हॉट न्यूड लेडी वांट फक … डॉक्टर के बेड पर मैं उनके लंड के साथ खेल रही थी. तभी डॉक्टर ने मुझे नंगी करना शुरू किया तो मेरी खुशियाँ दोगुणी हो गयी.
कहानी का पिछला भाग:आखिर मैं पहुंची डॉक्टर के बिस्तर पर
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डॉक्टर अतुल का लण्ड मुंह में लेकर अपना मुंह ऊपर नीचे करते हुए मैं उनके लण्ड से मेरे मुंह की चुदाई करवा रही थी.तब डॉक्टर के चेहरे के भाव देखने लायक थे।वे अपनी आँखें मूंदे चुपचाप पलंग पर पड़े मेरे मुंह की नर्मी और मेरी लार से लथपथ चिकनाहट भरी जीभ के मादक स्पर्श का आस्वादन उनके लण्ड पर महसूस कर रहे थे।
कभी कभार उनके मुंह से एक आह जरूर निकल जाती थी।उनके चेहरे पर उनकी भौहें सिकुड़ना दिखाता था कि वे भी काफी उत्तेजना महसूस कर रहे थे।
मुझे अतुल के उस तगड़े क्यूट लण्ड से पता नहीं एक तरह की आत्मीयता अनुभव हो रही थी।ऐसा लगता था जैसे मैंने उसे कई बार हाथ में पकड़ कर प्यार जताया हो।
अपनी उत्तेजना और सहभागिता जताने के लिए डॉक्टर अतुल बार बार मेरे सर को प्यार से पकड़ कर कभी मेरे बिखरे हुए बालों को सहला देते थे या फिर मेरे सर को पकड़ कर मेरे मुंह को उनके लण्ड के ऊपर नीचे होने के साथ उनका हाथ भी ऊपर नीचे होता रहता था।
मेरे दोनों हाथों में उनका लण्ड पकड़ कर हिला कर चूसते हुए मैं कई बार उसे मेरे मुंह के काफी अंदर लेने की कोशिश करती, पर उसकी मोटाई के कारण उसे ज्यादा अंदर ले नहीं पाती थी।कई बार उत्तेजना में आ कर डॉक्टर अतुल कभी धक्का मार देते तो उनका लण्ड मेरे गले तक पहुँच जाता और मेरी सांस रुक जाने के कारण मेरी आँखों में से पानी बहने लगता और मेरे गले का बुरा हाल हो जाता।
पर फ़ौरन जब वह यह देखते तो अपना लण्ड वापस खींच लेते।डॉक्टर अतुल का लण्ड मेरे मुंह की लार से लथपथ हो चुका था।
ज्यादातर मैं डॉक्टर अतुल का लण्ड चूसते हुए अपने दोनों हाथों में पकड़ कर उसे हिलाती रहती थी।इसी से उसकी लम्बाई का अंदाज आ जाता था कि मेरे दोनों हाथों की हथेलियों में पकड़ने के बाद भी वह लण्ड पूरे मेरे मुंह को भर देता था।
कुछ देर चूसने के बाद डॉक्टर ने मुझे खींच कर अपनी बगल में लिटा दिया।करवट बदल कर मेरे सामने देख कर मेरी आँखों में आँखें डालकर वे मुस्कुरा कर बोले- नीना, एक बात पूछूं? बुरा तो नहीं मानोगी?मैंने सर हिला के उन्हें बोलने का इशारा किया।
उन्होंने कहा- सच बताना, तुम मुझे वाकई में प्यार करती हो इसलिए यह कर रही हो या मेरे अहसानों का बदला चुकाने के लिए?
मैंने अपनी नजरें झुका कर शर्माते हुए कहा- डॉक्टर साहब, पहले तो मेरे दिल में एहसान का ही भाव था। पर यह भी सच है कि आपको देखते ही पहली ही नजर में मुझे आप बहुत अच्छे लगने लगे थे। आपको पहली बार देखकर पता नहीं क्यों मेरे हृदय में एक अजीब सी कसक उठी थी। मैं आपसे पहली नजर में ही प्यार करने लगी थी। मेरे पति से मैंने आपके बारे में बात की। मैंने उनको आपके लिए मेरे मन के भाव भी बताये। हम दोनों पति पत्नी एक दूसरे से पूरी तरह से एकात्म हैं। वे मेरा मन समझते हैं और मैं उनका। उन्होंने खुद सामने बोलकर मुझे खुली छूट देते हुए कहा है कि मैं आपके साथ जैसा चाहे करूँ, उन्हें कोई दिक्कत नहीं होगी। उन्होंने मुझे आपकी निजी सेवा करने को कहा है अगर आप को कोई दिक्कत ना हो तो! निजी सेवा का मतलब समझते हैं आप?
डॉक्टर अतुल क्या बोलते … उन्होंने बस अपनी मुंडी हिला कर हामी भरी।
मैंने कहा- आपको देख कर जो प्यार का भाव हुआ, वह आप के प्यार भरे बर्ताव से और घना हुआ। जिस लगन और दिन रात की मेहनत से आपने मेरे पति की देखभाल और उनका इलाज किया और कर रहे हैं और आप मुझे जिस तरह पूरी समझदारी, सहानुभूति और प्यार से सब समझा रहे हैं; मेरी मदद कर रहे हैं. यह देख कर मैं आप पर कुर्बान हो गयी। मैं और मेरे पति मानते हैं कि अच्छे इंसान जब मिलें तो उन्हें छोड़ना नहीं चाहिए। डॉक्टर साहब, यह आप समझ लीजिये कि मैं अब आपको आसानी से नहीं छोड़ने वाली। ख़ासकर आज आपके फ्लैट में आने के बाद जब आपको पलंग पर बिंदास लगभग नंगधडंग सोते और सपने देखते हुए पाया और आपके इस महाकाय नाग देवता जो मुझे डंक मारने के लिए तड़प रहे हैं उसके दर्शन हुए तो अब मैं पूरी तरह से आपकी हो चुकी हूँ। आप भले हमें आपके माने या ना माने मैं और मेरे पति आपको अपना मानते हैं और आपके लिए कुछ भी कर गुजरेंगे। अभी हम अस्पताल में नहीं है और मैं अब यह कह सकती हूँ कि मैं चाहती हूँ कि आज आप और आपका यह क्यूट मुझे अपनी बना लें। मैं आपकी बनना चाहती हूँ।
यह यह कर मैंने अतुल को मेरी बांहों में कस के भींच लिया और उनको मजबूर किया कि वे मुझे किस करें।
मुझे डॉक्टर पर कहीं ज्यादा प्यार उमड़ने लगा।
किस करते हुए बार बार मेरी नजरें डॉक्टर के चेहरे पर उनके भाव पढ़ने की कोशिश कर रहीं थीं।मेरा बदन उनके गठीले बदन को और ख़ास कर उनके नंगे तगड़े लण्ड को अपने ऊपर महसूस कर रहा था।
कुछ देर किस करने के बाद डॉक्टर अतुल ने मुझे प्यार भरी नज़रों से देखा और खिसक कर मेरे बाजू में लेट गए और अपनी एक टांग मेरी कमर पर डाल कर मेरे पूरे बदन से अपना बदन कस कर सटा दिया।उस समय डॉक्टर अतुल का वह महाकाय लण्ड बिल्कुल मेरी चूत के साथ मेरे इतने सारे कपड़ों के माध्यम से रगड़ रहा था।
मेरी बात के जवाब में वह थोड़ी गंभीर आवाज में बोले- नीना, यह मेरा सौभाग्य होगा। मैं शिकायत नहीं कर रहा; पर मैं एक स्त्री के ऐसे मधुरता भरे प्यार के लिए आज तक तड़पता रहा। दुर्भाग्यवश शादीशुदा होते हुए भी मुझे किसी कारणों से यह नहीं मिल पाया। मैं इसके लिए किसी पर दोषारोपण करने के बजाये तुम्हारे हृदय में मेरे लिए जो प्यार भरा है, उसके लिए अपने आप को धन्य मानता हूँ और तुम्हारा आभारी हूँ।
मेरी सारी लाज शर्म अब दफा हो चुकी थी।मुझे अपनी चूत में हो रही खुजली के अलावा कुछ भी नहीं समझ आ रहा था।
मैंने डॉक्टर अतुल के होंठों पर अपनी उंगली रख उनको चुप करते हुआ बोला- डार्लिंग, प्यार में नो थैंक यू नो सॉरी। अब मैं कम से कम अभी के लिए तुम्हारी आधी नहीं पूरी पत्नी का कर्तव्य निभाना चाहती हूँ।
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फिर मैंने डॉक्टर अतुल के लण्ड पर हाथ फिराते हुए डॉक्टर अतुल के लण्ड की और इशारा करते हुए पूछा- क्या आप दोनों मुझे अपनी बनाओगे?डॉक्टर अतुल ने मुझे चूमते हुए मेरे गालों पर अपनी लार लपेटते हुए मेरी साड़ी के एक छोर को मुझे दिखाते हुए कहा- तो फिर उसके लिए इन सब कपड़ों की क्या आवश्यकता है?
मैंने कुछ शर्माते हुए कहा- तो डार्लिंग, आपको मैंने कब रोका उनको निकाल फेंकने से? मैं आपकी तरह उतनी बेशर्म थोड़े ही हूँ कि जहां सोई वहाँ अपने आप ही सब कपड़े निकाल दूँ? यह भी क्या मुझे ही करना है? आप मर्द हो, आप क्या करोगे?
मेरी बात सुन कर सबसे पहले तो अतुल ने अपनी वह निक्कर अपने पाँव हिला कर निकाल दी और पलंग के नीचे गिरा दी।
डॉक्टर ने मेरी साड़ी को निकालने की कोशिश करते हुए कहा- चिंता मत करो। सारे मर्दों वाले काम करूंगा मैं! मेरी थोड़ी हेल्प तो कर ही सकती हो? और अब, तुम मुझे डार्लिंग तक कहने लगी हो तो मुझे दर्द होता है जब तुम मुझे डॉक्टर साहब अथवा आप कहती हो। अस्पताल में भले ही तुम मुझे डॉक्टर साहब या डॉक्टर अतुल कहो. पर कम से कम घर में तो मुझे तू ना भी कहो तो तुम तो कह ही सकती हो!
मेरे कपड़ों को निकालने में डॉक्टर अतुल की सहायता करते हुए मैंने बैठ कर अपने बदन को इधर उधर कर अपनी साड़ी निकाल दी और तह लगा कर पलंग के एक कोने में रख दी।तह लगाते हुए मैंने कहा- देखो, वैसे तो मेरे लिए आपको तू या तुम कहना मुश्किल है। पर तुम्हें प्यार करते हुए मैं कब क्या बोल दूंगी यह मैं नहीं जानती।
मैं घाघरा और ब्लाउज में फिर से डॉक्टर अतुल के बांहों में लेटने लगी तो वे खुद बैठ गए और मुझे अपनी बांहों में भरकर मेरे गले को बेसब्री से चूमने लगे।
डॉक्टर अतुल ने मेरे स्तनों को ब्लाउज के ऊपर से अपने दोनों हाथों की हथेलियों में भर कर उनको ऊपर नीचे हिलाते और कभी अपने अंगूठे से दबा कर मसलते हुए कहा- तुम्हारे प्यार भरे गुब्बारों ने मेरी रातों की नींद हराम कर रखी है। जब भी मैं सोने की कोशिश करता हूँ तो जागते हुए और सोने के बाद सपने में भी मुझे ये ही दिखने लगते हैं।
मैंने मेरे प्यारे से कहा- तो उसमें सोचने की क्या बात है? ये तो अब तुम्हारे हो गए हैं। अब उनके साथ खेलने के लिए तुम्हें मेरी इजाजत लेने की जरूरत नहीं। मेरा सब कुछ अब तुम्हारा है।
यह कह कर मैं घूम गयी और डॉक्टर अतुल की ओर मैंने पीठ कर दी।
डॉक्टर मेरा इशारा समझ गए।उन्होंने मेरे ब्लाउज के बटन खोल दिए।मैंने अपने हाथ उठा कर मेरा ब्लाउज निकाल दिया।
अतुल ने मुझे खींच कर अपनी गोद में बिठा दिया।मुझे फिर से उनके तगड़े घण्टे की ठोकर मेरी गांड पर लगी।
पीछे से अपनी बांहों में भर कर डॉक्टर ने मेरी ब्रा ऊपर खिसका कर मेरे फूले हुए मेरे नंगे स्तनों को अपने दोनों हाथों में भर लिया।मेरे स्तनों की निप्पलों से खेलते और कभी कभी पिचकाते हुए अतुल बोले- नीना, तुम्हारे बूब्स जैसे मैंने सोचे थे उससे कहीं ज्यादा सुन्दर, मादक और मस्त हैं। इनके साथ खेलते हुए मेरा जी कभी नहीं भरेगा।
मैंने अतुल से कहा- सुनो डार्लिंग, तुम भी जानते हो और मैं भी जानती हूँ कि ना तुम मुझे चोदे बगैर छोड़ने वाले हो और ना ही मैं तुमसे चुदवाये बिना यहां से जाने वाली हूँ। तो अब ना सिर्फ मेरे स्तनों पर बल्कि मेरे पूरे बदन पर तुम्हारा पूरा अधिकार है। जब तुम मुझे चोदने जा रहे हो तो मुझे अच्छे से कस कर चोदो। तुम मेरे पूरे बदन को जितना चाहो, जैसे चाहो खेलो, मसलो, दबाओ, रगड़ो और पिचकाओ। आज तुम मेरे मालिक हो और मैं पूरी तरह से तुम्हारी रंडी, ग़ुलाम और दासी हूँ। एक पत्नी ने तुम्हें दुःख दिया है तो तुम यह समझ कर कि मैं वही पत्नी हूँ उसकी मुझे सजा दो। मुझे जितनी सख्ती और क्रूरता से रगड़ना चाहो रगड़ो। तुम जैसे मुझे चोदना चाहो चोदो! मुझ पर बिल्कुल रहम मत करना! मैं कोई शिकायत नहीं करुँगी। तुम्हारा यह तगड़ा लण्ड मेरी चूत में बेरहमी से घुसेड़ दो। अगर तुम मुझ से प्यार करते हो तो मैं तुमसे सम्मान नहीं दर्द चाहती हूँ। मेरे लिए वही तुम्हारा सच्चा प्यार होगा। समझे मेरी बात को?
मेरी बात सुनकर अतुल ने मुझे बांहों में भर लिया।वे मेरे स्तनों को अपनी दोनों हथेलियों में दबाते और निप्पलों को पिचकाते और मेरे पूरे बदन को चूमते हुए बोले- नीना, मुझे किसी से कोई शिकायत नहीं। मुझे किसी को कोई भी सजा नहीं देनी। तुम या और कोई भी स्त्री कभी दासी या रंडी नहीं हो सकती। स्त्री हमेशा प्यार और सम्मान के पात्र है और रहेगी। सख्त तगड़ी चुदाई की बात है तो वह अलग विषय है। वह एन्जॉयमेंट का मामला है और उससे दासी या रंडी से कोई लेना देना नहीं। तुम चाहती हो कि तुम्हारी तगड़ी चुदाई हो तो देखते हैं, किसमें कितना दम है। यह तो चुदाई होने के बाद ही पता चलेगा।
यह कहते हुए डॉक्टर अतुल ने मेरा घाघरे का नाड़ा खोल कर उसे मेरी टांगों के नीचे से खींच निकाला।
मैंने भी मेरी पैंटी को नीचे खिसका कर मेरे पाँव ऊपर नीचे कर निकाल फेंकी।डॉक्टर अतुल बड़ी कामुक नज़रों से मुझे नंगी बिस्तर पर लेटी हुई देखते ही रहे।
ऐसा लगता था जैसे मुझे नंगी देख कर उनका मन भर नहीं रहा था।
मेरी गांड के गालों पर अपनी हथेली फिराते हुए डॉक्टर अतुल मेरे कानों में धीरे से बोले- नीना, मैं हमेशा से जब भी तुम्हें देखता था तो मेरे मन में यही ख़याल आता था कि काश मैं तुम्हें नंगी देख पाऊँ। मैंने मेरे सपनों में तुम्हें कई बार नंगी देखा है। आज मैं अपनी आँखों पर विश्वास नहीं कर पा रहा हूँ कि मेरे सामने इस तरह एक अप्सरा सी तुम नंगी लेटी हुई हो। मैं तुम्हारी साड़ी में छिपी हुई गांड को देख कर परेशान हो जाता था। तुम्हारी गांड बड़ी सेक्सी है। आज मैं इसे नंगी देख कर बहुत सारा प्यार करना चाहता हूँ।
यह कहते हुए डॉक्टर अतुल ने मेरी जाँघों के बीच जाकर मुझे पलट कर मेरी गांड को चूमना शुरू किया।
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