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पड़ोसी पठन समय: 17 मिनट पढ़ा गया: 1,086 बार

पड़ोस के बाप बेटे- 1

रोमा शर्मा

20 Nov 2021 को प्रकाशित

पड़ोस के बाप बेटे- 1
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हॉट अंकल Xx कहानी एक शादीशुदा लड़की की है जिसने पति से बहुत चुदाई करवाई थी लेकिन जब पति बाहर जाते तो उसकी चूत लंड के लिए प्यासी होने लगती थी।

नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम रोमा शर्मा है।अगर आपने मेरी इससे पहले प्रकाशित हुई कहानियां पढ़ी हैं तो आप मेरे बारे में जानते होंगे।मेरी पिछली कहानी थी:सहेली के पति से फ्री सेक्सी इंडियन चुदाईमैं आपके लिए एक और गर्मागर्म चुदाई की कहानी लेकर आई हूं, उम्मीद करती हूं कि आपको यह सेक्स कहानी भी पसंद आएगी।

दोस्तो, जैसा कि आप जानते हैं कि मैं शादीशुदा हूं।शादी के बाद मैंने सेक्स कहानियां लिखना छोड़ दिया था।

लेकिन मुझे इस संबंध में बहुत सारे ईमेल आये जिसमें पाठकों ने कहा था कि वे मेरी कहानियों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।इसलिए मुझसे भी रुका न गया और मैंने फिर से अपनी चुदाई की कहानी लिखना शुरू किया।

तो फ्रेंड्स, शादी के बाद मैंने चुदाई के खूब मजे लिए हैं, मेरे पति ने मुझे जमकर चोदा है।मुझे कभी किसी चीज की कमी नहीं होने दी।

मेरे पति एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करते हैं इसलिए काम के कारण कई दिनों तक भी शहर के बाहर रह जाते हैं।

जितने दिन वो घर पर नहीं होते हैं, मेरी चूत को लंड भी नहीं मिल पाता है और मैं तड़प जाती हूं।

मेरी आज की हॉट अंकल Xx कहानी इसी बारे में है।

बात तब की है जब हमारे घर के बगल वाले घर में एक परिवार रहने के लिए आया था।उस फैमिली में एक अंकल, आंटी और उनका बेटा था।

वो अंकल वन विभाग में काम किया करते थे।जॉब के चलते उनका ट्रांसफर होता रहता था और अब वो हमारे साथ वाले घर में आकर रह रहे थे। हमारी छतें मिली हुई थी.उनका बेटा एक बैंक में काम करता था।

चूंकि वो हमारे पड़ोसी थे तो धीरे-धीरे बातचीत भी होने लगी; धीरे-धीरे आपस में आना-जाना भी होने लगा।

ऐसे ही एक दिन मैं छत पर सुबह-सुबह जल्दी कपड़े सुखाने चली गई।मैंने देखा कि अंकल और उनका बेटा दोनों वहां योग, एक्सरसाइज वैगरह कर रहे थे।

मेरी नजर उन पर पड़ी तो हट नहीं पाई।दोनों ने बदन पर बस शॉर्ट्स डाले हुए थे।

उन दोनों की छाती नंगी थी और जांघें भी नंगी थीं।मेरा ध्यान कपड़े सुखाने में कम और उनके शरीर पर ज्यादा लगा हुआ था।

पांच मिनट बाद उनका बेटा उठा और ऑफिस का बोलकर वहां से चला गया।

मेरी नज़र बार-बार अंकल की तरफ ही जा रही थी।

कुछ देर बाद शायद अंकल ने मुझे देखा होगा तो उन्होंने मुझे गुड मॉर्निंग बोलकर विश किया।मैंने भी मुस्कराते हुए उन्हें गुड मॉर्निंग विश की।

वो बोले- रोमा, आज इतनी सुबह-सुबह तुम यहाँ छत पर?मैने कहा- हाँ अंकल, आज सुबह ही कपड़े धुल गए थे तो मैं इन्हें सुखाने के लिए तार पर डालने चली आई। आप क्या रोज इसी तरह यहाँ योग और एक्सरसाइज करते हैं?(माफ करना दोस्तो, मैंने आप लोगों को अंकल का नाम नहीं बताया, अंकल का नाम अशोक राठौर था.)

अशोक अंकल- हाँ, मैं और मेरा बेटा, हम दोनों ही रोज सुबह योग और एक्सरसाइज करते हैं। ये हमारी दिनचर्या का हिस्सा है।मैं- अंकल, आप की उम्र क्या होगी?अशोक अंकल- मैं 48 साल का हूँ।

मैं- आपको देख कर लगता नही अंकल कि आप 48 साल के होंगे।अशोक अंकल- क्या लगता है तुम्हें, मेरी उम्र क्या होगी?मैं- यही कोई 38-40 साल की।

अशोक अंकल- नहीं, मैं 48 का ही हूँ। मेरा बेटा 25 साल का हो गया है। मैंने अपने आपको शुरू से ही काफी मेंटेन किया हुआ है योग और एक्सरसाइज करके, यही मैं अपने बेटे को भी सिखाता आ रहा हूँ।मैं- सच में आप 48 के तो लगते ही नहीं हो।अशोक अंकल- ठीक है, चलो तुम्हारी बात भी मान लेते हैं। अब मैं भी चलता हूँ, मुझे ऑफिस जाना है।

अंकल का गठीला बदन अब मेरी आंखों में बस गया था, मेरी चूत में आग लग गई थी।

मैं नीचे आकर अपने कमरे में आई तो पति सो रहे थे।मैंने उनको सहलाकर जगाया और चोदने के लिए गर्म किया।

पति गर्म हो गए और उनका मूड भी अपनी प्यासी बीवी की चुदाई करने का बन गया।वो मुझे नीचे लिटाकर मेरे ऊपर चढ़ गए।लंड चूत में अंदर बाहर होने लगा तो मुझे बहुत मजा आने लगा।

मगर यहां चुदाई मेरे पति कर रहे थे और मैं ख्यालों में अंकल को सोच रही थी कि वो ही मुझे चोद रहे हैं।उनके गठीले बदन को याद कर चुदने में और ज्यादा रस मिल रहा था मेरी चूत को!

अंकल के लंड को मैं कल्पना में ही सोच रही थी कि बदन इतना गठीला है तो लंड भी कितना मस्त होगा उनका!

कुछ दिन बाद मेरे हस्बेंड को अपने ऑफिस के काम से कहीं जाना पड़ गया।कुछ दिन तो मेरे बिना चुदाई करवाए निकल गए लेकिन फिर मेरी चुदाई की वासना बढ़ने लगी।

अब मेरा मन मचलने लगा था।रह-रहकर अब मेरे अंदर चुदाई की प्यास जग रही थी।मुझे बस अब किसी का लंड चाहिए था।

तो फिर अब मेरे अंदर अंकल से चुदने का ख्याल आने लगा।

एक दिन मैं कुछ काम से अंकल के घर गई तो उनके घर का दरवाजा खुला हुआ ही था और अंदर से कुछ आवाजें आ रही थीं जो चुदाई की लग रही थीं।मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा था।

मैंने किसी तरह की आवाज किए बिना आगे कदम बढ़ाए।आवाजें अंकल के कमरे से ही आ रही थीं।

मैं दबे पैर कमरे के पास गई और देखा तो कमरे का दरवाजा भी खुला हुआ था।अंदर का नज़ारा देख मेरे होश उड़ गए।

अंकल-आंटी आपस में बहुत ही जबरदस्त चूमा चाटी कर रहे थे और दोनों बहुत ही रोमांटिक मूड में थे।

यह देख मुझे तो वहाँ से चले जाना चाहिए था लेकिन मुझे मजा आने लगा।ऊपर से मेरे अंदर अंकल का लंड देखने की प्यास भी लगी थी।

अंकल-आंटी पूरे नंगे थे।इस तरह उन्हें पूरा नंगा देख मुझे उत्तेजना हो रही थी।

इधर मेरी भी चूत गीली होने लगी थी।

अंकल का मुंह आंटी की तरफ था तो अंकल की मुझे सिर्फ गांड ही दिख रही थी, अंकल का क्या गठीला शरीर था, एकदम मस्त! आंटी नीचे बैठ कर उनका लंड चूस रही थी।

कुछ देर बाद आंटी ने कहा- चलो अब चोदो मुझे!तो अंकल कहने लगे- इतनी भी क्या जल्दी है! अभी मजे तो लेने दो!

फिर अंकल ने आंटी को बिस्तर पर लिटा दिया और उनकी चूत चाटने लगे।मुझे अभी तक अंकल के लंड के दर्शन नहीं हुए थे।

कुछ देर बाद अंकल ने आंटी की चुदाई चालू कर दी।दोनों खूब मजे ले कर चुदाई कर रहे थे।

इधर मेरी चूत भी पूरी गीली हो चुकी थी।मैं भी अपनी साड़ी उठाकर अपनी चूत को रगड़ने लगी।चुदाई देख कर मुझे मज़ा आने लगा था।

कुछ देर बाद अंकल आंटी की चुदाई पूरी हो गई।फिर जैसे ही अंकल मेरी तरफ मुड़े, मुझे उनके लंड के दर्शन हुए।

लंड काफी बड़ा था लेकिन अब वो कुछ ढीला हो गया था।मगर ढीला होने के बाद भी लंड साइज में काफी बड़ा और मोटा था।

अंकल कमरे से बाहर आने के लिए दरवाजे की तरफ आये और मैं दरवाजे पर ही साड़ी ऊपर उठाए हुए चूत को रगड़ रही थी।

जैसे ही अंकल की नज़र मुझ पर पड़ी, मैंने भी उनको देख लिया और मैं तुरंत वहां से भागी।जब मैं घर आई तो मेरी सांसें फूल रही थीं और मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।

मैं थोड़ी घबरा गई थी क्योंकि मुझे अंकल ने देख लिया था।अब क्या होगा ये सोचते हुए मैं बिस्तर पर लेट गई और थोड़ा रिलेक्स होने की कोशिश करने लगी।फिर सोचने लगी कि अब मैं अंकल के सामने कभी नहीं जाऊंगी, और उनसे नज़रें भी नहीं मिलाऊंगी।

मगर फिर मैंने सोचा कि इसमें मेरी क्या गलती थी।अगर वो लोग दरवाजा बंद किए बना चुदाई कर रहे थे तो इसमें उनकी ही गलती है।मेरी जगह कोई और होता तो वो भी देख ही लेता।

वैसे भी लाइव चुदाई देखने का मौका कौन छोड़ता है।

फिर मैं तीन-चार दिन तक अंकल के घर नहीं गई, न ही उनसे मैंने नजरें मिलाईं।

कई दिन बाद छत पर अंकल-आंटी बैठे हुए चाय पी रहे थे।मुझे देखकर उन्होंने चाय पीने का न्यौता दिया।

मैं बोली- नहीं, आप लोग पीजिए, मैं बस छत पर घूमने आई हूं, मौसम बहुत अच्छा है।

अंकल बोले- हां, मौसम तो है ही मस्त, इसलिए मैं और तुम्हारी आंटी यहां चाय पीने का मजा ले रहे हैं।

कुछ देर बाद आंटी वहाँ से चली गई.

तो अंकल ने मुझे बुलाया और पूछा- उस दिन तुम कुछ काम से आई थी क्या? फिर बिना कुछ बोले ही भाग गई?ये सुन कर मैं घबरा गई।

मैं बोली- हां, आंटी से कुछ काम था।अंकल बोले- तो क्या तुमने हमें सब कुछ करते हुए देख लिया था?

अंकल बहुत खुलकर सवाल कर रहे थे और मैं पसीना पसीना हो रही थी शर्म से!फिर किसी तरह मैंने भी हिम्मत की और बोली- हां, मैंने आप लोगों को वो सब करते हुए देखा था। आप तो काफी स्टेमिना रखते हो। बहुत देर से मैं देख रही थी।

अंकल बोले- ओह्ह, तभी तो तुम चूत रगड़ने लगीं थी! लगता है कि तुम्हारी चूत ने पानी भी छोड़ दिया होगा।मैंने भी हां में सिर हिला दिया।

धीरे-धीरे अंकल और मैं अब खुल गए और हमने खुलकर बातें कीं।अब हम दोनों हंस रहे थे।

इतने में ही आंटी वहां आ गईं।तभी अंकल ने बात को घुमा दिया।

अंकल से सेक्स की बात करने के बाद मेरी अब चूत चुदवाने की इच्छा और ज्यादा तीव्र हो गई थी।मैंने सोच लिया था कि जैसे ही मौका मिलेगा, मैं अंकल से चुदाई करवा लूंगी।

अब मेरा ध्यान अंकल में रहने लगा था।

अगली सुबह मैं जानबूझकर कपड़े सुखाने छत पर गई।

रोज की तरह अंकल और उनका बेटा वहां योग-व्यायाम कर रहे थे।मैं उन दोनों को बहाने से देखने लगी।दोनों ने सिर्फ शॉर्ट्स पहन रखे थे।

कुछ देर बाद अंकल की नजर भी मेरे ऊपर गई।मैंने पहले ही साड़ी को अपनी नाभि से नीचे बांध लिया था ताकि अंकल मेरी पतली कमर का नजारा ले सकें।

मैंने जानबूझकर ब्लाउज के अंदर ब्रा नहीं पहनी थी ताकि चूचियों की शेप और निप्पलों का आकार अंकल को सही से दिख जाए।मैं अब ध्यान दे रही थी कि अंकल अब मेरी ओर ज्यादा देख रहे थे और अपने व्यायाम पर कम ध्यान दे रहे थे।

कुछ ही देर बाद मैंने नोटिस किया कि अंकल का लंड टाइट हो गया था।उनके शॉर्ट्स में से लंड नजर भी आने लगा था।

अंकल अब जानबूझकर अपने लंड के आसपास सहला रहे थे और देख रहे थे कि मेरी नजर भी उनके लंड पर है या नहीं!

इधर मैं भी अंकल की हरकतों को पूरे ध्यान से देख रही थी।अंकल का लंड पूरा टाइट होकर अब तना हुआ अलग से दिखने लगा था।

हम दोनों अब एक दूसरे को पूरी लाइन दे रहे थे।दोनों के मन में ही शायद चुदाई का ख्याल चल रहा था।

कुछ देर बाद उनका बेटा उठकर चला गया।मैं भी इसी पल के इंतजार में थी।

बेटे के जाते ही अंकल ने मुझे आवाज देकर पास बुला लिया।

पास पहुंची तो उन्होंने गुड मॉर्निंग कहा और मैंने भी जवाब दिया।

फिर वो बोले- क्या कर रही हो?मैंने कहा- कपड़े सुखाने आई थी अंकल!वो बोले- लेकिन यहां तो कुछ गीला हो गया रोमा!कहकर अंकल ने अपने लंड को सहला दिया।

मेरा चेहरा शर्म से लाल हो गया और मैं मुस्करा कर हंसने लगी।फिर वो बोले- कल की बात अधूरी रह गई थी।

मैंने कहा- कौन सी बात अंकल? (मुझे अच्छी तरह याद था कि कल चुदाई की बात हुई थी, लेकिन फिर भी मैं जानबूझकर अनजान बन रही थी)

वो बोले- वही बात, जब तुमने मुझे और तुम्हारी आंटी को चुदाई करते हुए देख लिया था!

मैंने शर्माते हुए कहा- तो अंकल जब कोई दरवाजा खोलकर बिना किसी की परवाह किए ऐसे चुदाई करेगा तो सामने वाले की नजर कैसे नहीं जाएगी! वैसे भी आपका बदन इतना गठीला और जवान लगता है कि मैं भी देखने से रोक नहीं पाई। आपको देखकर तो मेरी भी (चूत) गीली हो गई थी।

इस बात पर वो हँस दिए।

फिर बोले- तो कैसा लगा तुम्हें वो सब देखकर?मैंने कहा- बहुत अच्छा, बड़ा मजा आ रहा था आप दोनों की चुदाई देखकर! जब आंटी की दोनों टांगें आप कंधों पर रखवाकर जोर-जोर से शॉट मार रहे थे, और आंटी मजे लेकर चुद रही थी तो बहुत मजा आ रहा था। लेकिन …

इतना कहकर मैं रुक गई।

अंकल बोले- लेकिन क्या …मैंने कहा- कुछ नहीं।

वो बोले- बताओ ना रोमा … ऐसी कौन सी बात है जो छुपा रही हो!मैं बोली- अंकल … मैंने आपकी पूरी चुदाई देख ली, लेकिन लंड नहीं देख पाई। मुझे बस आपके चूतड़ ही दिख रहे थे। तभी आप मेरी ओर मुड़ गए थे और मैं वहां से भाग आयी थी।

अंकल इस बात पर हंसने लगे।फिर उन्होंने जो किया, मुझे उस पर यकीन नहीं हुआ।उन्होंने यहां-वहां देखा और एकदम से अपने शार्ट्स को नीचे खींच दिया।

उनका लंड एकदम से फनफना रहा था।मैं लंड देखकर जैसे सुन्न सी हो गई।फिर मैं साथ ही घबरा भी गई।

वो बोले- डरो नहीं, कोई नहीं है देखने वाला … आराम से देख लो!

अंकल का लंड देखकर मेरे मुंह में पानी आने लगा।लंड बड़ा ही दमदार, मोटा और एकदम से सख्त था।

इससे पहले मैं कुछ बोलती, उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे नीचे खींच लिया और एक हाथ से मुझे आगोश में समाते हुए मेरा हाथ अपने लंड पर रखवा दिया।

उनके लंड को छूते ही मेरे बदन में करंट दौड़ गया।लंड एकदम से रॉड जैसा सख्त हो गया था।

लेकिन मैं बहुत घबरा रही थी और उठने लगी।वो बोले- अरे कहां भाग रही हो, कोई नहीं है यहां, तुम्हें अच्छा नहीं लग रहा क्या इसे छूकर? देखो कैसे तड़प रहा है तुम्हारे लिए!मुझे अंकल का लंड पकड़ने में बड़ा मजा आ रहा था लेकिन मैं कुछ कह नहीं रही थी।

फिर उन्होंने मेरे हाथ को पकड़ कर अपने लंड पर ऊपर नीचे करना शुरू किया।मैं भी अंकल के लंड पर हाथ ऊपर नीचे चलाने लगी।

इससे अंकल को भी मजा आने लगा और वो आहें भरने लगे।

मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।डर तो बहुत लग रहा था लेकिन मजा भी बहुत आ रहा था।

मैं और जोर जोर से अंकल का लंड हिलाने लगी।उनकी सिसकारियां तेज हो गईं।

वो अब कहने लगे- आह्ह … रोमा … क्या नर्म हाथ हैं तुम्हारे, और जोर से चलाओ हाथ … आह्ह … हाय … मेरी जान!अंकल का हाथ मेरी पीठ पर से होता हुआ दूसरी तरफ मेरी चूची तक पहुंच कर उसे दबाने की कोशिश कर रहा था।मेरा भी मन कर रहा था कि ब्लाउज उतार कर अंकल से यहीं चूचियां भिंचवा लूं लेकिन छत पर इतना रिस्क नहीं ले सकती थी।

दो मिनट के बाद ही अंकल के लंड ने माल फेंक दिया और मेरा पूरा हाथ उनके वीर्य में सन गया।

अंकल ने जल्दी से पास पड़े हैंड टावल से मेरा हाथ पौंछा और अपना लंड भी साफ कर लिया।मैं भी फटाक से वहां से उठी और बाल्टी उठाकर नीचे आ गई।

मेरी चूत में पानी आ गया था।मुझे चूत में गीलापन बिना हाथ लगाए ही महसूस हो गया था।अब चूत को लंड लेने की खुजली मची थी।

आपको मेरी चुदास भरी कहानी कैसी लग रही है, इस बारे में अपनी राय मुझे बताते रहें।मैं आपके पर्सनल मैसेज का उत्तर जरूर दूंगी।हॉट अंकल Xx कहानी पर कमेंट में भी आप अपना फीडबैक देना न भूलें।मेरा ईमेल आईडी हैsupport@mohakkisse.com

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पड़ोस के बाप बेटे

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पाठकों की राय

1 टिप्पणी

अनु

1 month ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

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