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पहली बार चुदाई पठन समय: 14 मिनट पढ़ा गया: 775 बार

चढ़ती जवानी में सेक्स की चाह- 2

रोमन

21 Aug 2022 को प्रकाशित

चढ़ती जवानी में सेक्स की चाह- 2
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फक़ मी … मैंने अपने पड़ोसी भैया को कहा … मैं उनके साथ नंगी थी. उन्होंने मेरी कुंवारी बुर चाट चाट कर गीली कर दी थी. मैंने उनका लंड चूस कर चिकना कर प्रिया था.

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मैं वंदना पांडेय, एक मनमोहनी और दिलकश लौंडिया हूँ. मैं अपनी उम्र से कहीं ज्यादा गदराई हुई एक माल हूँ.मैं अपनी इस लम्बी कहानी में बता रही हूँ कि मेरी बुर की चुदाई की शुरुआत किस तरह से हुई और मैं एक के बाद एक लंड से चुदती चली गई.

अब आगे फक़ मी कहानी:

मैं बगल वाली आंटी के घर गयी, उनको खीर का कटोरा पकड़ा प्रिया और काफी देर उनके साथ बैठ कर बातें की.आंटी से बातें करते हुए करीब साढ़े 11 बज गए थे.

आंटी ने मुझसे कहा- बेटा आज मैं बहुत थक गयी हूँ.मैंने उनसे कहा- आंटी, आप जाओ और सो जाओ. मैं समीर भैया के पास जा रही हूँ. मुझे उनसे कुछ काम है.

इसके बाद वो अपने नीचे के कमरे में सोने चली गईं और मैंने उनके घर का मेन गेट अन्दर से बंद कर प्रिया.

फिर मैं सीधी समीर भैया के कमरे की तरफ बढ़ गई और उनके कमरे के गेट के बाहर खड़े होकर चुपके से देखा.अन्दर वो अपने बिस्तर पर एकदम नंगे होकर मोबाइल में कुछ देख रहे थे और लंड की मुट्ठ मार रहे थे.

मैंने भी एक पल सोचा और एकाएक दरवाज़ा खोल प्रिया.मैं एकदम अनजान बन कर अन्दर आ गई और टीवी चलाने के लिए सामने आ गयी ताकि भैया अपने आपको एडजस्ट कर लें.

यही हुआ, उन्होंने मुझे एकदम से कमरे में आया देखा तो वहीं पड़ी एक चादर को ओढ़ लिया.

तब तक मैंने भी टीवी चला प्रिया और उन्हीं के साथ उनके चादर में घुस गयी.

उधर समीर भैया पहले से गर्म थे और नंगे व खड़े लंड के साथ मौजूद थे.

भैया ने मुझसे रिमोट मांगा और बोले- लाओ, मैं कोई अच्छी पिक्चर लगा दूँ.मैंने उन्हें रिमोट दे प्रिया.

उन्होंने एक अंग्रेज़ी भूतिया और सेक्सी मूवी लगा दी.शायद वो मेरी ये बात जानते थे कि मुझे भूत वाली फिल्मों से डर लगता है.

उन्होंने फिल्म चलाने के बाद हाथ बढ़ा कर बगल में लगे स्विच दबा कर कमरे की सारी लाइट्स बंद कर दीं.इससे उस कमरे में बड़ा सेक्सी और डरावना माहौल हो गया था.

उधर पिक्चर जैसे ही एक डरावने सीन की तरफ चली, मैं डर के एकदम से भैया कर चिपक गयी.उन्होंने भी मुझे दोनों हाथों से बांहों में भर लिया.मैं काफी देर तक समीर भैया से एकदम चिपक कर डरती हुई पिक्चर देखती रही.

फिर मैं बोली- भैया, अब आगे की फ़िल्म आप देखो, मुझे नींद आ रही है.भैया बोल पड़े- तुम कपड़े पहन कर सोती हो … ये नहीं करना चाहिए. क्योंकि रात को पूरे शरीर को आराम चाहिए होता है. दिन भर जिस्म को कसाव झेलना पड़ता है. फिर वैसे भी यहां हम दोनों के अलावा कौन है?

मैं तो आई ही चुदने थी तो मैंने समीर भैया की बात मानते हुए अपनी नाइटी उनके सामने ही निकाली जिससे उनको मेरी गांड के दर्शन टीवी की रोशनी से हो गए.मैं पूरी नंगी होकर उनके साथ उनके बिस्तर में घुस गई.

करीब आधा घंटा बाद भैया ने टीवी बन्द की और मुझे दो तीन बार हिलाया.

मैं अभी तक जाग रही थी मगर मैंने ये जाहिर नहीं होने प्रिया कि मैं जाग रही हूँ.

मेरी कोई भी प्रतिक्रिया ना पाकर उनको इस बात का यकीन हो गया कि मैं अब गहरी नींद में सो गई हूँ.

वो मेरे मुँह के एकदम पास आ गए और मेरे गाल को चूम कर वो मेरे पीछे लेट गए.भैया ने अपना लंड मेरी गांड की दरार में घुसा प्रिया और अपना हाथ मेरे पेट पर रख प्रिया.

भैया ने काफी देर तक मेरे पेट को सहलाया और उसके बाद उन्होंने मेरी चूचियों को भी मसलना शुरू कर प्रिया.काफी देर तक अपने दूध मसलवाने के बाद मैं सीधी होकर लेट गई.

अब भैया के लिए और आसानी हो गई थी.उन्होंने मेरे पूरे शरीर को चूमा और अंत में वो अपना खड़ा लंड मेरी बुर से रगड़ने लगे. मेरी एक चूची को मुँह में ले लिया, साथ ही वो एक हाथ से मेरी दूसरी चूची को दबाने लगे.दूसरे हाथ से भैया अपना लंड हिलाने लगे.

कुछ ही समय बाद उनका पानी निकलने को हुआ तो उन्होंने अपने हाथ में वीर्य लेकर थोड़ा मेरे होंठों में लगा प्रिया और बाकी बचा मेरी सीलपैक बुर के बाहर मल प्रिया.उसके बाद वो एक हाथ में मेरी चूची और दूसरी चूची में मुँह लगा कर सो गए.

सुबह करीब साढ़े पांच बजे हम दोनों की आंख खुली.मैंने भैया को एक गाल पर किस करते हुए गुड मॉर्निंग बोला.

मैं उनके सामने नंगी उठी और अपनी नाइटी पहन कर जाने लगी तो भैया ने अपने गाल के तरफ इशारा करते हुए मुझसे एक और किस मांगा.

जैसे ही मैं उनको किस करने झुकी, उन्होंने मुझे घसीट लिया और मुझे दबोच कर चूमने लगे.भैया ने मेरे गालों पर मुझे खूब सारे किस कर दिए.

मैंने मजे से भैया के चुम्बनों का मजा लिया और अपने घर आ गयी.

जब मैं घर आई थी तो पापा आदि सब काम पर जा चुके थे.मैं नहाने चली गयी.

तभी बाजू वाले भैया बाथरूम के बाहर आए और मुझसे बोले- सच में क्या मस्त फिगर है तुम्हारा.मैंने इठलाते हुए दरवाज़ा भेड़ प्रिया और उनसे कहा- आप बाहर बैठो.

जब मैं नहा चुकी तो मैं बस टॉवल बांध कर बाहर आ गयी.

और जैसे ही मैं बाहर वाले कमरे में पहुंची, वहां समीर भैया बैठे थे.उधर आकर मैं अपने बाल झटकारने लगी.

उन्होंने मुझे यूं देखा और पकड़ कर खींच लिया.मैं जाकर सीधी उनकी गोद में गिरी, जहां उनका खड़ा लंड फिर एक बार मेरी गांड की दरार में फंस गया.

तभी भैया ने मेरे गले को चूमना शुरू कर प्रिया.उनकी इस हरकत से मैंने खुद पर से अपना आपा खो प्रिया और उनकी तरफ घूम कर अपने लबों को उनके लबों में घुसा प्रिया.हमारे बीच एक जोरदार फ्रेंच किस का आगाज़ हुआ जिसमें हम दोनों एक दूसरे के होंठों को मानो खाने से लगे थे.

भैया ने मेरी जीभ बाहर निकलवाई और उसको खूब चूसा.इसके बाद मैंने भी ऐसा किया.

इसी के साथ भैया ने मेरी टॉवल मेरी गांड से उठा दी और अपने दोनों हाथों से मेरी गांड मसलने लगे.मैं गनगना उठी.

इसके बाद भैया मेरे गाल, गले को चूमते हुए मेरे सीने तक आ गए और अचानक से मेरी टॉवल खींच कर फेंक दी.मैं नंगी हो गई.

उन्होंने मेरे 34 साइज़ के बड़े मम्मों को मसलते हुए चूसना, चाटना और पीना शुरू कर प्रिया.फिर वो मेरे निप्पलों से खिलवाड़ करने लगे और मुझे और ज़्यादा उत्तेजित करने लगे.

इसके जवाब में मैंने उनका सिर पकड़ कर अपनी दोनों चूचियों के बीच घुसा प्रिया और दोनों चूचियों में घुसा घुसा कर भैया को अपनी दोनों चूचियां बारी बारी से पिलाना शुरू कर प्रिया.भैया ने खूब मस्ती से मेरे दूध चूसे.

मैं काफी गर्मा गई.

उसके बाद मैंने भी भैया के गाल और गले को चूमते हुए उनकी टी-शर्ट उतार फैंकी और उनके पूरे शरीर को चूमने लगी.फिर मैं उनकी गोद से उतर कर उनके पैरों में आ गयी और उनके लोअर में उबाल मारते हुए कड़क लंड हाथ से टच कर प्रिया.

मैंने जैसे ही भैया के लंड को थामा, उनके लंड की फूली हुई नसें मुझे गड़ने लगीं.मैंने एक पल भी नहीं लगाया और तुरंत लोअर से लंड बाहर निकाल लिया.

आज पहली बार अपने जीवन में मेरे हाथ में और सात इंच लम्बा और तीन इंच मोटा लौड़ा था.मैंने भैया के लंड को कुछ देर हाथ में लेकर सहलाया.

तभी भैया ने मेरा सिर पकड़ कर मुझे अपना लंड चूसने का इशारा कर प्रिया.मैंने गप से उनका लंड अपने होंठों से लगा लिया.

यह पहली बार था जब मैं किसी लंड को मुँह में ले रही थी.

उसी का नतीजा था कि आज मैंने मुँह को जल्दी से किसी रोज़ चुदने वाली रंडी के जितना खोल प्रिया और लंड मुँह में ले लिया.मैं लंड चूसने लगी और जल्दी ही करीब करीब उनका पूरा लौड़ा अपने मुँह में लेने लगी.

फिर समीर भैया ने मुझे लंड के नीचे लटकती अपनी दोनों गोलियों को बारी बारी से चुसाया.मुझे मजा आ गया.

इसके बाद मैंने खुद उन्हें एक साथ लेकर टॉफी की तरह काफी देर और बड़े मजे से चूसा.

अब लंड चुसाई का अध्याय समाप्त हुआ.

इसके बाद समीर भैया ने मुझे एक बार फिर से ऊपर खींचा और मेरे होंठों से शुरू करते हुए मेरे पूरे बदन को चूमने लगे.

भैया ने मुझे चूमते हुए मुझे उसी सोफे पर लिटा प्रिया और मेरी दोनों टांगों को फैला प्रिया.

जैसे ही उनका मुँह मेरी बुर के कुछ करीब पहुंचा और उनके मुँह की गर्म भाप मेरी बुर पर पड़ी, मेरी बुर ने एक धारदार पानी की पिचकारी निकाल दी.

समीर भैया पूरा भीग गए. उन्होंने रस चाटा और फिर से एक बार बुर चाटने लगे.इस तरह मेरी बुर दो बार झड़ी.

अब मेन एक्शन सीन शुरू होना था.

भैया ने मुझे उसी कमरे ने पड़े एक तख्त पर पीठ के बल सीधा लिटा प्रिया और मेरी दोनों टांगों को चीर कर मेरी बुर खोल कर देखने लगे.वो खुद भी मेरी टांगों के बीच में आ गए.

उन्होंने मेरी बुर पर खूब ढेर सारा थूक कर लगाया और थूक को बुर पर फैला प्रिया.मुझसे भी अपने लंड को थूक से सनवा कर पोजीशन बना ली.

भैया ने अपनी तोप को मेरी बारूदी सुरंग के सामने लाकर सैट किया और एक फायर कर प्रिया.मैं उस बकरी के मेमने की तरह चीख पड़ी, जब उसकी जान जाती हो और वो चिल्लाता हो.

उनका लंड मेरी बुर को फाड़ता हुआ अन्दर चला गया था. मेरे दर्द से भैया रुक गए.कुछ देर बाद फौजी सर यानि मेरे समीर भैया कुछ देर मुझे सहलाते और चूमते रहे.

फिर जैसे ही मुझे दर्द में कुछ राहत मिली तो उन्होंने मेरी दोनों टांगों को पकड़ कर मेरी बुर में अपना लंड ठेल प्रिया.

इस बार के शॉट में फौजी की आधी तोप दुश्मन के ठिकाने में अन्दर घुस गई थी.दुश्मन इस बार भी चिल्लाया और अबकी बार उसके आंसू भी निकल पड़े.

इस बार फौजी पहली बार की तरह नर्म नहीं पड़ा बल्कि उसने दुश्मन की चीख को अनसुना करते हुए अपनी तोप को दुश्मन के ठिकाने को फाड़ते हुए वहीं पर घुसेड़े रखी.

कुछ पल फौजी की तोप ने दुश्मन की बारूदी सुरंग को लहूलुहान कर प्रिया और अपनी जगह सही से बना ली.

इसके बाद समीर भैया मेरे दर्द को कम करने के लिए मेरे होंठों को और चूचियों को चूसते और दबाते रहे.

मेरी बुर में अब चुनचुनी होने लगी थी, दर्द भी काफी हद तक थम सा गया था.

इसके बाद भैया अपने मोटे हल से मेरे बंजर पड़े खेत की नॉन स्टॉप जुताई करने लगे.

कुछ धक्कों के बाद मैं भी उनके साथ अपनी गांड उठाने लगी.मुझे मजा आने लगा था.

इसी के साथ मैं अपने कंठ से उत्तेजना भरी आवाज निकालने लगी- उफ्फ उफ भैया, चोदो मुझे … और ज़ोर से भैया … और तेज़ … भैया फक़ मी … प्लीजचोद डालो अपनी बहना को… अहह फक मी!मेरी कामुक आवाजें मेरे भैया के उत्साह को बढ़ावा देने में लगी थीं.

करीब 5 मिनट बाद भैया ने मुझे उठाया और खुद लेट कर मुझे अपने ऊपर बिठा लिया.उसके बाद मैं अपनी गांड उनके लौड़े पर पटक पटक कर चुदवाने लगी.

फट फट की मस्त आवाज आने लगी.मेरी बुर से टपकते पानी की वजह से फच फच की तेज आवाजें पूरे कमरे में फैलने लगी थीं.

मेरे मुँह से उत्तेजना भरी आवाज़ों ‘फक़ मी … फक़ मी …’ और सिसकारियों से भी कमरे में चुदाई का संगीत गूंजने लगा था.

कुछ देर की और लड़ाई के बाद भैया ने मुझे फिर से अपने नीचे लिटा लिया और हचक कर चोदा.वो भी अपने चरम पर आ गए थे और उनकी भी तेज आवाजें निकलने लगी थीं.कुछ देर के बाद उन्होंने अपनी वीर्य भरी पिचकारी मेरी बुर में ऊपर छोड़ दी और भैया हांफते हुए मेरे ऊपर ही ढेर हो गए.

वो मुझे चूमने लगे.मुझे मजा आने लगा था और मैं भी अपने भैया के चुम्बनों का जवाब चुम्बन से देने लगी थी.

दोस्तो, अपने मेरी बुर के उद्घाटन की चुदाई कहानी पढ़ ली है. मुझे उम्मीद है कि आप मेरी चुदाई से खुश हुए होंगे.

इस हॉट गर्ल फक़ मी कहानी के अगले भाग में मैं आपको अपनी खौलती बुर की चुदाई के खेल एक एक करके सुनाती जाऊंगी.आप मुझे अपने प्यार भरे मेल भेजना न भूलेंsupport@mohakkisse.com

हॉट गर्ल फक़ मी कहानी का अगला भाग:चढ़ती जवानी में सेक्स की चाह- 3

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