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Group Sex Story पठन समय: 5 मिनट पढ़ा गया: 1,202 बार

जलता है बदन

रोनी सलूजा

24 Oct 2011 को प्रकाशित

जलता है बदन
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रोनी सलूजामेरी कहानी‘कामदेव के तीर’को पाठको की जो सराहनाप्राप्त हुई उसके लिए तमाम पाठक पाठिकाओं को तहे दिल सेधन्यवाद  !मध्यप्रदेश एवं कई जगहों से अनगिनत  पुरुष  मित्रों  के मेल आये हैं जो चाहते हैं कि यदि हमारे एरिया से किसी भी उम्र की कोई लड़की  या महिला जो  आपको मेल करे जो किसी लड़के या पुरुष  से मिलना चाहे तो उसे मेरा इमेल ID जरूर देना !  इसके तहत कुछ लड़कियों एवं महिलाओं  के वाकयी ऐसे मेल आये जो पुरुष मित्रों से गोपनीय तरीके से मिलना चाहती हैं, उनके नाम मैं यहाँ नहीं लिख सकता !

तो मैंने उनको वो संपर्क सूत्र दिए और कुछ लोगों की मुलाकात सफल रही !

फिर उसने अपनी सारी कहानी सुनाई जिसे मैं आपके समक्ष उन्हीं की जुबानी पेश कर रहा हूँ !मेरा नाम स्वाति है, मैं जालंधर की रहने वाली हूँ। अभी मेरी उम्र 24 साल है।सेक्स इन्सान को किस तरह अपनी गिरफ्त में लेकर वासना की आग में जलाता है, इन्सान इसके लिए क्या कुछ कर जाता है, मैं अपनी जिन्दगी के कुछ अनुभव आप सभी को बताना चाहती हूँ !स्कूल समय में दसवीं में थी, तब पहली बार रजस्वला हुई तो मेरी हालत खून देख कर डर के कारण ख़राब हो गई।भाभी को मैंने डरते हुए बताया तो वो बोली- चिंता मत कर, यह तो सामान्य बात है !  अब तू जवानी में कदम रखेगी, तुझमें बहुत से शारीरिक बदलाव भी आयेंगे।उनकी बातों ने मुझे बहुत राहत दी।मैंने भाभी और चाची से उनके जवानी के मजेदार किस्से कई बार सुने थे।अब अक्सर मैं अपने को जवान होते देखने की चाह में अक्सर आईने में अपने आप को निहारती रहती, अपने उभरते हुए वक्ष-उभारों को देखकर बड़ा अच्छा लगता, योनि क्षेत्र में उग आये रोयेंनुमा बालों ने मुझे बहुत रोमांचित कर दिया था !रात में अक्सर उन्हें छूने का आनन्द लेती, रोयों के साथ योनि भी सहलाने में आनन्द का अहसास तो मेरे को प्रफुल्लित ही कर देता। नहाते वक्त बड़े होते जा रहे स्तनों को सहलाती तो वो और भी बड़े दिखने लगते थे।कांख और योनि के रोयों पर साबुन लगाकर झाग बनाना बड़ा मजा आता था। अपने दिन पर दिन सुन्दर होते नंगे बदन के कटाव बाथरूम के आईने में देखती और उत्तेजित सी हो जाती !इसी तरह अपने को निहारते हुए कब बारहवीं पास करके कालेज पहुँच गई पता ही नहीं चला !अब मैं पूर्ण जवान नवयौवना बन चुकी थी, मेरे स्तन बड़े बड़े होकर भर से गए थे, जांघें मोटी चिकनी होकर मांसल हो गई थी, मेरे नितम्ब तो मेरे चलने से लेफ्ट राइट करते हुए थिरकते !चूत की तो पूछो ही मत, फूलकर पाव जैसी हो गई जिस पर मुलायम बाल उसकी शोभा बढ़ाते ! उसे तो दिन में एकाध बार अंगुली डालकर सहलाना ही पड़ता था।मेरा फिगर 32-28-32 हो गया था !

फिर मैं अपने को संभाल नहीं पाई, पहले बार मुझे हस्तमैथुन का चरम सुख प्राप्त हुआ था किसी के सामने !तब मैं अपने को नंगा देख घुटने मोड़कर बैठ गई, मेरी सहेली बोली- मजा आया या नहीं?मैंने कहा- बहुत मजा आया यार !शेफ़ाली बोली- यही सब मेरे साथ करो, मेरे दूध चूसो, मेरी चूत सहलाओ, मसलो, उसमें अंगुली डालो, अन्दर-बाहर करो, मेरे होंठ चूसो !वो जैसा बताती गई, मैं करती गई, मेरी पूरी अंगुली उसकी चूत में जा रही थी, वो मछली जैसी तड़पने लगी।फिर वो भी स्खलित हो गई !अब जब भी मौका मिलता, हम दोनों यही खेल खेलने लगते, ब्लू फिल्म देखकर पूरी तरह से उन्हीं किरदारों की तरह लिप किस करना, चूचियाँ चूसना, मसलना, चूत चाटना, अंगुली डालकर, मोटी मोमबत्ती घुसाकर चुदाई करना, हर तरीके से लेस्बियन सेक्स करते और अपनी जिस्म की ज्वाला को शांत करते !ऐसे ही दो साल निकल गए !अब मुझे नेट चलाना आसान हो गया था, मैंने फेस बुक पर अकाउंट बना लिया खूब चैट करने लगी।उसी दोरान मेरी मुलाकात मेरे पुरुष मित्र विवेक से हुई।हम घण्टों चैटिंग करते, हम दोनों में प्यार हो गया, एक दूसरे से मिलने को बेताब हो गए थे !हम फिर मुलाकात के लिए मनसूबे बनाने लगे, हमारे शहरो में ज्यादा दूरी नहीं थी तो पहले प्यार की हमारी यह तमन्ना भी पूरी हो गई। उन्हें देख कर मैं तो दंग रह गई, वो एकदम जवान खूबसूरत थे, मुझे बहुत पसंद आये !पहली मुलाकात में ही हमने एक दूसरे को पसंद कर लिया और शादी करने का विचार भी बना लिया !पारिवारिक विरोध के बाबजूद भी हम दोनों ने शादी कर ली और किराये के फ्लैट में रहने लगे।विवेक का व्यवसाय भी अच्छा चल रहा था।फिर शादी के दो साल बाद उन्हें व्यवसाय के कारण एक साल के लिए विदेश जाना पड़ा जिस कारण वो चार-पाँच माह में एक बार ही भारत आ पाते हैं। अब तक मैं एक बेटे की माँ बन चुकी थी !

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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

क्यूट विराट

5 days ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

शुभ शर्मा

3 weeks ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

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