हॉट गर्ल रेडी सेक्स कहानी में मेरे पिता ने गाँव में एक नवविवाहित जोड़े को आश्रय दे रखा था. मैं गाँव गया तो वे तंगहाल थे. मैंने लड़की को जॉब दिलवा दी. लड़के को दुबई में जॉब दिलवा दी.
नमस्कार दोस्तो,कैसे हैं आप सभी लोग?उम्मीद करता हूँ आप सभी लोग कुशल मंगल होंगे!सभी लौंडे अपने लंड को काम पर लगाए होंगे; कोई हिला रहा होगा, तो कोई चुदाई कर रहा होगा!बाकी लड़कियाँ तो मस्त चुदाई करवा रही होंगी या सब्जियाँ इस्तेमाल की जा रही होंगी!
मेरी पिछली कहानी थी: शादी में मिली अनजान लड़की से दोस्ती और सेक्स
कुछ लोग मुझे जानते-पहचानते हैं।जिनके लिए मैं नया हूँ, उनको अपना परिचय देना चाहूँगा।
मेरा नाम अजय चौधरी है। मैं उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का रहने वाला हूँ।लखनऊ से कुछ दूर मेरा गाँव है, जहाँ हमारी पुश्तैनी जमीन, घर और खेत हैं।
वहाँ की देखरेख अब मैं ही करता हूँ।
मैं आप सभी लड़कों का दोस्त, भाई, बंधु और लड़कियों एवं भाभियों का बॉयफ्रेंड कहो या पति—जिससे आप लोग चुदाई करवाने में सहमत हों, वही समझ लो!आप सब का अपना प्यारा अजय चौधरी हाजिर है, एक नई रोमांस से भरी चुदाई की कहानी लेकर! उम्मीद करता हूँ, आप सभी को यह हॉट गर्ल रेडी सेक्स कहानी पसंद आएगी।
यह कहानी मेरे गाँव के एक किसान परिवार की बहू की है।मेरे खेत में काम करने वाले एक मजदूर परिवार के लड़के ने एक अमीर घर की विधर्मी लड़की से भागकर शादी कर ली थी।बाद में लड़की के घर वालों ने पुलिस केस कर दिया था, जिसके बाद बहुत बवाल हुआ।
लेकिन मामला मेरे खेत में काम करने वाले मजदूर का था तो मेरे पिताजी ने सूचना पाते ही सारा मामला रफा-दफा करवा दिया।
हालाँकि, दोनों पक्षों ने लड़के और लड़की को घर से बेदखल कर दिया।इसके बाद मेरे पिताश्री ने उन्हें अपने ही घर में पनाह दी और घर के बाहर एक कमरा दे दिया, जिसमें घर का कबाड़ रखा हुआ था।
उसमें से जो सामान काम का था, वो उन्होंने रख लिया, बाकी फेंक दिया।फिर उसी कमरे में वो रहने लगे।
मेरे पिताश्री ने उन्हें थोड़ी-सी जमीन भी दे दी खेती करने के लिए ताकि उनका गुजारा हो सके।
कुछ समय तक तो सब कुछ ठीक चला.लेकिन कुछ ही महीनों में उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई और वो दोनों परेशान रहने लगे।
समय आ गया था धान की फसल लगाने का।मेरे पिताश्री ने मुझसे कहा, “बेटा अजय, तुम गाँव चले जाओ और खेतों में धान लगवा दो!”
हर बार मेरे पिताश्री ही जाकर खेतों का काम करवाते थे लेकिन इस बार उन्होंने यह काम मुझे सौंपा।मैं उनके कहे अनुसार अपने गाँव चला गया।
गाँव पहुँचकर मैं अपने घर गया, जहाँ मेरी मुलाकात उन दोनों से हुई।मैं उनका परिचय देना चाहूँगा।लड़के का नाम दीपक था। वह ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं था। गरीब घर का किसान का बेटा था, इसलिए ज्यादा पढ़ाई नहीं कर पाया।
लड़की का नाम मरियम था।मरियम अच्छे खासे घर से थी इसलिए उसने पढ़ाई भी की थी और दिखने में भी काफी सुंदर थी।
यह कहानी मरियम की है कि कैसे मैं उससे मिला, फिर कैसे मैंने उससे दोस्ती की और फिर कैसे मैंने उसकी चुदाई की।हो सकता है कि यह कहानी आपको काल्पनिक लगे.लेकिन यह कहानी काल्पनिक नहीं है।यह सत्य में एक घटित हुई कहानी है जो मैंने अपने जीवन में अनुभव की।
तो हुआ यूँ था कि मैं धान की फसल लगवाने के लिए गाँव गया।वहाँ मेरी मुलाकात दीपक और उसकी बीवी मरियम से हुई।
उन्होंने मुझे अपनी सारी कहानी सुनाई।उनकी कहानी सुनने के बाद मैं अपने खेतों में फसल लगवाने के लिए मजदूर ढूँढने निकल गया।लेकिन फसल का समय चल रहा था, इसलिए कोई भी मजदूर खाली नहीं था।
शाम को जब मैं घर लौटा, तब दीपक और उसकी बीवी घर में ही थे।
मैंने दीपक को बुलाया और कहा, “यार दीपक, मुझे अपने खेतों में धान की फसल लगवानी है, जिसके लिए मुझे मजदूर चाहिए। इस समय सभी लोग अपने खेतों में फसल लगा रहे हैं इसलिए कोई भी मजदूर खाली नहीं है। क्या तुम इसमें मेरी मदद कर सकते हो?”
इस पर दीपक ने कहा, “अजय, कोई बात नहीं है! मैं ही तुम्हारे खेतों में फसल लगवा दूँगा, जिससे मेरा भी काम हो जाएगा और तुम्हारा भी!”
दीपक ने सारा इंतजाम किया और दो दिन में खेतों में फसल लगवा दी।फसल का काम खत्म होने के बाद मैं फ्री हो गया।
अगले दिन शाम को मैंने अपने दोस्तों को फोन किया, तो पता चला कि सभी अपने काम में बिजी हैं।अब मैं अकेला ही ठेके पर गया और एक बोतल लेकर घर आ गया।
फिर मैंने दीपक को बुलाया और पूछा, “तुम पीते हो?”उसने कहा, “अजय, मैं पीता तो हूँ, लेकिन मेरी बीवी को यह सब पसंद नहीं है!”मैंने कहा, “अरे यार, तुम पियो! तुम्हारी बीवी से मैं बात कर लूँगा!”
वह मना करने लगा।
फिर मैंने मरियम को आवाज देकर बुलाया और कहा, “क्यों मरियम, तुम दीपक को शराब पीने से क्यों मना करती हो?”उसने कहा, “अभी हमारी आर्थिक स्थिति सही नहीं है। अगर यह पीने लगे और इनको पीने की लत लग गई, तब क्या होगा?”
उसके जवाब पर मैंने कहा, “एक दिन के पीने से किसी को कोई लत नहीं लगती!”
उसने कहा, “मैं पीने की इजाजत तो दे दूँगी, लेकिन आपको मेरा एक काम करना होगा!”मैंने कहा, “स्वीकार है!”
उसने मेरी बात को काटते हुए कहा, “पहले मेरी शर्त तो सुन लो!”मैंने कहा, “मुझे आपकी हर शर्त मंजूर है!”
इस पर मैंने पैग बनाए, एक दीपक को दिया और खुद पिया।साथ में मैं चखने के लिए जो सामान लाया था, उसे निकालकर रख दिया और खाने लगा।
फिर मरियम चली गई।
हमें पीते-पीते करीब दो घंटे हो गए।दीपक को काफी नशा हो गया था क्योंकि वह बहुत दिनों बाद पी रहा था।
नशे की हालत में उसने मुझसे कहा, “भाई अजय, यार मुझे कहीं नौकरी दिलवा दो! मैं अपनी बीवी के तानों से तंग आ गया हूँ। वह मुझे रोज ताने मारती है और कहती है कि मैं तुमसे शादी करके फंस गई हूँ। मेरा घर भी छूट गया और सारे शौक भी खत्म हो गए!”
उसकी बात पर मुझे कुछ सहानुभूति हुई और ऐसा लगा कि मुझे उसकी कोई मदद करनी चाहिए।
तब तक मरियम आ गई और उसने कहा, “चलो, खाना खा लीजिए!”मुझसे भी कहा, “अजय, तुम भी हमारे साथ खाना खा लो!”
मैंने कहा, “मैं खाना तो खा लूँगा, लेकिन मेरी भी एक शर्त है!”उसने कहा, “खाना खाने के लिए कौन-सी शर्त?”
मैंने कहा, “मेरी है! अगर मानोगी, तब ही मैं खाना खाऊँगा!”उसने कहा, “पहले बताइए, फिर सोचूँगी!”
मैंने कहा, “आज के बाद तुम मेरे इस घर में खाना बनाओगी और खाओगी, जिससे मेरा भी खाना हो जाएगा और तुम दोनों का भी!”
थोड़ी हिचकिचाहट के साथ मरियम मान गई।
फिर हमने खाना खाया और सो गए।
जब सुबह मेरी नींद खुली, तब मैंने किसी के लड़ने की आवाज सुनी।जब मैं अपने कमरे से बाहर निकला, तब देखा कि दीपक और मरियम में बहस हो रही थी।
किस बात के लिए … यह मुझे नहीं पता था।
मैं उनके पास गया और पूछा, “क्या हुआ? क्यों बहस कर रहे हो, दोनों? तुम दोनों की वजह से मेरी नींद खुल गई!”
मरियम ने बड़े ही सरलता से मुझसे कहा, “अजय, इन्हें नौकरी नहीं मिल रही और मैं नौकरी करना चाहती हूँ, जिस पर यह मेरा विरोध कर रहे हैं!”
मैंने दीपक को समझाया, “देखो, अभी न तो तुम्हारे पास खुद का घर है, न ही खुद की जमीन। इसलिए अगर दोनों लोग मिलकर मेहनत करोगे, तभी आगे जीवन में कुछ सफल हो पाओगे!”
मेरी इस बात से दीपक समझ गया और उसने मरियम को नौकरी करने की इजाजत दे दी।
फिर मैंने मरियम से पूछा, “रात में तुमने एक शर्त रखी थी। वह शर्त क्या है?”मरियम ने कहा, “अजय, आप मेरे लिए कोई नौकरी देख लो! मैं नौकरी करना चाहती हूँ!”मैंने कहा, “ठीक है!”
फिर मैंने अपने एक दोस्त से बात की।उसके पहचान में एक जगह खाली थी, हॉस्पिटल में रिसेप्शन पर लड़की चाहिए थी।तनख्वाह 12,000 थी।यह बात मैंने मरियम और दीपक को बताई।
दोनों काफी खुश हो गए और मरियम नौकरी पर जाने लगी।
मरियम को पहली तनख्वाह मिलते ही उसने अपनी तनख्वाह से मेरे लिए एक दारू की बोतल गिफ्ट की और अपने लिए और दीपक के लिए कुछ नए कपड़े लेकर आई।
फिर शाम को मैंने पीने की व्यवस्था बनाई और दीपक को साथ बैठाया।उस दिन मरियम काफी सुंदर लग रही थी।
मैंने और दीपक ने अपना-अपना जाम खत्म किया और बैठकर बातें करने लगे।
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कुछ ही देर में मरियम खाना बनाकर आई और हमारे साथ बैठ गई।
मैं मरियम को बार-बार देख रहा था।पता नहीं क्यों, उस दिन मेरी नजर बार-बार मरियम पर ही जा रही थी।उसने नीले रंग का सलवार सूट पहना था, जो उस पर काफी जच रहा था।
दीपक तो काफी नशे में था लेकिन मैं अपने पूरे होश में था, पर नशे में होने का नाटक कर रहा था।
थोड़ी देर बाद मैंने एक-एक पेग और बनाए और दीपक को दिया।
इसके बाद दीपक काफी ज्यादा नशे में हो गया और उसने उल्टी कर दी।फिर वह चुपचाप जाकर अपने कमरे में लेट गया।
इधर, मैं और मरियम बैठे थे।
थोड़ी देर बात करने के बाद मरियम ने मुझसे कहा, “मेरा एक और काम करोगे?”मैंने कहा, “अब कौन-सा काम बचा है?”
उसने कहा, “तुम मेरा यह काम कर दो, जिसके बाद तुम जो बोलोगे, मैं वह करूँगी!”
मरियम का ऐसा कहना मेरे लिए उसके प्रति सोच बदलने वाला था।अभी तक मैंने मरियम को उस नजर से नहीं देखा था, न ही मेरे दिलो-दिमाग में उसके लिए कोई गलत विचार थे।
लेकिन जब उसने ऐसा कहा, तब मेरे अंदर हवस जाग गई।मैंने अपने मन में सोचा, काश अगर मरियम की चूत चोदने को मिल जाए तो मजा आ जाएगा!
मरियम काफी सुंदर थी।उसके 32 साइज के चूचे, 28 की कमर, और 36 की गांड बहुत ही गजब की थी, जो मुझे उसकी चुदाई करने के बाद पता चला।
मैं अपने मन में उसे चोदने का तरीका सोच ही रहा था कि मरियम ने कहा, “अजय, कहाँ खो गए?”मैंने कहा, “सोच लो, क्या बोल रही हो!”उसने कहा, “हाँ, मैं सोच-समझकर ही बोल रही हूँ!”
मैंने उससे अपना हाथ बढ़ाकर वादा करने को कहा।उसने अपना हाथ बढ़ाकर वादा किया और कहा, “मैं तुमसे वादा करती हूँ, तुम जो बोलोगे, मैं वह करूँगी!”
मैंने पूछा, “बताओ, क्या काम है?”उसने कहा, “तुमने मेरी नौकरी तो लगवा दी है, लेकिन दीपक अभी भी बेरोजगार बैठा है, जो मुझे अच्छा नहीं लगता। मेरी कमाई से घर तो चल जाएगा, लेकिन कुछ बन नहीं पाएगा भविष्य के लिए!”
मैंने हामी भरी और कहा, “मरियम, तुम सही कह रही हो! बताओ, मैं तुम्हारी कैसे मदद कर सकता हूँ?”
मरियम बोली, “ज्यादा कुछ नहीं, बस दीपक को कहीं बाहर भिजवा दो! जैसे मेरे चाचा और उनके कई रिश्तेदार सऊदी में नौकरी करते हैं, जो पढ़े-लिखे नहीं हैं। दीपक भी पढ़ा-लिखा नहीं है और यहाँ उसे नौकरी भी नहीं मिलेगी!”मैंने कहा, “ठीक है, मैं कोशिश करता हूँ!”
कुछ दिनों बाद मैंने अपने दोस्त असलम से बात की।उसके एक रिश्तेदार ने कहा कि उसे एक आदमी की जरूरत है।मैंने दीपक को उनके पास भिजवा दिया।
इसके बाद दीपक सऊदी में सेट हो गया और अच्छी कमाई करने लगा।
कई दिन बीतने के बाद मैंने मरियम से कहा, “मरियम, तुमने जो कुछ भी कहा था, वह सब मैंने किया। अब बारी तुम्हारी है!”
मरियम ने हँसते-मुस्कुराते मेरी बात स्वीकार की और कहा, “बिल्कुल अजय, बताओ मुझे क्या करना है!”
मैंने कहा, “ठीक है, बताऊँगा! लेकिन तुम कल छुट्टी लेकर आना। परसों हम लोग घूमने चलेंगे!”
मरियम बोली, “अजय, अगर किसी ने देख लिया और दीपक को यह बात पता चल गई, तो वह हमारे बारे में क्या सोचेगा?”
मैंने कहा, “उसकी चिंता तुम मत करो! किसी को कुछ भी पता नहीं चलेगा!”
अगले दिन सुबह मैं नहा-धोकर तैयार हुआ और मरियम को अपने साथ ले जाने के लिए गाड़ी निकाली।
मरियम तैयार होकर आई.लेकिन उसके कपड़ों में वह बात नहीं थी जो होनी चाहिए थी।
मैं उसे सबसे पहले एक मॉल में ले गया और उसके लिए ढेर सारे नए-नए फैशन के कपड़े खरीदे।
फिर मैंने उससे पूछा, “तुम्हारा साइज क्या है?”उसने संकोच करते हुए कहा, “अजय, क्या बोल रहे हो?”
मैंने कहा, “तुमने मुझसे वादा किया है! अब तुम अपने वादे से मुकर रही हो?”
मरियम ने मेरा हाथ पकड़ते हुए कहा, “अजय, तुम बार-बार वादे की बात को क्यों ले आते हो? क्या तुम्हें मुझ पर भरोसा नहीं है?”मैंने कहा, “फिर तुम मुझसे इतना संकोच क्यों कर रही हो?”
उसने कहा, “तुम ऐसे बात करते हो कि हम संकोच में पड़ जाते हैं!”मैंने कहा, “अभी तुम्हारा पति यहाँ नहीं है और जब तक दीपक यहाँ नहीं है, तब तक उसकी जगह मैं तुम्हारे साथ हूँ!”
वह थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोली, “अजय, तुम क्या कह रहे हो?”मैंने कहा, “मैंने पहले ही बोला था, वादा करने से पहले सोच लो! मैं कुछ भी माँग सकता हूँ। अब मुझे सिर्फ और सिर्फ तुम चाहिए और कुछ नहीं!”
उसने थोड़ा उदास मन से हामी भर ली और कहा, “तुम मेरी मजबूरियों का फायदा उठाओगे!”मैंने कहा, “तुम्हें जो सोचना है, सोच लो! लेकिन मैं तो अब तुम्हें पाना चाहता हूँ!”
इसके बाद मैंने उसके लिए ब्रा और पैंटी खरीदी और कई सारे नाइट सूट भी खरीदे।
फिर मैं उसे पार्लर में ले गया, जहाँ मैंने उसका अच्छे तरीके से मेकओवर कराया और अपनी पसंद का एक सूट पहनने को कहा।
कुछ घंटों बाद जब वह पार्लर से तैयार होकर निकली, तो बिल्कुल एक कॉलेज की लड़की की तरह दिख रही थी।बहुत ही सुंदर!उसे देखकर जवान तो जवान, बूढ़ों का भी लंड खड़ा हो जाए!
मेरे साथ भी वही हुआ।उसे देखकर मेरा लंड पैंट में ही तंबू बनाने लगा जिसे मरियम ने देख लिया और वह शरमा गई।
फिर हम दोनों एक रेस्टोरेंट में गए और खाना खाया।फिर मूवी देखी।
इसके बाद शाम होते-होते घर आ गए।
घर आने के बाद मरियम अपने कामों में व्यस्त हो गई और मैं पीने की व्यवस्था बनाने लगा।रात के खाने का समय होते-होते मैं काफी ज्यादा नशे में हो गया था।
जब रात का खाना बनाकर मरियम फुर्सत में हुई, तब वह मेरे पास आई और बोली, “अजय, चलो अब खाना खा लो! बहुत हो गया पीना!”
मैंने उसका हाथ पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया और अपनी गोद में बिठाया।
मैं उसके स्तनों को दबाने लगा और साथ ही उसके होंठों को चूसने लगा।मरियम इसका नाम मात्र विरोध कर रही थी।
मैंने उसे किस करते हुए कुछ क्षण हुए थे कि वह मुझसे छूटने का प्रयास करने लगी।
मैंने उसे छोड़ दिया और बोला, “जाओ, जब तुम्हें मुझसे कोई दिलचस्पी नहीं है, तो मैं भी तुम्हारे साथ जबरदस्ती नहीं करूँगा!”
मरियम बोली, “यार अजय, ऐसी बात नहीं है! लेकिन मैं दीपक को धोखा नहीं देना चाहती। भले ही दीपक कैसा भी हो, लेकिन वह मेरा पति ही है। मैं सिर्फ और सिर्फ दीपक के लिए अपने घरवालों के खिलाफ गई और उसके साथ भागकर शादी की!”
मैंने उसकी बात को काटते हुए कहा, “देखो, पहले मेरी बात सुनो और समझो! अगर फिर भी तुम्हें मेरी बात न समझ आए, तब तुम बोलना!”
मैंने उसे प्यार से अपने बगल में बैठाया और कहा, “तुम दीपक से प्यार करती थी, इसलिए उसके साथ भागकर शादी की!”उसने कहा, “हाँ, बिल्कुल!”
मैंने कहा, “मैं कौन-सा तुम्हें दीपक को छोड़ने के लिए बोल रहा हूँ? हर लड़की की अपनी एक अलग जरूरत होती है, जो तुम्हें भी है। अगर तुम मेरा साथ दो, तो इससे तुम्हारी भी जरूरतें पूरी हो सकती हैं और मेरी भी!”
मरियम बोली, “अगर हम दोनों के बारे में किसी को पता चल गया, तो मैं तो घर से भी निकाल दी जाऊँगी! दीपक भी यहाँ नहीं है। न मेरे घरवाले मुझे अपनाएँगे, न दीपक के। तुम्हारे घर से निकाल दिए जाने के बाद मैं रहूँगी कहाँ?”
मैंने उसकी बात को काटते हुए कहा, “तुम उसकी चिंता मत करो! तुम सिर्फ मेरा साथ दो। मैं जिम्मेदारी लेता हूँ। जब तक मैं जिंदा हूँ, तुम्हें कोई तकलीफ नहीं होने दूँगा। तुम्हें जो कुछ भी चाहिए, वह मैं दिलाऊँगा!”मरियम बोली, “क्या तुम सच कह रहे हो?”मैं उसके करीब जाकर उसे किस करते हुए बोला, “हाँ, मेरी जान!”
मरियम बोली, “ठीक है! लेकिन तुम मुझसे वादा करो कि कभी भी तुम मेरा साथ नहीं छोड़ोगे और न ही यह बात किसी को पता चलने दोगे!”मैंने कहा, “ठीक है!”
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हॉट गर्ल रेडी सेक्स कहानी का अगला भाग:मदद करने के बदले में मिली चूत- 2