डॉक्टर हो तो जाएगा ना?‘हां बिल्कुल … और आप जब मेरी फीस देना, जब आपको रिजल्ट मिल जाए.’

डॉक्टर की बात से मैं संतुष्ट होकर वापिस घर आ गयी और शीशे के सामने खड़े होकर डॉक्टर के एक-एक स्पर्श का अनुभव करने लगी.

मैं किसी अजनबी के सामने पूर्ण नग्न थी और वो मेरे एक-एक अंग को अपना अधिकार समझकर अपने हाथ चला रहा था.

मेरी आंखों के सामने वही नजारा बार-बार घूम रहा था कि कैसे वो मेरे दोनों निप्पलों को अपनी उंगलियों से मसल रहा था, कैसे उसने मेरे गांड में उंगली डाल दी थी, कैसे वो मेरी चूत की फांकों को रगड़ रहा था.

यह कहानी लड़की के मुख से सुन के मजा लीजिये.

मैं फिर सोचने लगी कि काश मोहित कुछ ऐसा मेरे साथ करता, मैं अपना सब कुछ उस पर लुटाने के लिए तैयार बैठी थी, लेकिन वो संध्या पर फिदा था.

कोई बात नहीं … मैं भी अपनी चूचियों को ऐसा शेप दूंगी कि मोहित मेरे पीछे पागल रहेगा और फिर मैं अपनी मनमानी करूंगी.उठते-बैठते मैं बस यही एक बात सोच रही थी.

दूसरे दिन मैं फिर डॉक्टर के पास पहुंची.‘हाय डॉक्टर ..’ मैंने उसे विश किया.

मुझे देखते ही डॉक्टर उठा और उसने मुझे अपनी बांहों में भर लिया.

मुझे कोई ऐतराज नहीं था … क्योंकि मैं जानती थी कि जो मैं कर रही हूं, सिर्फ और सिर्फ मोहित को पाने के लिए कर रही हूं.

अगर सच कहूं कल का उसकी उंगलियों का मेरे जिस्म में उसका जो स्पर्श था, उस स्पर्श को मैं भुला नहीं पा रही थी.

थोड़ी देर बाद डॉक्टर मुझे अपने से अलग करता हुआ बोला- मिस नंदिनी, चलिए अपने कपड़े उतार दीजिए और उस शीशे के सामने खड़ी हो जाओ.मैंने झट से अपने कपड़े उतारे और शीशे के सामने खड़ी हो गयी. मेरे पीछे खड़ा होकर उसने मेरी कलाई को बांधकर ऊपर लटके एक हुक से बांध प्रिया.

मैंने पूछा- डॉक्टर ये क्या कर रहे हो?वो बोला- मिस नंदिनी, मुझ पर विश्वास रखिए.मैं चुप हो गई.

वो मेरे कान के पास अपने मुँह को लाकर बोला- मुझे आपके मम्मों की मालिश करनी है और मैंने अपनी सुविधा के लिए आपके हाथ बांधे हैं.फिर वो मेरी गर्दन को चूमते हुए नीचे को आया और उसने मेरे पीठ पर अपने चुंबन की बारिश कर दी.

चूमते-चूमते ही डॉक्टर नीचे कमर तक पहुंच चुका था. अब मेरे अन्दर एक झुरझुरी से पनपने लगी थी.फिर उसने पीछे से ही अपने दोनों हाथों से मेरे पेट को और नाभि को सहलाना शुरू कर प्रिया.

इससे मेरे पैरों में हल्की से कम्पन होना शुरू हो चुकी थी. डॉक्टर उसी तरह अभी भी मेरे पेट को सहलाते हुए मेरी कमर को चूम रहा था.मैं कंपकपाती आवाज में बोली- डॉक्टर …

पर उसने कुछ जैसे सुना ही नहीं, वो मेरी पीठ को चूमते हुए ऊपर की तरफ आने लगा.ऊपर बढ़ते हुए उसने मेरे पिलपिले मम्मों पर हाथ फेरना शुरू कर प्रिया.आह … कितना सुखद अनुभव था.

मेरे दांत मेरे होंठों को काट रहे थे. फिर वो डॉक्टर मेरे चिरौंजी जैसे निप्पलों को अंगूठे से मसलने लगा.वो मेरे पीछे खड़ा होकर कभी मेरे मम्मों को मसलता तो कभी दानों को मींजने लगता.

इसी के साथ ही वो मेरे कान की लौ को भी काट लेता और मेरी गर्दन पर चुम्बन कर देता.मेरे चूतड़ों पर उसका दबाव पड़ने लगा. आप चूतड़ों को गांड कह सकते हो … लेकिन मैं चूतड़ ही कहूंगी. क्योंकि चूत और चूतड़ मिलते जुलते नाम हैं.

हां तो मेरे चूतड़ों पर उसका दबाव बनने लगा था.मैंने ध्यान प्रिया तो उसका लंड रगड़ खा रहा था.

लंड के स्पर्श से मेरी चूत ऐसे फड़क उठी थी. मानो मेरी चूत के अन्दर हजारों चींटियां चल रही हैं और अन्दर ही अन्दर काट रही हों.

मैंने अपनी आंखें खोलीं और सामने शीशे में देखा. मेरी आंखें लाल लाल हो रही थीं. मेरा जिस्म फड़क रहा था और मेरे चूतड़ अब खुद ही उसके लंड पर रगड़ने के लिए बेताब हो उठे थे.

लेकिन डॉक्टर ने तो कपड़े पहने हुए थे.हम्म … तो लंड उसके पैन्ट के अन्दर ही तनतनाया हुआ था.

वो बहुत तेज-तेज मेरे मम्मों को मसल रहा था.मैं सरसराई- उई डॉक्टर … धीरे से करो न … दर्द हो रहा है.

फिर क्या था. डॉक्टर मेरे आगे आया और अपने घुटने को जमीन पर टिकाकर खड़ा हो गया. उसने मेरी कमर को पकड़ लिया और मेरी नाभि पर अपनी जीभ फिराने लगा.वो मेरे पेट को चाटने लगा.

डॉक्टर कुछ देर ऐसे ही करता रहा और फिर मेरे पिलपिले मम्मों को बारी-बारी अपने मुँह में भर कर चूसता रहा.अभी भी वो मेरी कमर को पकड़े रहा.

मेरी जिन्दगी में पहली बार किसी मर्द ने मेरे जिस्म को इस तरह चाटा था. मुझे बेहद गर्म लग रहा था.हालांकि इस बीच डॉक्टर ने न तो मेरे चूतड़ों को टच किया और न ही चूत पर अपने हाथ फेरे.फिर भी ये सब मेरी बर्दाश्त के बाहर हो रहा था.

कुछ ही देर बाद मुझे लगा कि मेरी चूत के अन्दर से कुछ स्राव सा हो रहा है. जैसे-जैसे अन्दर से कुछ निकल रहा था, वैसे-वैसे मेरा शरीर ढीला पड़ता जा रहा था. मेरी जांघों के आस-पास लसलसा सा लगने लगा.

अभी भी डॉक्टर मेरे मम्मों को चूसते हुए पी रहा था. मेरे जिस्म में ऐसा लगा कि जान नहीं बची है, मैं उनके ऊपर लटक गयी. उसने मेरा दूध पीना छोड़ प्रिया.

फिर मुझे देखकर वो बोला- मिस नंदिनी क्या हुआ?मैं अपनी सांसों को काबू करते हुए बोली- कुछ नहीं डॉक्टर.

पर डॉक्टर जैसे सब कुछ समझ गया था, उसने अपनी जेब से रूमाल निकाला और मेरी चूत से बहते हुए रस को साफ किया.

फिर मेरे हाथ खोलकर बोला- अब तुम अपने कपड़े पहन सकती हो.

मैं थोड़ी देर पास पड़ी कुर्सी पर यूं ही नंगी बैठी रही और डॉक्टर को एकटक देखने लगी.

मुझे इस तरह देखते रहने से डॉक्टर बोला- क्या हुआ मिस नंदिनी?मैंने उत्तर प्रिया- कुछ नहीं.डॉक्टर- तब ठीक है. जाइये, आप अपने मुँह हाथ धो लो और कपड़े पहन लो.

मैं उठ गई, अपने को दुरूस्त करके मैंने कपड़े पहने और डॉक्टर को थैंक्यू कहते हुए बाहर आ गयी.

अब मेरा कॉलेज जाने का मन बिल्कुल नहीं कर रहा था.मैं वापिस अपने घर आ गयी और सीधे अपने कमरे में पहुंच गई.

कमरे में आकर एक बार फिर अपने सारे कपड़े उतार कर शीशे के सामने खड़ी हो गई.मैं अपने नंगे जिस्म को निहारने लगी और एक बार फिर खुद ही उन जगहों पर उंगलियां चलाकर डॉक्टर का अहसास अपने जिस्म पर करने लगी.

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जिस तरह मोहित संध्या को चोद रहा था, उस तरह डॉक्टर ने कुछ भी नहीं किया था.उसने केवल चूम-चाट कर और मेरे मम्मों को चूसकर उसने मेरी चूत को रस छोड़ने पर मजबूर कर प्रिया था.

मेरी उंगलियां अब मेरी चूत को सहला रही थीं.

मैं हल्का सा मुड़कर पीछे जहां-जहां डॉक्टर ने मुझे चूमा था, देखने की कोशिश करने लगी.मुझे अपने जिस्म पर एक अजीब सा महसूस सा हो रहा था.मोहित मुझे भाव नहीं दे रहा था और डॉक्टर ने तो मुझे इतना किया.

मोहित … हां मोहित … अचानक मेरे दिमाग में यह नाम कौंधा. डॉक्टर ही क्यों, जैसा आज डॉक्टर ने मेरे साथ किया था, मोहित भी तो कर सकता है.

कल मैं डॉक्टर के पास नहीं जाऊंगी, मोहित से अकेले में ही यह सब करवा लूंगी.

यह बात दिमाग में आते ही मैंने मोहित को कॉल किया.उसने मेरा फोन उठा कर सीधे बोल प्रिया- यार नंदिनी, मैं अभी बिजी हूं. कल बात करते हैं.मैंने कहा- मुझे तुमसे कुछ कहना है.मोहित- यार, कल बात करते हैं.

मुझे लगा कि वो सच में बिजी है.

मैं कल का इंतजार करने लगी. सुबह हुई तो आज मैं बहुत खुश थी. मुझे मोहित से मिलने जाना था. वो भी मेरा इंतजार कर रहा होगा. मैं कॉलेज में सीधा मोहित के पास पहुंची.

मैं- हाय मोहित.मोहित- ओह हाय, नंदिनी.

मैं- यार तुमसे एक बात करनी थी.मोहित- हां हां कहो.

मैं- चलो उस पेड़ के नीचे बैठते हैं.मोहित- हां बोलो, क्या कहना चाहती थी तुम?

मैं- यार मोहित, पहले ये बताओ कि आज मैं कैसी लग रही हूँ.इससे पहले मोहित कुछ बोलता सामने से आती हुयी संध्या बोली- बिल्कुल बहन जी जैसी.

मैंने मोहित की तरफ देखा, वो संध्या की बात पर मुस्कुरा रहा था.तभी संध्या बोली- मोहित, चल तेरे को कुछ दिखाना है.

ये कहते हुए उसने अपनी उंगली नीचे की तरफ की.बस मोहित ने मुझे बोला- नंदिनी, मैं थोड़ी देर बाद आकर तुमसे बात करता हूँ.

मुझे बहुत दुख हुआ, इसके लिए मैं मरी जा रही थी और ये मेरी कद्र ही नहीं कर रहा है.

मैं मायूस सी उठी और सीधा डॉक्टर के पास आ पहुंची.

मुझे देखते ही डॉक्टर शक्ति अपनी चेयर से उठा और मुझे अपनी बांहों में भर लिया.आह क्या सुकून था!मैंने भी अपनी बांहों को फैलाकर शक्ति को जकड़ लिया. मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था.

शक्ति बोला- मिस नंदिनी चलो, ट्रीटमेंट शुरू करते हैं.ये कहकर वो मुझसे अलग हो गया.

आज मैंने बिना कुछ कहे अपने कपड़े उतार दिए.उसने इशारे से अपने पास बुलाया और मुझे अपनी गोदी में बैठने के लिए बोला.

मैं उसकी गोदी में बैठ गयी. उसने मेरे हाथों को अपने गर्दन के इर्द-गिर्द किया और फिर बोला- मिस नंदिनी, अब आपको शर्म तो नहीं आ रही है?इतना कहकर उसने मेरे मम्मों को अपनी हथेलियों के बीच कैद कर लिया और भींचने लगा.

मैं थोड़ा और उनसे सट गयी. एक हाथ से वो मेरे एक मम्मे भींचता, तो दूसरे हाथ को मेरी नाभि के आस-पास सहलाते हुए उंगली को नाभि के अन्दर चलाने लगता. कभी दूसरे हाथ से दूसरे मम्मे को भींचते, तो कभी उसी निप्पल को मसल देते. लेकिन आज भी उनका दूसरा हाथ मेरी चूत तक नहीं जा रहा था जबकि नीचे उनका तना हुआ लंड मेरी गांड को पैन्ट के अन्दर कैद होने के बावजूद भेदने की कोशिश कर रहा था.

मैं कुछ ही पल में मस्ती की जन्नत में घूमने लगी थी और मेरी चूत में चुनचुनहाट होने लगी थी.मेरी चूत कह रही थी कि मुझे ऐसे प्यासा मत छोड़ो, डॉक्टर से कहो कि अपना हाथ एक बार मेरे ऊपर भी लाए.

न चाहते हुए भी पता नहीं मुझे क्या हुआ कि मैंने डॉक्टर का हाथ पकड़ा और अपनी चूत के ऊपर फिराने लगी.

अब वो धीरे-धीरे मेरी चूत पर अपना हाथ फिराने लगा था.उसका हाथ का साथ पाकर मेरी चूत फड़फड़ा उठी, मेरी टांगें अपने आप ही फैल गईं.

जबकि डॉक्टर एक ही हाथ से मेरे मम्मों को बारी बारी से कस-कस कर मसल रहा था और दूसरे हाथ से चुत की फांकों के अन्दर बहुत ही प्यार से अपनी उंगली चला रहा था.

थोड़ी देर बाद डॉक्टर ने मुझे अपने ऊपर से उठाया और कुर्सी पर मुझे बैठने का इशारा कर प्रिया.मैं कुर्सी पर बैठ गयी.

डॉक्टर ने मेरी टांगें फैला दी और मेरी दोनों टांगों के बीच में आ गया.उसने घुटनों के बल बैठ कर मेरी नाभि पर चुंबनों की बौछार कर दी. फिर मेरी छाती की तरफ बढ़ते हुए मेरे मम्मों को अपने मुँह में भरकर बारी-बारी से पीने लगा.

फिर डॉक्टर ने नीचे उतरकर मेरी चूत पर एक हल्का सा चुंबन ले लिया. आह इससे मेरा पूरा जिस्म गनगना गया. मात्र उसके मेरी चूत पर चुंबन लेने मात्र से ही ऐसा हो गया था.

मैंने कांपते हाथों से उसके सर को पकड़ कर अपनी चूत से सटा प्रिया. फिर क्या था … उसके होंठ और मेरी चूत के होंठ आपस में ऐसे मिले, मानो बरसों से बिछड़े दो प्रेमी मिल रहे हैं. ऐसा लग रहा था मानो किसी ने मेरे गर्मी से झुलसते जिस्म पर बर्फ की धार बौछार कर दी हो.

कुछ देर बाद एक बार फिर से वो ऊपर आ गया और मेरे मम्मों को मुँह में भर कर चूसने लगा.

मेरे निप्पल तन चुके थे और डॉक्टर अपनी जीभ से मेरे निप्पल को चाटे जा रहा था. मेरे मम्मों को कस-कस कर दबाये जा रहा था. दर्द के कारण मेरे आंखों में आंसू आ गए थे, लेकिन उस मीठे अहसास के कारण मैं यह दर्द भी बर्दाश्त कर रही थी.

अच्छे से मेरे मम्मों को मसलने के बाद एक बार फिर वो मेरे पेट को चाटते हुआ मेरी नाभि में अपनी जीभ चलाने लगा था.

इधर मेरी चूत भी उसकी जीभ को अपने समीप पाकर फड़फड़ाने लगी और नाभि से लड़ने लगी कि हट जा साली मेरी सौत … मेरे प्यार को अपनी गिरफ्त से आजाद कर … ताकि वो मेरे पास आ जाए.

डॉक्टर एक बार फिर मेरी चूत की तरफ बढ़ने लगा.मैं भी सम्भल गयी, मेरी पूरी ताकत इस समय मेरी चूत के आस पास केन्द्रित हो गयी थी. इस अहसास से मेरी गांड भी फूल पिचक रही थी.

और डॉक्टर शक्ति मेरे दो मासूम सी कलियों को अपने होंठों के बीच दबा कर चूस रहा था.

मेरी चूची, जिसके बढ़िया शेप के चक्कर में अपना इलाज कराने आयी थी, उसको वो संयमी डॉक्टर अभी भी अपने हाथों से रौंद रहा था.

मुझे दर्द और सुख का अहसास एक साथ हो रहा था. ऐसा लग रहा था कि मेरे जिस्म की सारी शक्ति अब निकलने वाली है, निकलने वाली क्या … निकल रही थी.

पर डॉक्टर ने अभी तक वहां से अपना मुँह नहीं हटाया था. वो मेरी चूत से निकलते हुए रस को अपने मुँह में चूसे जा रहा था.

आगे मिलते हैं तब चुत चुदाई के मजे से लबरेज इस हॉट कॉलेज गर्ल सेक्स स्टोरी में आपको भरपूर मजा आएगा. मेल करना न भूलेंsupport@mohakkisse.com

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सेक्सी हॉट माल दिखने के चक्कर में चुत चुदवा ली

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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

अविनाश अग्रवाल

1 month ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

गांडू राकेश

2 months ago

सच में बहुत ही हॉट और उत्तेजक कहानी है भाई। मजा आ गया पढ़कर।

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