होम पर वापस जाएं
Office Sex • पठन समय: 7 मिनट • पढ़ा गया: 485 बार

गाँव की कुसुम और उसकी आपबीती-3

राहुल श्रीवास्तव

19 Sep 2013 को प्रकाशित

गाँव की कुसुम और उसकी आपबीती-3
कहानी सुनें

ऑडियो प्लेयर (Play Audio)

स्वर: लोड हो रहा है...

0:00
0:00

कहानी का पिछ्ला भाग:गाँव की कुसुम और उसकी आपबीती-2

मुकेश जी बोले- थोड़ा दर्द होगा! बर्दाश्त कर लेना!

मुझको लिटा कर मेरे नितंब के नीचे दो तकिये लगा दिए उन्होंने, उस पर एक तौलिया बिछा प्रिया।मैंने आँख बंद कर ली उस पल के इंतज़ार में मैं दम साधे आने वाले पलों का इन्तजार कर रही थी।

मेरी चूत पर उनके लंड का स्पर्श.. वो रगड़.. वो डर उनका चूत पर लंड का रगड़ना और फिर…

मेरी कमर को पकड़ कर लंड का दबाव आह अपनी चूत के अंदर लंड का सिर प्रवेश करता हुआ मेरे को दर्द का अहसास..फिर तेज झटका और मेरी अक्षत यौवन का टूटना…मेरी चीख…दर्द से तड़पता बदन…छटपटाता बदन…

उनके चंगुल से निकलने की कोशिश की मैंने पर मुकेश जी की मज़बूत पकड़ से निकलना आसान नहीं था। मैं तो कसमसा रही थी और छोड़ने के लिए कह रही थी।

मैं मुकेश जी को रोकते हुए बोली- आ… बहुत लग रही है। ऐसा लगता है मैं मर जाऊँगी… आआ… आ… मुकेश जी प्लीज मर जाऊँगी… मैं!मेरी आँखों में आँसू छलक आये थे।

खून निकल आया था, लंड करीब थोड़ा अंदर मेरी चूत में घुस कर फँस चुका था।मुझे ऐसा महसूस हो रहा था मानो कोई मेरी चूत को चाकू से काट रहा हो।

मैं रोने लगी थी- आआआ… आ… मुकेश जी… बहुत जोर से लग रही है।पर लंड का बीच का मोटा हिस्सा अभी और घुसना बाकी था।

पर उन्होंने बेरहम बन कर थोड़ा लंड थोड़ा सा बाहर निकालकर बड़ी बेरहमी से एक और धक्का मारा।

मैं मर गई और भी जोर से चीखी- आआआआ… आआ… और लंड का सबसे मोटे हिस्से तक मेरी चूत में घुस गया था।उन्होंने फिर से लंड को थोड़ा-सा बाहर निकालकर बड़ी बेरहमी से धक्का मारा।अब पूरा लंड मेरी चूत में घुसकर मेरे पेट में समा गया।

मैं बेहोश सी हो गई… वो मेरे ऊपर आकर मेरे उभारों को चूसने लगे.. सहलाने लगे।धीरे धीरे मेरी चेतना वापस लौटने लगी… दर्द का अहसास कम हो गया था, मेरे हाथ खुद से उनके नितम्ब पे कस गए जो संकेत था..

मुकेश जी का अनुभव.. वो समझ गए कि मेरी इच्छा क्या है…फिर लंड को निकल कर एक बार जोर से अंदर किया!मैं भी तैयार थी… उस दर्द को मैं झेल गई… उफ्फ्फ आह करके..

फिर क्या था मुकेश जी में जोश आ गया और ताबड़तोड़ तरीके से लंड को निकल कर मेरी चूत में डाल देते, फिर बार बार ऐसा करने लगे हर चोट पर मैं सिसकारी भरती, मेरी चूत ने पानी छोड़ प्रिया था चूत का चिकनापन लंड को आसानी से अंदर बाहर होने में मददगार था थोड़ी देर तक वो मुझे वैसे ही चोदते रहे।

फिर उन्होंने मुझे उल्टा लिटा प्रिया और पेट के अंदर हाथ डाल कर मेरे चूतड़ को थोड़ा उठा प्रिया।

एक तरह से में चौपाया थी मेरा सर तकिये पर था और चूतड़ पीछे से उठे थे, उन्होंने मेरे चूतड़ को पकड़ा और लंड को मेरी चूत पे रगड़ा और एक ही बार में उनका लंबा सा लंड मेरी चूत के अंदर!

मैं दर्द से बिलबिला उठी- ओह्ह्ह माँ आआ आ आ उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ मर गई!जैसी आवाज़ निकल गई मेरी और फिर उनके लंड का मेरी चूत पे वार पे वार…मेरे चूतड़ पर उनकी पकड़ मज़बूत थी, चूची हवा में लटक रही थी।

मुकेश जी ने एक हाथ से में चूतड़ पकड़े और दूसरे हाथ से मेरी चूची को पकड़ कर मसलने लगे। मेरे निप्पल को दो उँगलियों से मसल देते और मेरे जिस्म में एक करेंट दौड़ जाता था।

सांसों में कराहट थी, मेरी चूत से निकलता पानी टांगों में बह रहा था।फच फच फचा फच थप थप के शोर में तो न जाने मेरी चूत न जाने कितना पानी छोड़ चुकी थी या मैं कई बार झड़ गई थी, उस वक़्त कुछ पता नहीं था।

बस सब कुछ अच्छा लग रहा था,जिस्म के अंदर करेंट दौड़ रहा था…

मुकेश जी ने मुझे उठा कर अपनी टांगों को फैलाया और खड़े लंड के ऊपर मेरी चूत को सेट कर के गोद में बैठा लिया।अब हम दोनों का मुँह आमने सामने था, मैंने आगे बढ़ कर उनके होटों को चूसना शुरू कर प्रिया।मेरी चूची उनकी चौड़ी छाती में दब गई।

मुकेश जी नीचे से कमर उठा कर फिर से मेरी चूत पे प्रहार करने लगे।‘उफ्फ्फ्फ़ ओह्ह आअह्ह आह आहा…’ मैंने आनन्द के सागर में गोता लगा लिया था।

मेरे नितंब उनकी लय के साथ उछल रहे थे.. कि तभी फिर मैंने अपना काम रस छोड़ प्रिया, उनको अपनी बाँहों में जकड़ कर आंखों को बंद कर के गहरी सांस लेने लगी।

पर मुकेश जी का स्टेमिना बहुत था, वो रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे..थोड़ी देर बाद वो मुझे लिटा कर फिर से मेरे ऊपर आ गए और अपना लंड चूत पे सेट कर के एक बार में ही अंदर कर प्रिया।

‘ओऊ ओ ओ ओ हहह उफ़ मां अ अ अ आ आ…’

उनके हाथ मेरी चूची को मसल रहे थे और मेरे निप्पल को खींच रहे थे।मैं दो बार और अपना काम रस छोड़ चुकी थी।

जब मैंने महसूस किया कि उनका लंड काफी फूल गया है और उनकी स्पीड भी बढ़ गई है.. मैं समझ गई कि वो भी शिखर के करीब हैं।मुकेश जी ने लंड निकलने की कोशिश की पर मैंने उनके नितंब पर जोर लगा कर अंदर ही रहने का संकेत प्रिया।

वो समझ गए और फिर…

मेरी चूत में उनके रस के बौछार… साथ में मेरा काम रस एक बार फिर उस रस में मिल गया।

दो निढाल शरीर.. जैसी जान ही न हो!उनके भारी शरीर के नीचे मेरा फूल सा बदन!

मेरी चूत में उनके लंड का थिरकन जारी थी, झटके लग रहे थे, रस अन्दर गिर रहा था, मेरी चूत खुल बंद हो रही थी… तेज़ साँसें मेरे सीने के उभार उनकी छाती में धंस गए थे।

मेरी बाहें खुद बखुद उनसे लिपट गई…असीम शांति का अहसास, रुई सा हल्का होता जिस्म!आज भी अर्चना करती हूँ तो सिहरन से दौड़ जाती है..

मैंने उनके होंटों को चूम लिया और फिर एक लंबा चुम्बन…मुकेश जी ने एक बार जी भर के मुझे देखा और मेरे बदन से उठ गए, मेरी चूत से उनका लंड बाहर आ गया और साथ ही मेरे और उनके रस की धारा भी बह निकली।

मैं आनन्द में डूबी थी, मेरा मन प्रफुल्लित था।

उनका लंड सिकुड़ कर भी काफी लंबा था, मेरी चूत में हल्का हल्का मीठा दर्द था।चूत से हम दोनों का रस बह रहा था..

एक अजीब सा अहसास थावो मेरे बगल में लेट गए…

तभी मुकेश जी बोले- तुमको दवा ला दूंगा, तुम खा लेना!मैंने पूछा- क्यों?मुकेश जी बोले- मेरे रस से तुम गर्भवती हो सकती हो, तुमको बच्चा ठहर सकता है।मैं बोली- तो ठहर जाने दो!

कहानी जारी रहेगी।support@mohakkisse.com

कहानी का अगला भाग:गाँव की कुसुम और उसकी आपबीती-4

कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया दें (React to Story)

श्रृंखला

कहानी श्रृंखला (STORY SERIES)

गाँव की कुसुम और उसकी आपबीती

कुल भाग: 4
यह एक बहु-भाग कहानी है। अपनी पसंदीदा कड़ी पर जाने के लिए ऊपर क्लिक करें।

इसी श्रेणी से अन्य कहानियाँ

नई चूत का मज़ा लेने का नशा-1
Office Sex

नई चूत का मज़ा लेने का नशा-1

यह सत्य कथा सूरत की है जहाँ मैं एक कम्पनी में प्रोडक्शन मैंनेजर बन कर हुआ था। यह दिसंबर 2010 की घटना है। मैं जिस कम्पनी में जाता हूँ, अपनी सचिव खुद ही चुनता हूँ और हमेशा लड़की ही चुनता हूँ और हमेशा उसे चोदता भी ज़रूर हूँ।

7 मिनट 608
बॉस की बीवी की चूत की चुदाई की कहानी
Office Sex

बॉस की बीवी की चूत की चुदाई की कहानी

मेरा नाम जय है, मैं नागपुर का रहने वाला हूँ। मेरे लंड का आकार 7 इन्च का है। मैं सांवला और शरीर से हष्ट-पुष्ट और हैंडसम हूँ।

12 मिनट 1,130
चुत चुदाई से मेरा प्रमोशन
Office Sex

चुत चुदाई से मेरा प्रमोशन

हैलो, मेरा नाम चिंकी है.. मैं दिल्ली की रहने वाली हूँ और एक कॉल सेण्टर में जॉब भी करती हूँ।

7 मिनट 577

पाठकों की राय

2 टिप्पणियां
च

चुदासी सन्नो

3 months ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

र

रवि कडाचे

3 months ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

🔒 सुरक्षा कारणों से कॉपी करने की अनुमति नहीं है।