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भाई बहन • पठन समय: 11 मिनट • पढ़ा गया: 1,005 बार

जब पहली बार मुझे सेक्स के बारे में पता चला-4

अतुल

23 Mar 2019 को प्रकाशित

जब पहली बार मुझे सेक्स के बारे में पता चला-4
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साथियो.. जब मैंने अपना लण्ड सोनिया के सामने खोला तो उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं। मुझे भी लगा कि पता नहीं चूत मिलेगी कि नहीं.. मैं भी उसकी तरफ ही देख रहा था तभी उसने मुझसे कहा।

सोनिया- ओई ईए.. ये..सोनू- हाँ ये.. क्या हुआ?

सोनिया- ये ऐसा होता है?सोनू- तो क्या तूने पहले कभी नहीं देखा था?सोनिया- देखा है.. पर बच्चों का.. वो बहुत छोटा होता है.. पर ये तो बहुत मोटा और बड़ा है?

सोनू- बड़ों का ऐसा ही होता है.. इसे छू कर तो देखो।सोनिया- नहीं.. नहीं.. ये अजीब सा है.. आगे से तो एकदम तीर जैसा नुकीला है।

सोनू- मैं तुम्हारी छू सकता हूँ.. तो तुम मेरा क्यों नहीं?सोनिया- नहीं.. मुझसे नहीं होगा।सोनू- अपने मज़े तो ले लिए और मेरी बारी आई.. तो नहीं नहीं..

सोनिया मुस्करा कर बोली- ठीक है.. और अब तुम क्या करना चाहते हो?सोनू- वो..सोनिया- नहीं नहीं.. तुमने देखने की बात की थी.. तुमने देख लिया और भी बहुत कुछ कर लिया। अब और नहीं.. और ‘वो’ तो बिल्कुल नहीं.. तुम पागल हो गए हो.. हटो ऊपर से.. मुझे जाने दो।

सोनू- देखो सोनिया.. अब हमारे बीच में कुछ नहीं बचा.. अगर ‘वो’ भी हो जाएगा.. तो क्या होगा?सोनिया- नहीं नहीं.. ‘वो’ नहीं.. बच्चे होने का डर होता है.. तुम समझते क्यों नहीं?सोनू- अच्छा ठीक है.. ये सब तो कर सकता हूँ ना.. अच्छा एक बार तुम मेरा छूकर तो देखो।

वो थोड़ा मुस्कराई.. मैं जानता था कि ये भी करवाना चाहती है.. पर बच्चे (प्रेग्नेन्सी) से डरती है।उसने थोड़ी हिचक के साथ हाथ बढ़ाया और मेरा लण्ड उंगलियों से पकड़ लिया।

मैंने आज तक अपना लण्ड खुद ही पकड़ा था.. तो कभी एहसास नहीं हुआ.. मगर आज किसी दूसरे ने पकड़ा.. तो दूसरे किस्म का एहसास हुआ, मेरे लण्ड में एकदम करंट दौड़ गया और मुझे लगा कि अभी कुछ बाहर आ जाएगा।

उसके गोरे-गोरे हाथों में मेरा काले रंग का लण्ड बड़ा अजीब सा लग रहा था।

मैंने उसका हाथ पकड़ा और अपनी खाल को पीछे ले गया, मेरा खालिश लण्ड बाहर आ गया, वो तो उसको देखती ही रह गई।मैंने उसको समझाया कि कैसे इसको आगे-पीछे करते हैं।

उसने मेरा लण्ड आगे-पीछे करना शुरू कर प्रिया, अब मुझे भी मजा आने लगा, मैंने भी उसकी चूत में उंगली चलानी शुरू कर दी।मुझे लगा कि मेरा रस आने वाला है.. तो मैंने उसको रोक प्रिया.. पर मैं अपनी उंगली चलाता रहा।

उस अँधेरी और सर्द रात में उसका गोरा शरीर गजब का लग रहा था। उसकी आँखें बन्द थीं.. वो मज़े में थी।मैं थोड़ा उठा और उसकी दोनों टाँगों को थोड़ा खोला और उसके बीच में बैठ गया।

टाँगों के खुलने से उसकी चूत थोड़ी और खुल गई। मैं थोड़ा और झुका और अपना लण्ड उसकी चूत तक ले गया, मैंने अपनी उंगली निकाली और अपना लण्ड उसकी चूत पर रख प्रिया.. और उसकी चूत की दरार में लगा कर फिराने लगा।

ओफ.. क्या मजा था!

उसने अपनी आँखें खोलीं और मुझे देखा तो एकदम से डर गई और अपने हाथों से मुझे पीछे करने लगी लेकिन मैं लगा रहा।कुछ ही पलों में लण्ड की गर्मी से वो मस्त हो गई।

सोनिया- हम्म.. नहीं सोनूऊऊ.. नहींईई.. आह.. उम्म..

मैं कुछ नहीं बोला और लगा रहा।सोनिया- सोनूउऊ.. प्लीज़.. रहने दो.. सोनूउ.. बस करो..

मुझे भी लगा कि यह ठीक कह रही है.. जोश में अगर कुछ गड़बड़ हो गई तो दोनों फंस जाएंगे।

तभी मेरे दिमाग़ में एक बात आई। मैं तुरंत हटा.. और बिस्तर पर से उतर गया। वो भी हैरान हो गई कि मुझे क्या हुआ।

मैं सीधा अपनी स्टडी टेबल पर गया.. दराज खोली.. और सबसे आखिरी में से एक कन्डोम निकाला.. और वापिस आ गया।वो हैरानी से मुझे देख रही थी।

जब उसने मेरे हाथ में कन्डोम का पैकेट देखा तो हैरानी से बोली- ये क्या है?मैंने कहा- ये तुम्हारे डर की दवा है.. कन्डोम है.. जानती हो क्या होता है?वो बोली- वो तो जानती हूँ.. पर ये तुम्हारे पास कहाँ से आया?

मैं कुछ नहीं बोला।

वो फिर बोली- जानते हो कैसे इस्तेमाल करना है?मैंने कहा- तुम्हें पता है?उसने ‘ना’ में सिर हिलाया।

मैंने पैकेट खोला.. फुकना निकाला और अपने लण्ड पर चढ़ा प्रिया.. बोला- बस.. अब ठीक है।

फिर मैं उसकी टाँगों के बीच में बैठ गया.. अब वो मुस्करा दी।बस मुझे इशारा मिल गया।मैं फिर अपने लण्ड को उसकी चूत की दरार में डालकर हिलाने लगा। वो मस्त हो गई.. उसके मुँह से मादक सिसकारियाँ निकल रही थीं ‘आआआ.. उउउंम..’

मैंने देखा वो पूरी मस्त हो गई है.. तो मैं धीरे से लण्ड को उसके सुराख तक ले गया और हल्का सा अन्दर डाल प्रिया।वो मुझे देख रही थी.. वो पूरी तैयार थी।

कुछ तो कन्डोम की चिकनाई और कुछ उसकी चूत के रस की चिकनाई भी साथ दे रही थी, मेरा लण्ड धीरे-धीरे अन्दर जाने लगा.. तो उसे कुछ दर्द होने लगा।मैंने भी महसूस किया कि उसकी चूत बहुत टाइट थी।

मेरा लण्ड का आगे का सिरा ही अन्दर जा सका और रुक गया।मैंने थोड़ा सा जोर प्रिया.. तो दर्द की वजह से उसकी आँखें बन्द हो गईं। मैं उसके ऊपर पूरा झुका हुआ था.. मैं अपने दोनों हाथों के बल उस पर चढ़ा हुआ था.. मेरे दोनों हाथ बिस्तर पर टिके थे।

उसने अपने दोनों हाथ से मेरी दोनों बाजुओं को पकड़ लिया.. और मैं धीरे-धीरे से अपने लण्ड को धक्का दे रहा था।उसने दर्द से अपने होंठ भी भींच लिए।मुझे भी अन्दर डालने में दिक्कत हो रही थी, मैंने थोड़ा और ज़ोर लगाया.. उसने मेरी बाजू कस कर पकड़ लीं।

मेरा लण्ड धीरे-धीरे अन्दर जाने लगा.. वो दर्द से बेहाल थी.. उसके मुँह से कराहने की आवाज़ निकलने लगी ‘उफफ.. उफफफ्फ़.. आईयईईई.. नहीं सोनू नहीं होगा.. मैं मर जाऊँगी.. प्लीज़ बाहर निकाल लो.. बहुत दर्द हो रहा है.. हईई.. प्लीज़ निकालो.. मुझे नहीं करवाना..

मैंने कहा- थोड़ी देर सहन कर लो बस.. फिर सब ठीक हो जाएगा।‘नहीं नहीं.. तुम निकालो इसे.. उउउफ़फ्फ़ उउउइई.. माँ.. इससस्स.. निकालो..’

मैंने उसकी एक नहीं सुनी.. और मैं ज़ोर लगाता रहा, मेरा लण्ड धीरे-धीरे अन्दर जा रहा था.. और वो दर्द से तड़प रही थी।उसकी आँखों में पानी भी आ गया था, उसने मेरी बाजू छोड़ कर मेरी छाती पर हाथ रख दिए और मुझे वापिस धकेलने लगी।‘प्लीज़ सोनू.. इसे निकाल लो.. मैं मर जाऊँगी.. प्लीज़.. एयाया.. उफफफ्फ़..’

मैं रुक गया.. तो उसे भी थोड़ा आराम मिला, कोई एकाध पल के लिए मैं रुका.. फिर मैंने अपना लण्ड वापिस बाहर निकाला.. पर पूरा बाहर नहीं निकाला, थोड़ा सा निकाल कर फिर उतना ही डाल प्रिया.. जितना पहले डाला था।अब धीरे-धीरे उतना ही अन्दर-बाहर करने लगा।

उसे हल्का-हल्का मजा आने लगा, उसने फिर मेरी बाजू पकड़ ली, मैं अपनी गहराई बढ़ाने लगा.. उसकी चूत में पूरी चिकनाई हो गई थी और मेरा लण्ड हर धक्के में थोड़ा और अन्दर जा रहा था।उसे धक्के में थोड़ा दर्द होता.. पर मजा भी आता।

मेरी स्पीड कम थी.. इसलिए कि उसे ज्यादा दर्द ना हो।मेरा लण्ड पूरा अन्दर जा चुका था, अब मैं पूरा बाहर निकालता फिर पूरा अन्दर पेल देता।

मैं उस पर पूरा लेट चुका था। अब मैं अपने दोनों हाथ उसकी कमर के पीछे ले गया और अपनी ओर खींच लिया, इससे हम दोनों एकदम चिपक गए थे।उसने भी अपने दोनों हाथों से मुझे जकड़ रखा था.. और धीरे-धीरे दोनों टाँगों को भी मेरे हिप्स पर ले आई।मेरा लण्ड उसकी चूत में धीरे-धीरे चल रहा था।

हम लगातार एक-दूसरे को चूम रहे थे, उसके मुँह से सिसकारियाँ भी निकल रही थीं ‘हम्म.. एयाया.. हुउंम..’

अचानक वो एकदम टाइट हो गई.. उसने मुझे एकदम जकड़ लिया.. उसने आँखें बन्द कर लीं.. वो एकदम से सिहर गई। कुछ सेकेंड में वो थोड़ी ढीली पड़ गई.. पर तभी मुझे लगा कि मेरा रस बाहर आने वाला है.. और दो झटकों में मैं भी एकदम झड़ गया.. मेरा रस लण्ड से बाहर आ गया।मेरा लण्ड उसकी चूत में झटके देने लगा.. पूरा रस निकलने के बाद भी ऐसा लग रहा था कि जैसे आज एक-एक बूंद निकलेगी।

मैं उस पर गिर गया.. वो भी बिस्तर पर बिल्कुल निढाल पड़ी थी, उसके बाल उसके चेहरे और कंधे पर आए हुए थे, मेरा चेहरा उसके बालों से ढका था।हम दोनों कुछ मिनटों तक यूं ही पड़े रहे।

फिर उसने थोड़ी हरकत की.. वो थोड़ी हिली और मुझे अपने ऊपर से हटाने लगी।मेरा लण्ड अब ढीला पड़ चुका था और थोड़ा सा ही उसकी चूत में था।मैं उठा तो लण्ड बाहर निकल आया।

मैं उठा.. वो बिस्तर पर बैठ गई, मैं भी उसके साथ बैठ गया।

हम बिल्कुल चुप थे.. कमरे में बिल्कुल खामोशी थी।वो नीचे उतरने लगी तो देखा.. उसे उठने में परेशानी हो रही थी, उसे उठते हुए हल्का दर्द हुआ.. जैसे-तैसे वो उठी.. तो हल्की लाइट में हम दोनों की नज़र बिस्तर पर गई।

वहाँ खून गिरा हुआ था।उसको देखा तो मेरी नज़र उसकी चूत पर गई.. उसने भी अपनी चूत को देखा और हाथ से छुआ.. उसके हाथ पर थोड़ा खून लग गया। उसने मुझे देखा..मैं चुप रहा।

वो बाथरूम में चली गई.. और वहाँ से अपनी चूत को धोकर आई.. फिर आकर उसने अपने कपड़े पहनने शुरू किए।उसने सारे कपड़े पहन लिए और अपने बाल बाँधने लगी.. जब उसने अपने बाल बांधे.. तो वो इतनी खूबसूरत लगी कि बस..

मैं नंगा ही बिस्तर पर अधलेटा हुआ था, वो जाने लगी.. तो मैंने उसे आवाज़ दी।वो रुक गई.. मैं उठा.. उसके पास गया उसका चेहरा पकड़ा और उसके होंठों को चूम लिया।

उसने शर्मा कर नज़रें नीचे कर लीं और कहा- चादर बाथरूम में डाल देना.. मैं धो दूँगी।मैंने हल्के से कहा- नहीं.. मैं अपने आप धो लूँगा।

वो नज़र नीची करके चली गई।

दोस्तो, मैं नंगा खड़ा रहा.. फिर मैं भी कपड़े पहने और बिस्तर पर लेट गया.. पर मुझे नींद नहीं आ रही थी, मुझे तो विश्वास ही नहीं हो रहा था कि ये सब सच में हुआ है। मैं बार-बार अपने लण्ड को छू कर देख रहा था.. बार-बार मुझे उसका वो गुलाबी शरीर याद आ रहा था।

मैं सोच रहा था कि मैंने उसे जाने क्यों प्रिया.. मैं एक बार और कर सकता था।मेरी बेचैनी पहले से भी ज्यादा बढ़ गई थी, मैंने अपना हाथ लण्ड पर लगाया.. पर वो मजा नहीं आया.. जो उस वक़्त था।

फिर न जाने मुझे कब नींद आ गई।

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जब पहली बार मुझे सेक्स के बारे में पता चला

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